महामारी के इस दौर में भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहीं महिला कोरोना वारियर्स

By अंकित सिंह | May 08, 2021

वक्त मुश्किल भरा जरूर है पर इससे हम बाहर निकलेंगे। मुश्किलें आती हैं और आती भी रहेंगी। बाधाएं व्यवधान जरूर पैदा करती हैं पर लक्ष्य से नहीं हटा पाती। अपनों का साथ हो तो साहस और हिम्मत हमेशा बनी रहती है। पर साथ उनका मिले जो निस्वार्थ होकर दूसरों की सेवा में लगे हैं तो वह सबसे बड़ा प्रेरणा का काम करता है। निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोगों पर ही आज हमारे समाज की नींव टिकी हुई है। इस कोरोना महामारी में जब अपनों का साथ नहीं मिल रहा तब यही निस्वार्थ भाव से मदद कर रहे लोग हमारी सेवा में आगे आ रहे हैं। हमें हर तरह की सहायता प्रदान कर रहे हैं और शायद इसीलिए आज इस मुश्किल वक्त में हमारे लिए वह वॉरियर हैं। वॉरियर यानी की योद्धा। इसका मतलब यह नहीं कि देश और समाज की सुरक्षा के लिए किसी सीमा पर यह लोग गोली चला रहे हैं और दुश्मनों से लोहा ले रहे हैं। यह वह लोग हैं जो समाज में फैले इस महामारी से लोगों को बचाने की कोशिश में जी-जान से जुटे हुए हैं। इन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि इनके साथ क्या होगा? इन्हें तो बस अपने कर्तव्य से प्यार है। यही कारण है कि इनके लिए कितनी भी शब्दों में तारीफ की जाए वह कम पड़ जा रही हैं। स्त्री हो या फिर पुरुष, आज इस महामारी के दौर में हर रूप में कोरोना वॉरियर्स हमारी मदद को तत्पर हैं।

मुश्किल वक्त में इनके योगदान का ऋण यह समाज तो नहीं उतार पाएगा। परंतु इस बात की उम्मीद जरूर की जा सकती है कि महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया जरूर बदल जाएगा। आज के वक्त में जब हर कोई इस महामारी से बचने के लिए अपने घर में ही रहना पसंद कर रहा है, यह दलील दे रहा है कि नौकरी आएगी-जाएगी परंतु जिंदगी रहनी चाहिए। ऐसे वक्त में महिला कोरोना वारियर्स के कार्यों  की सराहना की जानी चाहिए। कभी वह हमारे पास इस मुश्किल वक्त में डॉक्टर या नर्स के रूप में दिखाई दे जाती हैं तो कभी सड़कों पर लॉकडाउन का पालन कराते हुए पुलिस या ट्रैफिक पुलिस के रूप में दिखाई दे जाती हैं। इतना ही नहीं, सीमा पर देश की प्रहरी कर रही महिलाएं भी वर्तमान परिस्थिति में देश के भीतर भी इस महामारी से लड़ रही हैं। उनके आगे भी उनका अपना गृहस्थ जीवन है, उनके बच्चे हैं परंतु अपने कर्तव्य को ज्यादा महत्व देते हुए  वह हर जगह दिखाई दे ही जाती हैं।

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गांव में आशा कार्यकर्ता के रूप में यह महिलाएं समाज को कोरोना वायरस के प्रति शिक्षित कर रही हैं और टीकाकरण को लेकर अभियान चला रही हैं तो वही पत्रकार के रूप में समाज को नई दिशा दे रही हैं। शायद इनके लिए भी इनका बच्चा सबसे ज्यादा प्यारा होगा। परंतु जीवन के इस मोड़ पर इन्होंने अपने कर्तव्यों को भी प्राथमिकता दी है। कुछ ऐसा ही काम महिला शिक्षक भी कर रही हैं। वह खुद मां है परंतु अपने घर के साथ-साथ उन्हें उन बच्चों की भी चिंता है जिनकी पढ़ाई-लिखाई इस कोरोना काल में चौपट हो रही है। यही कारण है कि ऑनलाइन क्लासेज के जरिए वह अब भी बच्चों को शिक्षा दीक्षा दे रही हैं। उदासी के इस आलम में महिला कोरोना वारियर्स हम सब के लिए प्रेरणा हैं। आज इस कठिन वक्त में वह अपने घर को संभालने के साथ-साथ अपने समाज और देश को भी संभालने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि अगर कुछ हो जाता है तो फिर उनके बच्चों को कौन देखेगा? उन्हें तो बस इस बात की फिक्र है कि कठिन समय से इस समाज को और देश को कैसे निकाला जाए और उसमें वह दिन-रात अपना योगदान दे रहे हैं।

पुरूष कोरोना वारियर्स के साथ-साथ महिला कोरोना वारियर्स भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बिल्कुल भी पीछे नहीं हैं। लेकिन अगर हम कहें तो इस कठिन वक्त में भी वह अपनी दोहरी जिम्मेदारियों को निभा रही है तो इसमें शायद ही किसी को संदेह हो। पहली जिम्मेदारी अपने घर की, अपने बच्चों को संभालने की जबकि दूसरी जिम्मेदारी अपने कर्तव्य की इस देश और समाज को बचाने की। यह महिला ही हैं जो अपनी दोनों ही जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। हमारे महिला कोरोना वारियर्स की ऐसी कई कहानियां सामने आ रही हैं जो सालों साल तक हमारी पीढ़ी को प्रेरित करती रहेंगी। हमने यहां सिर्फ तीन चार महिलाओं की ही बात की। परंतु आज इस परिस्थिति में ऐसी लाखों महिला कोरोना वारियर्स होंगी जो इस मुश्किल दौर में अपने घर से ज्यादा अपने कर्तव्य को ज्यादा महत्व दे रही होंगी। इनके निस्वार्थ सेवा के लिए इन्हें सलाम है।

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