मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हो या जमीयत...दोनों हमेशा एक जैसा राग क्यों अलापते हैं?

By गौतम मोरारका | Feb 12, 2023

आजकल धर्म पर शिक्षा देने और हमारा धर्म तुम्हारे धर्म से ज्यादा महान है या हमारा धर्म दुनिया में सबसे पुराना है, जैसे दावे करने का रिवाज-सा चल पड़ा है। पिछले सप्ताह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक हुई और इस सप्ताह जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक हुई। इन दोनों ही बैठकों में जो प्रस्ताव पास किये गये या सरकार से जो मांगें की गयीं वह लगभग समान हैं। ऐसा लगता है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए मुस्लिम संगठनों ने तय कर लिया है कि इससे पहले कि सरकार संशोधित नागरिकता कानून के नियम बनाये उससे पहले ही इस कानून का विरोध तेज कर दो, ऐसा लगता है कि कुछ लोगों को इस बात का आभास हो गया है कि मोदी सरकार समान नागरिक संहिता ला सकती है इसलिए इसका विरोध भी तेज किया जा रहा है, एक पक्ष की ओर से सनातन धर्म को ही राष्ट्रीय धर्म बताया गया तो इसका अर्थ धार्मिक कोण से निकालते हुए दूसरा पक्ष दावा कर रहा है कि इस्लाम धर्म सभी धर्मों में सबसे पुराना है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हो या जमीयत उलेमा-ए-हिंद...यह लोग मजहब के नाम पर बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं लेकिन आम गरीब मुस्लिमों के हितों के लिए इन्होंने आज तक कुछ नहीं किया। इन संगठनों से जुड़े नेताओं ने हमेशा अपना सियासी कद बढ़ाकर राजनीतिक रुतबा हासिल किया और आम मुसलमान को राजनीतिक पार्टियों के वोट बैंक के रूप में बदल दिया। आम मुसलमान को ना पढ़ने-लिखने दिया ना ही आगे बढ़ने दिया। अधिकतर मुस्लिम नेताओं के बच्चे तो विदेशों में तालीम हासिल करते हैं लेकिन आम मुस्लिमों को यह मदरसों में अपने बच्चे पढ़ाने के लिए कहते हैं ताकि जो नई युवा पीढ़ी आये वह भी इन नेताओं की बातों को ही सच मानकर बहक जाये। आज देश में गिने-चुने मुस्लिम नेता हैं तो यह सिर्फ इसलिए है कि अधिकतर मुस्लिम नेताओं ने अपने समाज से नेतृत्व को उभरने ही नहीं दिया, जिसके हाथ में सत्ता आई उसने इसे अपने परिवार तक ही सीमित रखा।

इसे भी पढ़ें: Muslim महिलाओं की बड़ी जीत, मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ने की इजाजत मिली !

आज जब पूरी दुनिया इतनी आगे बढ़ रही है ऐसे में इन नेताओं से सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्यों यह लोग असम में बच्चियों से विवाह के खिलाफ चल रहे अभियान का विरोध कर रहे हैं? संविधान जब सबको बराबरी का अधिकार देता है तो क्यों यह लोग समान नागरिक संहिता के जरिये बराबरी की जिम्मेदारी निभाने को तैयार नहीं हैं? आज के विज्ञान के युग में क्यों स्कूलों में हिजाब पहन कर जाने की ही जिद की जाती है? आज जब देश के बेटे-बेटियां कंधे से कंधा मिलाकर आगे चल रहे हैं तब क्यों लड़कों और लड़कियों के लिए अलग स्कूलों की मांग की जाती है? 

बहरहाल, समय आ गया है कि हमें यह फैसला करना होगा कि हमें आगे जाना या पीछे। यदि कोई अपने समाज को पीछे ले जाना चाहता है तो उस समाज के लोगों की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए वह ऐसे नेताओं का बहिष्कार करे। यदि हम सिर्फ धार्मिक मुद्दों में ही उलझे रहे और रूढ़िवाद में पड़े रहे तो दूसरे आगे निकल जायेंगे और हम देखते रह जाएंगे। यहां सवाल यह भी उठता है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हो या जमीयत उलेमा-ए-हिंद या इनके जैसे ही अन्य संगठन...यह सभी हर अवसर पर लगभग एक समान राग क्यों अलापते हैं? 

-गौतम मोरारका

प्रमुख खबरें

Kolkata Knight Riders की Bowling को मिलेगी धार, Fitness Test पास कर लौट रहे Matheesha Pathirana.

चीन के Shi Yu Qi से फाइनल में हारे Ayush Shetty, फिर भी Badminton Asia में Silver से रचा कीर्तिमान

Jos Buttler का बड़ा रिकॉर्ड, 14 हजार रन और 100 अर्धशतक के साथ रचा इतिहास

TCS का बड़ा Hiring Plan: 25 हजार फ्रेशर्स को देगी नौकरी, जानिए कंपनी का पूरा रिक्रूटमेंट प्लान।