अफगान मुद्दे को लेकर भारत की पहल पर क्यों बिदक रहे हैं पाकिस्तान और चीन ?

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Nov 09, 2021

यह खुशी की बात है कि अफगानिस्तान को लेकर हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने अच्छी पहल की है। उन्होंने पाकिस्तान, चीन, ईरान, रूस और मध्य एशिया के पांचों गणतंत्रों के सुरक्षा सलाहकारों को भारत आमंत्रित किया है ताकि वे सब मिलकर अफगानिस्तान के संकट से निपटने की साझा नीति बना सकें। इन देशों की यह बैठक 10 से 13 नवंबर तक चलनी है। जाहिर है कि हर देश के अपने-अपने राष्ट्रहित होते हैं। इसीलिए सब मिलकर कोई एक-समान नीति पर सहमत हो जाएं, यह आसान नहीं है लेकिन पाकिस्तान और चीन का रवैया अजीबो-गरीब है।

भारत ने पिछले 5-6 दशकों और खासकर पिछले 20 साल में वहां इतना निर्माण-कार्य किया है, जितना किसी अन्य देश ने नहीं किया है। अब भी भारत 50 हजार टन गेहूं काबुल भेजना चाहता है लेकिन पाकिस्तान उसे काबुल तक ले जाने के लिए सड़क का रास्ता देने को तैयार नहीं है। भुखमरी के शिकार हो रहे अफगानों की नज़र में पाकिस्तान की छवि उठेगी या गिरेगी? पाकिस्तान अपना नुकसान खुद कर रहा है। वह लाखों अफगानों को मजबूर कर रहा है कि वे पाकिस्तान में आ धमकें। यह ऐसा दुर्लभ मौका था, जिसका लाभ उठाकर भारत से पाकिस्तान लंबी और गहरी बात शुरू कर सकता था। कश्मीर तथा सर्वाधिक अनुग्रहीत राष्ट्र जैसे मुद्दों पर भी बात शुरू हो सकती थी। भयंकर आर्थिक संकट से जूझता पाकिस्तान इस मौके को हाथ से क्यों फिसलने दे रहा है ?  

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जहां तक चीन का सवाल है, यदि वह इस बैठक में भाग नहीं लेगा तो वह पाकिस्तान का पिछलग्गू कहलाएगा। महाशक्ति कहलवाने की उसकी छवि भी विकृत होगी। जब उसके बड़े फौजी अफसर गलवान घाटी जैसे नाजुक मुद्दे पर भारतीय अफसरों से बात कर सकते हैं तो उसके सुरक्षा सलाहकार दिल्ली क्यों नहीं आ सकते? यदि वह दिल्ली नहीं आना चाहते हैं तो न आएं, वे ‘जूम’ पर ही बात कर लें। अफगानिस्तान के पड़ौसी देशों की एकजुट मदद के बिना अफगान-संकट का हल होना असंभव है।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

(लेखक भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं)

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