<?xml version="1.0" encoding="UTF-8" standalone="no"?><rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0">
  <channel>
    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
    <link>https://www.prabhasakshi.com/</link>
    <item>
      <title><![CDATA[Bengaluru की Startup Pronto पर बड़ा आरोप, AI Training के लिए घरों में हो रही Video Recording?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/bengaluru-based-startup-pronto-faces-accusations-of-video-recording-in-homes-for-ai-training]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आजकल एआई और डेटा सुरक्षा को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच बेंगलुरु की घरेलू सेवाएं देने वाली स्टार्टअप “प्रोंटो” अब निजता से जुड़े विवादों में घिर गई हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया मंच एक्स पर पत्रकार हर्ष उपाध्याय ने दावा किया कि प्रोंटो के कुछ कर्मचारी ग्राहकों के घरों में छोटे कैमरों के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह रिकॉर्डिंग कंपनी के निवेशकों की “फिजिकल एआई” परियोजना के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।</div><div><br></div><div>हर्ष उपाध्याय की पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और उसे दो लाख से ज्यादा बार देखा गया। इसके बाद सामाजिक माध्यमों पर लोगों ने निजता, डेटा सुरक्षा और एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी है।</div><div><br></div><div>पोस्ट में कहा गया कि प्रोंटो के कर्मचारी कुछ चुनिंदा कामों के दौरान बाहर की ओर लगे छोटे कैमरे का इस्तेमाल करते हैं और बाद में ग्राहकों को उसकी रिकॉर्डिंग भेजी जाती हैं।</div><div><br></div><div>विवाद बढ़ने के बाद प्रोंटो ने अपनी सफाई जारी की हैं। कंपनी का कहना है कि किसी भी ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई रिकॉर्डिंग नहीं की जाती हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि प्रोंटो एक 10 मिनट घरेलू सेवा देने वाली स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना 23 वर्षीय अंजलि सरदाना ने की हैं। कंपनी का दावा है कि एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें बहुत कम ग्राहक शामिल होते हैं।</div><div><br></div><div>कंपनी ने कहा कि अगर कोई ग्राहक इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनना चाहता तो कर्मचारी कैमरा लेकर उसके घर नहीं जाता हैं। प्रोंटो के मुताबिक यह अनुमति हर बुकिंग से पहले अलग से ली जाती है और यह कोई स्थायी सहमति नहीं होती हैं।</div><div><br></div><div>प्रोंटो ने यह भी कहा कि जिन मामलों में कैमरे का इस्तेमाल होता है, वहां उसे आसानी से देखा जा सकता है और ग्राहकों को इसकी पूरी जानकारी दी जाती हैं।</div><div><br></div><div>बता दें कि कंपनी के अनुसार यह कार्यक्रम केवल 0.1 प्रतिशत ग्राहकों तक सीमित है और इसे लागू करने से पहले कई महीनों तक डेटा सुरक्षा नियमों की जांच की गई थीं।</div><div><br></div><div>कंपनी ने दावा किया कि उसकी प्रक्रिया भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून यानी डीपीडीपी अधिनियम के पूरी तरह अनुरूप हैं। साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल केवल वही नहीं बल्कि अन्य कंपनियां भी कर रही हैं।</div><div><br></div><div>हालांकि इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों की निजी जिंदगी और डेटा की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 24 May 2026 23:42:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/bengaluru-based-startup-pronto-faces-accusations-of-video-recording-in-homes-for-ai-training</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/24/pronto_large_2342_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[रॉकेट नहीं, Elon Musk का Starlink बना SpaceX का 'कमाई इंजन', Financial Report में बड़ा खुलासा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/elon-musks-starlink-not-a-rocket-became-spacexs-earnings-engine-a-major-revelation-in-report]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनिया की सबसे चर्चित निजी अंतरिक्ष कंपनियों में शामिल स्पेसएक्स ने पहली बार अपनी वित्तीय स्थिति सार्वजनिक की है। एलन मस्क की कंपनी अब शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है और माना जा रहा है कि यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े सूचीकरणों में शामिल हो सकती है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार स्पेसएक्स ने वर्ष 2025 में करीब 18.7 अरब डॉलर की कमाई की, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 33 प्रतिशत ज्यादा रही हैं। हालांकि तेजी से बढ़ती कमाई के बावजूद कंपनी को 4.9 अरब डॉलर से अधिक का भारी नुकसान भी हुआ है।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि यह नुकसान मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता परियोजनाओं, बड़े आंकड़ा केंद्रों और भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं पर किए जा रहे भारी निवेश के कारण हुआ हैं। गौरतलब है कि एलन मस्क पिछले कुछ समय से अपनी कंपनियों को केवल अंतरिक्ष कारोबार तक सीमित रखने के बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल ढांचे की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ा रहे है।</div><div><br></div><div>रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2026 की पहली तिमाही में ही स्पेसएक्स ने 4.7 अरब डॉलर की कमाई की हैं। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.1 अरब डॉलर था। लेकिन इसी दौरान कंपनी का घाटा भी तेजी से बढ़कर 4.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।</div><div><br></div><div>कंपनी का पूंजीगत खर्च भी तेजी से बढ़ा है। बताया गया है कि पिछले वर्ष यह खर्च लगभग दोगुना होकर 20.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया हैं। इस राशि का बड़ा हिस्सा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े विशाल आंकड़ा केंद्रों और संगणना ढांचे पर लगाया गया है।</div><div><br></div><div>बता दें कि स्पेसएक्स का सबसे ज्यादा मुनाफा अब रॉकेट प्रक्षेपण से नहीं बल्कि उसकी उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक से हो रहा हैं। कंपनी के अनुसार मार्च 2026 तक स्टारलिंक के ग्राहकों की संख्या बढ़कर 1.03 करोड़ पहुंच गई हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है।</div><div><br></div><div>स्टारलिंक ने अकेले पिछले वर्ष करीब 4.4 अरब डॉलर का परिचालन लाभ कमाया हैं। यही कमाई कंपनी की महंगी अंतरिक्ष परियोजनाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता निवेश को संभालने में अहम भूमिका निभा रही हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि स्पेसएक्स इस समय स्टारशिप रॉकेट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे और भविष्य में मानव बस्तियां बसाने जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम कर रही हैं। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में उसका संभावित बाजार आकार 28.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता हैं।</div><div><br></div><div>वित्तीय दस्तावेजों से यह भी साफ हुआ है कि एलन मस्क का कंपनी पर नियंत्रण पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया हैं। हालांकि उनके पास कंपनी के करीब 50 प्रतिशत शेयर हैं, लेकिन विशेष मतदान अधिकार वाले शेयरों के जरिए उनके पास 85 प्रतिशत से अधिक मतदान शक्ति मौजूद है।</div><div><br></div><div>कंपनी के मौजूदा आंतरिक मूल्यांकन को करीब 1.25 लाख करोड़ डॉलर बताया गया है। ऐसे में अकेले एलन मस्क की हिस्सेदारी की अनुमानित कीमत 635 अरब डॉलर से अधिक आंकी जा रही है।</div><div><br></div><div>स्पेसएक्स ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया है कि कंपनी का भविष्य अब तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं से जुड़ता जा रहा हैं। कंपनी टेनेसी में कोलोसस 1 और कोलोसस 2 नाम से बड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता आंकड़ा केंद्र विकसित कर रही है।</div><div><br></div><div>बताया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी एंथ्रोपिक के साथ स्पेसएक्स का बड़ा समझौता हुआ है। इसके तहत एंथ्रोपिक अगले तीन वर्षों तक हर महीने लगभग 1.25 अरब डॉलर देकर संगणना क्षमता का इस्तेमाल करेगी।</div><div><br></div><div>एलन मस्क ने हाल के महीनों में अंतरिक्ष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आंकड़ा केंद्र, चंद्रमा पर कॉलोनी बसाने, उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिप निर्माण और पृथ्वी से बाहर मानव बस्तियां बनाने जैसे कई बड़े लक्ष्य सामने रखे हैं।</div><div><br></div><div>अब कंपनी अगले महीने तक शेयर बाजार में उतर सकती है। रिपोर्ट के अनुसार स्पेसएक्स सूचीकरण के जरिए 50 अरब से 75 अरब डॉलर तक जुटाने की तैयारी में हैं। अगर ऐसा होता है तो यह दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजार सूचीकरणों में शामिल हो सकता हैं।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि कंपनी नैस्डैक पर एसपीसीएक्स नाम से सूचीबद्ध हो सकती हैं। हालांकि कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कई जोखिमों का भी जिक्र किया है। इनमें रॉकेट प्रक्षेपण विफलता, बढ़ता खर्च, स्टारलिंक विस्तार की चुनौतियां और एलन मस्क के कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच ग्रोक से जुड़े विवाद शामिल हैं।</div><div><br></div><div>अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या एलन मस्क स्पेसएक्स को केवल एक अंतरिक्ष कंपनी से आगे बढ़ाकर दुनिया की सबसे बड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी ढांचा कंपनी बना पाएंगे या नहीं।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 24 May 2026 19:55:04 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/elon-musks-starlink-not-a-rocket-became-spacexs-earnings-engine-a-major-revelation-in-report</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/24/spacex_large_1955_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अब Consumer को मिलेगा पूरा Fuel! केंद्र ने Petrol, CNG, Hydrogen पंपों की जांच के लिए जारी किए New Guidelines]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/consumers-will-receive-full-fuel-supply-centre-has-issued-new-guidelines-for-inspections-of-petrol]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>देश में स्वच्छ ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा कदम उठाया है। अब पेट्रोल, डीजल के साथ-साथ सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन ईंधन डिस्पेंसरों की जांच भी सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों के जरिए की जाएगी।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार उपभोक्ता मामले विभाग ने 24 मई 2026 को कानूनी माप विज्ञान (सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र) नियम 2013 में संशोधन किया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य ईंधन वितरण में सटीकता बढ़ाना, उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराना और राज्यों के विभागों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।</div><div><br></div><div>बता दें कि अभी तक सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र यानी जीएटीसी केवल 18 तरह के माप और तौल उपकरणों की जांच करते थे। लेकिन अब पांच नए ईंधन वितरण तंत्र जोड़ दिए गए हैं, जिसके बाद यह संख्या बढ़कर 23 हो गई है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि देश में पिछले कुछ वर्षों में स्वच्छ ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है। खासकर सीएनजी और एलएनजी आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं हाइड्रोजन ईंधन को भविष्य के विकल्प के रूप में देखा जा रहा हैं। ऐसे में सरकार अब इन ईंधन वितरण मशीनों की सटीक जांच व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दे रही है।</div><div><br></div><div>सरकार का मानना है कि इस बदलाव से लोगों को यह भरोसा मिलेगा कि उन्हें पेट्रोल पंप या गैस स्टेशन पर जितना ईंधन दिखाया जा रहा है, उतना ही वास्तव में मिल भी रहा हैं। विभाग ने कहा है कि इससे लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।</div><div><br></div><div>नए नियमों के तहत जांच शुल्क भी तय कर दिए गए हैं। पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर की जांच के लिए प्रति नोजल 5 हजार रुपये शुल्क रखा गया है, जबकि सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसरों के लिए प्रति नोजल 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।</div><div><br></div><div>मंत्रालय के अनुसार इस नई व्यवस्था से निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ेगी। तकनीकी क्षमता रखने वाले संस्थान अब सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र के रूप में काम कर सकेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।</div><div><br></div><div>इसके साथ ही राज्य सरकारों को भी अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब राज्य अपने स्थानीय जरूरतों के हिसाब से अतिरिक्त माप और तौल उपकरणों को भी जीएटीसी व्यवस्था के तहत जांच के लिए अधिसूचित कर सकेंगे।</div><div><br></div><div>बता दें कि सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए संयुक्त सचिव स्तर और उससे ऊपर के अधिकारियों को भी नियमों से जुड़े कई मामलों में मंजूरी देने का अधिकार दिया है। माना जा रहा है कि इससे स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं में देरी कम होगी।</div><div><br></div><div>उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने कहा है कि सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र पहले से ही देशभर में तौल और माप उपकरणों की जांच में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अब इनके दायरे के बढ़ने से राज्य कानूनी माप विज्ञान विभाग निरीक्षण, कार्रवाई और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।</div>]]></description>
      <pubDate>Sun, 24 May 2026 19:46:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/consumers-will-receive-full-fuel-supply-centre-has-issued-new-guidelines-for-inspections-of-petrol</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/24/petrol-pump_large_1946_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[S. Jaishankar से वार्ता के बाद बोले Marco Rubio- भारत संग ऐतिहासिक Trade Deal जल्द होगी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/us-and-india-poised-for-trade-deal-after-tensions]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता जल्द अंतिम रूप ले सकता है।
 रूबियो ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी और टिकाऊ होगा तथा दोनों के पारस्परिक हितों को आगे बढ़ाएगा।
 रूबियो ने यह टिप्पणी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की।
 दोनों नेताओं के बीच व्यापार, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
</p><p> अमेरिकी विदेश मंत्री की यह पहली भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पिछले एक वर्ष में व्यापार और शुल्क नीतियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखा गया था।
 रूबियो ने कहा, ‘‘हमने काफी प्रगति की है और मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसा व्यापार समझौता होगा जो लंबे समय तक कायम रहेगा, यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा।’’
 उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था के प्रति अमेरिका के दृष्टिकोण को संतुलित करना है।
 रूबियो ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ने यह नहीं कहा कि भारत के साथ व्यापार को लेकर तनाव पैदा किया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की व्यापार व्यवस्था में असंतुलन है और इसे ठीक करने की जरूरत है।’’
</p><p> उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है और दुनिया के लगभग हर देश के साथ बातचीत में व्यापार असंतुलन का विषय सामने आया है।
 अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल बहुत जल्द भारत आएगा।
 उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के व्यापार संबंधी मुद्दे यूरोपीय संघ जैसे सहयोगी देशों के साथ भी रहे हैं।
</p><p> रूबियो ने कहा, ‘‘भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और अमेरिका का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी है। ऐसे बड़े और व्यापक व्यापारिक संबंध वाले देश के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने की प्रक्रिया अधिक जटिल और व्यापक है।’’
 उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ऐसे व्यापारिक समझौते करना है जो अमेरिका के साथ-साथ उसके व्यापारिक साझेदारों के लिए भी लाभकारी हों।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 24 May 2026 18:33:34 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/us-and-india-poised-for-trade-deal-after-tensions</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/24/us-and-india_large_1833_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Hero MotoCorp का बड़ा प्लान, CEO बोले- इस साल भी Double-Digit Growth की उम्मीद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/hero-motocorp-eyes-double-digit-growth-12-new-models]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>&nbsp;देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन विनिर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने वित्त वर्ष 2026-27 में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज करने का भरोसा जताया है। कंपनी का कहना है कि वह इस दौरान 12 से अधिक नए उत्पाद बाजार में उतारेगी और इलेक्ट्रिक स्कूटर कारोबार को तेजी से बढ़ाएगी।
 कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हर्षवर्धन चितले ने पीटीआई-के साथ साक्षात्कार में कहा कि स्कूटर कारोबार कंपनी के लिए प्रमुख वृद्धि के केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष 2030 तक कंपनी की कुल स्कूटर बिक्री में इलेक्ट्रिक स्कूटर की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी।</p><p>
उन्होंने कहा कि कम प्रदूषण वाले पावरट्रेन की मांग उद्योग में तेजी से बढ़ रही है और बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने के लिए कंपनी विभिन्न विकल्पों पर काम कर रही है।
 चितले ने कहा, “अभी तक हम सबसे आगे हैं और आगे भी अग्रणी बने रहने की उम्मीद करते हैं। हमारा पूरा ध्यान ग्राहकों के लिए सुरक्षित और अधिक दक्ष उत्पाद उपलब्ध कराने पर है। हमारे उत्पादों और डीलर नेटवर्क को लेकर हमें पूरा भरोसा है।”
 उन्होंने माना कि भारतीय दोपहिया बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी तेज हो चुकी है, लेकिन वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के आंकड़ों को देखें तो कंपनी की अग्रणी स्थिति और बेहतर हुई है। </p><p>उनके अनुसार, पिछले छह-सात वर्षों में प्रतिस्पर्धियों के साथ अंतर घट रहा था, लेकिन बीते वित्त वर्ष में कंपनी ने दोबारा बढ़त मजबूत की है।
 कंपनी का कहना है कि स्कूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, 125 सीसी से ऊपर की मोटरसाइकिल और प्रवेश स्तर की बाइक में मजबूत प्रदर्शन के कारण उसकी बाजार स्थिति और मजबूत हुई है।
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के आंकड़ों के अनुसार, हीरो मोटोकॉर्प ने 2025-26 में 54.93 लाख मोटरसाइकिल और 5.72 लाख स्कूटर बेचे। </p><p>वहीं प्रतिद्वंद्वी होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने इसी अवधि में 25.89 लाख मोटरसाइकिल और 31.62 लाख स्कूटर की बिक्री की।
चालू वित्त वर्ष के अनुमान के बारे में चितले ने कहा कि बीते वित्त वर्ष की दोहरे अंक की वृद्धि इस साल भी जारी रहने की उम्मीद है। इसके पीछे निर्यात, इलेक्ट्रिक वाहन और स्कूटर कारोबार में मजबूत मांग प्रमुख कारण होंगे।
</p><p>नए उत्पादों के बारे में उन्होंने कहा कि कंपनी आमतौर पर हर साल 10 से 12 बड़े मॉडल पेश करती है और इस बार संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। इसके अलावा मौजूदा मॉडल के उन्नत संस्करण के साथ यह संख्या 40-50 तक पहुंच सकती है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sun, 24 May 2026 16:01:13 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/hero-motocorp-eyes-double-digit-growth-12-new-models</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/24/hero-motocorp_large_1601_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Fortis Healthcare के शानदार Q4 Results, मुनाफा 44% उछलकर ₹271 करोड़ के पार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/fortis-sees-strong-growth-from-hospital-diagnostics-biz]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>&nbsp;अस्पतालों की शृंखला संचालित करने वाली कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर का वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 44.23 प्रतिशत बढ़कर 271.19 करोड़ रुपये हो गया।
 कंपनी ने 2024-25 की समान तिमाही में 188.02 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।
 फोर्टिस हेल्थकेयर ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में उसकी परिचालन आय 17.8 प्रतिशत बढ़कर 2,364.67 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 2,007.20 करोड़ रुपये थी।</p><p>
 समीक्षाधीन तिमाही में फोर्टिस हेल्थकेयर की अस्पताल कारोबार से आय 18.9 प्रतिशत बढ़कर 2,023.23 करोड़ रुपये हो गई।
 इसके अलावा डायग्नोस्टिक्स कारोबार से राजस्व 11.13 प्रतिशत बढ़कर 387.26 करोड़ रुपये हो गया।
 आलोच्य तिमाही में कंपनी का कुल खर्च 17 प्रतिशत बढ़कर 2,038.59 करोड़ रुपये हो गया।</p><p>
 पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में फोर्टिस हेल्थकेयर का शुद्ध लाभ 31.5 प्रतिशत बढ़कर 1,064.19 करोड़ रुपये हो गया, जबकि उसकी कुल एकीकृत आय 17 प्रतिशत बढ़कर 9,178.5 करोड़ रुपये रही।
 फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशुतोष रघुवंशी ने कहा, “जनवरी-मार्च तिमाही में कारोबार का प्रदर्शन स्थिर रहा, जिससे हम वित्त वर्ष का समापन मजबूत स्थिति में कर सके। हमारे कुल राजस्व में अस्पताल कारोबार की हिस्सेदारी अब 85 प्रतिशत है और इसका प्रदर्शन लगातार अच्छा बना हुआ है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 18:14:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/fortis-sees-strong-growth-from-hospital-diagnostics-biz</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/23/fortis-healthcare_large_1814_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[IPO Alert: Investors के लिए कमाई का बड़ा मौका, Kotak Healthcare और Deepa Jewellers को SEBI की मंजूरी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sebi-approves-ipos-for-kotek-health-and-deepa-jewellers]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>दवा क्षेत्र की कंपनी कोटेक हेल्थकेयर और आभूषण क्षेत्र की कंपनी दीपा ज्वेलर्स को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की मंजूरी मिल गई है। बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
 कोटेक हेल्थकेयर ने सितंबर 2025 में और दीपा ज्वेलर्स ने दिसंबर 2025 में अपने मसौदा दस्तावेज (डीआरएचपी) दाखिल किए थे। </p><p>दोनों कंपनियों को 18 मई 2026 को सेबी की टिप्पणिया प्राप्त हुई, जिसे आईपीओ लाने की मंजूरी माना जाता है।
 कोटेक हेल्थकेयर का आईपीओ 295 करोड़ रुपये तक के नए शेयर निर्गम के साथ-साथ 60 लाख शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का प्रस्ताव है।
</p><p> कंपनी नई परियोजना स्थापित करने, मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए उत्पादों के निर्माण के लिए 226.25 करोड़ रुपये का उपयोग करेगी। शेष राशि सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए खर्च की जाएगी।
 दीपा ज्वैलर्स का आईपीओ 250 करोड़ रुपये के नए निर्गम और 1,18,48,340 शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का संयोजन है, जिसे प्रर्वतक अशोक अग्रवाल और सीमा अग्रवाल द्वारा बेचा जाएगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 12:46:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sebi-approves-ipos-for-kotek-health-and-deepa-jewellers</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/23/ipo_large_1246_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर लगी आग! 10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम, दिल्ली में ₹100 के करीब पहुंचा पेट्रोल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/petrol-and-diesel-prices-hiked-for-the-third-time-in-10-days-petrol-nears-100-mark-in-delhi]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे भारी उतार-चढ़ाव का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार (23 मई 2026) को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा संशोधन के बाद पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पिछले10 दिनों से भी कम समय में यह तीसरा मौका है जब ईंधन के दाम बढ़ाये गये हैं।
 उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये से 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई है।</span></p><p>वहीं डीजल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये से बढ़कर 92.49 रुपये हो गई है।
 पेट्रोल, डीजल के दाम में 15 मई के बाद से यह तीसरी बढ़ोतरी है। सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा कीमतों का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है।
 पंद्रह मई को कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। उसके बाद 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम 90 पैसे लीटर बढ़ाये गये थे।
 कुल मिलाकर, ईंधन की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/us-secretary-of-state-marco-rubio-arrives-in-kolkata-focus-to-be-on-quad-and-energy" target="_blank">US Secretary of State Marco Rubio Visit to India | कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, क्वाड और ऊर्जा पर रहेगा फोकस</a></h3><p>&nbsp;</p><p><b>ईरान युद्ध के बीच ईंधन की कीमतें बढ़ीं</b></p><p>यह ताज़ा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था। हालांकि दोनों बेंचमार्क साप्ताहिक नुकसान की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन कीमतों में लगातार भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि निवेशक बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।</p><p>&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/crime/volleyball-player-beaten-to-death-in-faridabad-over-relationship-with-minor-police" target="_blank">मेडल जीतने वाले हाथों में बांध दी बेड़ियाँ, 3 दिन तक भूखा रखा, फिर पीट-पीटकर मार डाला- होनहार वॉलीबॉल खिलाड़ी का दर्दनाक अंत</a></h3><p><br></p><p>महीनों तक, सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें बढ़ने के बावजूद पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें काफी हद तक अपरिवर्तित रखी थीं। केंद्र सरकार के अनुसार, इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कथित तौर पर हर महीने लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था।</p><p><br></p><p>अब जब कच्चे तेल की कीमतें एक समय 111 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं, तो तेल कंपनियों ने कीमतों में लगातार बदलाव करके इस बोझ का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है।</p><p><br></p><p>12 मई को, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने वैश्विक व्यवधानों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद ईंधन की स्थिर कीमतें और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की, साथ ही बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए घरेलू LPG उत्पादन में भी काफी बढ़ोतरी की।</p><p><br></p><p>मजबूत नीतियों के ज़रिए वैश्विक ऊर्जा संकटों से निपटने में भारत का लचीलापन: हरदीप पुरी। CII वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए, पुरी ने मजबूत नीति समन्वय और प्रभावी आपूर्ति प्रबंधन के ज़रिए वैश्विक ऊर्जा संकटों से निपटने में भारत के लचीलेपन पर प्रकाश डाला।</p><p><br></p><p>मंत्री ने कहा, "वैश्विक आपूर्ति संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के ऐसे समय में, भारत ने पूरे देश में पेट्रोल, डीज़ल और LPG की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की, और कहीं से भी इनकी कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। वैश्विक स्तर पर भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद, 2022 से ईंधन की कीमतें काफी हद तक अपरिवर्तित रही हैं, जो मजबूत नीति समन्वय और प्रभावी आपूर्ति प्रबंधन को दर्शाता है।"&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 09:37:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/petrol-and-diesel-prices-hiked-for-the-third-time-in-10-days-petrol-nears-100-mark-in-delhi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/23/petrol_large_0937_21.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Hormuz संकट से तेल बाज़ार में भूचाल, Brent Crude के $120 पार जाने का मंडरा रहा खतरा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/hormuz-crisis-creates-earthquake-in-oil-market-brent-crude-in-danger-of-crossing-120]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मध्य पूर्व में जारी तनाव अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर भारी असर पड़ा है। मौजूद जानकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी आईईए ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो दुनिया जुलाई तक “रेड ज़ोन” जैसी गंभीर स्थिति में पहुंच सकती है।</div><div><br></div><div>बता दें कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कुल ऊर्जा व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान का इस इलाके पर भौगोलिक नियंत्रण होने की वजह से यहां यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे रोजाना करीब 1 करोड़ 40 लाख बैरल तेल की आपूर्ति बाजार से बाहर हो गई है।</div><div><br></div><div>आईईए प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा है कि लगातार आपूर्ति बाधित रहने और भंडार घटने से वैश्विक तेल बाजार “रेड ज़ोन” में पहुंच सकता है। इसका मतलब ऐसी स्थिति से है जहां मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त तेल भंडार नहीं बचता और किसी भी नए संकट से कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि मार्च में आईईए और उसके सदस्य देशों ने रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में जारी किया था ताकि आपूर्ति संकट को संभाला जा सके। लेकिन हालात इतने गंभीर हैं कि अब वह अतिरिक्त भंडार भी तेजी से खत्म हो रहा है। इससे गरीब और विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</div><div><br></div><div>कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही तेज उछाल देखने को मिल चुका है। युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 104 से 105 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गया है। मई की शुरुआत में यह 114 डॉलर तक गया था और विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष दोबारा बढ़ा तो कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं।