भारत बनेगा अगला सऊदी? 150 कुओं की खुदाई चालू कर रचने वाला है इतिहास

By अभिनय आकाश | Aug 08, 2026

मिडिल ईस्ट जल रहा है। रूस यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है और इन सबके बीच भारत की धड़कनें तेज हैं। क्योंकि हम अपनी जरूरत का 89% तेल विदेशों से मंगाते हैं। अगर कल सप्लाई रुक गई तो भारत थम जाएगा। लेकिन दिल्ली के गलियारों में एक ऐसी योजना को हरी झंडी दे दी गई है जो दुनिया के तेल बाजारों में हलचल पैदा कर सकती है। नाम है समुद्र मंथन। बजट है 8484 करोड़ और लक्ष्य है भारत के गहरे समुद्र से तेल के भंडार को निचोड़ लेना। यह मेगा रिपोर्ट  केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के उस आधिकारिक ऐलान पर आधारित है जिसमें 8484 करोड़ की नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम को मंजूरी दे दी गई है। तेल की खोज कोई नल लगाना नहीं है। यह एक वैज्ञानिक तपस्या होती है। यही वो कुएं हैं जो आने वाले समय में आपकी गाड़ी के पेट्रोल की कीमत तय करेंगे। भारत सरकार ने 8484 करोड़ को दो बड़े हिस्सों में बांट दिया है। पहला हिस्सा है 28000 करोड़ का। यह समुद्र के सीने का डिजिटल एक्सरे है और इसे कहते हैं सिस्मिक डाटा। इनमें अत्याधुनिक जहाज समुद्र की गहराई में तरंगे भेजते हैं ताकि पता चल सके कि चट्टानों के नीचे तेल है या सिर्फ पानी। 

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समुद्र मंथन के जरिए अगर हम 150 कुओं से तेल निकालने में सफल रहे तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। रुपया मजबूत होगा और हम खाड़ी देशों की दादागिरी से मुक्त हो पाएंगे। यह मिशन सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक भी है। लेकिन सवाल उठता है सवाल यह है कि आखिर भारत को इस मिशन की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। रूस की बात करें तो रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्ति यानी सप्लायर बन गया है। जिसकी हिस्सेदारी बढ़कर 35 से 40% से भी अधिक हालिया आंकड़ों में 50% से अधिक है। हालिया कुल द्विपक्षीय व्यापार के मामले में अमेरिका और चीन के बाद रूस शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और भारत के कुल आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में रूस से ही आ रहा है। 

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जुलाई 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़कर 27.8 लाख बैरल प्रतिदिन के ऑल टाइम रिकॉर्ड पर पहुंच गया। जो कुल आयात का 55% से अधिक है। बात करें इराक और सऊदी अरब की तो यह भारत के पारंपरिक और भरोसेमंद साथी हैं जो दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। अमेरिका और यूएई की बात करें तो तो इन देशों से भी हम अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। संकट यह है कि हम हर साल करीब 150 बिलियन विदेशी तेल पर खर्च कर देते हैं। यह पैसा भारत के टैक्स पेयर्स का है जो विदेशों में जा रहा है। अगर हम इसमें से थोड़ा हिस्सा भी बचा लें तो भारत की अर्थव्यवस्था रॉकेट की रफ्तार से दौड़ेंगी। समुद्र मंथन भारत की ऊर्जा सुरक्षा की वो महागाथा है जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। ₹84,000 करोड़ का यह निवेश जोखिम भरा हो सकता है लेकिन बिना जोखिम के कोई भी राष्ट्र महाशक्ति नहीं बन सकता है। समुद्र की गहराइयों में होने वाली यह खोजे भारत की कल की बुनियाद है। 

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