क्या बजट 2022 में क्रिप्टोकरेंसी पर लगेगा कर? जानिए क्या कह रहे हैं कर विशेषज्ञ

By कमलेश पांडेय | Jan 31, 2022

कल 1 फरवरी को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जब संसद के पटल पर अपना आम बजट 2022 प्रस्तुत करेंगी, तो उसमें क्रिप्टोकरेंसी पर कर लगाने की बात वह कर सकती हैं। इसके साथ ही वह क्रिप्टोकरेंसी के नियमन से जुड़ी हुई और उलझी हुई गुत्थियों को भी सुलझाने की बात  कर सकती हैं। ऐसी उम्मीद कर विशेषज्ञों को है, क्योंकि इन्होंने अपनी सामूहिक मांग से उन्हें अवगत करा रखा है।

इसलिए कर विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आम बजट 2022 में सरकार क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय के टैक्सेशन पर उलझन को दूर कर सकती है। क्योंकि वर्तमान में इसे लेकर आयकर कानून में कोई विशेष प्रावधान नहीं है।

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बता दें कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी के रेगुलेशन को लेकर भले ही स्पष्ट नियम नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इसमें आई ताजा गिरावट के बावजूद इसको लेकर पेशेवरों में कोई नाउम्मीदी नहीं दिखाई दे रही है, बल्कि इसके बेहतर भविष्य को लेकर सभी आशान्वित हैं। यूं तो क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने के लिए संसद के विगत शीतकालीन सत्र के दौरान एक विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन पर्याप्त तैयारियों की कमी और कुछ दबाव के चलते तब इसे पेश नहीं किया गया। 

इसलिए अब इस बात की उम्मीद बंधी है कि सरकार बजट सत्र में क्रिप्टोकरेंसी रेगुलेशन बिल नामक एक विधेयक पेश कर सकती है। क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुड़े निवेशकों और ट्रेडर्स को आगामी बजट 2022 में क्रिप्टो अर्निंग पर एक प्रॉपर टैक्स पॉलिसी फ्रेमवर्क की भी उम्मीद है। ये लोग क्रिप्टो क्लासिफिकेशन, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, स्टैंडर्ड केवाईसी और रेगुलेटर जैसे चार महत्वपूर्ण नियमन की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

कर विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आगामी बजट में सरकार क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय के टैक्सेशन पर उलझन को दूर कर सकती है। क्योंकि वर्तमान में, क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर टैक्स को लेकर आयकर कानून में कोई विशेष प्रावधान नहीं है। क्लियरटैक्स के फाउंडर और सीईओ अर्चित गुप्ता कहते हैं कि क्रिप्टो से जुड़े टैक्स के नियमों को लेकर कई तरह की उलझनें हैं। मसलन इसके क्लासिफिकेशन, एप्लिकेबल टैक्स रेट्स, टीडीएस, टीसीएस और क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री पर जीएसटी जैसी चीजों पर इस बजट में फैसले लिए जा सकते हैं।

# क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली कमाई पर टैक्स लगाने की ये है योजना

साल 2021 में क्रिप्टोकरेंसी में जमकर निवेश हुआ और भारत में भी क्रिप्टो निवेशकों की संख्या में तेज इजाफा देखा गया। यही वजह है कि सरकार को क्रिप्टो को लेकर गहन विचार-विमर्श करते हुए एक क्रिप्टोकरेन्सी रेगुलेशन बिल तैयार करना पड़ा, जिसे बजट सत्र में लाया जा सकता है। इसलिए अब लोगों को भी बजट 2022 में डिजिटल करेंसी को लेकर किसी बड़े एलान की उम्मीद जगी है।

इस बीच विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस बात की संभावना बन रही है कि बजट के दौरान सरकार क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर भारी-भरकम टैक्स लगा सकती है।

# 1 फरवरी को पेश किया जाएगा बजट

बता दें कि देश के आम करदाताओं, कारोबारियों-व्यापारियों के साथ ही भारतीय क्रिप्टो निवेशक भी बजट 2022 का बेसब्री के साथ इंतजार कर रहा है, जिसे 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भी इस बजट में कुछ घोषणाएं की जानी संभव है। इस संबंध में आई रिपोर्टों पर विश्वास किया जाए तो यह पता चला है कि केद्र सरकार फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी को लेकर विभिन्न कर विशेषज्ञों की सलाह ले रही है। क्योंकि सरकार अब क्रिप्टोकरेंसी में निवेश अथवा ट्रेडिंग से होने वाली आय पर टैक्स को साफतौर पर परिभाषित करना चाहती है। वह इस बात पर भी विचार-विमर्श कर रही है कि क्या क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय को कारोबारी आय या कैपिटल गेन के तौर पर देखा जा सकता है।

