Swami Vivekananda Death Anniversary: स्वामी विवेकानंद ने 39 साल में क्यों ली थी महासमाधि, जानें Belur Math का वो रहस्य

By अनन्या मिश्रा | Jul 04, 2026

भारत के महान आध्यात्मिक चिंतक, राष्ट्रनिर्माता और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद का 04 जुलाई को निधन हो गया था। उन्होंने विश्व मंच पर वेदांत, भारतीय संस्कृति और सनातन दर्शन को नई पहचान दिलाई थी। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके युवा होते हैं। स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन में जो भी कार्य किए, उसका प्रभाव आज भी पूरी दुनिया महसूस करती है। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात

साल 1881 में पहली बार स्वामी विवेकानंद की रामकृष्ण परमहंस की मुलाकात हुई और वह उनके शिष्य बन गए। रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं ने स्वामी विवेकानंद के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया था। परमहंस ने विवेकानंद को भारतीय संस्कृति, आत्मज्ञान और जीवन के उद्देश्य को समझने में मार्गदर्शन किया था। रामकृष्ण परमहंस की शिक्षा के आधार पर स्वामी विवेकानंद ने आत्मा की शक्ति, समाज सुधार और धार्मिक सहिष्णुता के विषय में गहरे विचार किए।

शिकागो विश्व धर्म महासभा

साल 1893 में स्वामी विवेकानंद की पहचान पूरी दुनिया में शिकागो विश्व धर्म महासभा में उनके प्रसिद्ध भाषण से हुई। उन्होंने अपने भाषण में धार्मिक सहिष्णुता, भारतीय संस्कृति और मानवता के महत्व पर जोर दिया था। स्वामी विवेकानंद का यह भाषण आज भी धार्मिक एकता और सामाजिक एकता के रूप में याद किया जाता है।

मृत्यु

वहीं पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में 04 जुलाई 1902 को 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद का निधन हो गया था। स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों का मानना था कि जीवन के अंतिम समय में बेलूर मठ में ध्यान लगाते लिए उन्होंने अपनी इच्छा से महासमाधि प्राप्त की थी।

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