By अंकित सिंह | May 24, 2024
लोकसभा चुनाव अब अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है। इन सब के बीच बिहार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच पूरे चुनाव में क्रेडिट वार जबरदस्त तरीके से देखने को मिला। यह क्रेडिट वार बिहार में रोजगार को लेकर है। दोनों ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं। साथ ही साथ यह बताने की कोशिश की जा रही है कि पिछले दिनों बिहार में जितने भी सरकारी नौकरी दिए गए, उसमें हमारा अहम रोल है। यह क्रेडिट वार जनवरी में नीतीश कुमार के एक बार फिर से एनडीए में वापसी के बाद से ही शुरू हो गया था। राजद तेजस्वी को नौकरी देने वाले पुरुष के रूप में पेश कर रही है। तेजस्वी भी इसको लेकर खूब बखान दे रहे हैं। वही नीतीश कुमार कह रहे हैं कि जो किया हम लोगों ने किया, वह झूठ-मूठ का क्रेडिट लेना चाहते हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान राज्य में नौकरियां पैदा करने का श्रेय लेने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव पर कटाक्ष किया और कहा कि तेजस्वी और उनके परिवार की रोजगार सृजन में कोई भूमिका नहीं थी। तेजस्वी पर हमला करते हुए नीतीश ने कहा कि उन्होंने कहां किसी को काम दिया है? पहले किसे मिलती थी नौकरी? 'हम लोग कुछ दिन साथ रखे थे और हम ही बताते थे कि 10 लाख की नौकरी देने वाले हैं तो आजकल बोलता है कि हमलोग इतना दे देंगे, हमलोग करवा रहे हैं सब, वहीं करवा रहे हैं?'...जो हम किये हैं उसी पर दावा करता रहता है'। उन्होंने कहा कि मैं प्रचार-प्रसार में शामिल नहीं हूं, हम अपने काम में व्यस्त रहते हैं.' यह बात बिहार में काम करने वाले हर व्यक्ति को पता है... इन लोगों ने क्या किया?
तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक एक ही टीम में थे। चुनावी मौसम में तेजस्वी यादव 17 साल बनाम 17 महीने की तुलना कर रहे हैं। राजद का साफ तौर पर कहना है कि जितनी नौकरियां 17 महीने में दी गई, उतनी बिहार में कभी नहीं दी गई थी। दूसरी ओर जदयू कह रही है कि नीतीश कुमार के सात निश्चय कार्यक्रम का हिस्सा था यह और उसी के तहत काम हुआ है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि बिहार जैसे राज्यों में चुनावी मौसम के दौरान रोजगार बड़ा मुद्दा है। जब तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के साथ उपमुख्यमंत्री की भूमिका में थे, तब बिहार में रोजगार को लेकर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। कई लोगों को नौकरियां मिले हैं। लेकिन जहां तक श्रेय लेने की बात है तो हमेशा लोकतंत्र में सरकार के मुखिया को ही क्रेडिट जाता है। ऐसे में जिस टीम में तेजस्वी यादव थे, उसके कप्तान नीतीश कुमार रहे। ऐसे में कहीं ना कहीं इस मामले में नीतीश कुमार का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। लेकिन जनता तक अपनी बातों को कौन मजबूती से पहुंच पाता है, यह चुनावी नतीजो के बाद ही पता चल पाएगा।