# क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों पर बढ़ सकता है बोझ

गौरतलब है कि प्रस्तावित क्रिप्टोकरेंसी बिल में क्रिप्टोकरेंसी को एक कमोडिटी के तौर पर मानने और वर्चुअल करेंसी को उनके इस्तेमाल के आधार पर अलग-अलग नजरिए से देखने का प्रावधान शामिल था। यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पेश होना था, लेकिन टैक्स और इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न मुद्दों के चलते इसे टाल दिया गया। अब एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट में किए जाने वाले एलान के तहत क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ने की उम्मीद है। क्योंकि केंद्र सरकार क्रिप्टो एसेट्स पर इनकम टैक्स स्लैब को 35 प्रतिशत से लेकर 42 प्रतिशत के बीच रख सकती है। इसके साथ ही सरकार क्रिप्टो ट्रेंडिंग पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने पर भी विचार कर रही है।

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# क्रिप्टो एक्सचेंजों पर जीएसटी लगाने की तैयारी

कई रिपोर्टों में डिजिटल करेंसी या क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े किसी भी प्रकार के लेन-देन पर इनकम टैक्स के सबसे ऊंचे स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाए जाने की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। बता दें कि जब क्रिप्टो बिल की चर्चा जोरों पर जारी थी उस समय भी जारी की गईं कई रिपोर्टों में इस बात का जिक्र किया गया था कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर भी एक फीसदी जीएसटी लगाने की योजना बना रही है, जिसे सोर्स पर कलेक्ट किया जाएगा। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री का रेगुलेशन बाजार नियामक सेबी के हाथों सौंपे जाने की चर्चा है। यानी क्रिप्टो निवेशकों पर सेबी की पैनी निगाह हर समय रहेगी और क्रिप्टोकरेंसी का हर लेन-देन आयकर विभाग की रडार पर होगा। बहरहाल, सरकार की पूरी योजना क्या है, इसका खुलासा तो बजट पेश होने के दौरान ही हो सकेगा। 

# कर विशेषज्ञों ने दी ये जरूरी सलाह

एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि क्रिप्टोकरेंसी में भारतीयों द्वारा निवेश 2030 तक बढ़कर 24.1 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। नैसकॉम और वजीरएक्स के मुताबिक, फिलहाल भारत में वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो निवेशकों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। इसलिए कर विशेषज्ञों की राय है कि निर्धारित सीमा से अधिक क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को टीडीएस व टीसीएस प्रोविजंस के दायरे में लाया जाना चाहिए। ऐसा करने से सरकार को निवेशकों पर नज़र रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उन्होंने सलाह दी है कि क्रिप्टोकरेंसी की बिक्री से होने वाले नुकसान को अन्य आय से एडजस्ट करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

# क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक प्रतिगामी कर व्यवस्था ला सकती है सरकार

सरकार ने भारतीयों को क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार से प्रतिबंधित नहीं किया, इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक प्रतिगामी कर व्यवस्था ला सकती है। सरकार बजट सत्र में क्रिप्टोकरेंसी विनियमित करने के लिये एक विधेयक क्रिप्टोकरेन्सी रेगुलेशन बिल ला सकती है। सरकार आगामी आम बजट में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री को कर के दायरे में लाने पर विचार कर सकती है। कर क्षेत्र के एक विश्लेषक और नांगिया एंडरसन एलएलपी के कर प्रमुख अरविंद श्रीवत्सन ने कहा कि सरकार आगामी बजट में एक निश्चित सीमा से ऊपर क्रिप्टोकरेंसी की बिक्री और खरीद पर टीडीएस, टीसीएस लगाने पर विचार कर सकती है और इस तरह के लेनदेन को विशेष लेनदेन के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि आयकर अधिकारियों को इनकी जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी की बिक्री से होने वाली आय पर लॉटरी, गेम शो, पहेली की तरह 30 प्रतिशत की उच्च कर दर से कर लिया जाना चाहिए।

श्रीवत्सन ने आगे कहा कि इस समय भारत में विश्व स्तर पर क्रिप्टो मालिकों की संख्या सबसे अधिक लगभग 10.07 करोड़ है, और एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक भारतीयों द्वारा क्रिप्टोकरेंसी में निवेश बढ़कर 24.1 करोड़ डॉलर तक हो सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार के आकार, इसमें शामिल राशि और क्रिप्टोकरेंसी के साथ जोखिम को देखते हुए इसके कराधान में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, जैसे कि उन्हें स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और स्रोत पर एकत्र कर टीसीएस के दायरे में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी की बिक्री और खरीद दोनों को वित्तीय लेनदेन विवरण (एसएफटी) के दायरे में लाया जाना चाहिए। ऐसा करने से इनकी निगरानी की जा सकेगी। 