</div><div><br></div><div>इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल के महीनों में विमान ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। अप्रैल में विमान ईंधन करीब 25 प्रतिशत महंगा हुआ था। इसके बाद मई में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कीमतों में और बढ़ोतरी की गई। दिल्ली में इसकी कीमत 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी।</div><div><br></div><div>हालांकि राहत देने के लिए दिल्ली और मुंबई में विमान ईंधन पर लगने वाला वैट घटाया गया है। दिल्ली में वैट 25 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया गया, जबकि मुंबई में इसे 18 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। यह राहत अगले छह महीनों तक लागू रहेगी।</div><div><br></div><div>पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले सप्ताह दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 107.59 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया। इससे पहले देशभर में ईंधन कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई थी।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जुलाई तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ तो दुनिया गंभीर आपूर्ति संकट में फंस सकती है। ऐसे में तेल कंपनियों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ेंगे, जिससे लागत और बढ़ेगी और आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है।</div><div><br></div><div>इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी ठप पड़ी हुई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करे, जबकि ईरान युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाने की मांग कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि अगर बातचीत विफल हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।</div><div><br></div><div>फिलहाल अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल भंडार जारी किए जा सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना बेहद जरूरी माना जा रहा हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 19:20:08 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/hormuz-crisis-creates-earthquake-in-oil-market-brent-crude-in-danger-of-crossing-120</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/crude-oil_large_1920_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[SEBI की नई WFH Policy: अब कर्मचारी करेंगे घर से काम, खर्च घटाने का बड़ा प्लान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sebis-new-wfh-policy-employees-will-now-work-from-home-a-major-plan-to-reduce-expenses]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>ऊर्जा बचत और खर्चों में कमी लाने की दिशा में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने बड़ा कदम उठाया है। मौजूद जानकारी के अनुसार सेबी ने अपने कुछ कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन घर से काम करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही यात्रा और आतिथ्य से जुड़े कई आंतरिक कार्यक्रमों को भी अगले आठ सप्ताह के लिए टाल दिया गया है।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा संरक्षण को लेकर की गई अपील के बाद लिया गया है। सेबी के मानव संसाधन विभाग ने गुरुवार को एक प्रशासनिक सलाह जारी करते हुए यह नई व्यवस्था लागू की है, जो 25 मई से अगले आठ हफ्तों तक प्रभावी रहेगी।</div><div><br></div><div>नई व्यवस्था के तहत ग्रेड ए से ग्रेड सी तक के अधिकारी यानी सहायक प्रबंधक, प्रबंधक और सहायक महाप्रबंधक अब रोटेशन के आधार पर सप्ताह में एक दिन घर से काम कर सकेंगे। हालांकि ग्रेड डी और उससे ऊपर के अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यालय आना होगा। इसमें उप महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी और उससे वरिष्ठ कर्मचारी शामिल हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि सेबी ने सभी विभाग प्रमुखों, क्षेत्रीय निदेशकों और मुख्य महाप्रबंधकों को निर्देश दिया है कि वे ऐसा रोस्टर तैयार करें जिससे किसी भी समय कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहें।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार घर से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अलग से दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। कर्मचारियों को गोपनीय जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और डाटा सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है। विभाग प्रमुख जरूरत के हिसाब से काम और समय सीमा तय कर सकेंगे।</div><div><br></div><div>इसके अलावा सेबी ने अगले आठ हफ्तों तक गैर-जरूरी आंतरिक कार्यक्रम, विचार मंथन बैठकें, सम्मेलन और इसी तरह के अन्य आयोजनों को स्थगित करने का फैसला लिया है। हालांकि पहले से तय कार्यक्रम जरूरत पड़ने पर जारी रह सकते हैं।</div><div><br></div><div>ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन, साझा वाहन व्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहन और सेबी की सब्सिडी वाली बस सेवा का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही जहां संभव हो, बैठकों को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने की सलाह दी गई है ताकि यात्रा और उससे जुड़े खर्चों को कम किया जा सके।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा खपत और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकारी संस्थानों द्वारा ऐसे कदम भविष्य में अन्य विभागों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं। फिलहाल सेबी की इस नई व्यवस्था पर सभी की नजर बनी हुई हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:56:35 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sebis-new-wfh-policy-employees-will-now-work-from-home-a-major-plan-to-reduce-expenses</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/sebi_large_1856_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Global Crisis के बीच RBI बना संकटमोचक, Government को मिले 2.87 लाख करोड़, Economy को बड़ा सहारा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-become-troubleshooter-amid-global-crisis-govt-receives-287-lakh-crore-rupees-boost-to-economy]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लाभांश सरकार को देने का ऐलान किया है। बता दें कि यह अब तक का सबसे बड़ा अधिशेष हस्तांतरण माना जा रहा है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार यह फैसला आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अतिरिक्त राशि से सरकार को राजकोषीय मोर्चे पर काफी राहत मिल सकती है और विकास योजनाओं पर खर्च बढ़ाने में मदद मिलेगी।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई की तरफ से सरकार को दिए जाने वाले लाभांश में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय बैंक ने 2.69 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। वहीं वित्त वर्ष 2023-24 में यह राशि 2.1 लाख करोड़ रुपये रही थी। इससे पहले वित्त वर्ष 2022-23 में आरबीआई ने 87,416 करोड़ रुपये का अधिशेष सरकार को दिया था।</div><div><br></div><div>आरबीआई के बयान के अनुसार जोखिम प्रावधान और वैधानिक निधियों में राशि स्थानांतरित करने से पहले केंद्रीय बैंक की कुल शुद्ध आय वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,95,972.10 करोड़ रुपये पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 3,13,455.77 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में आय में काफी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</div><div><br></div><div>सिर्फ आय ही नहीं, आरबीआई की बैलेंस शीट में भी मजबूत विस्तार देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक उसकी कुल बैलेंस शीट 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार, निवेश आय और सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही है।</div><div><br></div><div>आर्थिक जानकारों के मुताबिक सरकार के लिए यह लाभांश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव लगातार चुनौती बने हुए हैं। ऐसे माहौल में अतिरिक्त राजस्व मिलने से सरकार को बुनियादी ढांचा, कल्याणकारी योजनाओं और पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखने में मदद मिल सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:41:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-become-troubleshooter-amid-global-crisis-govt-receives-287-lakh-crore-rupees-boost-to-economy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/rbi_large_1841_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Rupee को मिली बड़ी राहत, RBI के Intervention के बाद Dollar के मुकाबले 96 के नीचे]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-gets-major-relief-falls-below-96-against-the-dollar-after-rbi-intervention]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>काफी दिनों से दबाव में चल रहे भारतीय रुपये को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने आखिरकार बड़ा कदम उठाया है। मौजूद जानकारी के अनुसार आरबीआई ने गुरुवार को बाजार में करीब 2 से 3 अरब डॉलर बेचे, जबकि शुक्रवार को भी डॉलर बिक्री जारी रखी गई, जिससे रुपये में मजबूती देखने को मिली।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि आरबीआई ने सरकारी बैंकों के जरिए यह हस्तक्षेप किया। इसका असर यह हुआ कि डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होकर 96 के नीचे पहुंच गया। गुरुवार को रुपया 0.64 प्रतिशत मजबूत होकर 96.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। गौरतलब है कि बीते कुछ हफ्तों में रुपया लगातार कमजोर हो रहा था और 97 के करीब पहुंच गया था।</div><div><br></div><div>बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार सुबह बाजार खुलने से पहले ही करीब 50 करोड़ डॉलर की बिक्री की गई थी। उस समय बाजार में तरलता कम होने की वजह से इसका असर ज्यादा दिखाई दिया। कुछ कारोबारियों का अनुमान है कि पूरे दिन में आरबीआई ने 4 से 5 अरब डॉलर तक बेचे हो सकते हैं।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते विवाद की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये पर दबाव आता है।</div><div><br></div><div>वित्तीय विशेषज्ञ अनिल भंसाली ने कहा कि लंबे समय बाद इतनी बड़ी डॉलर बिक्री देखने को मिली है। वहीं करूर वैश्य बैंक के ट्रेजरी प्रमुख वीआरसी रेड्डी का कहना है कि जब तक तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी और विदेशी निवेशक पैसा निकालते रहेंगे, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 3 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इसमें करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी लगातार जारी है, जिससे बाजार की चिंता बढ़ी हुई है।</div><div><br></div><div>इसी बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि सरकार रुपये को स्थिर रखने के लिए और कदमों पर भी विचार कर रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार नीति निर्माता ब्याज दरों में बढ़ोतरी जैसे विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके और रुपये को सहारा मिले।</div><div><br></div><div>बता दें कि डीबीएस बैंक ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2026 के बाकी समय में रुपया 95 से 100 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर सकता है। फिलहाल बाजार की नजर आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति बैठक और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर टिकी हुई हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:22:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-gets-major-relief-falls-below-96-against-the-dollar-after-rbi-intervention</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/rbi_large_1822_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[SBI Bank Strike Alert: 52 करोड़ ग्राहकों के लिए चेतावनी, YONO और UPI से निपटाएं जरूरी काम]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-banking-faces-5-day-halt-due-to-employee-strike]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अगले सप्ताह कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए अपने ग्राहकों को वैकल्पिक माध्यमों से लेनदेन करने की शुक्रवार को सलाह दी।
 एसबीआई ने अपने 52 करोड़ से अधिक ग्राहकों से अनुरोध किया है कि वे नकदी निकासी के लिए एटीएम, ग्राहक सेवा केंद्रों का उपयोग करें और बैंक के ऑनलाइन बैंकिंग मंच ‘योनो’ एवं यूपीआई जैसी सेवाओं को प्राथमिकता दें।</p><p>
 बैंक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर दी सूचना में कहा कि वह अपनी 23,200 से अधिक शाखाओं में ‘आवश्यक सेवाएं’ बनाए रखने के प्रयास कर रहा है। 
 एसबीआई का यह सुझाव अखिल भारतीय स्टेट बैंक कर्मचारी महासंघ (एआईएसबीआईएसएफ) की प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए आया है। कर्मचारी महासंघ ने 25 मई से दो-दिवसीय हड़ताल का नोटिस दिया हुआ है।
 देश की बैंकिंग गतिविधियों में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले बैंक ने अपनी पोस्ट में कहा, ‘‘इस वजह से होने वाली किसी भी असुविधा का हमें खेद है।’’</p><p>
 यदि हड़ताल निर्धारित समय पर होती है, तो इससे एसबीआई के बैंकिंग कार्यों पर पांच दिनों तक असर पड़ सकता है। हड़ताल की तारीख से पहले चौथा शनिवार और रविवार पड़ रहा है। इसके अलावा, हड़ताल समाप्त होने के एक दिन बाद, 27 मई को भी ईद अल-अजहा के कारण कई राज्यों में छुट्टी रहेगी।
</p><p> कर्मचारी महासंघ ने संदेशवाहकों एवं सशस्त्र कर्मी की नियुक्ति और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) कर्मचारियों के लिए पेंशन कोष प्रबंधक बदलने के विकल्प की मांग रखी है। महासंघ ने बैंक की स्थायी नौकरियों की ‘आउटसोर्सिंग’ बंद करने की भी मांग की है क्योंकि इससे आंकड़ों की चोरी, दुरुपयोग और धोखाधड़ी का सीधा खतरा उत्पन्न होता है। इससे ग्राहकों का विश्वास खतरे में पड़ता है और बैंक को गंभीर प्रतिष्ठा और कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
 कर्मचारी महासंघ की एक अन्य मांग निदेशक मंडल में कर्मचारी निदेशक की नियुक्ति से संबंधित है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 17:51:56 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-banking-faces-5-day-halt-due-to-employee-strike</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/sbi-banking_large_1752_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Central Bank of India में सरकार बेच रही 8% हिस्सेदारी, Offer for Sale से जुटाएगी ₹2,456 करोड़]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/central-bank-shares-drop-as-govt-launches-ofs]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में सरकार की चार प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए बिक्री पेशकश 31 रुपये प्रति शेयर की दर से शुक्रवार को संस्थागत निवेशकों के लिए खुल गई।
 सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इस बिक्री पेशकश (ओएफएस) में अतिरिक्त चार प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीनशू विकल्प भी शामिल है। खुदरा निवेशक इस शेयर बिक्री में सोमवार को बोली लगा सकेंगे।
 यह 31 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य बृहस्पतिवार को बीएसई पर शेयर के 33.91 रुपये के बंद भाव से 8.58 प्रतिशत कम है।
</p><p> बीएसई पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर 32.06 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं जो पिछले दिन के बंद भाव से 5.46 प्रतिशत कम है।
 इस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में आठ प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को 2,456 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
 यह बिक्री पेशकश सरकार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी मानक को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगी।
</p><p> सेबी के अनुसार, सभी सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी होना अनिवार्य है।
 सरकार के पास वर्तमान में 89.27 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यदि सरकार ग्रीनशू विकल्प का उपयोग करती है, तो बैंक में उसकी हिस्सेदारी घटकर 81.27 प्रतिशत रह जाएगी।
 सरकार वित्त वर्ष 2025-26 में बिक्री पेशकश के जरिये बैंक ऑफ महाराष्ट्र से 2,624 करोड़ रुपये और इंडियन ओवरसीज बैंक से 1,419 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:15:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/central-bank-shares-drop-as-govt-launches-ofs</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/central-bank-of-india_large_1415_157.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Aditya Birla Capital का बड़ा दांव! जुटाए गए 4,000 करोड़ में से 3,500 करोड़ रुपये बिजनेस विस्तार पर करेगी खर्च]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/aditya-birla-capital-to-spend-3500-crore-on-business-expansion]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>आदित्य बिड़ला समूह की वित्तीय सेवा शाखा, आदित्य बिड़ला कैपिटल (Aditya Birla Capital), अपने कारोबार के विस्तार की रफ्तार को और तेज करने के लिए एक बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी ने हाल ही में तरजीही निर्गम (Preferential Issue) के जरिए जुटाए गए 4,000 करोड़ रुपये के फंड में से 3,500 करोड़ रुपये का उपयोग सीधे तौर पर अपने बिजनेस ग्रोथ और विस्तार योजनाओं के लिए करने का फैसला किया है।</p><p>इस सप्ताह की शुरुआत में, आदित्य बिड़ला समूह की वित्तीय सेवा शाखा ने समूह की कंपनियों और इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) को तरजीही निर्गम के माध्यम से 4,000 करोड़ रुपये जुटाने की घोषणा की थी।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/tmc-crackdown-continues-in-west-bengal-party-leader-sheikh-wasul-arrested-for-threats-and-fraud" target="_blank">West Bengal में TMC पर एक्शन जारी, धमकी-धोखाधड़ी में पार्टी नेता Sheikh Wasul गिरफ्तार</a></h3><p>&nbsp;</p><p>
 कंपनी की प्रवर्तक ग्रासिम इंडस्ट्रीज प्रस्तावित कोष जुटाने में 2,880 करोड़ रुपये का निवेश करेगी जबकि प्रवर्तक समूह की कंपनी सूर्यजा इन्वेस्टमेंट सिंगापुर 200 करोड़ रुपये का योगदान देगी। शेष 920 करोड़ रुपये आईएफसी से प्राप्त होंगे।
 कंपनी ने कहा कि वह इस कोष जुटाने के प्रस्ताव के लिए 12 जून 2026 को निर्धारित असाधारण आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी प्राप्त करेगी।
 आदित्य बिड़ला कैपिटल एक विविधीकृत वित्तीय सेवा कंपनी है जो ऋण, निवेश, बीमा और भुगतान क्षेत्रों में सक्रिय है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/jyotish/gold-boon-for-those-with-these-3-numbers-bring-tremendous-success-in-their-career" target="_blank">Numerology: इन 3 मूलांक वालों के लिए 'वरदान' है सोना, करियर में दिलाएगा जबरदस्त Success</a></h3><p>&nbsp;</p><p><b>विविधता से भरा है कंपनी का पोर्टफोलियो</b></p><p>आदित्य बिड़ला कैपिटल देश की एक अग्रणी और विविधीकृत (Diversified) वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी है। वर्तमान में कंपनी का बिजनेस नेटवर्क काफी मजबूत है और यह भारतीय वित्तीय बाजार के मुख्य क्षेत्रों में सक्रिय है, जिनमें शामिल हैं:</p><p>ऋण (Lending): होम लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन सेगमेंट।</p><p>निवेश (Investments): म्यूचुअल फंड और वेल्थ मैनेजमेंट सेवाएं।</p><p>बीमा (Insurance): लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस समाधान।</p><p>भुगतान (Payments): डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर।</p><p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई पूंजी के आने से कंपनी को फिनटेक और डिजिटल लेंडिंग (ऋण) क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी।&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:39:31 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/aditya-birla-capital-to-spend-3500-crore-on-business-expansion</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/aditya-birla_large_1339_21.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[न सऊदी अरब, न अमेरिका... भारत का सबसे नया बड़ा तेल सप्लायर आपको हैरान कर सकता है!]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/neither-saudi-arabia-nor-the-us-india-newest-major-oil-supplier-might-surprise-you]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के संकट के बीच भारत ने अपनी तेल खरीद रणनीति में एक ऐसा चौंकाने वाला दांव खेला है, जिसने दुनिया के दिग्गज तेल उत्पादकों को पीछे छोड़ दिया है। मई महीने में वेनेज़ुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल (Crude Oil) सप्लायर बनकर उभरा है। इस दक्षिण अमेरिकी देश ने सऊदी अरब और अमेरिका जैसे भारत के पारंपरिक और सबसे भरोसेमंद बड़े सप्लायर्स को पछाड़कर यह स्थान हासिल किया है। एनर्जी कार्गो ट्रैकर Kpler के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में अब तक वेनेज़ुएला ने भारत को रोजाना लगभग 4,17,000 बैरल (bpd) कच्चे तेल की सप्लाई की है, जो अप्रैल के 2,83,000 bpd के मुकाबले भारी उछाल को दर्शाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले नौ महीनों तक इस देश ने भारत को एक बूंद तेल भी सप्लाई नहीं किया था।</div><div><br></div><div>यह उछाल ऐसे समय में आया है जब भारत पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की रुकावटों और वैश्विक सप्लाई में हो रहे बदलावों की वजह से अपनी कच्चे तेल की खरीद की रणनीति में फेरबदल कर रहा है।</div><div><br></div><div>मई में वेनेज़ुएला से ज़्यादा कच्चा तेल भारत को सिर्फ़ रूस और संयुक्त अरब अमीरात ने ही सप्लाई किया।</div><div><br></div><div><b>भारत वेनेज़ुएला से ज़्यादा तेल क्यों खरीद रहा है?</b></div><div>इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह कीमत है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">वेनेज़ुएला का कच्चा तेल अभी कई दूसरे वैश्विक तेल ग्रेड्स के मुकाबले सस्ता है। इस वजह से यह उन भारतीय रिफाइनरों के लिए आकर्षक बन गया है जो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">Kpler के लीड एनालिस्ट-रिफाइनिंग निखिल दुबे ने The Economic Times (ET) को बताया, "भारतीय खरीदारों ने ऐतिहासिक रूप से वेनेज़ुएला के तेल में काफ़ी दिलचस्पी दिखाई है, क्योंकि यह आर्थिक रूप से फ़ायदेमंद है और हमारी जटिल रिफाइनिंग प्रणालियों के साथ अच्छी तरह मेल खाता है।"</span></div><div><br></div><div>भारतीय रिफाइनर, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज़, सबसे बड़े खरीदारों में से हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वेनेज़ुएला का भारी और ज़्यादा सल्फर वाला कच्चा तेल रिलायंस की गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी जैसी जटिल रिफाइनरी प्रणालियों के लिए ज़्यादा उपयुक्त है।</div><div><br></div><div>ज़्यादातर भारतीय रिफाइनर वेनेज़ुएला के कच्चे तेल को सिर्फ़ सीमित मात्रा में ही प्रोसेस कर सकते हैं, लेकिन रिलायंस के पास रिफाइनिंग का जो आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, उसकी वजह से वह इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाने वालों में से एक है।</div><div><br></div><div>भारत का तेल आयात बढ़ा, लेकिन अब भी युद्ध से पहले के स्तर से नीचे है</div><div>Kpler के डेटा के मुताबिक, मई में भारत का कुल कच्चा तेल आयात पिछले महीने के मुकाबले 8% बढ़कर लगभग 4.9 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया।</div><div><br></div><div>हालांकि, आयात अब भी फ़रवरी में दर्ज किए गए 5.2 मिलियन बैरल प्रति दिन के स्तर से नीचे है। फ़रवरी में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले पश्चिम एशिया से होने वाली एनर्जी सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आई थी।</div><div><br></div><div>इस साल की शुरुआत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के लगभग बंद हो जाने की वजह से मध्य-पूर्व के मुख्य सप्लायर्स से होने वाली तेल की सप्लाई पर काफ़ी बुरा असर पड़ा था। हालांकि इस महीने इराक से कच्चे तेल की कुछ खेप फिर से आने लगी हैं, लेकिन इनकी मात्रा अभी भी काफी कम है।</div><div><br></div><div>मई में अब तक भारत को इराक से सिर्फ़ 51,000 bpd (बैरल प्रति दिन) कच्चा तेल मिला है, जबकि फ़रवरी में यह मात्रा लगभग 969,000 bpd थी।</div><div><br></div><div><b>ईरान से सप्लाई फिर से रुक गई है</b></div><div>इस साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद, भारत ने अप्रैल में कुछ समय के लिए ईरान से कच्चे तेल का आयात फिर से शुरू किया था।</div><div><span style="font-size: 1rem;">यह लगभग सात सालों में भारत में ईरान से तेल का पहला आयात था।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">हालांकि, अब ये खेपें एक बार फिर से रुक गई हैं।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">चल रहे संघर्ष के बीच ईरानी बंदरगाहों के आसपास अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के कारण इस महीने भारत में ईरान से कच्चे तेल की कोई खेप नहीं पहुंची है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इस रुकावट के कारण भारतीय रिफाइनरों को कच्चे तेल के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ी, जिससे वेनेज़ुएला और UAE जैसे आपूर्तिकर्ताओं को फ़ायदा हुआ।</span></div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/rajya-sabha-elections-voting-in-10-states-and-24-states" target="_blank">Rajya Sabha का सियासी रण, 10 राज्यों में 24 सीटों पर होगा मतदान, 18 June को ही आएगा परिणाम</a></h3><div><br></div><div><b>सऊदी अरब की स्थिति कमज़ोर हुई</b></div><div>सऊदी अरब, जो फ़रवरी में ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने से पहले भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश था, अब भारत को होने वाली अपनी सप्लाई में भारी गिरावट देख रहा है।</div><div><br></div><div>मई में सऊदी अरब से आने वाली खेप लगभग आधी होकर 340,000 बैरल प्रति दिन रह गई, जबकि अप्रैल में यह 670,000 bpd थी।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">जानकारों का कहना है कि सऊदी कच्चे तेल की आक्रामक कीमतों के कारण, वेनेज़ुएला के कच्चे तेल के मुकाबले इसकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कम हो गई है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">दुबे ने कहा, "ऐसा मुख्य रूप से सऊदी कच्चे तेल की आक्रामक कीमतों के कारण हुआ है।"</span></div><div><br></div><div>भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता है, और अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए यह बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">कच्चे तेल के स्रोतों में हो रहा यह बदलाव इस बात को दिखाता है कि कैसे भू-राजनीतिक तनाव, प्रतिबंध और तेल की कीमतें भारतीय रिफाइनरों को अपने सप्लाई स्रोतों में तेज़ी से विविधता लाने के लिए मजबूर कर रही हैं।</span></div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/cbse-new-3-language-policy-challenged-in-supreme-court" target="_blank">CBSE की नई 3-Language Policy को Supreme Court में चुनौती, PIL पर अगले हफ्ते होगी सुनवाई</a></h3><div><br></div><div>यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब:&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ गई हैं, रुपया काफ़ी कमज़ोर हो गया है, और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ रही हैं।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">वेनेज़ुएला का सस्ता कच्चा तेल उन रिफाइनरों को कुछ राहत दे सकता है, जिन्हें वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में उतार-चढ़ाव के बीच मुनाफ़े पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 12:06:30 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/neither-saudi-arabia-nor-the-us-india-newest-major-oil-supplier-might-surprise-you</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/oil-refinery_large_1206_21.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[100 के मुहाने पर रुपया: वैश्विक तेल संकट के बीच एक्सपर्ट्स क्यों बोले- 'घबराने की जरूरत नहीं, 100 सिर्फ एक नंबर है']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/the-rupee-on-the-brink-of-100-amidst-the-global-oil-crisis-why-did-experts-say]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हाल के महीनों में भारतीय रुपया वैश्विक बाजारों में एक रोलर-कोस्टर की तरह उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। ऊर्जा संकट के इस दौर में अब कई बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का $100$ के ऐतिहासिक और मनोवैज्ञानिक स्तर को छूना अब कोई अकल्पनीय बात नहीं रह गई है।दिलचस्प बात यह है कि देश और दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग अब यह तर्क दे रहा है कि भारत के लिए असली जोखिम रुपये का $100$ के स्तर पर पहुंचना नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ देश में महंगाई, रोजगार और उत्पादन पर क्या असर पड़ता है, वह है।</div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/rajya-sabha-elections-voting-in-10-states-and-24-states" target="_blank">Rajya Sabha का सियासी रण, 10 राज्यों में 24 सीटों पर होगा मतदान, 18 June को ही आएगा परिणाम</a></h3><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">दिलचस्प बात यह है कि विशेषज्ञों की बढ़ती संख्या यह तर्क भी दे रही है कि भारत के लिए असली जोखिम रुपये का 100 के स्तर को छूना नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ महंगाई, रोज़गार और आर्थिक स्थिरता पर क्या असर पड़ता है, वह है।</span></div><div><br></div><div>IMF की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने हाल ही में सोच में आए इस बदलाव को तब ज़ाहिर किया, जब उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को विनिमय दर के सांकेतिक स्तर पर कम और व्यापक अर्थव्यवस्था पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">गोपीनाथ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, "प्रासंगिक आंकड़ा विनिमय दर का वास्तविक मूल्य नहीं है।"&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने कहा, "जो मायने रखता है, वह है रोज़गार, महंगाई और उत्पादन।"