Amarnath Yatra Story: Baba Barfani के पहले दर्शन किसने किए? जानिए Amarnath Yatra शुरू होने की Secret Story

By अनन्या मिश्रा | May 19, 2026

धार्मिक मान्यता है कि अमरनाथ की कठिन चढ़ाई चढ़ने के बाद बाबा बर्फानी के दर्शन मात्र से व्यक्ति को अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। वहीं हर साल अमरेश्वर के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस रहस्य़मई गुफा की खोज कैसे हुई और बाबा बर्फानी के दर्शन करने का सौभाग्य सबसे पहले किसको मिला था। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सबसे पहले बाबा बर्फानी के दर्शन किए हुए थे, तो आइए जानते हैं अमरनाथ यात्रा से जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में...

इसे भी पढ़ें: Bhairav ​​Nath Temple: जब पांडव भीम भी नहीं उठा पाए थे Bhairav Baba की प्रतिमा, Delhi में है ये चमत्कारी मंदिर 

जानिए सबसे पहले किसने किए दर्शन

बता दें कि बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर दो प्रमुख मान्यताएं मिलती हैं, जोकि इस प्रकार हैं-

पुराणों के मुताबिक कश्मीर की घाटी पानी में डूबी थी। जोकि एक विशाल झील थी। ऋषि कश्यप ने कई नदियों और छोटी धाराओं के जरिए पानी को बाहर निकाला। उस समय ऋषि भृगु हिमालय की यात्रा पर उस रास्ते से जा रहे थे, तभी उनको यह पवित्र गुफा मिली थी। इसलिए ऋषि भृगु को अमरेश्वर शिवलिंग का दर्शन करने वाला पहला व्यक्ति माना जाता है।

कैसे शुरू हुई अमरनाथ यात्रा

स्थानीय और लोक कथाओं के मुताबिक 15वीं शताब्दी में एक बूटा मलिक नामक चरवाहा था। जिसने इस पवित्र गुफा की खोज की थी। एक दिन बूटा मलिक को एक संत मिले, जिन्होंने उसको अपना कोयले से भरा एक थैला थमा दिया। जब चरवाहे ने घर जाकर थैला खोलकर देखा, तो थैले में रखा कोयला सोने के सिक्कों में बदल गया था।

वह हैरान होकर उसी स्थान पर संत को धन्यवाद कहने के लिए गया। लेकिन चरवाहे को वहां पर संत नहीं मिले। तब बूटा मलिक चरवाहे को अमरनाथ की गुफा और उसमें विराजमान स्वयंभू शिवलिंग मिला। जब लोगों ने इस शिवलिंग के बारे में सुना, तो यह स्थान तीर्थयात्रा का प्रमुख केंद्र बन गया।

अमरेश्वर शिवलिंग

सिर्फ मान्यताओं तक ही अमरनाथ यात्रा सीमित नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक प्रमाण भी मौजूद है। कल्हण द्वारा रचित प्रसिद्ध पुस्तक 'राजतरंगिणी' में अमरेश्वर शिवलिंग का उल्लेख मिलता है। इस पुस्तक में बताया गया है कि रानी सूर्यमती ने 11वीं शताब्दी में त्रिशूट भेंट किया था।

प्रमुख खबरें

CSK में MS Dhoni के रोल पर कोच फ्लेमिंग का खुलासा, उन्होंने खेला नहीं, लेकिन प्रभाव बहुत बड़ा है

PM मोदी का Nordic Mission, ग्रीन एनर्जी से लेकर हिंद-प्रशांत तक भारत का बढ़ता वैश्विक दबदबा

DND-Jewar Expressway: दिल्ली-NCR को ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत, घंटो का सफर होगा मिनटों में

T20 World Cup से पहले Smriti Mandhana का बड़ा दावा, टीम इंडिया अच्छी लय में, जीत का पूरा भरोसा