By अनन्या मिश्रा | Nov 15, 2025
आज ही के दिन यानी की 15 नवंबर को नाथूराम गोडसे का निधन हुआ था। नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी के सीने में गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। इस जुर्म में नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949 को फांसी की सजा दी गई थी। बताया जाता है कि वह हिंदू राष्ट्रवाद के कट्टर समर्थक थे, साथ ही नाथूराम कभी महात्मा गांधी के पक्के अनुयायी भी थे। लेकिन इसके बाद भी वह महात्मा गांधी के सबसे बड़े विरोधी बन गए और महात्मा गांधी की हत्याकर दी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर नाथूराम गोडसे के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
एक समय में नाथूराम के पिता की पोस्टिंग महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुई थी। यहां पर गोडसे की मुलाकात कांग्रेस के नेताओं से हुई। इस दौरान नाथूराम गोडसे ने कांग्रेस की कई सभाओं में भाषण दिया और बताया जाता है कि रत्नागिरी में ही नाथूराम गोडसे की मुलाकात विनायक दामोदर सावरकर से हुई। जिससे नाथूराम की विचारधारा बदली और वह RSS से जुड़ गए।
नाथूराम गोडसे ने हैदराबाद निजाम के खिलाफ नागरिक अवज्ञा आंदोलन में हिस्सा लिया। इस दौरान नाथूराम को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। वहीं जेल से छूटने के बाद नाथूराम गोडसे ने सावरकर के विचारों को फैलाने के उद्देश्य से एक अखबार शुरू किया। इस अखबार का नाम 'हिंदू राष्ट्र' था, लेकिन कुछ ही समय बाद इस अखबार को बंद करने की नौबत आ गई।
देश की आजादी के बाद महात्मा गांधी जिस तरह से मुस्लिमों को बचाने के लिए अभियान में जुटे थे, यहीं से नाथूराम महात्मा गांधी का विरोधी बन गया। वहीं जब गोडसे ने सुना कि महात्मा गांधी चाहते हैं कि भारत, पाकिस्तान को करोड़ रुपए देंगे तो उसने तय कर लिया कि वह गांधीजी की हत्या कर देगा। लेकिन हत्या से पहले शायद ही कोई ऐसा मौका होगा, जब सार्वजनिक तौर पर गोडसे ने गांधीजी के खिलाफ कुछ बोला हो।
हालांकि समय-समय पर गोडसे अपने अखबार में महात्मा गांधी और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ लिखा करते थे। नाथूराम गोडसे का मानना था कि गांधीजी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदी भाषा और हिंदुस्तान के दो टुकड़े कर दिए। गोडसे का मानना था कि महात्मा गांधी ने सारे प्रयोग हिंदुओं की कीमत पर किए थे।
वहीं नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी को गोली मारी थी। जिस वक्त महात्मा गांधी की हत्या हुई, उस दौरान उनकी उम्र 78 साल थी। नाथूराम विनायक गोडसे ने गांधी जी की प्रार्थना सभा की ओर जाते हुए तीन गोलियां मारकर हत्याकर दी थी।
महात्मा गांधी की हत्या के बाद नाथूराम गोडसे को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन नाथूराम ने गांधीजी की हत्या के लिए खुद पर गर्व होने की बात कही। जिसके बाद कोर्ट के आदेशानुसार 15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे को फांसी दी गई।