&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">जैसे-जैसे भारत बिगड़ते वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, अर्थशास्त्रियों और बाज़ार विशेषज्ञों के बीच इस दृष्टिकोण को लगातार समर्थन मिल रहा है।</span></div><div><br></div><div><b>कमज़ोर रुपया हमेशा बुरा नहीं होता</b></div><div>सालों से, रुपये की कमज़ोरी को अक्सर पूरी तरह से आर्थिक तनाव के संकेत के तौर पर देखा जाता रहा है। लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि किसी बड़े बाहरी झटके के दौरान मुद्रा का अवमूल्यन होना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">दरअसल, एक कमज़ोर रुपया कभी-कभी अर्थव्यवस्थाओं को खुद को समायोजित करने में मदद कर सकता है।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">जब रुपया गिरता है, तो आयात महंगा हो जाता है। इससे स्वाभाविक रूप से विदेशी वस्तुओं की मांग कम हो जाती है, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होता है, और भारतीय उत्पादों को विश्व स्तर पर सस्ता बनाकर निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो सकता है।</span></div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/marco-rubio-stirs-controversy-ahead-of-his-delhi-visit" target="_blank">Marco Rubio ने अपने दिल्ली दौरे से पहले ही खड़ा कर दिया विवाद, कांग्रेस ने 'भारत की स्वतंत्र विदेश नीति' पर उठाया सवाल</a></h3><div><br></div><div>जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, "रुपये का अवमूल्यन आंशिक रूप से एक समस्या है और आंशिक रूप से उस समस्या का समाधान भी।"&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आगे कहा, "रुपये का अवमूल्यन निर्यात को बढ़ावा देता है और साथ ही विदेशी मुद्रा पर होने वाले खर्च को भी कम करता है। महंगा डॉलर, खर्च में कटौती की अपीलों की तुलना में विदेशी मुद्रा खर्च को ज़्यादा प्रभावी ढंग से कम कर सकता है। इस तरह, यह समस्या का एक समाधान भी है।"</span></div><div><br></div><div><b>तेल संकट के दौरान यह तर्क विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है</b></div><div>भारत अपनी कच्चे तेल की अधिकांश ज़रूरतों को आयात के ज़रिए पूरा करता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे तेल की बढ़ी हुई कीमतें पहले से ही भारत के आयात बिल और डॉलर की मांग पर दबाव बढ़ा रही हैं। ऐसी स्थितियों में, अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि करेंसी को धीरे-धीरे कमज़ोर होने देना, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) को किसी सांकेतिक एक्सचेंज-रेट लेवल को बचाने के लिए तेज़ी से फ़ॉरेक्स रिज़र्व खर्च करने पर मजबूर करने के बजाय, झटके के कुछ हिस्से को झेलने में मदद कर सकता है।</div><div><b><br></b></div><div><b>'100 सिर्फ़ एक नंबर है'</b></div><div>रुपये को ज़ोर-शोर से बचाने के ख़िलाफ़ बढ़ते तर्क को नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया का भी समर्थन मिला है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">X पर हाल ही में एक पोस्ट में, पनगढ़िया ने सीधे तौर पर RBI से आग्रह किया कि वह 100 रुपये के निशान की "मनोविज्ञान" को नीतिगत फ़ैसलों को प्रभावित न करने दे।</span><span style="font-size: 1rem;">उन्होंने लिखा, "100 सिर्फ़ एक नंबर है, जैसे 99 और 101।"</span></div><div><br></div><div>पनगढ़िया के अनुसार, तेल संकट के दौरान रुपये को कमज़ोर होने देना असल में ज़्यादा टिकाऊ रणनीति हो सकती है, खासकर अगर ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने तर्क दिया, "अगर तेल की कमी लंबे समय तक रहती है, तो रुपये को कमज़ोर होने देने के अलावा कोई भी दूसरा उपाय घाटे का सौदा होगा," और चेतावनी दी कि रुपये को ज़ोर-शोर से बचाने की कोशिश में आख़िरकार भारत का फ़ॉरेक्स रिज़र्व ख़त्म हो सकता है।</div><div><br></div><div>पनगढ़िया ने यह भी तर्क दिया कि भारत की मौजूदा मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति 2013 के 'टेपर टैंट्रम' दौर की तुलना में काफ़ी मज़बूत है, जब महंगाई दोहरे अंकों में चल रही थी और रुपये पर भारी दबाव था।</div><div><br></div><div>उन्होंने लिखा, "यह 2013 नहीं है," और कहा कि भारत में अपेक्षाकृत कम महंगाई और मज़बूत मौद्रिक प्रबंधन अर्थव्यवस्था को रुपये के कमज़ोर होने से पैदा होने वाले कुछ महंगाई के दबाव को ज़्यादा आसानी से झेलने में मदद कर सकता है।</div><div><br></div><div>उनकी टिप्पणियाँ आर्थिक सोच में एक बड़े बदलाव को दर्शाती हैं जो अब रुपये के मामले में उभर रहा है।</div><div><br></div><div>पहले, करेंसी में अचानक आई कमज़ोरी को अक्सर पूरी तरह से आर्थिक संकट के संकेत के तौर पर देखा जाता था। लेकिन अब ज़्यादा से ज़्यादा अर्थशास्त्री यह तर्क दे रहे हैं कि किसी बड़े बाहरी झटके के दौरान, करेंसी को धीरे-धीरे कमज़ोर होने देना, किसी सांकेतिक लेवल को बचाने की कोशिश में रिज़र्व को ख़त्म करने से ज़्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।</div><div><br></div><div>RBI अभी भी रुपये को बेकाबू होकर गिरने की इजाज़त क्यों नहीं दे सकता?</div><div>इसके बावजूद, एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि कंट्रोल्ड गिरावट और करेंसी के बेकाबू होकर गिरने में बहुत बड़ा फ़र्क होता है।</div><div><br></div><div>तेज़ी से कमज़ोर होता रुपया, भारत जैसी इंपोर्ट पर निर्भर इकॉनमी के लिए जल्दी ही महंगाई का सबब बन सकता है।</div><div><br></div><div>कच्चे तेल और खाद से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और खाने के तेल तक, हर चीज़ तब महंगी हो जाती है जब रुपया तेज़ी से गिरता है। इंपोर्ट की ये बढ़ी हुई लागतें आख़िरकार ईंधन की कीमतों, ट्रांसपोर्ट खर्च, किराने के बिल और मैन्युफ़ैक्चरिंग खर्चों के ज़रिए पूरी इकॉनमी में फैल जाती हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">विजयकुमार ने कहा, “महंगा डॉलर इंपोर्टेड महंगाई का कारण बनता है। इसीलिए RBI दखल देकर रुपये को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है।”</span></div><div><br></div><div>Choice Broking की कमोडिटी एनालिस्ट कावेरी मोरे के मुताबिक, सरकार और RBI करेंसी की तेज़ी से हो रही गिरावट को लेकर बहुत ज़्यादा संवेदनशील रहते हैं, क्योंकि इससे भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है और बड़े पैमाने पर मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा, “भारत सरकार और RBI रुपये की तेज़ी से हो रही गिरावट को लेकर बहुत ज़्यादा संवेदनशील रहते हैं, क्योंकि कमज़ोर करेंसी भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ा देती है—खासकर कच्चे तेल और सोने के लिए—जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ जाता है और बाहरी फ़ाइनेंसिंग का दबाव बढ़ जाता है।”</div><div><br></div><div>कच्चे तेल की ऊंची कीमतें तब और भी बड़ी चिंता बन गई हैं, जब ग्लोबल सप्लाई की कड़ी शर्तों और रियायती रूसी तेल पर लगी पाबंदियों की वजह से डॉलर की मांग बढ़ गई है।</div><div><br></div><div>इसलिए RBI डॉलर बेचकर, लिक्विडिटी मैनेजमेंट के उपायों से, और ज़रूरत से ज़्यादा सट्टेबाज़ी को कम करने के मकसद से लगाई गई पाबंदियों के ज़रिए करेंसी मार्केट में सक्रिय रूप से दखल दे रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">लेकिन इकॉनमिस्ट्स का मानना ​​है कि RBI का मकसद ज़रूरी नहीं कि गिरावट को पूरी तरह से रोकना हो।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इसके बजाय, ऐसा लगता है कि उसका ध्यान घबराहट में उठाए गए कदमों और ज़रूरत से ज़्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने पर है।</span></div><div><br></div><div>मोरे ने कहा, “रुपये को स्थिर करने के लिए, RBI डॉलर बेचकर, लिक्विडिटी मैनेज करके, बैंकों की ओपन करेंसी पोज़िशन्स पर पाबंदी लगाकर, और गैर-ज़रूरी इंपोर्ट पर रोक लगाने के उपायों के ज़रिए दखल देता है।”</div><div><br></div><div>तेज़ी से कमज़ोर होता रुपया विदेशी निवेशकों का भरोसा भी तोड़ सकता है, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों का रिटर्न कम हो जाता है, कैपिटल के बाहर जाने का जोखिम बढ़ जाता है, और करेंसी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">उन्होंने आगे कहा, “इसलिए RBI का मुख्य मकसद उस बेकाबू गिरावट को रोकना है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है, निवेशकों में घबराहट फैल सकती है, और बड़े पैमाने पर मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।”</span></div><div><br></div><div>‘रुपया 100 के पार’ को लेकर बहस</div><div>हाल के महीनों में रुपये को लेकर चर्चा का रुख काफ़ी बदल गया है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">पहले, करेंसी में किसी भी बड़ी कमज़ोरी को अक्सर पॉलिसी की नाकामी या आर्थिक संकट की निशानी माना जाता था। लेकिन अब कई अर्थशास्त्री यह तर्क देते हैं कि 100 जैसे किसी प्रतीकात्मक स्तर को लेकर बहुत ज़्यादा परेशान होने के बजाय, भारत की व्यापक अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखना ज़्यादा ज़रूरी हो सकता है।</span></div><div><b><br></b></div><div><b>इसका मतलब यह नहीं है कि कमज़ोर रुपया कोई तकलीफ़ नहीं देता</b></div><div>मुद्रा में लंबे समय तक गिरावट और तेल की बढ़ी हुई कीमतें मिलकर महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, घरों का खर्च बढ़ा सकती हैं और विकास को नुकसान पहुँचा सकती हैं।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">लेकिन अर्थशास्त्री अब ज़्यादा से ज़्यादा यह तर्क दे रहे हैं कि सिर्फ़ किसी मनोवैज्ञानिक आँकड़े को बचाने के लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करना हमेशा समझदारी भरा कदम नहीं हो सकता।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इसलिए, RBI के लिए असली चुनौती शायद रुपये को 100 के स्तर तक पहुँचने से रोकना न हो — बल्कि यह सुनिश्चित करना हो कि गिरावट इतनी धीरे-धीरे हो कि बाज़ारों और व्यापक अर्थव्यवस्था में घबराहट न फैले।</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 11:59:51 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/the-rupee-on-the-brink-of-100-amidst-the-global-oil-crisis-why-did-experts-say</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/22/rupee_large_1159_21.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Stock Market में दिनभर चला Drama, सुबह की तूफानी तेजी शाम को फुस्स, Sensex-Nifty फिसले।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/drama-continued-throughout-day-in-market-stormy-rise-in-morning-fizzled-out-sensex-nifty-slipped]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत मजबूत तेजी के साथ हुई थी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ बाजार की बढ़त धीरे-धीरे खत्म हो गई और अंत में प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ 23,654.70 अंक पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 75,183.36 अंक पर बंद हुआ, जिसमें 0.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान निफ्टी एक समय 23,859 अंक तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में इसमें कमजोरी आ गई। इसी तरह सेंसेक्स भी सुबह के कारोबार में 75,945 अंक तक पहुंचा था, लेकिन दिन के अंत तक बढ़त गंवा बैठा।</div><div><br></div><div>बता दें कि बाजार में शुरुआती तेजी के पीछे वैश्विक संकेतों और कुछ प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी को वजह माना जा रहा था। हालांकि बाद में निवेशकों की मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण दबाव देखने को मिला।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने निफ्टी को सबसे ज्यादा सहारा दिया हैं। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, इंडिगो, अपोलो हॉस्पिटल्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में भी मजबूती रही हैं। दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बनाने वाला शेयर रहा हैं। भारती एयरटेल, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।</div><div><br></div><div>क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो रक्षा क्षेत्र सबसे ज्यादा मजबूत रहा हैं। निफ्टी इंडिया डिफेंस सूचकांक में 1.43 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई हैं। इसके अलावा रियल एस्टेट, ऊर्जा और वाहन क्षेत्र के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली हैं। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र सबसे कमजोर रहा और इसमें गिरावट दर्ज की गई हैं। उपभोक्ता सामान, मीडिया, बैंक और वित्तीय सेवा क्षेत्र भी दबाव में बंद हुए।</div><div><br></div><div>बाजार विशेषज्ञों का कहना हैं कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत पर भी दुनिया भर के निवेशकों की नजर बनी हुई है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखी गई हैं। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा हैं कि ईरान के साथ बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इसके बाद ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ गई है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना हैं कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता हैं और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य रहती हैं तो आने वाले दिनों में बाजार को कुछ राहत मिल सकती हैं। फिलहाल निवेशक वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू आर्थिक संकेतों पर करीबी नजर बनाए हुए है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 22:29:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/drama-continued-throughout-day-in-market-stormy-rise-in-morning-fizzled-out-sensex-nifty-slipped</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/stock-market_large_2229_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Jubilant Foodworks के नतीजों से बाजार निराश, Brokerage Firms ने घटाई रेटिंग, शेयर 8% लुढ़का]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/market-disappoint-with-jubilant-foodwork-results-brokerage-firms-downgraded-ratings-shares-fell-8]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गुरुवार को शेयर बाजार में जुबिलेंट फूडवर्क्स के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली हैं। डोमिनोज़ इंडिया का संचालन करने वाली इस कंपनी के शेयर तिमाही नतीजों के बाद 8 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, कई बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों ने कंपनी के भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाया हैं और अपने टारगेट मूल्य में कटौती की है।</div><div><br></div><div>बता दें कि जुबिलेंट फूडवर्क्स ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 79.79 करोड़ रुपये पहुंच गया हैं। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 48 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। इस तरह कंपनी के मुनाफे में सालाना आधार पर करीब 66 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि कंपनी की परिचालन आय भी बढ़ी हैं। चौथी तिमाही में कंपनी की आय 2,499 करोड़ रुपये रही हैं, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 2,095 करोड़ रुपये थी। इसके साथ ही कंपनी के निदेशक मंडल ने 2 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 1.20 रुपये लाभांश देने की सिफारिश भी की हैं। हालांकि इसके लिए आगामी वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होंगी।