By कमलेश पांडे | Aug 08, 2026
किसी भी वाहन धारक के लिए थर्ड पार्टी बीमा बहुत जरूरी होता है, ताकि दुर्घटना की स्थिति में तीसरे व्यक्ति को हुई जान-माल की क्षति की भरपाई की जा सके। लेकिन बीमा कम्पनियों ने अब जो नया रुख अख्तियार किया है, उसका सार-सत्य यह है कि अब आपके गाड़ी चलाने के तरीके से ही यह तय होगा कि आपको कितना बीमा प्रीमियम देना होगा। यानी कि रफ ड्राइविंग करने वालों को अब ज्यादा बीमा प्रीमियम अदा करना पड़ेगा। इस हेतु बीमा कम्पनियों ने टेलीमैटिक्स तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है।
आपको पता होना चाहिए कि दिन प्रतिदिन तकनीकी दुनिया में नए नए बदलाव आ रहे हैं। इसी तरह से टेलीमैटिक्स तकनीक भी है जो आपके वाहन में लगी होती है और निम्नलिखित जानकारियां रिकॉर्ड करती है:- वह वाहन की गति (Speed), अचानक ब्रेक लगाने या तेज एक्सेलरेशन की आदत, तीखे मोड़ (Harsh Cornering), रात में वाहन चलाने की आवृत्ति, प्रतिदिन या प्रतिवर्ष तय की गई दूरी, दुर्घटना या टक्कर की जानकारी, वाहन की लोकेशन और यात्रा का पैटर्न भी समझती है और उसका विश्लेषण करती है।
सुरक्षित चालक: यदि आप नियमों का पालन करते हैं, सीमित गति रखते हैं और सावधानी से वाहन चलाते हैं, तो प्रीमियम कम हो सकता है।
जोखिमपूर्ण चालक: तेज रफ्तार, बार-बार अचानक ब्रेक, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन जैसी आदतें प्रीमियम बढ़ा सकती हैं।
अच्छे ड्राइवरों को कम प्रीमियम का लाभ। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा। दुर्घटना होने पर तेज क्लेम प्रक्रिया। चोरी होने पर वाहन की लोकेशन ट्रैक करने में मदद। ड्राइविंग व्यवहार सुधारने के लिए फीडबैक।
निजता (Privacy) को लेकर चिंता। हर समय लोकेशन और ड्राइविंग डेटा रिकॉर्ड होना। डेटा सुरक्षा और उसके दुरुपयोग का जोखिम।
भारत में कुछ बीमा कंपनियां Usage-Based Insurance (UBI) और Pay As You Drive/Pay How You Drive जैसे मॉडल पर टेलीमैटिक्स आधारित मोटर बीमा योजनाएं शुरू कर चुकी हैं। भविष्य में यह व्यवस्था और व्यापक होने की संभावना है।
निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि टेलीमैटिक्स मोटर बीमा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब केवल वाहन का मॉडल या इंजन क्षमता ही नहीं, बल्कि आप वाहन कितनी जिम्मेदारी से चलाते हैं, यह भी आपके बीमा प्रीमियम को प्रभावित कर सकता है। इससे सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहन मिलेगा और जिम्मेदार चालकों को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार