आखिर हिंदुत्व का नया चैम्पियन बनने की कोशिश क्यों कर रहे हैं चंद्रबाबू नायडू ?

By नीरज कुमार दुबे | Jan 07, 2021

आंध्र प्रदेश में हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ रही भाजपा की लोकप्रियता में इजाफा होते देख चंद्रबाबू नायडू एकदम से जाग गये हैं और हिंदुत्व के एजेंडे को भाजपा से ज्यादा बुलंद करने में जुट गये हैं। हिंदुत्व और मंदिरों के नये चैम्पियन के रूप में खुद को स्थापित करने की चंद्रबाबू नायडू की कोशिशों को देख कर हर कोई हैरान भी है क्योंकि खुलकर वह हिंदुत्व के पक्ष में इससे पहले कभी नहीं उतरे थे। चंद्रबाबू क्या कर रहे हैं और क्या कह रहे हैं इस पर चर्चा करने से पहले जरा आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश में 20 फीसदी हिंदू मतदाता हैं। चुनावों के समय आंध्र प्रदेश में अकसर मतदाता धार्मिक की बजाय जातीय आधार पर मतदान करते रहे हैं। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में दलितों, रेड्डी और मुस्लिम मतदाताओं का पूरा साथ मिला था।

दरअसल आंध्र प्रदेश में चल रही हिंदुत्व की राजनीति को तब बल मिला जब राज्य में कुछ मंदिरों में मूर्तियों को अपवित्र करने की घटना से राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ। चंद्रबाबू नायडू के मन में हिंदुत्व के प्रति जागे प्रेम पर सत्तारुढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का कहना है कि चंद्रबाबू नायडू अपनी राजनीति चमकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं परन्तु वास्तव में उनके मन में किसी धर्म के प्रति कोई सम्मान नहीं है। वाईएसआरसी विधायक अम्बाती रामबाबू ने तो यहाँ तक आरोप लगा दिया है कि चंद्रबाबू नायडू के कार्यकाल के दौरान रातोंरात 40 मंदिरों को तोड़ दिया गया था। यही नहीं विजयवाड़ा में चंद्रबाबू नायडू ने कई मंदिरों को स्थानांतरित भी कराया था जिस पर काफी विवाद हुआ था।

उधर, भाजपा का कहना है कि चंद्रबाबू नायडू अवसरवादी राजनेता हैं और उनकी कोई तय विचारधारा नहीं है बल्कि वह समय और जरूरत के हिसाब से अपना एजेंडा और विचारधारा बदलते रहते हैं। भाजपा का आरोप है कि चंद्रबाबू नायडू ने खुद अपने चुनावी घोषणापत्र में ईसाइयों के लिए चर्च बनाने का वादा किया था और सत्ता में रहते हुए क्रिसमस के अवसर पर मुफ्त चीजें वितरित की थीं। 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में तेलुगू देशम पार्टी की जनता ने जो दुर्गति की उसके बाद से चंद्रबाबू नायडू उठ नहीं पाये हैं क्योंकि कभी उनका कोई विधायक तो कभी कोई सांसद पार्टी छोड़ता रहा तो दूसरी ओर राज्य की नयी सरकार तेदेपा के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों को उजागर करने के अलावा उस मामले पर कार्रवाइयां करती रही।

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तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू दो बार एनडीए में रह चुके हैं इसलिए अटकलें हैं कि वह एक बार फिर एनडीए में आना चाहते हैं क्योंकि अपने राज्य में फिर से खड़ा होने के लिए उन्हें दिल्ली के समर्थन की जरूरत है। लेकिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सोमू वीरराजू साफ कर चुके हैं कि अब तेदेपा के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। लेकिन राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता। फिलहाल तो स्थानीय स्तर पर भाजपा वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने में जुटी है लेकिन खुद मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी केंद्र सरकार के साथ अच्छा संबंध बनाये हुए हैं यही नहीं उनकी पार्टी ने संसद में जरूरत के समय सरकार का समर्थन भी किया है।

बहरहाल, भगवान श्रीराम और हिंदुत्व के प्रति चंद्रबाबू नायडू के प्रेम को छलावा बताते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सोमू वीरराजू ने ऐलान किया है कि 20 जनवरी के बाद से भाजपा उन सभी मंदिरों के लिए एक यात्रा निकालेगी जहाँ पिछले कुछ महीनों के दौरान मूर्तियों को अपवित्र किया गया या नुकसान पहुँचाया गया है। जाहिर है आंध्र प्रदेश में हिंदुत्व के नाम पर चल रही राजनीति में अभी और भी बहुत कुछ देखने को मिलने वाला है।

-नीरज कुमार दुबे

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