</div><div><br></div><div>कंपनी ने अपने शेयरधारकों को भेजे पत्र में बताया कि मार्च महीने के दौरान कुछ इलाकों में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थीं। इसका असर डोमिनोज़ इंडिया के कारोबार पर सीमित स्तर पर पड़ा था। कंपनी के अनुसार, इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ दुकानों में अस्थायी रूप से भोजन सूची में बदलाव किए गए थे और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल भी किया गया था।</div><div><br></div><div>कंपनी ने यह भी कहा कि अब गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य हो चुकी हैं और कारोबार पहले की तरह पटरी पर लौट आया हैं। बावजूद इसके, बाजार विशेषज्ञों का मानना हैं कि बढ़ती महंगाई, कर्मचारियों पर बढ़ता खर्च और कच्चे माल की कीमतों में तेजी आने वाले समय में कंपनी के मुनाफे पर दबाव बना सकती है।</div><div><br></div><div>ब्रोकरेज संस्था नुवामा ने कंपनी के नतीजों को उम्मीद से कमजोर बताया हैं। संस्था का कहना हैं कि त्वरित भोजन कारोबार क्षेत्र में मांग बेहतर होने के बावजूद कंपनी का प्रदर्शन प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कमजोर रहा हैं। नुवामा ने कंपनी के शेयर पर अपना लक्ष्य मूल्य 744 रुपये से घटाकर 646 रुपये कर दिया है।</div><div><br></div><div>वहीं वैश्विक ब्रोकरेज संस्था मॉर्गन स्टेनली ने भी कंपनी के प्रदर्शन पर चिंता जताई हैं। संस्था के अनुसार, डोमिनोज़ इंडिया की समान दुकान बिक्री वृद्धि में गिरावट आई हैं और खाने के ऑर्डर का औसत मूल्य भी कमजोर रहा हैं। मॉर्गन स्टेनली ने कंपनी के शेयर के लिए 486 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय किया है।</div><div><br></div><div>इसके अलावा गोल्डमैन सैक्स ने भी अपने अनुमान में कटौती की है। संस्था का कहना हैं कि ऊर्जा, वेतन और कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनी के लाभ मार्जिन पर असर पड़ सकता हैं। गोल्डमैन सैक्स ने शेयर का लक्ष्य मूल्य 480 रुपये से घटाकर 460 रुपये कर दिया है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से खाद्य और उपभोक्ता कारोबार से जुड़ी कंपनियां बढ़ती लागत और कमजोर उपभोक्ता मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आने वाली तिमाहियों में जुबिलेंट फूडवर्क्स के प्रदर्शन और कंपनी की रणनीति पर बनी हुई है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:49:59 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/market-disappoint-with-jubilant-foodwork-results-brokerage-firms-downgraded-ratings-shares-fell-8</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/domino’s_large_2150_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[IPO Listing के बड़े नियम बदलने की तैयारी में SEBI, Price Discovery पर होगा पूरा फोकस]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sebi-is-preparing-to-change-major-rules-of-ipo-listing-full-focus-will-be-on-price-discovery]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>शेयर बाजार में आईपीओ के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों के लिए आने वाले समय में नियम बदल सकते हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने आईपीओ और दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों की शुरुआती ट्रेडिंग व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला किया है। नियामक का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था कई बार शेयरों की सही कीमत तय होने में बाधा बन रही हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार सेबी ने इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया है और बाजार सहभागियों से सुझाव मांगे हैं। यह प्रस्ताव खासतौर पर लिस्टिंग वाले दिन होने वाले प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र से जुड़ा हुआ है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत आईपीओ और दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों में सुबह 9 बजे से 10 बजे तक एक घंटे का प्री-ओपन कॉल ऑक्शन सत्र चलता है। इस दौरान केवल सीमित मूल्य वाले आदेश लगाए जा सकते हैं, जबकि बाजार मूल्य वाले आदेशों की अनुमति नहीं होती है।</div><div><br></div><div>सेबी ने कहा है कि बाजार से मिले सुझावों में यह बात सामने आई कि मौजूदा डमी प्राइस बैंड और आधार मूल्य तय करने की प्रक्रिया कई मामलों में कीमतों को कृत्रिम रूप से दबा रही हैं। इसके कारण सामान्य ट्रेडिंग शुरू होने के बाद शेयरों में अचानक तेज खरीदारी दबाव बन जाता है और कई बार ऊपरी सर्किट जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि एक मामले में प्री-ओपन सत्र के दौरान लगभग 90 प्रतिशत खरीद आदेश केवल इसलिए खारिज हो गए क्योंकि वे तय मूल्य सीमा से बाहर थे। सेबी का मानना है कि ऐसी स्थिति बाजार में वास्तविक मांग और सही मूल्य निर्धारण को प्रभावित कर रही है।</div><div><br></div><div>मौजूदा नियमों के अनुसार आईपीओ वाले शेयरों के लिए डमी प्राइस बैंड आधार मूल्य से 50 प्रतिशत नीचे और 100 प्रतिशत ऊपर तक रखा जाता है। वहीं दोबारा सूचीबद्ध होने वाले शेयरों के लिए यह सीमा 85 प्रतिशत नीचे और 50 प्रतिशत ऊपर तक होती हैं। छोटे और मध्यम उद्योग वर्ग के आईपीओ के लिए यह दायरा 90 प्रतिशत ऊपर और नीचे तक निर्धारित है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि अलग-अलग शेयर बाजार फिलहाल अपने स्तर पर इन सीमाओं में बदलाव करते हैं। अगर अलग-अलग बाजारों में अलग कीमत सामने आती है तो फिर कारोबार की मात्रा के आधार पर एक साझा संतुलित मूल्य तय किया जाता है।</div><div><br></div><div>सेबी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आईपीओ के दौरान प्री-ओपन सत्र में कोई संतुलित मूल्य तय नहीं हो पाता तो सामान्य कारोबार में निर्गम मूल्य को आधार बनाकर ट्रेडिंग शुरू होती हैं। वहीं दोबारा सूचीबद्ध शेयरों में कीमत तय नहीं होने पर सभी आदेश रद्द कर दिए जाते हैं और अगले कारोबारी दिन फिर से वही प्रक्रिया दोहराई जाती है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में आईपीओ बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में शुरुआती ट्रेडिंग व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।</div><div><br></div><div>सेबी का कहना है कि बदलती बाजार परिस्थितियों और निवेशकों के व्यवहार को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि मौजूदा नियमों की दोबारा समीक्षा की जाए ताकि शेयरों की वास्तविक कीमत बेहतर तरीके से तय हो सके और बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव कम हो सकें।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:23 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sebi-is-preparing-to-change-major-rules-of-ipo-listing-full-focus-will-be-on-price-discovery</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/sebi_large_2130_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Elon Musk का बड़ा दांव, SpaceX IPO में रिटेल निवेशकों को मिलेगा सीधा मौका, जानें पूरी डिटेल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/elon-musk-big-bet-retail-investors-will-get-a-direct-opportunity-in-spacex-ipo-learn-full-details]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स अब शेयर बाजार में उतरने की तैयारी में है। खास बात यह है कि इस बार कंपनी ने आम निवेशकों को भी सीधे आईपीओ में हिस्सा लेने का मौका देने का फैसला किया है, जिससे छोटे निवेशकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार स्पेसएक्स अपने सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के कुछ शेयर सीधे खुदरा निवेशकों को उपलब्ध कराएगी। इसके लिए रॉबिनहुड, फिडेलिटी और चार्ल्स श्वाब जैसे निवेश मंचों का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग में दाखिल दस्तावेजों में इसकी जानकारी दी।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि आमतौर पर बड़े आईपीओ में शुरुआती हिस्सेदारी ज्यादातर बड़े वित्तीय संस्थानों और वॉल स्ट्रीट निवेशकों को मिलती है। छोटे निवेशकों को अक्सर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद ऊंचे दाम पर शेयर खरीदने पड़ते हैं। लेकिन स्पेसएक्स ने इस पारंपरिक व्यवस्था से अलग रास्ता अपनाया है।</div><div><br></div><div>कंपनी का कहना है कि खुदरा निवेशकों को भी वही कीमत और वही समय मिलेगा जो बड़े संस्थागत निवेशकों को दिया जाएगा। हालांकि शेयरों की उपलब्धता सीमित रहने की संभावना है और भारी मांग के चलते सभी निवेशकों को पूरा आवंटन मिलना आसान नहीं होगा।</div><div><br></div><div>बता दें कि एलन मस्क की स्पेसएक्स नैस्डैक शेयर बाजार में एसपीसीएक्स नाम से सूचीबद्ध होने जा रही है। कंपनी ने अप्रैल में गोपनीय तरीके से नियामकों के पास आवेदन दाखिल किया था। अब जून महीने में निवेशकों के साथ रोडशो शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।</div><div><br></div><div>साल 2002 में स्थापित स्पेसएक्स ने पिछले दो दशकों में अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी पहचान बनाई है। शुरुआत में इसे एक महत्वाकांक्षी रॉकेट कंपनी माना जाता था, लेकिन अब यह दुनिया की सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों में गिनी जाती है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लिए स्पेसएक्स प्रमुख प्रक्षेपण साझेदार बन चुकी है। कंपनी पुन: उपयोग किए जा सकने वाले रॉकेट, रक्षा परियोजनाओं और उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के जरिए तेजी से विस्तार कर रही हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी के पास लगभग 10 हजार उपग्रहों का नेटवर्क है, जो उसकी इंटरनेट सेवा का आधार हैं। इसके अलावा एलन मस्क कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी तेजी से निवेश कर रहे हैं। उनकी एआई कंपनी एक्सएआई को भी भविष्य के बड़े कारोबार के रूप में देखा जा रहा है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेसएक्स का आईपीओ हाल के वर्षों का सबसे चर्चित सार्वजनिक निर्गम साबित हो सकता है। हालांकि खुदरा निवेशकों के लिए अंतिम आवंटन संबंधित निवेश मंचों की शर्तों और उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करेगा।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 19:25:07 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/elon-musk-big-bet-retail-investors-will-get-a-direct-opportunity-in-spacex-ipo-learn-full-details</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/elon-musk_large_1925_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Dollar के मुकाबले Rupee बेहाल, Middle East तनाव के बीच RBI उठा सकता है 2013 जैसे बड़े कदम।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-is-in-trouble-against-the-dollar-amid-middle-east-tension-rbi-may-take-big-steps-like-2013]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर अब भारतीय मुद्रा पर साफ दिखाई देने लगा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के स्तर के करीब पहुंच चुका है, जिससे सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की चिंता बढ़ गई है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार फरवरी के आखिर में मध्य पूर्व संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपया करीब 6 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है। इस दौरान भारतीय मुद्रा ने डॉलर के मुकाबले कई बार नया रिकॉर्ड निचला स्तर भी छुआ।</div><div><br></div><div>बताया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों में कई अहम बैठकें की हैं। इन बैठकों में रुपये की गिरावट रोकने और विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर रखने के उपायों पर चर्चा हुई।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि रिजर्व बैंक जिन बड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ब्याज दर बढ़ाना भी शामिल है। हालांकि अगली मौद्रिक नीति बैठक 3 जून से 5 जून के बीच प्रस्तावित है, लेकिन जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक पहले भी अचानक फैसले ले चुका है। वर्ष 2022 में भी केंद्रीय बैंक ने तय समय से पहले ब्याज दरों में बदलाव किया था।</div><div><br></div><div>इसके अलावा विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए अनिवासी भारतीयों के लिए विशेष विदेशी मुद्रा जमा योजना लाने पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक सरकार संप्रभु डॉलर बॉन्ड जारी करने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा कर सकती है। हालांकि इस तरह के किसी भी फैसले के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।</div><div><br></div><div>बता दें कि वर्ष 2013 में जब वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल हुई थी, तब भी भारत ने अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए विशेष योजना शुरू की थी। उस समय करीब 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि नई योजना के जरिए लगभग 50 अरब डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। वर्ष 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड स्तर पर पैसा निकाला है। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की निकासी 19 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच चुकी हैं।</div><div><br></div><div>वहीं दूसरी ओर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने से भारत और अमेरिका के बॉन्ड प्रतिफल के बीच का अंतर भी काफी कम हो गया है। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार से कम होता दिखाई दे रहा हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में 5 अरब डॉलर का स्वैप नीलामी कार्यक्रम भी घोषित किया था ताकि बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनी रहे और डॉलर भंडार मजबूत हो सके। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस तरह की और नीलामियां भी हो सकती हैं।</div><div><br></div><div>आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारत की बैंकिंग व्यवस्था और आर्थिक बुनियाद अभी भी मजबूत हैं, लेकिन वैश्विक तनाव और तेल कीमतों के दबाव ने फिलहाल रुपये की स्थिति को कमजोर कर दिया है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 19:13:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-is-in-trouble-against-the-dollar-amid-middle-east-tension-rbi-may-take-big-steps-like-2013</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/rbi_large_1913_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[एशिया में Energy Crisis, Russia-China का नया दांव, क्या Petrodollar का 'गेम' होगा खत्म?]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/asia-energy-crisis-fuels-russia-strategic-rise]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>मई 2026 में एशिया एक साथ कई संकटों का केंद्र बन गया है। फिलीपींस ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर देशव्यापी आपातकाल घोषित कर दिया है। वहीं, पिछले झटकों से मुश्किल से उबर पाया श्रीलंका अब कहीं से भी पेट्रोलियम खरीदने की कोशिश कर रहा है, बशर्ते वह अवरुद्ध हो चुके होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर से आए।</div><div><br></div><div>हांगकांग और सियोल के शेयर बाज़ारों में हरियाली दिखाई दे रही है क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि मध्य पूर्व का संघर्ष धीरे-धीरे कम हो सकता है। लेकिन इन सुर्खियों के पीछे एक और बड़ा बदलाव उभर रहा है: एशिया केवल अपनी ऊर्जा आपूर्ति के रास्तों पर ही नहीं, बल्कि अपने पूरे आर्थिक ढाँचे पर दोबारा विचार कर रहा है। और इस उथल-पुथल में रूस एक अप्रत्याशित लाभार्थी बनकर सामने आ रहा है।