# क्या क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर देना होगा टैक्स?

पिछले दो साल में क्रिप्टोकरेंसी के तेजी से बढ़ने की प्रक्रिया ने भारत में भी कई लोगों के लिए व्यापार और आय के अवसर के नए द्वार खोले हैं। यही वजह है कि इसमें आई ताजा भारी गिरावट के बावजूद इसमें दिलचस्पी रखने वाले लोगों की अभिरुचि कम नहीं हुई है। दरअसल, एक तरफ तो लोग तेजी से लोकप्रिय हो रहे डिजिटल कॉइन के जरिए बंपर कमाई की उम्मीद से निवेश कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कई सारे ऐसे भी हैं जो रेस्टोरेंट और ऑनलाइन शॉप पर पेमेंट के रूप में स्वीकार करने के तरीके भी बना रहे हैं। जबकि कुछ माइनिंग के जरिए क्रिप्टोकरेंसी से पैसे बना रहे हैं। हालांकि क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली इस कमाई पर सरकार कैसे टैक्स वसूलेगी, इस बारे में लोगों में अभी भी भ्रम बना हुआ है। वहीं, अधिकारियों द्वारा पहले क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने और फिर वर्चुअल करेंसी के व्यापार की अनुमति देने के कदम ने इस आभाषी करेंसी कारोबार के क्षेत्र में असमंजस को और बढ़ा दिया है।

याद दिला दें कि वर्ष 2018 में, भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को बिटकॉइन, एथेरियम, डोजकॉइन जैसी दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन की सुविधा से प्रतिबंधित कर दिया। हालांकि बाद में 2020 की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने इन वर्चुअल सिक्कों के व्यापार की अनुमति देते हुए पहले के आदेश को उलट दिया। बावजूद इसके अभी तक भारत में इन्हें कानूनी निविदा का दर्जा नहीं मिला है। वहीं, आरबीआई ने भी कहा है कि यह ध्यान में रखते हुए कि मुद्रा का यह नया रूप मौजूदा वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, वह अपनी खुद की क्रिप्टोकरेंसी पर काम कर रहा है और सावधानी के साथ फूंक फूंक कर इस दिशा में आगे बढ़ेगा।

इतना सब होने के बावजूद आपको इनसे हुई आय पर टैक्स देना होगा या नहीं, इसको लेकर अभी तक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आलम यह है कि उन्हें पूंजीगत लाभ के रूप में घोषित किया जाए या किसी अन्य स्रोत में, इस बात पर भी कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। हालांकि, सरकार आभासी मुद्राओं और उनके उपयोग के आधार पर उनके कर को विभाजित करने की योजना बना रही है, चाहे वह निवेश, भुगतान या उपयोगिता के किसी भी रूप में हुआ हो।

यही वजह है कि सरकार ने पहले ही वर्चुअल करेंसी से डील करने वाली कंपनियों के लिए ट्रांजैक्शन पर हुए प्रॉफिट या लॉस का खुलासा करना अनिवार्य कर दिया है। इसने उन्हें अपनी बैलेंस शीट में क्रिप्टोकरेंसी की मात्रा के बारे में जानकारी देने को कहा गया है, लेकिन यह अभी तक उनके लेनदेन को नियंत्रित करने के लिए कोई कर योग्यता कानून नहीं लाया है। वहीं, आयकर कानून हर तरह की आय पर कर लगाने की मांग करते हैं। इसलिए उम्मीद है कि नए बजट में सरकार अपनी मन की बात अपनी बजट घोषणाओं से स्पष्ट कर सकती है।

बताया जाता है कि क्रिप्टोकरेंसी से कमाई के चार मुख्य स्रोत हैं- पहला, माइनिंग: खनन क्रिप्टोकरेंसी स्व-निर्मित पूंजीगत संपत्ति है। ऐसे बिटकॉइन की बाद में बिक्री से आमतौर पर पूंजीगत लाभ होता है। दूसरा, वास्तविक मुद्रा के बदले में ट्रांजेक्शन: निवेश के रूप में रखे गए क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में प्रशंसा को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ या अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति कितनी देर तक रखी गई है। तीसरा, ट्रेडिंग गतिविधि से आय: क्रिप्टो सिक्कों के व्यापार से होने वाली आय से व्यवसाय से होने वाली आय के तहत होगी और इसलिए लाभ पर लागू टैक्स स्लैब के रूप में कर लगाया जा सकता है। चतुर्थ, माल और सेवाओं की बिक्री पर प्राप्त: इन क्रिप्टोकरेंसी लाभ को धन की प्राप्ति के बराबर माना जा सकता है। ऐसे में प्राप्तकर्ता पर व्यापार या पेशे से लाभ या लाभ के मद में कर लगाया जाएगा।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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