By अंकित सिंह | Apr 18, 2026
महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद, मोदी सरकार को 2014 के बाद पहली बार विधायी विफलता का सामना करना पड़ा। इसके एक दिन बाद, शनिवार को सरकार ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि शुक्रवार को जो हुआ, उससे कांग्रेस की महिला-विरोधी मानसिकता स्पष्ट होती है। सरकार की ओर से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जोरदार हमला बोला और कहा कि विपक्ष को इसके लिए 'लोकतांत्रिक रूप से दंडित' किया जाएगा।
रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में विधेयक के विफल होने से सरकार निश्चित रूप से निराश है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह न तो केंद्र सरकार की विफलता है और न ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की। उन्होंने कहा कि यह सबके लिए 'काला दिन' है और कांग्रेस जिस तरह से जश्न मना रही है वह शर्मनाक और निंदनीय है। हालांकि, रिजिजू ने कहा कि संसद सत्र बेहद सफल रहा और उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रिजिजू ने कहा कि अगर राहुल गांधी कहते हैं कि महिलाओं को आरक्षण देना असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है, तो किसी को राहुल गांधी को समझाना चाहिए कि महिलाओं को अधिकार देना अलोकतांत्रिक कैसे हो सकता है। उनकी सोच कैसी है, इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रेस ब्रीफिंग के तुरंत बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रिजिजू ने परिसीमन को लेकर विपक्ष के आरोपों का खंडन किया और कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी भी राज्य का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए संशोधन की आवश्यकता थी क्योंकि देश में जनसंख्या भी बढ़ गई है।