रिश्तों से भागना नहीं, खुद को बचाने का तरीका! जानें क्यों Love से डर रही है आज की Generation

By एकता | Jan 20, 2026

कई लोग दिल ही दिल में किसी के साथ होना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि कोई उन्हें समझे, उन्हें चुने और बिना शर्त प्यार करे। उन्हें किसी का साथ, किसी की मौजूदगी और किसी के लिए खास होना अच्छा लगता है। लेकिन जब सच में कोई इंसान उनके करीब आता है, जब प्यार हकीकत बनकर सामने खड़ा होता है, तो वे पीछे हट जाते हैं। ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें प्यार नहीं चाहिए बल्कि इसलिए क्योंकि वे प्यार मिलने से डरते हैं। यह डर धीरे-धीरे उन्हें रिश्तों से दूर कर देता है।


इमोशनल दर्द का डर

कई लोगों ने पहले रिश्तों में दिल टूटने, धोखा खाने या भावनात्मक अनदेखी का अनुभव किया होता है। ये अनुभव उनके अंदर गहरे निशान छोड़ जाते हैं। वे आज भी प्यार चाहते हैं, लेकिन दोबारा टूटने का डर उन्हें खुद को बचाने पर मजबूर कर देता है। किसी को पास आने देने से बेहतर उन्हें अकेला रहना ज्यादा सुरक्षित लगता है।


ज्यादा उम्मीदें और आइडियल सोच

फिल्में, सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स रिश्तों की एक परफेक्ट तस्वीर दिखाते हैं। इससे लोगों के मन में बहुत ऊंची उम्मीदें बन जाती हैं। जब असल इंसान उन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो वे उसे अपनाने के बजाय खुद को पीछे कर लेते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि शायद कहीं कोई और बेहतर होगा।

 

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भरोसे की कमी

आज के समय में धोखा, घोस्टिंग और झूठ ने भरोसे को कमजोर कर दिया है। लोग रिश्ते चाहते हैं, लेकिन किसी पर पूरी तरह भरोसा करने से डरते हैं। जब भरोसा ही नहीं होता, तो सच्चा प्यार भी उन्हें डराने लगता है और वे उसे ठुकरा देते हैं।


आजादी और खुद को खोने का डर

कई लोगों को लगता है कि रिश्ता उनकी आजादी छीन लेगा। वे अपने करियर, सपनों और खुद की पहचान को लेकर सजग होते हैं। वे अकेले इसलिए नहीं रहते क्योंकि उन्हें रिश्ते पसंद नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि वे किसी के लिए खुद को खोना नहीं चाहते।


इमोशनल रूप से थक जाना

काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां या पुराने जख्म इंसान को भावनात्मक रूप से थका देते हैं। ऐसे में प्यार का विचार अच्छा लगता है, लेकिन उसे निभाने की ताकत नहीं बचती। “ना” कहना उनके लिए खुद को संभालने का तरीका बन जाता है।


कमिटमेंट का डर

कमिटमेंट का मतलब जिम्मेदारी, समझौता और भविष्य की चिंता है। कई लोगों के लिए यह सब बहुत भारी लगता है। वे प्यार चाहते हैं, लेकिन बंधन नहीं। इसलिए जब कोई रिश्ता गंभीर होने लगता है, वे भाग जाना आसान समझते हैं।


विकल्पों का भ्रम

डेटिंग ऐप्स यह एहसास कराते हैं कि हमेशा कोई और बेहतर विकल्प मौजूद है। इस सोच की वजह से लोग किसी एक पर टिक नहीं पाते। परफेक्ट की तलाश में वे हर सच्चे रिश्ते से दूर होते जाते हैं।


अकेलेपन में मिलने वाली शांति

कई लोग अपनी कंपनी में सुकून ढूंढ लेते हैं। अकेलापन उन्हें नियंत्रण, शांति और भावनात्मक स्थिरता देता है। अगर कोई रिश्ता उनकी जिंदगी में साफ़ तौर पर खुशी नहीं जोड़ता, तो वे जोखिम लेने से बेहतर अकेले रहना चुनते हैं।

 

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समाज की उम्मीदें और दिल की सच्चाई

समाज रिश्ते को जरूरी मानता है, लेकिन हर इंसान अंदर से इसके लिए तैयार हो, यह जरूरी नहीं। लोग चाहते तो हैं, पर जब असली इंसान सामने आता है, तो उनकी अंदरूनी तैयारी की कमी साफ़ दिख जाती है।


लोग रिश्तों से इसलिए नहीं भागते क्योंकि उन्हें प्यार नहीं चाहिए, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें प्यार मिलने से डर लगता है। उन्हें चोट, खोने और टूटने का डर होता है। आज के समय में अकेले रहना कई बार अकेलापन नहीं, बल्कि खुद को बचाने का तरीका बन गया है।

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