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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[नैनो SIM अब देश में! Ashwini Vaishnaw ने MNIT Jaipur में Makers Lab का किया उद्घाटन]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/nano-sims-now-in-the-country-ashwini-vaishnaw-inaugurated-the-makers-lab-at-mnit-jaipur]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 11 जून को जयपुर में मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) में ‘मेकर्स लैब’ का उद्घाटन किया। यह नैनो सिम मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है। प्रभा भवन पहुँचने पर, मंत्री ने तकनीकी शिक्षा और रिसर्च को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई तीन खास लैब्स का उद्घाटन किया। इनमें 'मेकर्स लैब' मुख्य थी, जिसका मकसद इनोवेशन को बढ़ावा देना है। एक इंटरैक्टिव सेशन के दौरान, वैष्णव ने नैनो सिम टेक्नोलॉजी पर आधारित क्विज़ और विस्तृत सवाल-जवाब के ज़रिए छात्रों से बातचीत की।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/mri/mission-z-operation-that-unsettles-the-adversary" target="_blank">दुश्मन को परेशान करने वाला मिशन Z, कैसे इससे बदलेगा चीन-पाकिस्तान बॉर्डर का भूगोल</a></h3><div><br></div><div>सभा को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि MNIT जयपुर में इस टेक्नोलॉजी–खासकर सेमीकंडक्टर सिस्टम–को सीखने के लिए एक बहुत असरदार सिमुलेशन सिस्टम लॉन्च किया जाएगा। इससे स्टूडेंट्स को सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन की ट्रेनिंग मिल सकेगी। साथ ही, अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन टूल्स भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अब नैनो सिम का निर्माण देश में ही हो रहा है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत की बढ़ती क्षमता को दिखाता है।</div><div><br></div><div>मंत्री ने सरकार के हाई-टेक शिक्षा के विज़न के तहत MNIT में क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रयोगशालाएँ स्थापित करने की योजना की घोषणा की। उन्होंने छात्रों को अपनी खुद की चिप्स डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर करने की चुनौती दी और कहा, "यह मानते हुए कि अभी और भी बहुत कुछ सीखना बाकी है, उन्होंने छात्रों को अपनी चिप्स खुद डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर करने की चुनौती दी। उन्होंने बताया कि भारत के 323 कॉलेजों में पहले से ही ऐसी पहल लागू की जा रही हैं और इच्छा जताई कि MNIT इस क्षेत्र में सबसे आगे रहे।"</div><div>&nbsp;<span style="color: inherit; font-family: inherit; font-size: 1.75rem;">&nbsp;</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/60-trucks-caused-a-stir-in-pakistan-21-soldiers-missing" target="_blank">पाकिस्तान ने इन 60 ट्रकों ने मचाया हड़कंप, 21 सैनिक गायब!</a></h3><div><br></div><div>वैष्णव ने आगे कहा कि MNIT को इस मिशन के व्यापक नेटवर्क से जोड़ने के लिए एक तीसरी पहल शुरू की जाएगी। उसी दिन, मंत्री ने जयपुर में आकाशवाणी परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के रामगढ़ में 20-kW FM ट्रांसमीटर का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में जयपुर की सांसद मंजू शर्मा, प्रसार भारती के चेयरमैन प्रसून जोशी, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, वैष्णव ने व्यापक रणनीतिक लक्ष्यों के तहत सीमावर्ती इलाकों में कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:20:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/nano-sims-now-in-the-country-ashwini-vaishnaw-inaugurated-the-makers-lab-at-mnit-jaipur</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान! GlobalFoundries बनाएगी भारतीय Startup FermionIC का पहला Semiconductor Chip]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/globalfoundries-to-manufacture-the-first-semiconductor-chip-for-indian-startup-fermionic]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सेमीकंडक्टर विनिर्माण कंपनी ग्लोबलफाउंड्रीज एक साझेदारी के तहत सरकारी समर्थन प्राप्त फर्मियोनिक के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) चिप बनाएगी। बृहस्पतिवार को जारी एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई।
 फर्मियोनिक के आरएफ चिप ग्लोबलफाउंड्रीज द्वारा बनाए जाने वाले पहले भारतीय सेमीकंडक्टर होंगे। कंपनी पहले से क्वालकॉम, मीडियाटेक, ब्रॉडकॉम जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए चिप बना रही है।
</p><p> बयान में कहा गया, ‘‘ ग्लोबलफाउंड्रीज इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (जीएफ इंडिया) और उन्नत रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) समाधान पर केंद्रित भारतीय फैब्लेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप फर्मियोनिक ने एक वाणिज्यिक साझेदारी की घोषणा की है। जीएफ इसके तहत फर्मियोनिक के आरएफ चिप का विनिर्माण करेगी।’’
 फर्मियोनिक सरकार की डिजाइन से जुड़ी प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के तहत भारतीय ‘फैब्लेस’ कंपनियों के शुरुआती समूह का हिस्सा है।
 भारतीय ‘फैब्लेस’ कंपनियों से तात्पर्य उन स्टार्टअप व भारतीय कंपनियों से है जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों एवं माइक्रोप्रोसेसर (चिप) के लिए डिजाइन एवं सॉफ्टवेयर (आईपी) तो खुद बनाती हैं, लेकिन उनके विनिर्माण या उत्पादन का काम विदेशों में स्थित कंपनियों से करवाती हैं।
</p><p> फर्मियोनिक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गौतम कुमार सिंह ने कहा, ‘‘ ग्लोबलफाउंड्रीज इंडिया के साथ हमारा सहयोग हमें जटिल, उत्पादन-स्तर के आरएफ सिलिकॉन (केवल ‘प्रोटोटाइप’ नहीं) उपलब्ध कराने में सक्षम बनाता है। हमारी यात्रा के इस चरण में हमें केवल एक विनिर्माण प्रदाता नहीं, बल्कि ऐसे भागीदार की आवश्यकता थी जो आरएफ की जटिलता को समझे और उत्पादन-स्तर के निष्पादन में सहयोग कर सके। ग्लोबलफाउंड्रीज की आरएफ विशेषज्ञता और जीएफ इंडिया की सक्रिय भागीदारी ने इसे संभव बनाया।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:17:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/globalfoundries-to-manufacture-the-first-semiconductor-chip-for-indian-startup-fermionic</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[MakeMyTrip का New Feature: होटल में Early Check-In, Late Check-Out अब आसान, बस चुकानी होगी एक्स्ट्रा कीमत।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/makemytrip-new-feature-early-hotel-check-in-and-late-check-out-are-now-easy%E2%80%94just-pay-an-extra-fee]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>यात्रा संबंधी सेवाओं से जुड़े ऑनलाइन मंच मेकमाईट्रिप ने अपने ऐप पर जल्दी ‘चेक-इन’ और देर से ‘चेक-आउट’ की सुविधा शुरू की है। इसके लिए उपयोगकर्ता को होटल बुकिंग के दौरान अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
 मेकमाईट्रिप ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि यह सुविधा भारत में 10,000 से अधिक होटल, विला तथा होमस्टे में और 20 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में 1,000 से अधिक संपत्तियों पर अतिरिक्त शुल्क के साथ उपलब्ध है।</p><p>
 कंपनी ने कहा, ‘‘ देश के 53 प्रतिशत यात्री सुबह नौ बजे से पहले पहुंचते हैं और 54 प्रतिशत दोपहर तीन बजे के बाद प्रस्थान करते हैं। यह सुविधा यात्रियों को बुकिंग के समय ही जल्दी या देर से कमरे का ‘स्लॉट’ सुनिश्चित करने की अनुमति देती है। </p><p>यात्री अब तीन, छह या नौ घंटे के ‘स्लॉट’ में जल्दी आने या देर से जाने का विकल्प बुकिंग के समय चुन सकते हैं।’’
 मेकमाईट्रिप के होटल कारोबार के मुख्य व्यवसाय अधिकारी अभिषेक लोगानी ने कहा कि ठहरने के विकल्प चुनने के लिए यात्रियों के मानदंड बदल रहे हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:53:46 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[दिल्ली पहुंचे तमिलनाडु के CM Joseph Vijay! नीति आयोग की बैठक में केंद्रीय फंड और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए उठाएंगे आवाज]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/joseph-vijay-will-raise-issue-of-central-funds-and-infrastructure-projects-niti-aayog-meeting]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी में नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में केंद्रीय निधि के आवंटन का मुद्दा उठा सकते हैं।
 आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में विजय क्षेत्रीय मुद्दों को उठाएंगे और वह राज्य की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए धन आवंटित करने की मांग उठा सकते हैं।
 यह विजय की नीति आयोग की शासी परिषद की पहली बैठक होगी।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/ed-summons-pinarayi-vijayans-daughter-veena-seeks-more-time-to-appear" target="_blank">Pinarayi Vijayan की बेटी को ED का समन, Veena ने पेशी के लिए और मोहलत मांगी</a></h3><p>&nbsp;</p><p><b>केंद्रीय फंड और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर रहेगा जोर</b></p><p>आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय इस बैठक का उपयोग तमिलनाडु के क्षेत्रीय और आर्थिक हितों को केंद्र के सामने मजबूती से रखने के लिए करेंगे।</p><p><b>परियोजनाओं के लिए धन की मांग: </b>वह राज्य में चल रही प्रमुख और महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए विशेष केंद्रीय वित्तीय सहायता और लंबित फंड को जल्द जारी करने की मांग करेंगे।</p><p><b>क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा: </b>इसके अलावा, तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था, विकास और आम जनता से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मुद्दों को भी प्रधानमंत्री और परिषद के सामने रेखांकित किया जाएगा।</p><p><b>दिल्ली में जोरदार स्वागत, शुक्रवार को जाएंगे मंदिर</b></p><p>राजनीतिक दौरों की व्यस्तता के बीच मुख्यमंत्री विजय बुधवार शाम को ही दिल्ली पहुंच गए थे। राजधानी पहुंचने के बाद वह सीधे 'तमिलनाडु भवन' गए।</p><p>भव्य स्वागत: तमिलनाडु भवन पहुंचने पर राज्य के मुख्य सचिव एम. साईकुमार और तमिलनाडु की स्थानिक आयुक्त (Resident Commissioner) आर. जया ने गुलदस्ता भेंट कर मुख्यमंत्री का औपचारिक और भव्य स्वागत किया। इस दौरान राज्य के वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद रहे।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/crime/opened-fire-outside-a-gym-in-paschim-vihar-bishnoi-gang-claimed-responsibility" target="_blank">Delhi Paschim Vihar Firing | पश्चिम विहार में जिम के बाहर बाइक सवार लोगों ने की गालीबारी, बिश्नोई गिरोह ने ली ज़िम्मेदारी</a></h3><p><b>कोल्लूर श्री मूकांबिका मंदिर में करेंगे दर्शन</b></p><p>नीति आयोग की बैठक समाप्त होने के बाद, मुख्यमंत्री विजय का अगला पड़ाव आध्यात्मिक होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 12 जून (शुक्रवार) को वह कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित प्रसिद्ध और ऐतिहासिक कोल्लूर श्री मूकांबिका मंदिर जाएंगे। वहाँ वह राज्य की सुख, समृद्धि और प्रगति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन करेंगे।&nbsp;</p><p><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">Read </span><a href="https://www.prabhasakshi.com/national" target="_blank" style="background-color: rgb(255, 255, 255); font-size: 1rem;"><span style="font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif; background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial;">Latest
National News in Hindi </span></a><span style="background-image: initial; background-position: initial; background-size: initial; background-repeat: initial; background-attachment: initial; background-origin: initial; background-clip: initial; font-size: 1rem; font-family: &quot;Segoe UI&quot;, sans-serif;">only on Prabhasakshi&nbsp;</span>&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:19:44 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/joseph-vijay-will-raise-issue-of-central-funds-and-infrastructure-projects-niti-aayog-meeting</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भारत सरकार का बड़ा फैसला: 22% से 30% इथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/government-of-india-excise-duty-waived-on-petrol-containing-22-to-30-percent-ethanol]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>देश में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को पूरी तरह से हटा दिया है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार, अब 22% से 30% इथेनॉल की मात्रा वाले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत—जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है—अपनी व्यापक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति के तहत ईंधन मिश्रण में इथेनॉल की हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ाने पर काम कर रहा है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/bihar-govt-warns-15-banks-of-govt-deposit-freeze" target="_blank">Bihar में बैंकों की मनमानी पर Samrat सरकार का अल्टीमेटम, खराब Performance पर बंद होगा Govt Deposit</a></h3><p>&nbsp;</p><p><b>एक्साइज़ ड्यूटी से छूट का क्या मतलब है?</b></p><p>एक्साइज़ ड्यूटी वह टैक्स है जो सरकार कुछ खास सामानों, जिनमें ईंधन भी शामिल है, पर लगाती है। ज़्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल को इस ड्यूटी से छूट देकर, सरकार ऐसे ईंधन मिश्रणों को उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए आर्थिक रूप से ज़्यादा आकर्षक बना रही है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">यह नोटिफिकेशन 22% से 30% के बीच इथेनॉल वाले पेट्रोल पर लागू होता है।</span></p><p>सरकार ने रिटेल आउटलेट्स पर बिकने वाले सामान्य पेट्रोल में तुरंत किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि इस कदम से ज़्यादा इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के विकास और आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा।</p><p><b>भारत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को क्यों बढ़ावा दे रहा है?</b></p><p>भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए आयातित कच्चे तेल पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने से - जो देश में ही गन्ने और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है - आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर को कम करने में मदद मिलती है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने किसानों के लिए एक अतिरिक्त बाज़ार भी बनाया है और ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने के सरकार के व्यापक लक्ष्य का समर्थन किया है।</span></p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/one-decision-by-mukesh-ambani-brings-a-rally-to-the-market-reliances-surge-delights-investors" target="_blank">Mukesh Ambani का एक फैसला और बाजार में हरियाली, Reliance की तेजी ने निवेशकों को किया खुश।</a></h3><p><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></p><p>भारत ने पिछले दशक में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को तेज़ी से बढ़ाया है क्योंकि वह अपने तेल आयात बिल को कम करना और साफ़-सुथरे ईंधन को बढ़ावा देना चाहता है।</p><p>टैक्स में यह नई छूट संकेत देती है कि भारत ज़्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहता है। यह वैकल्पिक ईंधन पर सरकार के लगातार फ़ोकस को भी दर्शाता है, ऐसे समय में जब देश बढ़ती ऊर्जा मांग और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की ज़रूरत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।</p><h2><span style="font-size: 1rem;"><b>उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?</b></span></h2><p>आम उपभोक्ताओं के लिए इस फैसले का तुरंत या सीधा असर शायद सीमित हो, क्योंकि अभी यह नीतिगत बदलाव उत्पादकों और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया गया है। लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से देखा जाए तो यह भारत की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत देश के परिवहन क्षेत्र में घरेलू स्तर पर तैयार इथेनॉल की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बनाना है।</p><p>बढ़ती ऊर्जा मांग और आयातित तेल पर निर्भरता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में यह फैसला भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।&nbsp;</p>]]></description>
      <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:44:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/government-of-india-excise-duty-waived-on-petrol-containing-22-to-30-percent-ethanol</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[RBI का Rules पर बड़ा प्रहार, 135 Non-Banking कंपनियों का पंजीकरण हुआ रद्द।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-cracks-down-on-rule-violations-registration-of-135-non-banking-companies-cancelled]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय क्षेत्र में निगरानी और अनुपालन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 135 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद ये कंपनियां अब गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के रूप में काम नहीं कर सकेंगी।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया है कि जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है, उनमें एक्सप्रेस फिनकैप हाउस, अक्षय फिस्कल सर्विसेज, टाइम्स फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, जुपिटर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, जुपिटर फिनवेस्ट, एस्सेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स और सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां देश की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। ये संस्थाएं ऋण वितरण, निवेश, वाहन वित्तपोषण और अन्य वित्तीय सेवाओं के माध्यम से लाखों ग्राहकों तक पहुंचती हैं। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर इनके संचालन और नियमों के पालन की समीक्षा करता रहता है।</div><div><br></div><div>बता दें कि जिन 135 कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए गए हैं, उनमें से बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल में पंजीकृत थी। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने इस कार्रवाई के पीछे प्रत्येक कंपनी के अलग-अलग कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया है, लेकिन यह कदम नियामकीय निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</div><div><br></div><div>इसी के साथ भारतीय रिजर्व बैंक ने यह भी जानकारी दी है कि 13 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने स्वेच्छा से अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिए हैं। इन कंपनियों ने या तो इस कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया है या फिर विलय, समामेलन, विघटन अथवा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के कारण उनका अस्तित्व समाप्त हो गया है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार जे. थॉमस फाइनेंस, इकोन-सुपर सेल्स, हितेशा फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट, तिरुनेलवेली तूतीकोरिन इन्वेस्टमेंट्स, कार्नेक्स विनिमय और इम्पैक्ट लीजिंग जैसी कंपनियों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार से बाहर निकलने के कारण अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस किए हैं।</div><div><br></div><div>वहीं फोररनर कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स ने भी अपना पंजीकरण वापस कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार यह कंपनी अब ऐसी निवेश कंपनी की श्रेणी में आती है जिसे अलग से पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए उसने स्वेच्छा से अपना लाइसेंस केंद्रीय बैंक को लौटा दिया है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि कुछ अन्य कंपनियों ने भी विलय या कानूनी पुनर्गठन की वजह से अपने पंजीकरण समाप्त कर दिए हैं। इनमें कैस्पियन इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट्स, हरि दर्शन सेल्स, आइवरी कंसल्टेंट्स, एसकेए कंसल्टेंसी सर्विसेज, तृषिता मैनेजमेंट और सुबन ट्रेड्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों का स्वतंत्र कानूनी अस्तित्व समाप्त हो चुका है, जिसके कारण इनके पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस किए गए हैं।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की यह कार्रवाई वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाया है ताकि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</div><div><br></div><div>बता दें कि देश में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि इनके लिए नियामकीय मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि नियमों और अनुपालन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:47:07 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-cracks-down-on-rule-violations-registration-of-135-non-banking-companies-cancelled</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mukesh Ambani का एक फैसला और बाजार में हरियाली, Reliance की तेजी ने निवेशकों को किया खुश।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/one-decision-by-mukesh-ambani-brings-a-rally-to-the-market-reliances-surge-delights-investors]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>वैश्विक बाजारों में दबाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। देश के प्रमुख शेयर सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की, जिसमें सबसे बड़ा योगदान मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का रहा है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद संवेदनशील सूचकांक 436 अंकों तक चढ़ गया, जबकि राष्ट्रीय सूचकांक 23,350 के स्तर तक पहुंच गया। सुबह करीब 9 बजकर 27 मिनट पर संवेदनशील सूचकांक 358 अंकों की बढ़त के साथ 74,272 पर कारोबार कर रहा था, जबकि राष्ट्रीय सूचकांक 89 अंकों की तेजी के साथ 23,330 के आसपास बना हुआ था।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि भारतीय बाजार की यह मजबूती ऐसे समय में देखने को मिली है जब अधिकांश एशियाई बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य कार्रवाई होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं के बावजूद शांति समझौते की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।</div><div><br></div><div>इसी तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिला है। बता दें कि कच्चे तेल की कीमतें बुधवार को बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। एक दिन पहले अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल करीब 89 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया था, लेकिन बाद में इसमें तेज उछाल आया और कीमतें 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं।</div><div><br></div><div>हालांकि इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय निवेशकों का रुख सकारात्मक बना रहा। राष्ट्रीय शेयर विनिमय के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में से अधिकांश बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। विशेष रूप से उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र से जुड़ा सूचकांक सबसे अधिक मजबूत रहा और इसमें करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, निजी बैंक, वित्तीय सेवाएं, तेल एवं गैस तथा उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े क्षेत्र भी मजबूत बने रहे हैं।</div><div><br></div><div>दूसरी ओर मेटल, वाहन, औषधि और कुछ सरकारी बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी अपेक्षाकृत कमजोरी रही। मध्यम आकार की कंपनियों का सूचकांक हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि छोटी कंपनियों का सूचकांक भी लाल निशान में रहा है।</div><div><br></div><div>बाजार की सबसे बड़ी चर्चा रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। कंपनी के शेयरों में करीब 2.5 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई और भाव 1,300 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। इसकी वजह मेटा और रिलायंस के बीच घोषित नई साझेदारी रही है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि मेटा, जिसकी स्थापना मार्क जुकरबर्ग ने की थी, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विशाल डाटा केंद्र स्थापित करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर काम करेगी। मौजूद जानकारी के अनुसार गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला डाटा केंद्र बनाया जाएगा। इस परियोजना का निर्माण रिलायंस करेगी और मेटा इसका उपयोग करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</div><div><br></div><div>रिलायंस के अलावा नेस्ले इंडिया, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली है। वहीं हिंडाल्को, अदाणी एंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, टाटा मोटर्स और श्रीराम फाइनेंस के शेयर दबाव में रहे हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद आंकड़ों के अनुसार बाजार का समग्र रुख सकारात्मक रहा। राष्ट्रीय शेयर विनिमय पर 1,474 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1,276 शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा फिलहाल भारतीय बाजार में बना हुआ है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:34:06 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/one-decision-by-mukesh-ambani-brings-a-rally-to-the-market-reliances-surge-delights-investors</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Gold Price पर दोहरी मार: Profit Booking और US संकेतों से 1.50 लाख के नीचे फिसला सोना]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/double-blow-for-gold-prices-gold-slips-below-the-150-lakh-mark-due-to-profit-booking-and-us-cues]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>सोने की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर फिलहाल ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है। बुधवार को घरेलू बाजार में सोने के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए 1.50 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों ने इस गिरावट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार बहु-वस्तु विनिमय मंच पर 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,489 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। एक ही कारोबारी सत्र में सोने की कीमत में 3,500 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट उस समय आई है जब निवेशक अमेरिका से आने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि यदि अमेरिका में महंगाई अपेक्षा से अधिक बनी रहती है तो वहां ब्याज दरों में कटौती की संभावना और आगे खिसक सकती है। ऐसी स्थिति में सोने जैसी संपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि कई निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया है।</div><div><br></div><div>बता दें कि 13 मई को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला था। उस समय सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से बढ़कर 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थीं। हालांकि उसके बाद बाजार में लगातार सुधार देखने को मिला और अब कीमतें अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 9 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी हैं।</div><div><br></div><div>वस्तु और मुद्रा बाजार के विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद आई तेजी मुख्य रूप से घरेलू लागत बढ़ने का असर थी। यह तेजी किसी नए दीर्घकालिक उछाल का संकेत नहीं थी। अब बाजार का ध्यान फिर से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय संकेतकों पर केंद्रित हो गया है।</div><div><br></div><div>मौजूद आंकड़ों के अनुसार इससे पहले 11 मई 2026 को सोने का हाजिर भाव 1,49,942 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इसके बाद पहली बार कीमतें फिर से 1.50 लाख रुपये के नीचे पहुंची हैं।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर सोने के लिए महत्वपूर्ण सहारा माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत बाधा बना हुआ है। जब तक कीमतें इस स्तर के ऊपर नहीं निकलती हैं, तब तक बाजार की धारणा कमजोर बनी रह सकती है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिकी मुद्रा मजबूत हुई है। इसके पीछे अमेरिका की अपेक्षा से बेहतर आर्थिक स्थिति और मजबूत आंकड़े प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। मजबूत अमेरिकी मुद्रा और ऊंची प्रतिफल दरों वाले ऋण पत्रों ने सोने की मांग को कुछ हद तक प्रभावित किया है। क्योंकि सोना नियमित आय देने वाली संपत्ति नहीं माना जाता है, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के दौर में इसकी आकर्षण क्षमता कम हो जाती है।</div><div><br></div><div>वस्तु बाजार विशेषज्ञ हरीश वी का मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी साबित हो सकती है। उनके अनुसार निवेशक एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी कर सकते हैं। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है।</div><div><br></div><div>फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर टिकी हुई है। यदि आंकड़े अपेक्षा से अधिक आते हैं तो सोने पर दबाव और बढ़ सकता है। वहीं यदि महंगाई नियंत्रित दिखाई देती है तो कीमतों में फिर से स्थिरता लौटने की संभावना बन सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने के बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद की जा रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 22:16:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/double-blow-for-gold-prices-gold-slips-below-the-150-lakh-mark-due-to-profit-booking-and-us-cues</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Power Sector में Adani का 3,050 करोड़ का Mega Deal, IntelliSmart के अधिग्रहण से बदलेगा बाजार का खेल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/adanis-?3050-crore-mega-deal-in-the-power-sector-acquisition-of-intellismart-set-to-change-game]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>देश में स्मार्ट बिजली मीटरों के बढ़ते उपयोग के बीच ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा कारोबारी सौदा सामने आया है। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने स्मार्ट मीटरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का पूर्ण अधिग्रहण करने का फैसला किया है। इस सौदे के बाद अदाणी समूह की कंपनी देश के स्मार्ट मीटर क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की तैयारी में है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए 3,050 करोड़ रुपये का समझौता किया है। यह समझौता 9 जून 2026 को किया गया। इस प्रक्रिया के तहत नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के पास मौजूद वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचरों का भुगतान और मोचन भी शामिल है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि यह अधिग्रहण अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की दीर्घकालिक विस्तार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कंपनी का उद्देश्य स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में अपनी मौजूदगी बढ़ाना और बड़े स्तर पर संचालन के जरिए लागत को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सौदे से परिचालन और रखरखाव संबंधी खर्चों में भी कमी आ सकती है।</div><div><br></div><div>बता दें कि इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर वर्तमान में देश की प्रमुख स्मार्ट मीटर और डिजिटल ऊर्जा समाधान प्रदाता कंपनियों में शामिल है। यह कंपनी नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम के रूप में काम कर रही है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार इंटेलीस्मार्ट उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और असम सहित पांच राज्यों में बड़े स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजनाओं पर काम कर रही है। कंपनी के पास 2.2 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटरों का पोर्टफोलियो है।</div><div><br></div><div>इस अधिग्रहण के बाद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का कुल स्थापित और अनुबंधित स्मार्ट मीटर पोर्टफोलियो 4.7 करोड़ से अधिक हो जाएगा। इससे कंपनी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटरिंग सेवा प्रदाता के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगी।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि भारत सरकार भी बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट मीटर परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। स्मार्ट मीटरों के जरिए बिजली खपत की वास्तविक समय पर निगरानी, बिलिंग में पारदर्शिता और बिजली चोरी पर नियंत्रण जैसे कई लाभ मिलने की उम्मीद की जाती है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश और प्रतिस्पर्धा दोनों तेजी से बढ़ी हैं।</div><div><br></div><div>वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का कारोबार 621.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024 में यह 243.5 करोड़ रुपये था। वहीं वित्त वर्ष 2023 में कंपनी का कारोबार 85 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। यह आंकड़े कंपनी के तेज विस्तार और बढ़ती मांग को दर्शाते हैं।</div><div><br></div><div>बता दें कि यह सौदा अभी नियामकीय मंजूरियों और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के अधीन है। सभी जरूरी अनुमतियां मिलने के बाद इंटेलीस्मार्ट को अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के व्यापक ऊर्जा और आधारभूत ढांचा कारोबार में शामिल कर लिया जाएगा।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र के डिजिटलीकरण और स्मार्ट मीटरिंग की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह अधिग्रहण आने वाले वर्षों में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम साबित हो सकता है। इससे कंपनी को तेजी से बढ़ते स्मार्ट ऊर्जा बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर मिलेगा।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:32:04 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/adanis-?3050-crore-mega-deal-in-the-power-sector-acquisition-of-intellismart-set-to-change-game</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mukesh Ambani का बड़ा ऐलान: Meta के साथ मिलकर Jamnagar बनेगा भारत का नया Global Tech Hub]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/ambanis-major-announcement-jamnagar-to-become-india-new-global-tech-hub-in-partnership-with-meta]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत में एआई और डिजिटल आधारभूत ढांचे को लेकर निवेश की दौड़ लगातार तेज हो रही है। इसी बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल मेटा ने भारत में अपना पहला एआई आधारित डाटा केंद्र स्थापित करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ साझेदारी की है। इस परियोजना को देश के डिजिटल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला डाटा केंद्र विकसित करेगी। इस परियोजना को अगले दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। डाटा केंद्र तैयार होने के बाद मेटा इसे पट्टे पर लेगी और आवश्यकता पड़ने पर इसकी क्षमता को आगे बढ़ाने का विकल्प भी उसके पास रहेगा।</div><div><br></div><div>बता दें कि इस परियोजना में रिलायंस केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी। कंपनी डाटा केंद्र के डिजाइन, निर्माण, ऊर्जा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति, नेटवर्क संपर्क और संचालन संबंधी सेवाओं की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी। वहीं मेटा इस केंद्र के संचालन के लिए आवश्यक ऊर्जा और जल की पूरी लागत वहन करेगी।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि मेटा और रिलायंस के बीच यह सहयोग किसी एक परियोजना तक सीमित नहीं है। वर्ष 2025 में दोनों कंपनियों ने भारत और कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करने के उद्देश्य से एक संयुक्त उद्यम भी शुरू किया था। उस समय दोनों कंपनियों ने कुल 855 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश की घोषणा की थी। इससे पहले वर्ष 2020 में मेटा ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 5.7 अरब डॉलर का निवेश कर लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदी थी।</div><div><br></div><div>रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश डी. अंबानी ने इस साझेदारी को भारत के डिजिटल आधारभूत ढांचे के लिए परिवर्तनकारी क्षण बताया है। उनका कहना है कि जामनगर आने वाले समय में विशाल स्तर की एआई आधारित संगणना का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करेगी।</div><div><br></div><div>जामनगर को इस परियोजना के लिए चुनने के पीछे कई कारण बताए गए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार यहां नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता, पर्याप्त जल संसाधन, समुद्री संचार केबलों की निकटता और जियो के व्यापक प्रकाश तंतु नेटवर्क जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इस केंद्र को नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित किया जाएगा और समुद्री जल को शुद्ध कर शीतलन व्यवस्था के लिए उपयोग किया जाएगा।</div><div><br></div><div>मेटा के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि भारत कंपनी के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण बाजार है। उनके अनुसार जामनगर में बनने वाला यह केंद्र मेटा की वैश्विक एआई क्षमता को मजबूत करेगा और भारत में दीर्घकालिक निवेश को भी बढ़ावा देगा।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि मेटा पिछले कुछ वर्षों से एआई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। कंपनी ने अपने पूंजीगत व्यय के अनुमान को बढ़ाकर 125 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर के बीच कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी नए समझौते किए हैं, जिनके तहत राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में सौर तथा पवन ऊर्जा परियोजनाओं से लगभग एक गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त की जाएगी।</div><div><br></div><div>बता दें कि भारत को वैश्विक डाटा केंद्र और एआई केंद्र बनाने की दिशा में कई बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं। गूगल, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन भी हाल के वर्षों में भारत में अरबों डॉलर के निवेश की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में मेटा और रिलायंस की यह साझेदारी भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:19:24 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/ambanis-major-announcement-jamnagar-to-become-india-new-global-tech-hub-in-partnership-with-meta</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[PM Modi सरकार का दावा, Income Tax में कटौती और बढ़ता Trust ही है 'रामराज्य']]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/india-taxpayer-base-doubles-burden-cut-govt-report]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में आयकर बोझ में आई कमी सरकार की ‘रामराज्य’ की अवधारणा को दर्शाती है। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने के अवसर पर जारी एक सरकारी पुस्तिका में यह बात कही गई है।
 बुधवार को मोदी सरकार की तरफ से जारी इस पुस्तिका के मुताबिक, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), चेहरा-रहित कर व्यवस्था और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों ने सार्वजनिक व्यवस्था में भरोसा बढ़ाया है, जो भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मददगार होगा।
</p><p> प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का लगातार 4,398 दिनों तक पद पर रहने का रिकॉर्ड पार कर लिया। मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार पद संभाला था और 2019 में दोबारा निर्वाचित हुए थे। उनका तीसरा कार्यकाल नौ जून 2024 को शुरू हुआ था।
 मोदी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करने वाली इस पुस्तिका में कहा गयाहै कि करदाताओं के बढ़ते भरोसे से सड़कों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है, जिससे देश के भविष्य को मजबूती मिली है। </p><p>
 पुस्तिका कहती है कि 2014 के बाद आयकर में चार बार राहत दी गई है और कर-मुक्त आय की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर 12.75 लाख रुपये कर दी गई है। इसी अवधि में आयकर दाताओं की संख्या 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ हो गई।
 पुस्तिका के मुताबिक, “जब सरकार की आय बढ़ी, तो वह खजाने में ही नहीं टिकी रही, बल्कि नागरिकों के पास वापस गई।” 
 इसके साथ ही, मोदी सरकार के कार्यकाल में आयकर रिफंड की प्रक्रिया में तेजी से करदाताओं की नकदी उपलब्धता में भी सुधार हुआ है।
</p><p> पुस्तिका में कहा गया,  कर बोझ घटा है और लोगों का भरोसा बढ़ा है। इसका परिणाम यह है कि करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोग देख रहे हैं कि उनका पैसा सड़कों, अस्पतालों और देश के भविष्य पर खर्च हो रहा है। यही सुशासन है और यही ‘रामराज्य’ का संदेश है। 
 सरकार की तरफ से जारी पुस्तिका के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था  पांच नाजुक देशों  (फ्रेजाइल फाइव) की श्रेणी से निकलकर  सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था  बन गई है। इसमें मुद्रास्फीति नियंत्रण, जीएसटी लागू करने और बैंकिंग सुधारों के जरिए फंसा कर्ज (एनपीए) घटाने जैसे सुधारात्मक कदमों को अहम बताया गया है।
</p><p> पुस्तिका के मुताबिक,  सुधारों के 12 वर्ष अब विश्वास के 12 वर्ष बन गए हैं। चाहे जीएसटी हो, चेहरा-रहित कर व्यवस्था हो या डिजिटल इंडिया, हर कदम ने नागरिकों को यह महसूस कराया है कि वे भी राष्ट्र निर्माण में भागीदार हैं। भारत पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की तरफ अग्रसर है। </p><p>यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हर भारतीय के सपनों की उड़ान है। 
 इसके अनुसार, जीएसटी व्यवस्था में सुधार किए जाने के बाद कर संग्रह अप्रैल में 2.42 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने करीब दो लाख करोड़ रुपये का लाभ कमाया।
 पुस्तिका में कहा गया कि मध्यम वर्ग इन सुधारों का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है और घरेलू खपत में करीब दो लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:00:58 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/india-taxpayer-base-doubles-burden-cut-govt-report</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Impact of West Asia Crisis | Equity Mutual Funds निवेश मई में 40% घटा, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/west-asia-crisis-equity-mutual-fund-investments-fell-40-percent-in-may-hitting-a-one-year-low]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में जारी भारी उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट पर देखने को मिल रहा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी - AMFI) द्वारा बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश (Net Inflow) घटकर 22,908 करोड़ रुपये पर आ गया है, जो पिछले एक साल का सबसे निचला स्तर है। यह प्रवाह अप्रैल 2026 में दर्ज किए गए 38,440 करोड़ रुपये के निवेश के मुकाबले 40 प्रतिशत की भारी गिरावट को दर्शाता है। इससे पहले मई 2025 में इक्विटी फंड्स में इससे कम (19,013 करोड़ रुपये) का निवेश देखा गया था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और युद्ध के हालातों को देखते हुए निवेशकों ने फिलहाल आक्रामक निवेश से दूरी बना ली है।</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/bollywood/dhamaal-4-ajay-devgn-announces-new-release-date-film-is-set-to-create-blast-in-cinemas-sooner" target="_blank">Dhamaal 4 New Release Date | Ajay Devgn ने किया नई रिलीज़ डेट का ऐलान, उम्मीद से पहले सिनेमाघरों में मचेगा धमाल</a></h3><div>&nbsp;</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों की राय: इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक एवं व्यापार प्रमुख अंकुर पुंज ने आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश प्रवाह में आई नरमी बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों की अधिक सतर्क भावना को दर्शाती है। वैश्विक घटनाक्रमों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चिंताओं के कारण कई निवेशकों ने नई निवेश राशि लगाने के बजाय 'देखो और इंतजार करो' (Wait and Watch) की रणनीति अपनाई है।"</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/union-cabinet-big-decisions-ahmedabad-metro-amaravati-project" target="_blank">Modi Cabinet Meeting: मोदी के नेतृत्व में बने रिकॉर्डों के लिए कैबिनेट ने पारित किया अभिनंदन प्रस्ताव, कई बड़े फैसले भी लिये गये</a></h3><div><br></div><div>मासिक आधार पर गिरावट के बावजूद एसआईपी, म्यूचुअल फंड उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ बना रहा। मई में एसआईपी की प्रबंधन अधिक परिसंपत्ति बढ़कर 17.12 लाख करोड़ रुपये हो गई जो उद्योग की कुल एयूएम का लगभग 21 प्रतिशत है। म्यूचुअल फंड उद्योग में मई में कुल मिलाकर 64,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध निकासी दर्ज हुई जबकि अप्रैल में 3.22 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। इसकी मुख्य वजह बॉन्ड से जुड़ी योजनाओं से 9600 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी रही। इसके परिणामस्वरूप, उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) मई के अंत में घटकर 81.6 लाख करोड़ रुपये रह गईं, जो एक महीने पहले 81.92 लाख करोड़ रुपये थीं। एम्फी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेंकट चालसानी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताएं और जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) में मामूली गिरावट आई है।