</div><div><br></div><h2>पेट्रोलियम, युआन और पारंपरिक लॉजिस्टिक्स का पतन</h2><div><br></div><div>फिलीपींस में राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने ऐसा भाषण दिया जो एक साल पहले किसी डिस्टोपियन फिल्म की पटकथा जैसा लगता। ऊर्जा क्षेत्र में आपातकाल लागू किया गया, ईंधन वितरण को नियंत्रित करने के लिए विशेष समिति बनाई गई, और मोटरसाइकिल टैक्सी चालकों को 83 डॉलर तक की सहायता दी जा रही है ताकि परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप न हो जाए। इस स्थिति का मुख्य कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना है, जिसके माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया को बड़ी मात्रा में ईंधन की आपूर्ति होती थी। सप्लाई चेन टूट चुकी हैं, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें आसमान छू रही हैं, और मनीला को कालाबाज़ारी तथा बढ़ती मांग से मैन्युअली लड़ना पड़ रहा है।</div><div><br></div><div>इसी दौरान, श्रीलंका ने घोषणा की कि वह रूसी पेट्रोलियम युआन में खरीदेगा। यह निर्णय अपने आप में बहुत बड़ा संकेत है। एक छोटा द्वीपीय देश, जो हाल तक पूरी तरह डॉलर प्रणाली पर निर्भर था, अब वैकल्पिक मुद्रा प्रणाली अपना रहा है। श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री ने साफ कहा कि रूसी पेट्रोलियम मध्य पूर्वी तेल से सस्ता है और युआन आज उन देशों के लिए सबसे सुविधाजनक माध्यम बन चुका है जो पश्चिमी वित्तीय चैनलों से बाहर रहकर व्यापार करना चाहते हैं। श्रीलंका अकेला नहीं है। पाकिस्तान पहले ही रूस के साथ युआन में भुगतान कर रहा है, भारत की तेल रिफाइनरियाँ भी इस संभावना पर विचार कर रही हैं, और रूस-चीन तेल व्यापार में रूबल और युआन की संयुक्त हिस्सेदारी 90% से अधिक हो चुकी है। डॉयचे बैंक के अनुसार, मध्य पूर्व का यह संघर्ष “पेट्रोडॉलर” व्यवस्था के अंतिम क्षरण को तेज कर सकता है।</div><div><br></div><h2>संसाधन बेचने से लेकर करियर अवसरों के निर्यात तक</h2><div><br></div><div>जब एशियाई सरकारें ईंधन की तलाश में व्यस्त हैं, रूस एक अलग लेकिन उतनी ही गंभीर समस्या से जूझ रहा है — श्रमिकों की कमी। पिछले पाँच वर्षों में रूस का मानव संसाधन भंडार 70 लाख से घटकर 40 लाख रह गया है। इसका मुख्य कारण तेजी से बढ़ता औद्योगिक उत्पादन और योग्य कर्मचारियों की कमी है। साथ ही, अधिकतर लोग मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं, जिससे अन्य क्षेत्रों में श्रमिकों की भारी कमी हो गई है। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मशीन ऑपरेटर, तकनीशियन और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों की कमी लगातार बढ़ रही है। कंपनियाँ वेतन में 13–20% तक की वृद्धि कर रही हैं, फिर भी पर्याप्त कर्मचारी नहीं मिल रहे। आधुनिक रूस के इतिहास में पहली बार अर्थव्यवस्था श्रम-सीमाओं का सामना कर रही है। इसी संदर्भ में 2022 में शुरू किया गया “अलाबुगा स्टार्ट” कार्यक्रम महत्वपूर्ण बन जाता है। शुरुआत में इसे युवा महिलाओं को सेवा और आतिथ्य क्षेत्र में रोजगार देने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह 85 देशों तक फैला एक संगठित श्रम-प्रवासन कार्यक्रम बन चुका है, जिसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अनेक देश शामिल हैं।</div><div><br></div><h2>अलाबुगा स्टार्ट कार्यक्रम</h2><div><br></div><div>यह कार्यक्रम बेहद व्यावहारिक और पारदर्शी तरीके से बनाया गया है। इसमें 18 से 22 वर्ष की युवा महिलाओं को रूस के विशेष आर्थिक क्षेत्र “अलाबुगा” में स्थित कंपनियों में आधिकारिक नौकरी दी जाती है। यहाँ रूसी, चीनी, तुर्की और यूरोपीय कंपनियों के कारखाने मौजूद हैं। कार्यक्रम में सात प्रकार के क्षेत्र उपलब्ध हैं— जैसे लॉजिस्टिक्स, प्रोडक्शन ऑपरेटर, कैटरिंग और सर्विस। शुरुआती वेतन लगभग 707 डॉलर प्रति माह (नेट) है, और हर छह महीने में पदोन्नति व वेतन वृद्धि की संभावना रहती है। प्रतिभागियों को सब्सिडी वाले हॉस्टल दिए जाते हैं। लगभग 44 डॉलर प्रति माह में उन्हें सुसज्जित कमरे मिलते हैं। एक कमरे में आठ लड़कियाँ रहती हैं और उन्हें अलग-अलग देशों की प्रतिभागियों के साथ रखा जाता है ताकि वे रूसी भाषा और संस्कृति जल्दी सीख सकें। अतिरिक्त रूसी भाषा कक्षाएँ भी दी जाती हैं। कुछ महीनों में वे स्वयं खरीदारी करना, स्थानीय लोगों से बातचीत करना और काम के निर्देश समझना सीख जाती हैं। यह कार्यक्रम दो वर्षों तक चलता है। इस दौरान प्रतिभागी रूसी भाषा में दक्ष हो जाती हैं, करियर में आगे बढ़ती हैं और व्यावसायिक प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र प्राप्त करती हैं।</div><div><br></div><h2>BRICS और श्रम गतिशीलता का नया ढाँचा</h2><div><br></div><div>अलाबुगा स्टार्ट व्यापक BRICS सहयोग का हिस्सा भी माना जा रहा है। 2025 के BRICS शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा था: “जैसे-जैसे वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का केंद्र एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे क्षेत्रीय देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों के नए अवसर खुल रहे हैं। रूस इन साझेदारियों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।'' इन बयानों से स्पष्ट है कि मॉस्को एशियाई देशों को केवल बाज़ार नहीं, बल्कि नई आर्थिक व्यवस्था के साझेदार के रूप में देख रहा है।</div><div><br></div><div>BRICS के अंतर्गत युवा रोजगार और प्रशिक्षण से जुड़ी कई योजनाएँ शुरू की जा चुकी हैं। उदाहरण के लिए “BRICS Next-Gen Careers Hub” युवाओं के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बनाने का प्रयास है, जहाँ सदस्य देशों में नौकरी, इंटर्नशिप और शोध के अवसर उपलब्ध होंगे। रूस के विश्वविद्यालय BRICS और CIS देशों के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व कार्यक्रम भी शुरू कर रहे हैं। साथ ही, 1 जनवरी 2027 से रूस की नई इमिग्रेशन नीति लागू होगी, जिसमें संगठित और लक्षित भर्ती प्रणाली अपनाई जाएगी — जिसका बड़ा हिस्सा BRICS देशों पर केंद्रित होगा। इस दृष्टि से “अलाबुगा स्टार्ट” केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य में बड़े स्तर पर लागू होने वाला मॉडल माना जा रहा है।</div><div><br></div><h2>विश्वास की संरचना</h2><div><br></div><div>एशियाई परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न सुरक्षा और स्थिरता का होता है। अलाबुगा स्टार्ट इन्हीं दो बातों पर ज़ोर देता है। हॉस्टल क्षेत्र सुरक्षित है और फेस-आईडी प्रवेश प्रणाली से लैस है। हवाई यात्रा का खर्च मेज़बान संस्था उठाती है। प्रतिभागियों को पहले दिन से स्वास्थ्य बीमा भी मिलता है। रोजगार अनुबंध रूसी श्रम कानूनों के अनुसार होता है और वेतन बैंक ट्रांसफर द्वारा महीने में दो बार दिया जाता है। कार्यक्रम के समर्थकों का दावा है कि रूस दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ सड़क अपराध अपेक्षाकृत कम हैं। सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस गश्त, बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग और संगठित शहरी व्यवस्था इसे विदेशी युवतियों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण के रूप में प्रस्तुत करती है। विशेष रूप से तातारस्तान — जहाँ अलाबुगा स्थित है — को बहुसांस्कृतिक और धार्मिक सह-अस्तित्व का उदाहरण बताया जाता है, जहाँ इस्लाम और ईसाई धर्म सदियों से साथ मौजूद हैं।</div><div><br></div><h2>पेशेवर विकास के माध्यम से “सॉफ्ट पावर”</h2><div><br></div><div>अलाबुगा स्टार्ट एक साथ कई उद्देश्यों को पूरा करता है। यह रूस के श्रम बाज़ार को कर्मचारियों से भरता है, एशिया और अफ्रीका में रूस-समर्थक पेशेवरों का नेटवर्क बनाता है, और बिना बड़े भू-राजनीतिक निवेश के सांस्कृतिक तथा आर्थिक प्रभाव का ढाँचा तैयार करता है। जब श्रीलंका या फिलीपींस की युवा महिलाएँ दो साल बाद अपने देश लौटती हैं — रूसी भाषा, आधुनिक औद्योगिक अनुभव और प्रमाणपत्र के साथ — तब वे दोनों देशों के बीच एक जीवित पुल बन जाती हैं।&nbsp;</div><div><br></div><div>आज, जब ऊर्जा संकट एशियाई देशों को नए साझेदारों और नए गठबंधनों की तलाश के लिए मजबूर कर रहा है, रूस केवल सस्ता पेट्रोलियम ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए करियर, आय और सुरक्षा का प्रस्ताव भी दे रहा है। और उपलब्ध आँकड़ों को देखते हुए, इस प्रस्ताव की मांग भविष्य में और बढ़ सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:28:34 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/asia-energy-crisis-fuels-russia-strategic-rise</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/asia-energy-crisis_large_1828_23.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA['Melody' मीम का शेयर बाज़ार पर अनोखा असर! Parle Industries में लगातार दूसरे दिन 5% का अपर सर्किट]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/melody-meme-impact-stock-market-parle-industries-hits-5-percent-upper-circuit]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>शेयर बाज़ार में कई बार ऐसी घटनाएं होती हैं जो तर्क से परे होती हैं। ऐसा ही कुछ गुरुवार को लगातार दूसरे दिन देखने को मिला, जब Parle Industries Ltd के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी जारी रही और यह 5% के अपर सर्किट पर पहुंच गया। इस तेज़ी के पीछे कोई बड़ा बिजनेस एग्रीमेंट या कॉर्पोरेट घोषणा नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से जुड़ा एक वैश्विक वायरल वीडियो है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">Bombay Stock Exchange (BSE) पर सुबह 10:03 बजे तक Parle Industries Ltd के शेयर 4.95% बढ़कर 5.51 रुपये प्रति शेयर हो गए।</span></div><div><br></div><div>पिछले सत्र में भी शेयर अपने अपर सर्किट की सीमा पर पहुंच गए थे, जब PM मोदी की इटली यात्रा के वीडियो ऑनलाइन वायरल हुए थे, जिनमें प्रधानमंत्री मेलोनी को Melody टॉफियां देते हुए दिखाई दे रहे थे। इन दृश्यों ने सोशल मीडिया पर लोकप्रिय "Melodi" मीम को फिर से ज़िंदा कर दिया और "Parle" नाम से जुड़े शेयरों में खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी में अचानक उछाल ला दिया।</div><div><br></div><div>हालांकि, Parle Industries का Melody टॉफियों या Parle Products से कोई लेना-देना नहीं है। Parle Products एक निजी FMCG कंपनी है जो Parle-G, Monaco और KrackJack जैसे ब्रांडों के साथ-साथ Melody टॉफियां भी बनाती है। इस तेज़ी को बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चर्चा के कारण हुई "गलत पहचान" वाली खरीदारी का मामला माना जा रहा है।</div><div><br></div><div>इस बीच, Parle Products ने कहा कि इस राजनयिक कदम के बाद उसके ब्रांड को जो सुर्खियां मिलीं, उससे वह हैरान रह गई।</div><div><br></div><div>India Today से बात करते हुए, Parle Products के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने कहा कि PM मोदी द्वारा मेलोनी को Melody टॉफी उपहार में देने के बाद कंपनी "पूरी तरह से हैरान" रह गई थी। उन्होंने आगे कहा कि वीडियो वायरल होने के बाद से कंपनी ने क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी बिक्री में पहले ही तेज़ी देखी है।</div><div><br></div><div>शाह ने कहा कि Melody पहले से ही देश का सबसे ज़्यादा बिकने वाला टॉफी ब्रांड है और 200 से ज़्यादा देशों में बेचा जाता है। उन्होंने कहा कि हालिया वैश्विक ध्यान से विदेशों में भी मांग को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/trending/discovered-in-china-how-assam-tea-win-hearts-of-world-learn-full-history" target="_blank">International Tea Day 2026: चीन में हुई खोज, पर Assam की चाय ने कैसे जीता दुनिया का दिल? जानें पूरी History</a></h3><div><br></div><div>Parle Industries के शेयरों में इस ज़बरदस्त उछाल के बावजूद, कंपनी की ओर से कोई बड़ी कॉर्पोरेट घोषणा या व्यावसायिक विकास सामने नहीं आया है, जिससे इस तेज़ी की वजह समझी जा सके।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/trump-and-netanyahu-clash-america-is-in-a-mood-to-end-the-war-israel-wants-the-fighting-to-resume" target="_blank">Prabhasakshi NewsRoom: फोन कॉल पर भिड़े Trump और Netanyahu, America युद्ध खत्म करने के मूड़ में, Israel चाहता है लड़ाई फिर शुरू हो</a></h3><div><br></div><div>बाज़ार विशेषज्ञों ने कहा कि कम कीमत वाले स्मॉल-कैप शेयरों में अक्सर इस तरह की तेज़ी-आधारित गतिविधियां तब देखने को मिलती हैं, जब कोई वायरल घटना, जाना-पहचाना ब्रांड नाम या सोशल मीडिया ट्रेंड खुदरा निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 11:19:54 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/melody-meme-impact-stock-market-parle-industries-hits-5-percent-upper-circuit</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/melody_large_1119_21.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Share Market में भी रौनक, Sensex उछला और All-Time Low से उबरकर मजबूत हुआ भारतीय रुपया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/share-market-witnessed-surge-sensex-jumped-and-rupee-strengthened-from-all-time-low]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में अपने सर्वकालिक निचले भाव से 41 पैसे चढ़कर 96.45 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ वार्ता के अंतिम चरण में पहुंचने के संकेत देने के बाद निवेशकों की धारणाओं को थोड़ा बल मिला है।
 विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि निवेशक अब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने या कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका के मद्देनजर भू-राजनीतिक जोखिम और तेल की कीमतों को लेकर सतर्क हैं।
</p><p> अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.25 पर खुला। फिर शुरुआती कारोबार में 96.45 प्रति डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 41 पैसे अधिक है।
 रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक निचले स्तर 96.86 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 96.95 प्रति डॉलर तक भी टूट गया था।
 इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.18 पर रहा।</p><p>
 घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 327.74 अंक चढ़कर 75,646.13 अंक पर जबकि निफ्टी 111.75 अंक की बढ़त के साथ 23,772.05 अंक पर पहुंच गया।
 अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 105.77 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
 शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने 1,597.35 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
</p><p> गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के खिलाफ जारी युद्ध की आगे की रणनीति को लेकर फोन पर बातचीत हुई। अमेरिका दोबारा सैन्य हमले करने के बजाय समझौते के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
 ट्रंप ने रविवार को कहा था कि उन्होंने कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित अरब देशों के अनुरोध पर ईरान पर हमलों को टाल दिया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 10:37:29 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/share-market-witnessed-surge-sensex-jumped-and-rupee-strengthened-from-all-time-low</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/21/share-market_large_1037_15.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Lenskart Q4 Results: मुनाफे में आई गिरावट, पर Revenue ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, बिक्री 45% बढ़ी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/lenskart-q4-results-profits-declined-but-revenue-broke-all-records-sales-increased-by-45-percent]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>चश्मा कंपनी लेंसकार्ट का 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही का एकीकृत शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.5 प्रतिशत घटकर 203.6 करोड़ रुपये रह गया।
