आखिर विश्व, भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना क्यों चाहता है? समझिए

By कमलेश पांडे | May 25, 2026

विश्व आज भारत की विकास यात्रा का हिस्सा इसलिए बनना चाहता है, क्योंकि भारत केवल “बड़ा बाजार” नहीं रहा, बल्कि वह अब यह देश वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक, सुरक्षा और मानव संसाधन का एक निर्णायक केंद्र बनता जा रहा है। खास बात यह है कि अब वह कई मामलों में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस-जर्मनी-यूके जैसे यूरोपीय देशों से होड़ भी लेने लगा है।

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दूसरा, चीन के विकल्प के रूप में भारत: अमेरिका-चीन तनाव और सप्लाई चेन संकट के बाद दुनिया “चाइना प्लस वन” रणनीति अपना रही है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब उत्पादन और निवेश का बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित करना चाहती हैं, क्योंकि वो भारत को एक स्थिर लोकतांत्रिक, कानूनी और विशाल श्रम-आधारित अर्थव्यवस्था माना जा रहा है।

तीसरा, भारत की डिजिटल क्रांति ने दुनिया को प्रभावित किया: यूपीआई, आधार, डिजिटल गवर्नेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और एआई आधारित सेवाओं ने भारत को “डिजिटल पावर” बना दिया है। चूंकि दुनिया अब भारतीय डिजिटल मॉडल को कम लागत और बड़े पैमाने पर लागू होने वाली व्यवस्था के रूप में देख रही है। इसलिए भारत की ओर उनका झुकाव स्वाभाविक है।

चौथा, भारत वैश्विक स्थिरता का नया स्तंभ बन रहा है: आज दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत, अमेरिका से भी संबंध रखता है, रूस से भी, यूरोप, जापान, खाड़ी देशों और अफ्रीका से भी। यही संतुलित कूटनीति भारत को “विश्वसनीय शक्ति” बनाती है। इसलिए अधिकांश देश भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं। 

पांचवां, भारत का युवा मानव संसाधन दुनिया की जरूरत है: यूरोप, जापान और कई विकसित देशों में वृद्ध आबादी बढ़ रही है। इसके विपरीत भारत के पास विशाल युवा कार्यबल है। आईटी, स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग, एआई और सेवा क्षेत्र में भारतीय प्रतिभा वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 

छठा, रक्षा और सामरिक शक्ति का बढ़ता प्रभाव: भारत तेजी से रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल, रक्षा कॉरिडोर, अंतरिक्ष कार्यक्रम और समुद्री शक्ति ने भारत को सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है। 

सात, भारत “ग्लोबल साउथ” की आवाज बन गया है: अफ्रीका, एशिया और विकासशील देशों को लगता है कि भारत पश्चिम और चीन- दोनों से अलग एक संतुलित मॉडल प्रस्तुत कर सकता है। जी-20, ब्रिक्स और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

आठवां, निवेशकों को भारत में दीर्घकालिक अवसर दिखते हैं: विश्व की बड़ी कंपनियां समझती हैं कि अगले 20-25 वर्षों तक भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था रहेगा, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, एआई, हरित तकनीक और विनिर्माण में विशाल अवसर मौजूद हैं। 

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। भले ही दुनिया भारत में अवसर तो देख रही है, पर साथ ही कुछ चिंताएं भी हैं: बेरोजगारी, सामाजिक असमानता, शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता, न्यायिक व प्रशासनिक देरी, राजनीतिक ध्रुवीकरण, और बुनियादी ढांचे की असमानता। यदि भारत इन चुनौतियों को संतुलित ढंग से संभाल लेता है, तो 21वीं सदी में वह केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली महाशक्ति बन सकता है। 

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

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