सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में अपना प्रतिनिधि क्यों चाहती है केंद्र सरकार?

By गौतम मोरारका | Jan 16, 2023

केंद्रीय कानून मंत्री ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर मांग की है कि उच्च और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का चयन करने वाले कॉलेजियम में सरकार का भी प्रतिनिधि होना चाहिए। इस पत्र पर हालांकि कॉलेजियम में चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जायेगा, लेकिन इस पर देश में बहस भी शुरू हो गयी है। कुछ न्यायविद् इसे एनजेएसी अधिनियम की वापसी बता रहे हैं तो वहीं सरकार से जुड़े लोगों का कहना है कि हमने कोई अभूतपूर्व मांग नहीं की है क्योंकि पूरी दुनिया में ही ऐसा होता है। कानून मंत्री का मानना है कि कॉलेजियम प्रणाली में सरकार का प्रतिनिधि होने से इसमें पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही भी आएगी। 

इसे भी पढ़ें: सरकार स्वतंत्रता के अंतिम स्तंभ ‘न्यायपालिका’ पर कब्जा करना चाहती है : कपिल सिब्बल

न्यायपालिका और सरकार के बीच कॉलेजियम प्रणाली पर मतभेद उस समय भी सामने आये थे जब हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने केशवानंद भारती मामले में अदालत के ऐतिहासिक फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि न्यायपालिका, संसद की संप्रभुता से समझौता नहीं कर सकती। उल्लेखनीय है कि उस फैसले ने देश को 'संविधान के मूलभूत ढांचे का सिद्धांत' दिया था। धनखड़ ने जयपुर में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को निरस्त किये जाने पर एक बार फिर सवाल उठाते हुए कहा था कि लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए संसदीय संप्रभुता और स्वायत्तता सर्वोपरि है। बहरहाल, न्यायपालिका और सरकार के बीच जो मतभेद दिख रहे हैं उसका हल सौहार्द्रपूर्ण तरीके से ही निकाला जाना चाहिए।

प्रमुख खबरें

कलकत्ता HC से Tulu Mandal को झटका, गैर-जमानती वारंट के खिलाफ याचिका खारिज

Imran Khan की पार्टी के कार्यकर्ताओं की हड्डी-पसली तोड़ने की तैयारी! Pakistan में बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की संभावना के चलते खाली कराये जा रहे अस्पताल

Royal Enfield Classic 350 का नया Signature White वेरिएंट लॉन्च, कीमत ₹2.23 लाख

त्योहारी सीजन में हवाई किराये पर नहीं लगेगी सीमा, Ram Mohan Naidu ने दी सलाह