By अभिनय आकाश | Jan 09, 2026
8 जनवरी को कोलकाता की सड़कों पर ऐसा तमाशा चला कि जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई पड़ी। जिस आईपैक ने कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कैंपेन डिजाइन किया था। अब जो ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी के लिए कैंपेन करती है, उसी के ऑफिस पर ईडी की रेड पड़ी। लेकिन मामला तब तूल पकड़ा जब ममता बनर्जी कोलकाता में ईडी से ही भिड़ गईं। जहां छापा पर रहा था, वहां उन्होंने धावा बोल दिया। चुनावों के दौरान सर्वे करने वाली और रणनीति बनाने वाली कंपनी आईपैक के दफ्तर में छापा पड़ रहा था। इसके प्रमुख प्रतीक जैन के यहां छापा चल रहा था। ममता बनर्जी सीधे उनके घर गईं और पार्टी से जुड़े दस्तावेज, एक हरे रंग की फाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर बाहर आ गईं। इसके बाद वे आईपैक के दफ्तर भी गईं। ममता काफी गुस्से में नजर आ रही थीं। प्रधानमंत्री-गृह मंत्री को चुनौती देने लगीं कि चुनाव में लड़ने की हिम्मत दिखाएं। पार्टी के कागजात लूट कर उन्हें चुप कराने और डराने की कोशिश न करें। लेकिन क्या एक ग्रीन फाइल ममता बनर्जी को फंसा सकती है? ईडी के पास ऐसी कौन सी ताकत है जो ममता बनर्जी को गिरफ्तार तक करा सकती है। ईडी ने छापे के लिए किस कोयला घोटाले का नाम लिया, बदले में टीएमसी ने क्या आरोप लगाएं? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस पूरे घटनाक्रम के क्या मायने निकाले जा रहे हैं? तमाम पहलुओं का एमआरआई स्कैन करते हैं।
8 तारीख की सुबह ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में कोलकाता में छापेमारी की। रेड आईपैक के कुछ दफ्तरों और आईपैक के चीफ प्रतीक जैन के आवास पर मारी गई। आईपैक एक पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म है जो टीएमसी का काम भी देखती है। रेड चल ही रही थी कि खुद ममता बनर्जी वहां पहुंच गई। छापेमारी को रोकने की कोशिश हुई। पहले वह प्रतीक जैन के घर गई। जब बाहर निकली तो उनके हाथों में हरे रंग की एक फाइल थी। कैमरे के सामने आई और बीजेपी पर चोरी का आरोप लगाया। गृह मंत्री अमित शाह के लिए नॉटी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। कहा कि बीजेपी हमारी चुनावी स्ट्रेटजी को चुराना चाहती है। इसके बाद ममता बनर्जी आईपैक के दफ्तर पहुंची। ममता के पहुंचने के बाद सीएमओ के कुछ अधिकारी भी वहां आ गए। उन्होंने दफ्तर से कुछ फाइलों को उठाया और अपने साथ भरकर ले गए। उन फाइलों में क्या था यह किसी को नहीं मालूम क्योंकि वह ईडी के हाथों लग ही नहीं पाई।
साल 2020 के कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़ी जांच में बाधा डाली गई। यह आरोप लगाया गया है। कोर्ट में जो याचिका दायर की है उसमें ममता आईपैक के प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर छापे के दौरान एक लैपटॉप, फोन और कई दस्तावेज अपने साथ ले गई हैं। यह ईडी का कहना है, यह कारवाई किसी भी राजनीतिक संगठन को निशाना बनाकर नहीं की गई है बल्कि कोयला खनन घोटाले से जुड़ी जांच के आधार पर की गई है। ईडी ने कोयला तस्करों और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बंगाल और दिल्ली के 10 ठिकानों पर छापेमारी की और उसी के तहत आईपैक पर छापेमारी की गई। मुख्यमंत्री ने ना सिर्फ तलाशी प्रक्रिया में दखल दिया बल्कि अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी अपने साथ वहां से हटाकर ले गई। यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत और सबूतों के आधार पर की जा रही थी। ईडी का यह आरोप कोर्ट में है और जांच का दायरा 2020 में हुए कथित हवाला लेनदेन से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। जिसका संबंध कोयला तस्करी और उससे अर्जित धन से बताया जा रहा है।