 कंपनी ने शेयर बाजारों को यह जानकारी दी। कंपनी ने पिछले साल इसी तिमाही में 220.1 करोड़ रुपये शुद्ध लाभ कमाया था। </p><p>
 मार्च तिमाही में कंपनी की परिचालन आय45.62 प्रतिशत बढ़कर करीब 2,516 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में 1,728 करोड़ रुपये थी।
 समीक्षाधीन तिमाही में भारत में लेंसकार्ट की औसत बिक्री कीमत (एएसपी) पिछले साल के मुकाबले 15.9 प्रतिशत बढ़कर 1,865 रुपये हो गई।</p><p>
लेंसकार्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में 542 नए स्टोर जोड़े, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह संख्या 282 थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 20:43:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/lenskart-q4-results-profits-declined-but-revenue-broke-all-records-sales-increased-by-45-percent</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/20/lenskart-q4-results_large_2043_15.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Dollar के सामने बेबस हुआ Rupee, ऐतिहासिक गिरावट से Economy पर मंडराया बड़ा संकट।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-becomes-helpless-in-front-of-dollar-crisis-looms-over-economy-due-to-its-historic-fall]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वैश्विक बाजार में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। मौजूद जानकारी के अनुसार रुपया कारोबार के दौरान 96.96 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर माना जा रहा है। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 96.6150 के स्तर तक गिरा था। दिन के अंत में रुपया 96.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।</div><div><br></div><div>बता दें कि फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रुपया 6 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में ठहराव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से दुनियाभर के बॉन्ड बाजारों में बिकवाली तेज हुई है और निवेशकों को आशंका है कि केंद्रीय बैंक आने वाले समय में ब्याज दरें और बढ़ा सकते हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नरम जरूर हुईं, लेकिन अभी भी करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने तत्काल हमले को टालते हुए बातचीत के लिए कुछ और समय देने की बात कही है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार बढ़ती ऊर्जा कीमतों और कमजोर विदेशी निवेश प्रवाह ने भारत के चालू वित्त वर्ष के भुगतान संतुलन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विश्लेषकों का कहना है कि तेल आयात महंगा होने से भारत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है।</div><div><br></div><div>डीबीएस बैंक के विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह बाहरी ऊर्जा संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है और इसी कारण रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। बैंक ने वर्ष 2026 के लिए रुपये का अनुमानित दायरा पहले 90 से 95 प्रति डॉलर रखा था, जिसे अब बदलकर 95 से 100 प्रति डॉलर कर दिया गया है।</div><div><br></div><div>इस बीच बाजार में यह भी चर्चा रही कि सरकारी बैंकों ने डॉलर बेचकर रुपये को और ज्यादा गिरने से रोकने की कोशिश की। कारोबारियों का मानना है कि यह बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से कराई गई हो सकती है। एक निजी बैंक के कारोबारी ने बताया कि बाजार में लगातार डॉलर की मांग बनी हुई है, जबकि बड़ी मात्रा में डॉलर की आपूर्ति मुख्य रूप से रिजर्व बैंक की ओर से ही आ रही है।</div><div><br></div><div>सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के दूसरे देशों पर भी इस संकट का असर दिखाई दे रहा है। इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक ने अपनी मुद्रा रुपिया को संभालने के लिए उम्मीद से ज्यादा 50 आधार अंक की ब्याज दर बढ़ोतरी की है। इंडोनेशियाई मुद्रा भी हाल के दिनों में लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रही थी।</div><div><br></div><div>आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव जल्दी कम नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों की मुद्रा, महंगाई और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 19:07:49 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-becomes-helpless-in-front-of-dollar-crisis-looms-over-economy-due-to-its-historic-fall</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/20/rupee_large_1907_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Meta में फिर Mass Layoff का ऐलान, 8000 कर्मचारियों की नौकरी पर लटकी तलवार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/meta-announces-another-mass-layoff-putting-the-jobs-of-8000-employees-at-risk]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनियाभर की बड़ी टैकनोलजी कंपनियों में इस समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर तेज प्रतिस्पर्धा चल रही है और इसी बीच मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा ने बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार मेटा करीब 8 हजार कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर रही है। कंपनी के इस फैसले से अमेरिका, यूरोप और एशिया समेत कई देशों में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ गई है।</div><div><br></div><div>बता दें कि मेटा फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसी बड़ी सामाजिक माध्यम सेवाओं की मालिक कंपनी है। कंपनी का कहना है कि यह छंटनी संगठन में बदलाव, खर्च कम करने और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की योजना का हिस्सा है। वहीं दूसरी ओर मेटा कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक पर भारी निवेश कर रही है और आने वाले वर्षों में इसी क्षेत्र पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की तैयारी में है।</div><div><br></div><div>रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्मचारियों को बुधवार सुबह से ही सूचना भेजी जानी शुरू हो गई थी। सबसे पहले सिंगापुर स्थित कर्मचारियों को स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 4 बजे जानकारी दी गई। इसके बाद यूरोप और अमेरिका में भी कर्मचारियों को अलग-अलग समय क्षेत्रों के अनुसार सूचना भेजी गई है। कंपनी ने कई कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह भी दी है ताकि छंटनी प्रक्रिया के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि इस बार सबसे ज्यादा असर कंपनी की इंजीनियरिंग और उत्पाद विकास टीमों पर पड़ने की संभावना बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार साल के अंत तक और भी कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भी मेटा कई बार बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को निकाल चुकी है। मार्क जुकरबर्ग लगातार “ज्यादा दक्षता” की नीति पर जोर देते रहे है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी अब अपने कर्मचारियों से कोडिंग और दूसरे तकनीकी कामों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कह रही है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि जुकरबर्ग खुद भी ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक उपकरण विकसित करने में लगे हैं जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कुछ कामों में मदद कर सकें।</div><div><br></div><div>हालांकि मेटा के इस बड़े निवेश को लेकर निवेशकों के बीच चिंता भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे पर जितना पैसा खर्च कर रही है, उसके मुकाबले छंटनी से होने वाली बचत काफी कम है। अनुमान के अनुसार कंपनी को इस कदम से करीब 3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है, जबकि इस साल मेटा का कुल पूंजीगत खर्च 145 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।</div><div><br></div><div>तकनीकी क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ और तेज हो सकती है, लेकिन इसके साथ रोजगार पर असर भी लगातार देखने को मिलेगा। मेटा का यह फैसला इसी बदलती तकनीकी दुनिया की बड़ी तस्वीर को दिखाता है, जहां कंपनियां तेजी से नई तकनीक अपनाने के लिए अपने पुराने ढांचे में बड़े बदलाव कर रही हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:45:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/meta-announces-another-mass-layoff-putting-the-jobs-of-8000-employees-at-risk</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/20/meta_large_1845_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Petrol-Diesel की कीमतों में लगी आग, Commercial Gas महंगा, अब महंगाई का होगा Double Attack]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/petrol-and-diesel-prices-are-on-fire-commercial-gas-is-expensive-double-attack-of-inflation]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दूसरी बार हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कुछ ही दिनों के भीतर ईंधन के दाम बढ़ने से अब लोगों को डर सताने लगा है कि आने वाले दिनों में महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि महानगरों में कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पेट्रोल 96 पैसे महंगा होकर 109.70 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गई है।</div><div><br></div><div>बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। उस समय पेट्रोल 3.29 रुपये और डीजल 3.11 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार ने चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। इससे पहले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए थे। वहीं व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था।</div><div><br></div><div>19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत कोलकाता में 3202 रुपये तक पहुंच गई है। यह पहले 2208 रुपये थी। यानी एक साथ करीब 994 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से परिवहन और कारोबार की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की चीजों और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ेगा। ऐसे में आम परिवारों का मासिक बजट और ज्यादा प्रभावित हो सकता हैं।</div><div><br></div><div>कोलकाता के न्यू गरिया इलाके में रहने वाले ऐप टैक्सी चालक सुमित दास ने बताया कि वह रोज लगभग 150 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं। पहले उनका मासिक डीजल खर्च करीब 25,500 रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 26,650 रुपये पहुंच जाएगा हैं।</div><div><br></div><div>सुमित दास का कहना है कि उनकी कमाई नहीं बढ़ रही, लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सबसे बड़ी चिंता बेटी की पढ़ाई का खर्च है, क्योंकि अतिरिक्त ईंधन खर्च सीधे परिवार के बजट पर असर डाल रहा हैं।</div><div><br></div><div>वहीं बेहाला इलाके में फास्ट फूड दुकान पर काम करने वाले 50 वर्षीय मलॉय सरदार भी बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। वह रोल, मुगलई पराठा और तले हुए खाद्य पदार्थ बनाते हैं और उनकी मासिक तनख्वाह 13,500 रुपये हैं।</div><div><br></div><div>व्यावसायिक गैस सिलेंडर महंगा होने के बाद उनके मालिक ने वेतन कम करने की चेतावनी दी है। अब जून से उनकी तनख्वाह 13 हजार रुपये करने की बात कही गई हैं।</div><div><br></div><div>मलॉय सरदार का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतें आगे भी बढ़ती रहीं तो उनकी आय और घट सकती है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी भी कई घरों में खाना बनाने का काम करती हैं, लेकिन दो लोगों की कमाई के बावजूद परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा हैं।</div><div><br></div><div>इसी तरह कार किराये का कारोबार करने वाले संदीप कायल भी बढ़ती लागत से परेशान हैं। उनके पास चार गाड़ियां हैं, जिनमें तीन डीजल से चलती हैं। उन्होंने बताया कि पहले एक गाड़ी से हर महीने लगभग 4500 रुपये की बचत हो जाती थी, लेकिन अब ईंधन महंगा होने से यह कम होकर करीब 3300 रुपये रह जाएगी हैं।</div><div><br></div><div>आर्थिक जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, परिवहन, शिक्षा और छोटे कारोबार समेत लगभग हर क्षेत्र पर दिखाई देता हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:32:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/petrol-and-diesel-prices-are-on-fire-commercial-gas-is-expensive-double-attack-of-inflation</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/20/petrol-diesel_large_1832_145.jpeg" />
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[TPCI रिपोर्ट: UAE को Food Export बढ़ाकर भारत कमा सकता है अरबों डॉलर, Economy को मिलेगी रफ्तार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/tpci-sees-untapped-india-uae-food-export-potential]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद (टीपीसीआई) ने बुधवार को कहा कि भारत से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को खाद्य और पेय पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि इस पश्चिम एशियाई देश को इन उत्पादों का भारत का निर्यात केवल 3.6 अरब डॉलर का रहा है। वहीं यूएई का इन उत्पादों का कुल आयात 22 अरब डॉलर का था।
 भारत से यूएई को खाद्य और पेय पदार्थों का निर्यात वर्ष 2021 में 2.3 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 में 3.6 अरब डॉलर का हो गया, जो 11.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाता है।
</p><p> वर्ष 2025 में यूएई में इस क्षेत्र से कुल आयात लगभग 22 अरब डॉलर का रहा है।
 टीपीसीआई ने कहा कि ये आंकड़े यूएई के बाजार में बढ़ती मांग और साथ ही मुख्य खाद्य पदार्थों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, मांस उत्पादों, पेय पदार्थों और कृषि वस्तुओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं। </p><p>
 टीपीसीआई के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि यूएई दुनिया के उन देशों में से एक है जो खाद्य आयात पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं; यह अपनी जरूरतों का लगभग 85 से 90 प्रतिशत आयात करता है और उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के लिए आयातित खाद्य उत्पादों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहता है।
</p><p> उन्होंने कहा, ‘‘भारत को यूएई के सबसे भरोसेमंद खाद्य आपूर्तिकर्ताओं में से एक माना जाता है, जिसकी बाजार में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है। भारत-यूएई व्यापार संबंधों के मजबूत होने और खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक और गुणवत्ता प्रणालियों में बढ़ते निवेश के साथ, भारत, यूएई के खाद्य और पेय आयात बाजार में अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 17:58:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/tpci-sees-untapped-india-uae-food-export-potential</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
      <media:thumbnail url="https://images.prabhasakshi.com/2026/5/20/india-uae-food-export-potential_large_1758_157.jpeg" />
    </item>
  </channel>
</rss>