2019 में विधानसभा टिकट कटने से लेकर बिहार प्रभारी बनाए जाने तक, महाराष्ट्र के OBC नेता विनोद तावड़े पर बीजेपी ने क्यों जताया भरोसा?

By अभिनय आकाश | Sep 10, 2022

2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने अपने महासचिव विनोद तावड़े को बिहार का प्रभार सौंपा है। सहयोगी नीतीश कुमार के एनडीए छोड़ राजद के साथ सरकार बनाने के बाद बीजेपी को राज्य की सत्ता से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में राज्य के हालात और तावड़े पर भरोसा दिखाना ये दर्शाता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने परिणाम देने और जटिल राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की उनकी क्षमताओं को पहचाना है। महाराष्ट्र के दिग्गज नेता, जिन्हें पिछले नवंबर में महासचिव के रूप में पदोन्नत किया गया था, इससे पहले हरियाणा के प्रभारी थे। केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनावों में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी थी, जहां तावड़े मुख्य समन्वयक थे और उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, एनडीए उम्मीदवार के लिए समर्थन हासिल करने के लिए व्यापक रूप से देश का दौरा किया था। 

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बता दें कि 2019 में तावड़े को मुंबई के बोरीवली में उनके निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा टिकट से वंचित कर दिया गया और पार्टी ने इसके बजाय सुनील राणे को टिकट दिया। इस फैसले से तावड़े को गहरा धक्का लगा था, जो उस समय बोरीवली का प्रतिनिधित्व करने वाले सीटिंग विधायक थे। उनके धैर्य का परिणाम तब मिला जब उन्हें 2020 में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और उन्हें हरियाणा का प्रभार सौंपा गया। एक साल बाद, 2021 में बीजेपी चीफ जेपी नड्डा ने तावड़े को महासचिव बना दिया।

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आगे की राह कठिन 

2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बिहार प्रभारी के रूप में तावड़े के सामने एक कठिन काम है। केंद्रीय नेतृत्व ने 545 सीटों में से 400 से अधिक सीटों का अत्यधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। बिहार में कुल लोकसभा सीटें 40 हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 17, जनता दल (यूनाइटेड) ने 16, लोक जनशक्ति पार्टी ने 6 और कांग्रेस ने 1 सीटें जीती थीं। पिछले महीने बिहार के मुख्यमंत्री और जद (यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बीजेपी से अपना गठबंधन तोड़ लिया। राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में परिवर्तित घटनाक्रम से संयोजन भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। तावड़े को रणनीति बनानी होगी कि पार्टी अपने चुनावी आधार को कैसे बनाए रख सकती है और इसे और बढ़ा सकती है। 

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