चीन ने दुनिया में किए सबसे अधिक साइबर हमले, अमेरिका दूसरे नंबर पर, अब क्यों दे रहा वैश्विक डेटा सुरक्षा पर ध्यान?

By अभिनय आकाश | Jul 05, 2023

साल 2013 यानी वो वर्ष जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) पहल की घोषणा की। जिसके बाद चीन ने कई पहल शुरू की हैं। 8 सितंबर 2020 को बीजिंग ने डेटा सुरक्षा पर वैश्विक पहल (जीआईडीएस) शुरू की। सितंबर 2021 में वैश्विक विकास पहल का अनावरण किया गया। अप्रैल 2022 में शी ने एशिया के लिए बोआओ फोरम के दौरान वैश्विक सुरक्षा पहल (जीएसआई) की घोषणा की। इस साल 16 मार्च को चीन ने वैश्विक सभ्यता पहल शुरू की। जिनपिंग की वन बेल्ट वन रोड ने काफी और परियोजनाओं के मुकाबले काफी ज्यादा लाइमलाइट बटोरी हैं। इसके वनस्पद जीआईडीएस पर सबसे कम ध्यान दिया गया। इसका श्रेय चीन द्वारा इस पर खर्च किए गए तुलनात्मक रूप से कम प्रयास को दिया जा सकता है। लेकिन चीन पर नजर रखने वाले इस बात से सहमत होंगे कि बीजिंग एक बार वहां कुछ कर देता है, तो वह हमेशा के लिए होता है। इसका एक उदाहरण द्वितीय द्वीप श्रृंखला पर चीन का दावा है। पिछले कुछ समय से यह चर्चा से गायब हो गया है। हाल ही में प्रशांत द्वीप देशों पर चीन के बढ़ते फोकस को उन देशों को ताइवान से दूर करने के अलावा, उस दावे के विस्तार के रूप में देखा जा सकता है।

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एक अल्टरनेट सिक्योरिटी ऑर्किटेक्चर बनाने पर विचार 

व्यक्तिगत रूप से देखने पर ये सभी पहलें अहानिकर लगती हैं और ये अकेली हैं। यदि एक साथ विश्लेषण किया जाए, तो वे संकेत देते हैं कि चीन एक अल्टरनेट सिक्योरिटी ऑर्किटेक्चर बनाने पर विचार कर रहा है। इसे समझने के लिए इन पहलों को गंभीरता से देखने की और उनके बीच के कॉमन फैक्टर को तलाशना होगा। जीआईडीएस के लिए छह और आईसीटी (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) कंपनियों के लिए दो प्रस्ताव रखा गया। पहले प्रस्ताव में कहा गया है कि उन्हें साक्ष्य-आधारित तरीके से डेटा सिक्योरिटी को संभालना चाहिए और वैश्विक आईसीटी उत्पादों और सेवाओं की एक सुरक्षित और स्थिर सप्लाई चेन बनाए रखनी चाहिए। यह प्रस्ताव उन चुनौतियों से उपजा प्रतीत होता है जिनका चीन की कंपनियों को विदेशों में सामना करना पड़ रहा है, सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं पर चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना और अर्धचालकों के लिए प्रौद्योगिकी से इनकार करने से खुद को बचाना। 

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चीन साइबर हमलों के प्रमुख पीड़ितों में से एक 

दूसरे प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्यों को आईसीटी गतिविधियों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए जो अन्य देशों के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के महत्वपूर्ण डेटा को ख़राब करते हैं या चुराते हैं या उन गतिविधियों को संचालित करने के लिए डेटा का उपयोग करते हैं जो अन्य राज्यों की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हितों को कमजोर करते हैं। यह प्रस्ताव साइबर जासूसी का दोष अन्य देशों पर मढ़ने या चीन द्वारा रक्षात्मक खेल खेलने के लिए लगता है। 2 जून को जारी एडवांस्ड एनालिटिक्स ग्रुप की रिपोर्ट बताती है कि चीन साइबर हमलों के प्रमुख पीड़ितों में से एक है। 2022 की दूसरी और तीसरी तिमाही के बीच, चीन में डेटा उल्लंघन में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई (4852 प्रतिशत, 14,157,775 खातों का उल्लंघन)। दूसरी ओर, साइबरप्रूफ रिपोर्ट (जनवरी 2022) के अनुसार, चीन ने दुनिया के 18.83 प्रतिशत साइबर हमले किए और अमेरिका 17.05 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। यह संभवतः वही काटने का मामला है जो आप बोएंगे।

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