BJP के सिंहासन पर बैठेंगी महारानी? वसुंधरा-भागवत मुलाकात के बाद क्या चर्चाएं हैं

By अभिनय आकाश | Sep 03, 2025

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार सुबह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मुलाकात की। दोनों के बीच जोधपुर में करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। राजे और भागवत की मुलाकात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। मोहन भागवत मंगलवार को 9 दिवसीय दौरे पर जोधपुर पहुंचे। इस बैठक में संघ परिवार के 32 संगठनों के शीर्ष नेता और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे।

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समन्वय बैठक से पहले विशेष मुलाक़ात

मोहन भागवत और वसुंधरा राजे के बीच यह मुलाक़ात न सिर्फ़ राजस्थान में, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरण गढ़ सकती है और भाजपा की भावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि क्या यह मुलाक़ात वाकई राष्ट्रीय राजनीति में वसुंधरा राजे की बड़ी भूमिका की शुरुआत है या सिर्फ़ पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की एक कोशिश। 

आरएसएस प्रमुख और वसुंधरा राजे की मुलाकात से राजनीतिक संकेत

1. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की संभावना

सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत यह है कि आरएसएस वसुंधरा राजे को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का समर्थन कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस की पहली पसंद वसुंधरा राजे हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शिवराज सिंह चौहान का समर्थन कर रहे हैं। पूर्व आरएसएस नेताओं का मानना ​​है कि वसुंधरा राजे संघ के प्रति वफ़ादार हैं और पार्टी को वैचारिक स्तर पर मज़बूत कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो वह भाजपा की पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगी।

2. मोदी-शाह खेमे से तालमेल की कोशिशें

वसुंधरा राजे के मोदी-शाह के साथ रिश्ते कभी भी बहुत सहज नहीं रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में वह मुख्यमंत्री पद की सबसे बड़ी दावेदार थीं, लेकिन पार्टी आलाकमान ने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया। हाल ही में, राजे ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से मुलाकात की है, जिससे संकेत मिलता है कि पार्टी उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

3. आरएसएस-भाजपा के बीच संतुलन की राजनीति

इस बैठक से साफ़ संकेत मिलता है कि आरएसएस भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपनी प्राथमिकता थोपने में कामयाब हो रहा है। मोहन भागवत ने अपने हालिया बयान में कहा था कि "हिंदू राष्ट्र का सत्ता से कोई लेना-देना नहीं है", जो भाजपा के लिए भी एक संदेश था।

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