By अनन्या मिश्रा | Jun 20, 2026
हर साल 21 जून को 'विश्व संगीत दिवस' मनाया जाता है। साल 1982 में फ्रांस में इस दिन की शुरूआत हुई थी। जिसका श्रेय तत्कालिक सांस्कृतिक मंत्री जैक लो को जाता है। दरअसल, फ्रांस का हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी रूप में संगीत से जुड़ा है। फिर चाहे वह गाता हो या फिर वाद्य बजाता हो। फिर चाहे संगीत शास्त्रीय हो या सुगम, देशी हो या फिर विदेशी। संगीत की विभिन्न खूबियों की वजह से यह दिन मनाया जाने लगा है।
शास्त्रों की मानें, तो संगीत को ईश्वर का दर्जा प्राप्त है। संगीत तन और मन दोनों को शांत करता है। मन में चलने वाले द्वंद्व से हमें निजात दिलाता है और तनाव व टेंशन को फुर्र से उड़ा देता है। संगीत भी योग की तरह हमारे मन, शरीर और मस्तिष्क को साध कर हमारी आत्मा को शुद्ध करता है। जब-जब व्यक्ति ज्यादा टेंशन महसूस कर रहा होता है, तो यदि वह कुछ समय के लिए संगीत सुन ले तो वह अपना तनाव भूलकर पॉजिटिव सोचने लगेगा।
इस बात को ज्यादातर लोग जानते हैं कि कुछ बीमारियों का इलाज अब सिर्फ दवाओं से नहीं बल्कि अपरंपरागत तरीकों से भी होता है। स्पर्श, सुगंध से लेकर संगीत द्वारा भी बहुत सी बीमारियों का इलाज किया जाने लगा है। रोजाना 20 मिनट अपनी पसंद का संगीत सुनने से रोजमर्रा की होने वाली बहुत सी बीमारियों से निजात पाया जा सकता है। कई दिनों से कोमा में पड़ा बच्चा मां की लोरी को सुनकर होश में आ गया। जिससे यह सिद्ध होता है कि ध्वनि तरंगों के जरिए भी उपचार संभव है।