By अभिनय आकाश | Dec 19, 2025
बांग्लादेश की सड़कों पर इस वक्त जो आग दिख रही है वो सिर्फ एक शख्स की मौत का गुस्सा नहीं बल्कि उस कट्टर सोच का विस्फोट है जो सालों से पनप रही थी। इस आग के केंद्र में एक नाम शरीफ उस्मान हादी का है। वही हादी जो खुद को भारतीय वर्चस्व के खिलाफ क्रांति का चेहरा बताता था और जिसे ग्रेटर बांग्लादेश के पीछे की सोच कहा जाता था। उस्मान हादी कोई आम नेता नहीं था। वो 2024 में शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन से उभरा था और बहुत तेजी से कट्टरपंथी युवाओं का पोस्टर बॉय बन गया था। उसकी राजनीति का आधार था भारत विरोध, आवामी लीग से नफरत और सिस्टम को गिराने की खुली चुनौती। वो इकबाल मंच का प्रवक्ता था। एक ऐसा प्लेटफार्म जिसकी पहचान ही आक्रामक राष्ट्रवाद और एंटी इंडिया सोच से बनी।
32 साल के हादी को ढाका के बिजोयनगर इलाके में चुनाव कैंपेन के दौरान मोटरसाइकिल पर सवार नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मार दी। 12 दिसंबर को उनपर यह हमला तब हुआ, जब कुछ ही देर पहले उन्होंने पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों को मिलाकर ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का एक विवादित फेसबुक मैप पोस्ट किया था, जिसके बाद लोग इस हमले को भारत से भी जोड़ रहे हैं।
असल सवाल यह नहीं है कि उस्मान हादी को किसने मारा? असल सवाल यहां पर यह है कि क्या उसकी मौत को बहाना बनाकर बांग्लादेश में भारत विरोधी राजनीति को जानबूझकर हवा दी जा रही और क्या आने वाले चुनावों से पहले यह हिंसा एक सोझा समझा स्टंट है। बांग्लादेश में इस वक्त भयंकर बवाल है। लेकिन इस आग की लपटें सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। यह बांग्लादेश की राजनीति, उसकी स्थिरता और भारत बांग्लादेश के रिश्तों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।