Birju Maharaj Birth Anniversary: Kathak को Global Stage तक ले गए थे बिरजू महाराज, जानिए दिसचस्प किस्से

Birju Maharaj
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आज ही के दिन यानी की 04 फरवरी को सुप्रसिद्ध कथक नर्तक बिरजू महाराज का जन्म हुआ था। उन्होंने कथक को भारत सहित पूरे विश्व में एक अलग मुकाम पर पहुंचाने का काम किया था। कथक के अलावा उनको पखावज नाल, तबला और सितार आदि वाद्य यंत्र में महारत हासिल थी।

सुप्रसिद्ध कथक नर्तक बिरजू महाराज का 04 फरवरी को जन्म हुआ था। उनकी शख्सियत ऐसी थी, जो घुंघरू की झंकार से दर्शकों का मन मोह लेते थे। जब बिरजू महाराज नृत्य करते थे, तो उनके घुंघरू भी बात किया करते थे। उन्होंने कथक को भारत सहित पूरे विश्व में एक अलग मुकाम पर पहुंचाने का काम किया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर बिरजू महाराज के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 04 फरवरी 1938 को बिरजू महाराज का जन्म हुआ था। इनका पूरा नाम पंडित बृजमोहन मिश्र था। पहले उनका नाम 'दुखहरण' रखा गया था, जोकि बाद में बदल दिया गया था। उनके पिता ने बिरजू महाराज में नृत्य क्षमता को देखते हुए महज 3 साल की उम्र से उनको दीक्षा देना शुरूकर दिया था। जब वह 9 साल के हुए तो उनके पिता की मृत्यु हो गई। फिर कुछ सालों बाद बिरजू महाराज दिल्ली आ गए और यहां पर संगीत भारती में कथक सिखाना शुरूकर दिया।

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वाद्य यंत्र में हासिल थी महारथ

बिरजू महाराज को कथक के अलावा पखावज नाल, तबला और सितार आदि वाद्य यंत्र में महारत हासिल थी। वह एक अच्छे गायक कवि और चित्रकार भी थे। उन्होंने कथक को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में नृत्य स्कूल 'कलाश्रम' शुरू किया। यहां पर कथक के अलावा इससे संबंधित विषयों पर शिक्षा की जाती। बिरजू महाराज ने कथक को एक अलग पहचान दी और उनका सफर लंबा रहा। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में नृत्य का निर्देशन किया।

सम्मान

बिरजू महाराज ने फिल्म 'दिल तो पागल है', 'गदर एक प्रेम कथा' 'डेढ़ इश्किया', 'देवदास' और 'बाजीराव मस्तानी' आदि में नृत्य का निर्देशन किया। उन्होंने अपने इस लंबे सफर में कई प्रसिद्धियां बटोरी। उनको साल 1986 में 'पद्म विभूषण', 'संगीत नाटक अकादमी' और 'कालिदास सम्मान' से सम्मानित किया गया। फिर साल 2012 में बिरजू महाराज को 'लता मंगेशकर पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। वहीं साल 2012 में सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन के लिए बिरजू महाराज को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार फिल्म विश्वरूपम से नवाजा गया। साल 2016 में उनको फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' के गाने 'मोहे रंग दो लाल' के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार मिला।


मृत्यु

वहीं 17 जनवरी 2022 को बिरजू महाराज ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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