America ने Gautam Adani और Sagar Adani को जो समन भेजे थे, उसे मोदी सरकार ने आखिर क्यों बैरंग लौटा दिया?

By नीरज कुमार दुबे | Jan 24, 2026

भारत की संप्रभु कानूनी व्यवस्था और प्रक्रियागत स्पष्टता की एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा हो रही है। हम आपको बता दें कि हाल ही में सामने आए अदालती दस्तावेजों के अनुसार भारत के विधि और न्याय मंत्रालय ने अमेरिकी नियामक संस्था U.S. Securities and Exchange Commission की ओर से भेजे गए कानूनी समन को औपचारिक रूप से स्वीकार करने से दो बार इंकार किया। यह समन भारतीय उद्योग जगत के अग्रणी उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के नाम भेजे गए थे।

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इन दोनो अस्वीकारो के बाद अमेरिकी नियामक संस्था ने न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है। उसने अनुरोध किया है कि पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए समन को ईमेल के जरिये प्रभावी रूप से भेजने की अनुमति दी जाए। अमेरिकी अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि चूंकि संबंधित पक्षो को इस मुकदमे की जानकारी पहले से है और उन्होंने अमेरिका स्थित वकीलों को नियुक्त किया है इसलिए ईमेल के माध्यम से समन भेजना पर्याप्त होगा। माना जा रहा है कि जल्द ही गौतम अडानी और सागर अडानी को ईमेल के माध्यम से समन भेजा जायेगा।

हम आपको याद दिला दें कि यह मामला उस समय और अधिक चर्चा में आया था जब नवंबर 2024 में अमेरिकी अधिकारियो ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह के कुछ कार्यकारी भारतीय अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत देने की योजना में शामिल थे ताकि अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा उत्पादित बिजली की खरीद सुनिश्चित की जा सके। इसी संदर्भ में एसईसी ने एक सिविल मामला दर्ज किया था जो अमेरिकी न्याय विभाग की आपराधिक कार्यवाही से अलग है और वह मामला अभी भी विचाराधीन है।

अमेरिका में चल रही इस कानूनी प्रक्रिया की खबर का असर शुक्रवार को शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहां अडानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियो के शेयरों में अस्थायी गिरावट दर्ज की गई। न्यूयॉर्क की अदालत में एसईसी द्वारा ईमेल के जरिये समन भेजने की अनुमति मांगे जाने की सूचना के बाद बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। अडानी समूह से जुड़ी कंपनियों के शेयर 3 प्रतिशत से लेकर लगभग 15 प्रतिशत तक गिरे। इसके साथ ही बाजार पर भी दबाव दिखा और सेंसेक्स में करीब एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक है और निवेशक अडानी समूह की बुनियादी मजबूती, परियोजनाओं और दीर्घकालिक विकास संभावनाओं से वाकिफ हैं।

दूसरी ओर, अडानी समूह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है। समूह का कहना है कि वह अपने बचाव में सभी कानूनी विकल्पो का उपयोग करेगा। इसके साथ ही यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव देखा जा रहा है, विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्कों के बाद। हम आपको यह भी बता दें कि भारत के विधि मंत्रालय ने पहले भी स्पष्ट किया है कि यह मामला दो निजी पक्षों और अमेरिका की संस्था के बीच का है, जिसमें भारत सरकार की भूमिका केवल प्रक्रियागत नियमों के पालन तक सीमित है।

इस तरह अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह संदेश स्पष्ट रूप से गया है कि भारत अपनी कानूनी संप्रभुता और नियमों से कोई समझौता नहीं करता। देखा जाये तो आज का भारत वह देश नहीं है जो किसी भी विदेशी दबाव में आकर अपनी प्रक्रियाओं को ताक पर रख दे। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून और संस्थागत मर्यादा सर्वोपरि है, चाहे सामने दुनिया की कोई भी शक्तिशाली संस्था क्यों न हो। विधि मंत्रालय द्वारा उठाया गया कदम यह दर्शाता है कि भारत अब बराबरी के स्तर पर संवाद करता है। बिना हस्ताक्षर और मुहर वाले दस्तावेज स्वीकार न करना कोई अड़ियलपन नहीं बल्कि एक जिम्मेदार राष्ट्र की पहचान है। यह वही आत्मविश्वास है जिसने भारत को वैश्विक निवेश और कूटनीति का भरोसेमंद केंद्र बनाया है।

जहां तक अडानी समूह का सवाल है तो इसमें कोई दो राय नहीं कि वह आज भारत के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और विकास की रीढ़ बन चुका है। समूह पर लगाए गए आरोपों को तथ्य और कानून के तराजू पर ही परखा जाना चाहिए, न कि मीडिया ट्रायल या भू राजनीतिक खींचतान के आधार पर। अडानी समूह का यह कहना कि वह सभी कानूनी मंचों पर अपना पक्ष मजबूती से रखेगा, एक जिम्मेदार कॉरपोरेट आचरण का उदाहरण है।

यह भी समझना जरूरी है कि भारत की कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। ऐसे में उन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनना अस्वाभाविक नहीं है। लेकिन मोदी सरकार की यह स्पष्ट नीति कि भारतीय उद्यमों के साथ न्याय होगा और देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, उद्योग जगत के लिए भरोसे का मजबूत आधार है।

बहरहाल, आज भारत न केवल दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में है बल्कि वह अपने नियम खुद तय करने की स्थिति में भी है। यही नया भारत है, जो विकास, कानून और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ रहा है।

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