शुक्ल पक्ष में शुरू करें गुरुवार का व्रत, मिलेगा मनचाहा लाभ

By प्रज्ञा पाण्डेय | Nov 21, 2019

अगर आप जीवन में आने वाली तरह-तरह की परेशानियों से छुटाकारा पाना चाहते हैं तो गुरुवार का व्रत आपके लिए लाभदायी होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुरुवार का व्रत एक खास दिन शुरू किया जाता है अगर नहीं तो आइए हम आपको गुरुवार का व्रत शुरु करने के कुछ नियम बताते हैं।

हिंदू धर्म में बृहस्पति को ज्ञान, सौभाग्य और सुख देने वाला माना गया है। इसलिए जीवन में सभी प्रकार के सुखों को पाने के लिए गुरुवार का व्रत कर सकते हैं। साथ ही विशेष कामना की पूर्ति हेतु भी बृहस्पति देव की आराधना का विधान है। इस प्रकार गुरुवार के व्रत जीवन में सभी प्रकार की सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। 

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इन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा

गुरुवार का व्रत उन्होंने लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह खराब होता है। साथ ही विवाह में आ रही रूकावट को खत्म करने के लिए बृहस्पतिवार के दिन व्रत रख सकते हैं। अगर आप संतान सुख से वंचित हैं, पेट और मोटाप से समस्या से परेशान हैं तो यह व्रत निःसंदेह ही आपके लिए लाभदायी होगा। 

कब शुरू करें गुरुवार का व्रत

गुरुवार का व्रत बहुत खास होता है। इसलिए यह एक खास मुहूर्त में ही शुरू करना चाहिए। इसलिए आपके लिए गुरुवार का व्रत शुक्ल पक्ष में गुरुवार व अनुराधा के योग से शुरू करना अच्छा होगा। यह व्रत कितने समय तक रहना चाहिए इस भी कुछ नियम है। आप चाहे तो 1, 3, 5, 7, 9, 11 या 1 से 3 साल या जीवन भर रख सकते हैं।

गुरुवार व्रत के नियम 

हिन्दू धर्म में गुरुवार के व्रत का बहुत महत्व होता है। यह व्रत बृहस्पतिदेव को प्रसन्न करने के लिए होता है। इसलिए इस व्रत में कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। बृहस्पतिवार के दिन कभी नमक का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा बालों में तेल न लगाएं और बालों को धोना भी नहीं चाहिए। साथ ही ध्यान रखें गुरुवार को अपने बाल न कटवाएं। यही नहीं घर की साफ-सफाई के समय ध्यान रखें कि घर में पोछा न लगाएं और धोबी को कपड़े भी न दें। आप गुरुवार को पीला और मीठा खा सकते हैं। शाम को चने की दाल की पूरी या पराठा भी खा सकते हैं। पुरुष गुरुवार के व्रत को लगातार 16 गुरुवार कर सकते हैं लेकिन महिलाओं को मासिक धर्म के समय यह व्रत नहीं करना चाहिए। 

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कैसे करें गुरुवार के दिन पूजा

गुरुवार के दिन प्रातः जल्दी उठकर व्रत करने का संकल्प करें। उसके बाद नित्य कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करें और पीला वस्त्र धारण करें। उसके बाद बृहस्पति देव को पीले वस्त्र अर्पित करें। प्रसाद में पीले चने की दाल, मुनक्का, गुड़, हल्दी, पीला चावल और पीले पेड़े चढ़ाएं। इसके अलावा इस दिन केले के पेड़ की पूजा भी फायदेमंद होती है इसलिए केले के पेड़ में जल अर्पित करें। उसके बाद सच्चे मन से बृहस्पतिवार की व्रत कथा पढ़े और पूजा करें। आप दिन भर फलाहार करें और रात में पीले चने की दाल या पराठा खा कर व्रत पूरा करें। इस तरह पूर्ण मनोयोग से व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। 

प्रज्ञा पाण्डेय

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