जांच के दौरान जो सामग्री जब्त की जा रही थी, वो मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों के लिहाज से अहम थी। यानी कि ममता बनर्जी जो सबूत उठाकर प्रतीक जैन के ठिकानों से अपने साथ लेकर चली गई। बकायदा काफिले के साथ आती हैं ममता बनर्जी। आईपक के दफ्तर में दस्तक देती हैं। प्रतीक जैन के घर पर पहुंचती हैं और वहां से हरी फाइलें आप उनके हाथ में देख सकते हैं। उठाकर अपने साथ ले जाती हैं। जिसके पबाद से ही सवाल खड़े हो रहे हैं और आखिर उन फाइलों में क्या है जो छुपाने की कोशिश आप कर रही हैं और आरोप लगा रही हैं कि पार्टी से जुड़ी जानकारी केंद्र सरकार जुटाने की कोशिश कर रही थी।
इस छापेमारी से ममता बनर्जी इतनी ज्यादा डर गई, बेचैन हो गई कि तुरंत आईपैक पहुंचती हैं और कुछ हरी फाइलें लेकर वहां से निकल जाती हैं। यानी दस्तावेज वहां से अपने साथ लेकर रवाना हो जाती हैं। अब सियासी लड़ाई जो है वो कानूनी पछड़े में फंस गई है। यानी कि ममता बनर्जी की इस तानाशाही के खिलाफ ईडी अब कोर्ट पहुंच गई है। अब ईडी ने हाई कोर्ट में ममता बनर्जी की तानाशाही और जिस तरीके से कानूनी कार्रवाही में अड़चन डालने की कोशिश की गई उसके खिलाफ याचिका दायर की है। तो दूसरी तरफ आईपैक के जरिए भी ईडी के खिलाफ याचिका दायर की गई है कोर्ट में।
रिपोर्ट के मुताबिक ईडी के पास अभी भी एक ऐसा दांव है जो मुख्यमंत्री को फंसा सकता है। उदाहरण के तौर पर हम अरविंद केजरीवाल को देख सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ईडी का पलड़ा अभी भी भारी है क्योंकि ईडी के पास पीएमएलए की धारा 67 है। द प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के 67वें पॉइंट में लिखा है इस अधिनियम के तहत की गई किसी भी कार्यवाही या दिए गए किसी भी आदेश को रद्द करने या बदलने के लिए किसी भी सिविल कोर्ट में मुकदमा नहीं किया जा सकता। सद्भावना से किए गए या किए जाने वाले किसी भी काम के लिए सरकार या उसके किसी अधिकारी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला, मुकदमा या दूसरी कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती। यानी अगर सरकार या उसके अधिकारी इस कानून के अनुसार ईमानदारी से काम करते हैं तो उनके खिलाफ अदालत में कोई केस नहीं चलेगा। अब इसे आसान शब्दों में समझें तो अगर कोलकाता पुलिस ईडी की छापेमारी को गलत साबित करना चाहती है तो उसे पहले यह साबित करना होगा कि ईडी अधिकारियों ने यह रेड अपने निजी फायदे के लिए की थी। जब तक कोलकाता पुलिस ईडी को गलत साबित नहीं कर देती तब तक अधिकारियों की गिरफ्तारी तो बहुत दूर की बात है। पुलिस इस रेड को अपराध की श्रेणी तक में नहीं ले जा सकती। लेकिन अगर ईडी ने यह साबित कर दिया कि जो फाइलें ममता बनर्जी ने छापेमारी के बीच लेकर वो गई हैं वो जांच में कितनी ज्यादा अहम थी तो ईडी चुटकियों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गिरफ्तार कर सकती है।