मर्दानगी की दवा लेंगे ट्रंप के सैनिक? खामनेई ने...युद्ध के बीच पेंटागन के ऐलान ने मचाई हलचल

By अभिनय आकाश | Jul 18, 2026

ईरान के साथ लंबे वक्त से छिड़ी जंग के बीच अमेरिकी सेना का क्या हाल हो रहा है अब यह धीरे-धीरे पूरी दुनिया के सामने आ रहा है। दरअसल 1 मार्च 2026 को कुवैत के शोएब इंटरनेशनल बंदरगाह को ईरान ने निशाना बनाया था। हालांकि इससे पहले अमेरिकी सैनिकों ने अपनी सीनियर कमांड को यह जानकारी दी थी कि उनकी यह पोजीशन ईरान के निशाने पर आ सकती है। लेकिन उनकी इस चेतावनी के बावजूद भी अमेरिकी सीनियर कमांड ने इसे अनदेखा किया और आखिरकार वही हुआ जिसका इन सैनिकों को डर सता रहा था। ईरान के साथ लंबे खिसते टकराव की वजह से अमेरिकी सैनिक एक अभूतपूर्व मानसिक और शारीरिक दबाव से जूझ रहे हैं। जिसका सीधा असर उनकी सैन्य क्षमता पर पड़ रहा है। और इसी वजह से अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को एक ऐसा कदम उठाना पड़ा है जो बेहद ही हैरान करने वाला है। पेंटागन के इस कदम से दुनिया भर में इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या अमेरिकी सैनिकों की मददानगी ताकत कम हो रही है? दरअसल अमेरिका ने ईरान को झुकाने के लिए मिडिल ईस्ट में अपनी आधी से ज्यादा फौज उतार दी। अमेरिका ने अपनी नेवी एयरफोर्स और ग्राउंड फोर्स को मिडिल ईस्ट में ईरान की घेराबंदी के लिए उतार दिया है। लेकिन इसी बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने घोषणा की है कि अमेरिका के हर सैनिक को सालाना टेस्टोस्टरॉन की स्क्रीनिंग करानी होगी। बता दें कि टेस्टोस्टरॉन एक ऐसा हार्मोन होता है जो पुरुषों में पाया जाता है। यह हार्मोन पुरुषों में मददानगी और शारीरिक ताकत से लेकर स्टैमिना तक बढ़ाने का काम करता है। 

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अमेरिका का टेस्टोस्टरॉन स्क्रीनिंग प्रोग्राम 

यह स्क्रीनिंग प्रोग्राम अमेरिका के 30 साल या उससे ज्यादा उम्र के सैनिकों के लिए अनिवार्य होगा। हेक्सेथ का कहना है कि इस प्रोग्राम का मकसद अमेरिकी सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन की कमी से निपटना है जो अमेरिकी सैनिकों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। इसको लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि विज्ञान में यह बात अच्छे से साबित हो चुकी है कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, टेस्टोस्टरॉन का स्तर प्राकृतिक रूप से घटता है। दरअसल पीट हेक्कसेथ का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों के टेस्टोस्टरॉन लेवल की जांच के लिए एक सालाना हेल्थ असेसमेंट होगा जो सभी सैनिकों के लिए अनिवार्य होगा। इस स्क्रीनिंग में 30 साल या उससे अधिक उम्र के सैनिक स्वतः अपने आप शामिल हो जाएंगे और 30 साल से कम उम्र के सैनिक स्वैक्षिक रूप से टेस्टोस्टरॉन स्क्रीनिंग करा सकते हैं। हेक्सेथ का कहना है कि जिन सैनिकों का टेस्टोस्टरॉन लेवल कम पाया जाता है उन्हें टेस्टोस्टरॉन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी टीआरटी दी जाएगी। जिसके जरिए अमेरिकी सैनिकों को अतिरिक्त रूप से टेस्टोस्टरॉन हॉर्मोन दिया जाएगा। हालांकि ऐसा जबरन नहीं किया जाएगा। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह थेरेपी जेल, इंजेक्शन, स्किन पैचेस,  मुंह द्वारा खाई जाने वाली टेबलेट के जरिए दी जा सकती है। हेक्सेथ का कहना है कि अगर किसी सैनिक का टेस्टोस्टरॉन लेवल तय मानक से नीचे चला जाता है तो उन्हें टीआरटी थेरेपी दी जाएगी।

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