कब है Yogini Ekadashi 2026? जानें Lord Vishnu को प्रसन्न करने की संपूर्ण पूजा विधि और Shubh Muhurat

By दिव्यांशी भदौरिया | Jul 08, 2026

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है और यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। 

हिंदू पंचांग के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। वहीं, एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होगी। तिथि का समापन 11 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। हालांकि, हरिवासर का अंत 10 जुलाई को सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शाम 4 बजकर 36 मिनट के बीच किया जाएगा।

योगिनी एकादशी की पूजा विधि

- योगिनी एकादशी के दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें और फिर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

 - अब आप भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद तुलसी के पत्ते, पीले फूल, चंदन, धूप और घी का दीपक अर्पित करें। फल और सात्विक भोग जरुर चढ़ाएं। अब आप विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।

- शाम के समय श्री विष्णु की आरती करें। योगिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद भजन-कीर्तन, ध्यान और भगवान के नाम का स्मरण करते हुए दिन बिताना शुभ माना जाता है।

योगिनी एकादशी व्रत के नियम

- साधक अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जिसनें पूरे दिन न तो भोजन किया जाता है और न ही पानी पिया जाता है।

- कुछ लोग फलाहार व्रत रखते हैं, वे फूल, दूध, दही, सूखे मेवे, साबूदाना, सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन भी कर सकते हैं।

 - लेकिन व्रत के दौरान चावल, गेहूं, दालें, प्याज, लहसुन, मांसाहरी भोजन, शराब और किसी भी तरह का नशे से दूर रहने में भलाई है।

  योगिनी एकादशी के आध्यात्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और निमयपूर्वक करने से जातक के बुरे कर्मों के प्रभाव से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हेल्थ, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है। वहीं, इस व्रत के रखने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। मन शांत रहता है और भगवान के प्रति भक्ति बढ़ती है। जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है। 

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