By नीरज कुमार दुबे | Feb 22, 2024
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि पाकिस्तान में जो दिखावटी लोकतंत्र था क्या वह भी अब खत्म होने की कगार पर है? क्योंकि सेना के अनुरोधों और चेतावनियों के बावजूद वहां के राजनीतिक दल सरकार गठन के लिए बीच का रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लोकतंत्र का मजाक बना कर रख दिया है। पहले वहां चुनाव नहीं कराये जा रहे थे, चुनाव हुए तो परिणाम में धांधली की गयी और अब जो परिणाम घोषित किये गये उसके बाद कोई सरकार ही नहीं बन पा रही है। उन्होंने कहा कि दिन में खबर आती है कि सरकार गठन का फॉर्मूला निकल गया है तो उसी दिन शाम को खबर आती है कि सरकार गठन में कोई नया पेंच फंस गया है। उन्होंने कहा कि यह सब दर्शा रहा है कि सेना वहां राजनीतिक दलों पर दबाव नहीं बना पा रही है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि देखा जाये तो इमरान खान को अन्यायपूर्ण तरीके से जेल में डालने, चुनाव चिह्न छीनने और प्रचार की इजाजत नहीं दिए जाने के बावजूद जनता ने तहरीक-ए-इंसाफ को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 180 सीटों का स्पष्ट बहुमत दिया है। लेकिन चुनाव परिणामों को बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित कई देशों ने पाकिस्तान के चुनावों में हुई धांधली की जांच कराने को कहा है लेकिन वहां कोई नहीं सुन रहा है। यही नहीं, पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने भी आठ फरवरी को हुए आम चुनाव में अनियमितताओं को लेकर नए सिरे से चुनाव कराने का अनुरोध करने वाली एक याचिका को ‘‘लोकप्रियता हासिल करने का हथकंडा’’ बताते हुए खारिज कर दिया है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र पहले भी दिखावटी ही था क्योंकि उसमें कभी प्रधानमंत्री और कभी सैन्य तानाशाह का शासन रहा। इस बार तो सेना ने आगे जाकर पूरे चुनाव की कमान खुद संभाल रखी थी और चुनाव परिणाम के बाद किसको क्या पद देना है वह भी तय कर रखा था लेकिन जनता ने पूरी बाजी पलट दी है। उन्होंने कहा कि इस सबसे सर्वाधिक खतरा पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष असीम मुनीर को लग रहा होगा क्योंकि उनकी सैन्य और राजनीतिक, दोनों ही ताकत कम हो गयी है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे ही रहे तो कहीं सेना का ही पहला तख्तापलट ना हो जाये।