2024 लोकसभा चुनाव की रेस में कौन होगा नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष का चेहरा

By अंकित सिंह | Sep 12, 2022

प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हम हर सप्ताह देश की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं। पिछले सप्ताह भी देश में राजनीतिक खबरों का बोलबाला रहा। हर बार की तरह इस बार भी प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में संपादक नीरज कुमार दुबे मौजूद रहे। हमने नीरज दुबे से पहला सवाल कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर ही पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी को गति देने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी के साथ-साथ इसमें पार्टी के कई बड़े नेता लगे हुए हैं। हाल में जिन लोगों ने भी कांग्रेस छोड़ा है, उनका आरोप साफ तौर पर यही था कि पार्टी निष्क्रिय हो गई है। कोई बैठक नहीं हो रही है। कोई रणनीति तैयार नहीं की जा रही है। इसी को देखते हुए कांग्रेस की ओर से यह भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की गई है। हालांकि, राहुल गांधी साफ तौर पर कह रहे हैं कि वह कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व नहीं, बल्कि इसमें भागीदारी कर रहे हैं। 

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नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा है कि कांग्रेस को इस बात पर ज्यादा जोर देना चाहिए कि हम देश के लिए क्या कर सकते हैं? हमारा विजन क्या है? नीरज दुबे ने इस बात को स्वीकार किया कि कांग्रेस की यह यात्रा लंबी यात्रा है। इससे पहले भी इस तरह की जो यात्रा हुई है, उसका सकारात्मक परिणाम रहा है। चुनाव पर असर देखने को मिला है। इसके साथ ही कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को यह भी बताने की कोशिश कर रही है कि हम राष्ट्रीय दल है। हमारी हर जगह पकड़ है। ऐसे में आप हमारे साथ आइए। इसके साथ ही नीरज दुबे ने यह भी कहा कि भले ही राहुल गांधी के अध्यक्ष बनते हैं या नहीं बनते हैं, लेकिन पार्टी में उन्हीं का मालिकाना हक रहने वाला है और उन्हीं की ही चलेगी। 

विपक्षी एकजुटता पर चर्चा

हमने विपक्षी एकजुटता पर भी चर्चा की। इसके जवाब में नीरज दुबे ने कहा कि जो क्षेत्रीय दल हैं, उनकी राज्य आधारित महत्वाकांक्षा होती है। लेकिन विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां जितने भी मोर्चे हैं, उनको इस बात की समझ ही नहीं है कि हमारे साथ खड़ा कौन-कौन है। मिलने के लिए तो सभी एक दूसरे से मिल रहे हैं। लेकिन जब एक मंच पर आने की बात होगी, उस समय शायद सभी एक साथ ना दिखे। अरविंद केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं कि वह अकेले ही चलेंगे और भाजपा को चुनौती देंगे। उदाहरण देते हुए नीरज दुबे ने कहा कि अभी हाल में ही ममता बनर्जी का एक बनाया बयान आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार, के चंद्रशेखर राव और हेमंत सोरेन हमारे साथ हैं। विपक्ष के समक्ष मुश्किल यह होगी कि अगर नीतीश कांग्रेस के साथ रहते हैं तो ममता के साथ नहीं रह पाएंगी। ऐसे में कहां से विपक्षी एकजुटता हो सकती है। उनके मुद्दे अलग-अलग हैं। उनकी महत्वाकांक्षा अलग-अलग है और जब भी बात होगी कि गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, तब भी टकराव देखने को मिलेगी। 

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भाजपा की रणनीति

हमने भाजपा की 2024 चुनाव को लेकर बन रही रणनीति पर भी चर्चा की। इसके जवाब में नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा और अन्य दलों में यही फर्क है कि जहां अन्य दल अभी अपने साथी की तलाश कर रहे हैं। तो वहीं भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत की कर दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बाकी दलों की तुलना में बीजेपी फिलहाल चुनावों के मामले में बहुत आगे हैं। संघ और भाजपा के बीच बैठक पर उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठक हमेशा होती रहती है। इसमें इस बात पर भी चर्चा होती है कि कहां पर इतना लक्ष्य हासिल किया गया है, कहां और काम करने की आवश्यकता है, कहां किस प्रकार की चुनौतियां है। तमाम जमीनी मुद्दों पर चर्चा की जाती है। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा नियुक्तियों में जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रख रही है। साथ ही साथ उत्तर प्रदेश सांसदों का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर उन्हें आगामी चुनाव में टिकट दिया जाएगा। इसके अलावा भाजपा ने 144 सीटों पर ज्यादा फोकस कर रही है जहां पिछले चुनाव में वह दूसरे या तीसरे नंबर पर रही थी। इसके लिए केंद्रीय मंत्री और कई नेताओं को जिम्मेदारी दी जा रही है।

- अंकित सिंह

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