Satyendra Nath Bose Death Anniversary: Albert Einstein संग काम किया, फिर भी क्यों गुमनाम रह गए 'God Particle' के जनक

By अनन्या मिश्रा | Feb 04, 2026

आज ही के दिन यानी की 04 फरवरी को भारत के महान वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस का निधन हो गया था। सत्येंद्रनाथ बोस को अपने जीवन में वह पहचान व सम्मान नहीं मिली, जिसके वह असल में हकदार थे। उन्होंने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन के साथ मिलकर काम किया था और बोस-आइंस्टाइन सिद्धांत दिया था। उन्होंने एक सब एटॉमिक पार्टिकल की खोज की थी। जिसका नाम सत्येंद्र नाथ बोस को सम्मान देने के लिए 'बोसॉन' रखा गया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर महान भौतिकी विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... 


जन्म और परिवार

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 01 जनवरी 1894 को सत्येंद्र नाथ बोस का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम सुरेंद्रनाथ बोस था, जोकि ईस्‍ट इंडियन रेलवे में काम करते थे। इन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा जुगलिया गांव से पूरी की थी। फिर कोलकाता के प्रेजिडेंसी कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। फिर कोलकाता यूनिवर्सिटी से एमए किया था। उन्होंने बांग्ला भाषा में बहुत लेखन किया और आइंस्टीन के मूल जर्मन शोधकार्यों के आधार पर वह अंग्रेजी की एक किताब के सहलेखक भी बने थे।

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शोधपत्र

जब सत्येंद्र नाथ बोस ढाका यूनिवर्सिटी में थे, तब साल 1924 में उन्होंने एक शोधपत्र लिखा था। इनमें बोस ने प्लैंक का क्वांटम रेडिएशन सिद्धांत निकाला। इसके लिए बोस ने शास्त्रीय भौतिकी का संदर्भ नहीं लिया था। बोस ने इस शोध को जर्मनी 'अल्बर्ट आइंस्टीन' को भेजा। अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसके महत्व को पहचाना और उसका जर्मन में अनुवाद किया और वहां के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में बोस के नाम से इसको प्रकाशित कराया।


बड़े वैज्ञानिकों के साथ काम

इसके बाद सत्येंद्र नाथ बोस यूरोप गए और दो साल तक एक्स रे और क्रिस्टलोग्राफी प्रयोगशालाओं में काम किया। यहां पर उन्होंने आइंस्टीन और मैडम क्यूरी समेत कई वैज्ञानिको के साथ काम किया। वहीं खुद आइंस्टीन ने भी बोस के आइडिया को अपनाया और उसको परमाणुओं पर लागू करके ऐसे कणों के समूह की खोज की, जिसको 'बोसोन' कहा जाता है।


बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी

गैस के अणुओं की गति के गणित के लिए मैक्सवेल और बोल्ट्समैन द्वारा एक सांख्यिकी की खोज की थी। जो परमाणुओं के लेवल तक काम करती थी। परमाणु के अंदर उपपरमाणु कणों की जानकारी के बाद यह सांख्यिकी उस लेवल पर नाकाम साबित हुई। इनके लिए सत्येंद्र नाथ बोस द्वारा नई सांख्यिकी खोजी गई। इसको ही बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी कहा जाता है।


गॉड पार्टिकल

वहीं साल 2012 में जब गॉड पार्टिकल की खोज की गई, तब बोस के नाम पर वैज्ञानिकों ने उसको 'हिग्स-बोसोन कण' नाम दिया। फिर जुलाई 2012 के न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख में बोस को 'फादर ऑफ गॉड पार्टिकल' बताया गया। यह भौतिकी का मूलभूत कण है, जोकि हिग्स क्षेत्र में क्वांटम उत्तेजन से पैदा होता है।


मृत्यु

वहीं 04 फरवरी 1974 में सत्येंद्रनाथ बोस का निधन हो गया था।

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