By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 02, 2026
(अलिंद चौहान और वर्षा सागी) नयी दिल्ली, दो नवंबर तेंदुए का शिकार करने वाले नेटवर्क से जुड़े होने और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का उल्लंघन करने के आरोपों का सामना कर रही दिल्ली की संस्था ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ के प्रतिनिधि को दिल्ली वन्यजीव बोर्ड से हटाने का फैसला किया गया है, जिन्हें कुछ दिन पहले ही इसमें शामिल किया गया था। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि एनजीओ ने 2018 से वन्यजीवों के बचाव के लिए दिल्ली वन विभाग के साथ काम किया है और वन्यजीव बोर्ड में इसे सदस्य के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव फरवरी, 2026 में रखा गया था। अंतिम प्रस्ताव मंजूरी के लिए जुलाई में सक्षम प्राधिकार को दिया गया था।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 8 के अनुसार, किसी राज्य के वन्यजीव बोर्ड का काम वन्यजीवों और विशेष पौधों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए नीतियां बनाने जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को सलाह देना होता है। इससे पहले, भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “यह बेहद चिंताजनक है कि वाइल्डलाइफ एसओएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिकेय (सत्यनारायण) के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार और वन विभाग ने गंभीर आरोप दर्ज किए हैं। यह मामला पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में तेंदुओं के अवैध शिकार से जुड़ा है।” उन्होंने कहा, “वन्यजीव अपराधों से जुड़े गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे संगठन को किसी राज्य के उच्च स्तरीय वैधानिक सलाहकार निकाय में शामिल करना जनता के भरोसे को ठेस पहुंचाता है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के मूल उद्देश्य को कमजोर करता है।” साल 1995 में स्थापित वाइल्डलाइफ एसओएस ने पिछले कई वर्षों में भारत के लुप्तप्राय जानवरों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए कई अभियान चलाए हैं।
इनमें अवैध शिकार विरोधी गतिविधियां, बचाव और पुनर्वास केंद्र, तथा प्राकृतिक आवास संरक्षण शामिल हैं। हालांकि, अगस्त में मीडिया में ऐसी खबरें आईं जिनमें वाइल्डलाइफ एसओएस का संबंध मध्यप्रदेश में तेंदुए के अवैध शिकार के एक कथित मामले से जोड़ा गया। सितंबर में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले में कार्तिकेय सत्यनारायण को दी गई अंतरिम सुरक्षा (राहत) वापस ले ली थी, लेकिन बाद में उच्चतम न्यायालय ने इस सुरक्षा को बहाल कर दिया।