Karnataka Pakistan HC: जज ने मुस्लिम मोहल्ले को पाकिस्तान बताया?भरी अदालत में महिला वकील से अंडरडार्मेंट पर कहा ऐसा भड़के CJI

By अभिनय आकाश | Sep 21, 2024

आपने कई बार नेताओं की जुबानी और कई बार लोगों के मुंह से सुना होगा कि फलां शहर का फलां इलाका मिनी पाकिस्तान बन चुका है। कर्नाटक हाईकोर्ट के जज साहब ने बेंगलुरू के एक मुस्लिम इलाके को मिनी पाकिस्तान बता दिया। स्वत संज्ञान अमूमन ये शब्द हमें तब सुनाई देता है जब अदालतें किसी कानूनी मुद्दे या विषय पर खुद से हस्तक्षेप करती हैं। जैसा की देश की सर्वोच्च अदालत ने कर्नाटक हाई कोर्ट के एक जज की टिप्पणी पर स्वत संज्ञान लिया। कहा कि ये सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि न्यायिक टिप्पणियां अदालतों में अपेक्षित शिष्टाचार के मुताबिक हों। 

मुस्लिम इलाके को मिनी पाकिस्तान बताया

जज श्रीशानंद की टिप्पमी रेंट कंट्रोल एक्ट के कुछ प्रावधानों की पेंचदगियों पर चर्चा से शुरू हुई और फिर ड्राइवर के बीमा कवरेज के मामलों पर चली गई। जज श्रीसानंद ने एक महिला वकील को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने महिला वकील से कहा कि वो विपक्षी पार्टी के बारे में बहुत कुछ जानती हैं। सुझाव दिया कि वो उनके अंडरगारमेंट का रंग भी पहचान सकती हैं। जब वी  श्रीशानंद की टिप्पणियां सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी और लोग इसको लेकर आपत्ति जताने लगे तो सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लिया। 

सीजेआई ने क्या कहा

हमारा ध्यान न्यायिक सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस वी श्रीशानंद द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों की ओर आकर्षित हुआ है। हमने एजी और एसजी से सलाह मांगी है। हमने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने जज की टिप्पणी पर संज्ञान लेते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा, हम कुछ बुनियादी दिशानिर्देश तय कर सकते हैं। 

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पहले भी सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट जज की टिप्पणियों पर लेता रहा संज्ञान

पिछले साल दिसंबर के महीने में कलकत्ता हाई कोर्ट ने लड़कियों को अपनी ओर से एक सलाह दी थी। कहा था कि कम उम्र की लड़कियों को सेक्सुअल इच्छाएं कंट्रोल करके रखनी चाहिए और दो मिनट के सुख के लिए अपनी गरिमा से समझौता नहीं करना चाहिए। तब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की इस टिप्पणी पर सख्त ऐतराज जताया था। कहा था कि जजों को इस तरह के अनावश्यक सलाह देने से बचना चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट ने कोरोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया था और उनपर मर्डर का चार्ज चलाने की बात तक कह दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तब मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को कठोर और अनुचित बताया था। जजों को संयम बरतने की सलाह दी थी। 

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