By रेनू तिवारी | May 28, 2026
कर्नाटक में जारी हाई-प्रोफाइल सियासी ड्रामे के बीच एक तकनीकी और संवैधानिक पेंच फंसता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि वे दोपहर के भोजन के बाद अपने पद से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन राज्यपाल थावरचंद गहलोत बुधवार रात को ही एक पारिवारिक इमरजेंसी के चलते बेंगलुरु से इंदौर (मध्य प्रदेश) रवाना हो चुके हैं। इस स्थिति ने राजनीतिक गलियारों में यह बहस छेड़ दी है कि जब राज्य के संवैधानिक प्रमुख ही शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, तो क्या मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार हो सकता है? आइए जानते हैं कि इस पर हमारा संविधान और कानून के विशेषज्ञ क्या कहते हैं।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 (Article 164) यह स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाएगी और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करेंगे। इसी प्रक्रिया के तहत: कोई भी मुख्यमंत्री तब तक औपचारिक रूप से पदमुक्त नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह अपना त्यागपत्र राज्य के राज्यपाल (गवर्नर) को न सौंप दे। चूंकि गवर्नर गहलोत अचानक शहर से बाहर चले गए हैं और उनके लौटने की कोई तारीख तय नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने एक वैकल्पिक रास्ता चुना है। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया राजभवन (राज्यपाल कार्यालय) को ही अपना इस्तीफा प्रेषित करेंगे।
क्या कहता है नियम? एक्सपर्ट से समझिए संवैधानिक स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और संवैधानिक विशेषज्ञ आर.के. सिंह के अनुसार, राज्यपाल का राज्य में मौजूद न होना किसी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की प्रक्रिया में बाधा नहीं बन सकता। इसके पीछे निम्नलिखित संवैधानिक तर्क हैं:
स्थान का बंधन नहीं: राज्यपाल राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकारी होते हैं। उनका पद या उनके अधिकार किसी एक विशेष इमारत (जैसे राजभवन) या भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं हैं।
कहीं से भी दे सकते हैं मंजूरी: गवर्नर देश के किसी भी हिस्से में या विदेश में रहते हुए भी प्रशासनिक निर्णय ले सकते हैं और आधिकारिक व सरकारी दस्तावेजों को अपनी मंजूरी दे सकते हैं।
डिजिटल और भौतिक माध्यम वैध: मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा सीधे राजभवन के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप सकते हैं। इसके अलावा, इसे फैक्स (Fax) या आधिकारिक ईमेल (Email) के जरिए भी राज्यपाल को भेजा जा सकता है, जिसे वे वहां बैठे-बैठे स्वीकार कर सकते हैं।
कर्नाटक में आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि राज्यपाल की अनुपस्थिति से उनके राजनीतिक प्लान में कोई बदलाव नहीं आएगा।
इस्तीफा सौंपना: सिद्धारमैया अपना आधिकारिक त्यागपत्र राजभवन के अधिकारियों को सौंपेंगे और इसकी एक प्रति डिजिटल माध्यम से गवर्नर को इंदौर भेजी जाएगी।
कार्यवाहक मुख्यमंत्री: इस्तीफा स्वीकार होने के बाद, नए मुख्यमंत्री (संभावित रूप से डीके शिवकुमार) के शपथ लेने तक राज्यपाल सिद्धारमैया को 'कार्यवाहक मुख्यमंत्री' के तौर पर पद पर बने रहने को कह सकते हैं।
नई सरकार का गठन: राज्यपाल डिजिटल माध्यम या वापस लौटकर नए मुख्यमंत्री को सरकार बनाने का न्योता देंगे, जिसके बाद शनिवार (30 मई) को नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण संभावित है।
संवैधानिक नियमों के मुताबिक, तकनीकी रूप से सिद्धारमैया के इस्तीफे में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। राज्यपाल इंदौर में बैठकर भी उनके इस्तीफे को हरी झंडी दे सकते हैं। अब देखना यह है कि राजभवन इस कागजी प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाता है।
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