&nbsp;</div><div><br></div><div>आंकड़ों के अनुसार, मई में इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश 22,908 करोड़ रुपये रहा। यह अप्रैल में 38,440 करोड़ रुपये, मार्च में 40,450 करोड़ रुपये, फरवरी में 25,978 करोड़ रुपये और जनवरी में 24,028 करोड़ रुपये था। इक्विटी योजनाओं में यह निवेश मई 2025 के बाद सबसे कम है। उस समय इक्विटी म्यूचुअल फंड में 19,013 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक एवं व्यापर प्रमुख अंकुर पुंज ने कहा कि इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश प्रवाह में आई नरमी बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों की अधिक सतर्क भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक घटनाक्रमों विशेष रूप से पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चिंताओं के कारण कई निवेशकों ने नई निवेश राशि लगाने के बजाय देखो और इंतजार करो की रणनीति अपनाई है।</div><div><br></div><div>&nbsp;इक्विटी योजनाओं में ‘फ्लेक्सी-कैप’ फंड में सबसे अधिक 5,175 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, इसके बाद ‘स्मॉल कैप’ फंड में 4,945 करोड़ रुपये और मिड कैप फंड में 4,385 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। लार्ज कैप फंड में तुलनात्मक रूप से कम 1,593 करोड़ रुपये का निवेश आया। दूसरी ओर, लाभांश वाली और इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम(ईएलएसएस) में मई में शुद्ध निकासी देखी गई। इस बीच, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में मई में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई जबकि अप्रैल में इसमें 3,040 करोड़ रुपये का निवेश आया था। यह इस परिसंपत्ति वर्ग में निवेशकों की कम होती रुचि को दर्शाता है।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:10:46 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/west-asia-crisis-equity-mutual-fund-investments-fell-40-percent-in-may-hitting-a-one-year-low</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[NHAI का High-Tech प्लान: अब ऑटोमेटिक मशीनें भरेंगी गड्ढे, National Highway पर सफर होगा शानदार।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/nhai-plan-to-fill-potholes-with-automatic-machines-ensuring-a-smooth-journey-on-national-highways]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के रखरखाव को मजबूत करने के मकसद से मशीनीकृत नाली सफाई, स्वचालित गड्ढा मरम्मत प्रणाली और उन्नत सड़क सफाई प्रौद्योगिकियों को अपनाया है।
एनएचएआई ने मंगलवार को बयान में कहा कि इन पहल का उद्देश्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों, निवारक रखरखाव उपायों और अनुबंध संबंधी दायित्वों के कड़े अनुपालन के माध्यम से एनएच की गुणवत्ता तथा दक्षता में सुधार करना है।</p><p>
बयान में कहा गया है कि इन उपायों से एनएच की गुणवत्ता में सुधार होगा, स्थिरता मजबूत होगी और यात्रियों के सफर का अनुभव सुविधाजनक बनेगा।
एनएचएआई ने कहा कि मशीनीकृत नाला सफाई, स्वचालित गड्ढा भराई प्रणाली और उन्नत सड़क सफाई तकनीकों के उपयोग से परिचालन दक्षता बढ़ेगी, निवारक रखरखाव को मजबूती मिलेगी और देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग करने वाले लोगों को बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 14:31:07 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/nhai-plan-to-fill-potholes-with-automatic-machines-ensuring-a-smooth-journey-on-national-highways</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अनिल अंबानी को बड़ी राहत, Black Money Act केस में Bombay High Court ने लगाई दंडात्मक कार्रवाई पर रोक]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/bombay-hc-halts-action-in-ambani-tax-evasion-case]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>बंबई उच्च न्यायालय ने काला धन अधिनियम के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली उद्योगपति अनिल अंबानी की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें कथित कर चोरी मामले में अभियोजन और जुर्माने जैसी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दे दी है।
 अंबानी ने अपनी याचिका में कहा कि (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के कुछ प्रावधान संविधान के ‘‘अल्ट्रा वायर्स’’ (अर्थात संविधान के अधिकार क्षेत्र से परे/विरोधी) हैं।
</p><p> न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने मंगलवार को अंबानी की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि इस अधिनियम के खिलाफ उच्च न्यायालय में अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं। इस पर अंतिम सुनवाई उचित समय पर की जाएगी।
 अदालत ने केंद्र सरकार को इस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
 उच्च न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि अंबानी के खिलाफ पहले ही आकलन आदेश पारित किया जा चुका है और उन्होंने आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर की है।
</p><p> अदालत ने कहा, ‘‘ उक्त अपील आगे बढ़ सकती है और उस पर आदेश पारित किए जा सकते हैं। हालांकि, हम स्पष्ट करते हैं कि इस रिट याचिका की सुनवाई और अंतिम निपटारे तक याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन और जुर्माने सहित कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।’’
 आयकर विभाग ने आठ अगस्त 2022 को अंबानी को नोटिस जारी कर आरोप लगाया था कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में रखे 814 करोड़ रुपये से अधिक के अघोषित धन पर 420 करोड़ रुपये की कर चोरी की है।
 विभाग के नोटिस के अनुसार, अंबानी पर काले धन कानून की धारा 50 और 51 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। </p><p>इसमें अधिकतम 10 वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
 आयकर विभाग ने अंबानी पर ‘‘जानबूझकर’’ कर चोरी करने का आरोप लगाया है और कहा है कि उन्होंने विदेशी बैंक खातों तथा वित्तीय हितों का विवरण भारतीय कर अधिकारियों को ‘‘जानबूझकर’’ नहीं दिया।
 अंबानी ने अपनी याचिका में दावा किया कि काला धन कानून 2015 में लागू हुआ था, जबकि कथित लेनदेन आकलन वर्ष 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं।
 याचिका में दलील दी गई कि इस कानून के प्रावधानों को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं किया जा सकता।
</p><p> आयकर विभाग के नोटिस के मुताबिक, अंबानी बहामास स्थित ‘डायमंड ट्रस्ट’ नामक इकाई और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थापित ‘नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड (नाटू)’ के ‘‘ आर्थिक योगदानकर्ता तथा लाभकारी स्वामी’’ थे।
 विभाग ने आरोप लगाया कि अंबानी ने इन विदेशी परिसंपत्तियों का खुलासा अपनी आयकर रिटर्न (आईटीआर) में नहीं किया और इस प्रकार काले धन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया।
 कर अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों खातों में अघोषित धन का कुल मूल्य 8,14,27,95,784 रुपये आंका गया है और इस पर देय कर 4,20,29,04,040 रुपये है।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:58:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/bombay-hc-halts-action-in-ambani-tax-evasion-case</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Reliance और Meta की मेगा डील! Jamnagar में बनेगा भारत का सबसे एडवांस AI डेटा सेंटर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/reliance-and-meta-partner-for-168mw-ai-data-center-in-india]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>&nbsp;रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और मेटा प्लेटफॉर्म्स ने गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला डेटा सेंटर विकसित करने के लिए साझेदारी की है। इसे दो वर्षों के भीतर तैयार किया जाएगा। यह जानकारी बुधवार को जारी एक संयुक्त बयान में दी गई।
 बयान के अनुसार, यह भारत में मेटा के लिए पहला ‘बिल्ट-टू-सूट’ डेटा सेंटर होगा। यह भारत के वैश्विक एआई अवसंरचना केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
 इसमें कहा गया है, ‘‘ रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड 168 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करेगी, जिसे दो वर्ष में पूरा किया जाएगा। इसे आगे बढ़ाने का विकल्प भी होगा। मेटा इस सुविधा से क्षमता पट्टे (लीज) पर लेगी।’’
 यह डेटा सेंटर नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगा और समुद्री जल के लवण हटाकर (डिसैलिनेशन) इसका शीतलन किया जाएगा।
</p><p> बयान में कहा गया कि मेटा प्लेटफॉर्म्स भारत में दो प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा प्रदाताओं क्लीनमैक्स और फोर्थ पार्टनर एनर्जी के साथ भी साझेदारी कर रही है। इससे करीब एक गीगावाट (1000 मेगावाट) नवीकरणीय ऊर्जा को समर्थन मिलेगा।
 रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, ‘‘ मेटा के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण है। मेटा जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी के लिए भारत का पहला ‘बिल्ट-टू-सूट’ डेटा सेंटर बनाना इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक एआई क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।’’
 उन्होंने कहा, ‘‘ जामनगर हाइपरस्केल एआई कंप्यूटिंग का एक प्रमुख केंद्र बनेगा और इस दृष्टि को साकार करने के लिए मेटा के साथ साझेदारी पर हमें गर्व है।’’
</p><p> मेटा ने 2020 में जियो प्लेटफ़ॉर्म्स में 5.7 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया था।
 बयान में कहा गया है कि यह डेटा सेंटर मेटा के वैश्विक अवसंरचना की जरूरतों को पूरा करेगा और उसके मुख्य कारोबार एवं एआई कंप्यूटिंग आवश्यकताओं का समर्थन करेगा, जो वैश्विक डिजिटल तथा एआई परिवेश में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
</p><p> यह परियोजना भारत में हाइपरस्केल एआई अवसंरचना के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज को ‘एकल-खिड़की’ समाधान प्रदाता के रूप में स्थापित करती है।
 बयान के अनुसार, गुजरात का यह स्थान बड़े डेटा सेंटर संचालन के लिए कई लाभ प्रदान करता है जिनमें आपूर्ति क्षमता, नवीकरणीय ऊर्जा, जल उपलब्धता, पश्चिमी तट के समुद्री केबल लैंडिंग स्टेशन के नजदीक होना और जियो के व्यापक फाइबर नेटवर्क से जुड़ाव शामिल है।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:52:42 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/reliance-and-meta-partner-for-168mw-ai-data-center-in-india</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Sundar Pichai Birthday: Sundar Pichai ने कैसे Google के CEO बन दुनिया में मनवाया लोहा, पढ़ें पूरी कहानी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/how-sundar-pichai-became-ceo-of-google-and-made-his-mark-in-world-read-full-story]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>आज ही के दिन यानी की 10 जून को दिग्‍गज टेक्‍नोलॉजी कंपनी गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। सुंदर पिचाई ने काबिलियत के दम पर खूब दौलत, शोहरत और नाम कमाया है। साल 2015 में सुंदर पिचाई आईटी कंपनी गूगल के सीईओ बने थे। वह पहले भारतीय मूल के नागरिक थे, जिनको गूगल में सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिली है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर सुंदर पिचाई के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...</div><div><br></div><h2>जन्म और परिवार</h2><div>तमिलनाडु में 10 जून 1972 को सुंदर पिचाई का जन्म हुआ था। उनका असली नाम पिचाई सुंदरराजन है। वह चेन्नई में पले बढ़े हैं और उनके पिता एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। वहीं उनकी मां स्टेनोग्राफर के रूप में काम करती थीं। साल 1993 में वह अमेरिका चले गए और स्टैनफोर्ड से मास्टर डिग्री हासिल की थी।&nbsp; MBA की डिग्री के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के व्हार्टन स्कूल में पढ़ाई की थी।</div><div><br></div><h2>गूगल के सीईओ</h2><div>साल 2004 में सुंदर पिचाई ने गूगल ज्वॉइन किया था। उन्होंने गूगल टूलबार और क्रोम को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ सालों में गूगल क्रोम दुनिया का सबसे पॉपुलर इंटरनेट ब्राउजर बन गया। साल 2014 में पिचाई को गूगल के सभी प्रोडक्ट और प्लेटफॉर्म से जुड़ी जरूरी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। </div><div>&nbsp;</div><div>इस दौरान पिचाई के पास लोकप्रिय प्रॉडक्ट्स जैसे गूगल टूलबार, गैजेट्स, गूगल पैक, क्रोम, डेस्कटॉप सर्च, गूगल गियर्स, फायरफॉक्स एक्सटेंशन आदि चार्ज रहा। फिर साल 2015 में उनको गूगल का सीईओ बनाया गया।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 10:33:54 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/how-sundar-pichai-became-ceo-of-google-and-made-his-mark-in-world-read-full-story</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Market Opening Bell: ग्लोबल संकेतों की कमजोरी के बीच सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, निफ्टी सपाट, रिलायंस में 1.20% की तेजी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/market-opening-bell-sensex-opens-higher-amidst-weak-global-cues-nifty-flat]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>&nbsp;मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को सँभली हुई शुरुआत की। हालांकि ग्लोबल मार्केट के दबाव में निफ्टी की शुरुआत सुस्त रही, लेकिन दिग्गज शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स ने बढ़त के साथ ओपनिंग की। शुरुआती कारोबार में रिलायंस के शेयरों ने 1.20% की छलांग लगाकर बाजार को सहारा दिया।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/cricket/ben-stokes-embroiled-in-another-nightclub-controversy-ecb-launches-investigation-stir-within-team" target="_blank">Ben Stokes फिर Nightclub विवाद में फंसे, ECB ने शुरू की जांच, England टीम में मचा हड़कंप।</a></h3><div>&nbsp;</div><div>आज भारतीय इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स — सेंसेक्स और निफ्टी — की शुरुआत मिली-जुली रही।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;30-शेयर वाला BSE सेंसेक्स 69.51 अंक या 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,988.27 पर खुला, जबकि निफ्टी 8.15 अंक गिरकर 23,233.95 पर खुला। पिछले ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स 73,918.76 पर और निफ्टी 50 23,242.10 पर बंद हुआ था। हालांकि, शुरुआती सेशन में ब्रॉडर इंडेक्स बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे। जहां BSE मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स 8.29 अंक ऊपर था, वहीं BSE स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स 16.27 अंक या 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 8,355.47 पर ट्रेड कर रहा था।</span></div><div><br></div><div>सेंसेक्स पैक में रिलायंस, L&amp;T, ट्रेंट, इंफोसिस और BEL बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे, जिसमें रिलायंस शुरुआती कारोबार में 1.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे आगे था। दूसरी ओर, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, HCL टेक और इंडिगो सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल थे, जिसमें टेक महिंद्रा 0.71 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा गिरा।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/sports/french-open-2026-alexander-zverevs-years-long-wait-ends-wins-first-grand-slam-title" target="_blank">French Open 2026: Alexander Zverev का सालों का इंतजार खत्म, जीता पहला Grand Slam खिताब</a></h3><div><br></div><div>शुरुआती कारोबार में मार्केट का रुख पॉजिटिव था, जिसमें NSE पर 1,601 शेयरों में बढ़त और 690 शेयरों में गिरावट देखी गई। 118 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।</div><div><br></div><div><b>गिफ्ट निफ्टी ने क्या संकेत दिया?</b></div><div>निफ्टी 50 के लिए शुरुआती संकेत देने वाले गिफ्ट निफ्टी ने सपाट से नेगेटिव शुरुआत का संकेत दिया, क्योंकि यह पिछले बंद भाव 23,184.50 की तुलना में 21.5 अंक की गिरावट के साथ 23,206 पर खुला। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने ज़ोरदार बिकवाली जारी रखी और 9 जून को 4,566.03 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) लगातार खरीदारी करते रहे और उन्होंने 6,159.48 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर विदेशी बिकवाली के दबाव का एक बड़ा हिस्सा संभाल लिया।</div><div><br></div><div>SEBI-रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और Livelong Wealth के फाउंडर हरिप्रसाद K ने कहा, "FII की लगातार बिकवाली, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ग्लोबल ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता के कारण रिस्क लेने की इच्छा सीमित बनी हुई है। US CPI डेटा आने से पहले निवेशक सतर्क रह सकते हैं, क्योंकि यह डेटा ग्लोबल मार्केट की अगली दिशा तय कर सकता है।"</div><div><br></div><div><b>आज एशियाई बाज़ार</b></div><div>बुधवार को एशियाई शेयरों में गिरावट आई क्योंकि ईरान पर US के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ गईं। मंगलवार को US बाज़ार गिरावट के साथ बंद हुए क्योंकि एक दिन की मामूली रिकवरी के बाद चिप शेयरों में तेज़ी कम हो गई। रिपोर्ट लिखे जाने के समय जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1,026.63 अंक या 1.57 प्रतिशत गिरकर 64,390 पर था। इसी तरह, हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 292.90 अंक या 1.19 प्रतिशत नीचे था। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 376.20 अंक की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहा था। इसी तरह, शंघाई का SSE कम्पोजिट इंडेक्स 23.37 अंक या 0.58 प्रतिशत नीचे था।</div>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 10:04:33 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/market-opening-bell-sensex-opens-higher-amidst-weak-global-cues-nifty-flat</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Share Market में तेजी लेकिन Dollar के आगे Rupee पर दबाव, 95.56 के स्तर पर आया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/stock-market-rallies-but-rupee-under-pressure-against-the-dollar-slips-to-the-9556-level]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>पश्चिम एशिया संकट बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच रुपया बुधवार को शुरुआती कारोबार में 15 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.56 पर आ गया।
 अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.52 प्रति डॉलर पर खुला। इसके बाद गिरावट के साथ शुरुआती कारोबार में 95.56 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 15 पैसे की गिरावट दर्शाता है।
 रुपया मंगलवार को 20 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.41 पर बंद हुआ था।
</p><p> इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.94 पर रहा।
 घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 303.73 अंक चढ़कर 74,222.49 अंक पर जबकि निफ्टी 85.40 अंक की बढ़त के साथ 23,327.50 अंक पर रहा।
</p><p> अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ 92.12डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।
 शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने 4,566.03 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 10:02:39 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/stock-market-rallies-but-rupee-under-pressure-against-the-dollar-slips-to-the-9556-level</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Air India का 'Hub and Spoke' मॉडल लॉन्च, अब Varanasi से International Travel होगा आसान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/air-india-hub-and-spoke-model-launched-international-travel-from-varanasi-will-now-be-super-easy]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>एयर इंडिया ने मंगलवार को केंद्र सरकार के ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के तहत अपनी उड़ानों के लिए बुकिंग शुरू की। इस मॉडल के तहत पहली उड़ान सेवा 25 जून को वाराणसी से शुरू होगी।
 ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के तहत, वाराणसी जैसे मझोले यानी  स्पोक  शहरों को दिल्ली जैसे बड़े यानी  हब  हवाई अड्डे से जोड़ा जाता है, जहां से यात्री एयर इंडिया के बड़े वैश्विक नेटवर्क का आसानी से लाभ उठा सकते हैं।</p><p>
 एयर इंडिया ने बयान में कहा कि ‘ईजी कनेक्ट  उड़ानों के तौर पर शुरू की गई ये सेवाएं यात्रियों को बड़े केंद्र से दूर छोटे शहरों से भी अपना सामान जमा करने और शुरुआती एयरपोर्ट पर ही आव्रजन की प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा देती हैं, ताकि वे दुनिया भर में आसानी से यात्रा कर सकें।
 एयर इंडिया ने कहा कि इस व्यवस्था से मझोले शहरों के यात्री एक ही ‘हब’ के जरिये कई अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इसमें आसान पारगमन का अनुभव मिलेगा।
 एयरलाइन ने कहा कि वह आने वाले महीनों में कई शहरों में  ईजी कनेक्ट  उड़ानों को चरणबद्ध तरीके से शुरू करेगी, ताकि भारत के मझोले और छोटे शहरों से बड़े पैमाने पर आसान अंतरराष्ट्रीय संपर्क सुविधा मिल सके।
</p><p> इस सुविधा के तहत यात्री अपनी अंतिम मंजिल तक के लिए ‘थ्रू चेक-इन’ कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, वाराणसी जैसे शहर के यात्री अपने शहर के हवाई अड्डे पर ही अपनी अंतिम अंतरराष्ट्रीय गंतव्य तक के लिए चेक-इन कर सकते हैं। उन्हें दिल्ली जैसे हवाई अड्डे पर अपना सामान लेने या दोबारा चेक-इन करने की जरूरत नहीं होगी।
 साथ ही, यात्री अपने शुरुआती एयरपोर्ट पर ही अंतरराष्ट्रीय आव्रजन की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे, जिससे उन्हें ‘हब’ यानी बढ़े शहर के हवाई अड्डे पर लंबी लाइन और प्रसंस्करण से नहीं गुजरना पड़ेगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 09:35:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/air-india-hub-and-spoke-model-launched-international-travel-from-varanasi-will-now-be-super-easy</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[TCS में Layoffs पर लगी ब्रेक! N. Chandrasekaran बोले- छंटनी नहीं, एआई है सबसे बड़ा अवसर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/layoffs-halted-at-tcs-n-chandrasekaran-says-no-layoffs-ai-is-the-biggest-opportunity]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस ने अपने कर्मचारियों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। कंपनी के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया है कि कंपनी में कर्मचारियों की संख्या घटाने या बड़े पैमाने पर छंटनी की कोई योजना नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में पहले की तरह बड़े स्तर पर परिसर भर्ती का दौर शायद देखने को न मिले।</div><div><br></div><div>टीसीएस की 31वीं वार्षिक आम बैठक के दौरान एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी का ध्यान सही प्रतिभा को जोड़ने पर है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कर्मचारियों की संख्या कम करने की कोई योजना नहीं है। उनका कहना था कि कंपनी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल और योग्य लोगों की आवश्यकता है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में टीसीएस के कुल कर्मचारियों की संख्या में 23,460 की कमी दर्ज की गई है। इसके बाद कंपनी का कुल कार्यबल लगभग 5.84 लाख कर्मचारियों का रह गया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि यह किसी छंटनी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है, बल्कि कार्यबल की स्वाभाविक संरचना में बदलाव का परिणाम है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि हाल के महीनों में एआई को लेकर वैश्विक स्तर पर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक आने वाले वर्षों में लाखों नौकरियों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन टीसीएस अध्यक्ष ने इस धारणा से असहमति जताई है।</div><div><br></div><div>एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि एआई सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए खतरा नहीं बल्कि अब तक का सबसे बड़ा अवसर है। उनके अनुसार कंपनी आंतरिक कार्यों, ग्राहकों के लिए समाधान तैयार करने और विभिन्न व्यावसायिक प्रक्रियाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहायक प्रणालियों का उपयोग बढ़ा रही है।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि भविष्य में कर्मचारी और एआई आधारित प्रणालियां मिलकर काम करेंगी। यही कार्य संस्कृति आने वाले समय की पहचान बनेगी। उनका मानना है कि इस तकनीक के कारण नए प्रकार के रोजगार और नई विशेषज्ञताओं की मांग पैदा होगी, जिससे प्रतिभाशाली युवाओं के लिए अवसर भी बढ़ेंगे।</div><div><br></div><div>बता दें कि कंपनी की एआई से जुड़ी वार्षिक आय पिछले तिमाही में लगभग 2.5 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गई है। चंद्रशेखरन ने अनुमान जताया कि वर्ष 2028 से 2030 के बीच कंपनी की लगभग पूरी आय में किसी न किसी रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का योगदान होगा।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग ने वह उपलब्धि हासिल की है, जिसे कभी असंभव माना जाता था। भारत की कंपनियों ने नई तकनीकों को अपनाकर दुनिया की बड़ी संस्थाओं के लिए भरोसेमंद और जवाबदेह समाधान तैयार किए हैं। यही कारण है कि भारतीय उद्योग ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि पिछले वर्ष के अंत में जब एआई आधारित स्वचालित प्रणालियों की क्षमता तेजी से बढ़ी, तब वैश्विक निवेशकों के बीच चिंता पैदा हो गई थी। इससे कई तकनीकी कंपनियों के शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली थी। हालांकि टीसीएस अध्यक्ष का कहना है कि वास्तविक कारोबारी स्थिति मजबूत बनी हुई है। मुनाफा, आय और नए अनुबंधों की स्थिति पहले से बेहतर है।</div><div><br></div><div>उन्होंने कहा कि एआई केवल काम का बोझ कम करने वाली तकनीक नहीं है, बल्कि यह एक नई तरह का बौद्धिक आधारभूत ढांचा है, जो आने वाले वर्षों में उद्योगों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है। इसी वजह से टीसीएस इसे चुनौती नहीं बल्कि एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 22:44:14 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/layoffs-halted-at-tcs-n-chandrasekaran-says-no-layoffs-ai-is-the-biggest-opportunity</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Indian Economy के लिए बड़ी खुशखबरी, Experts के अनुमान फेल, 7.1 अरब डॉलर का Current Account Surplus]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/great-news-for-indian-economy-expert-estimates-defied-with-a-71-billion-current-account-surplus]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान देश के चालू खाते में 7.1 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया है। यह सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.7 प्रतिशत है। हालांकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह अधिशेष 13.7 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 1.4 प्रतिशत था, फिर भी अधिकांश अर्थशास्त्रियों के अनुमान के विपरीत इस बार घाटे की जगह अधिशेष (सरप्लस) दर्ज होना इस वक्त चर्चा में है।</div><div><br></div><div>बता दें कि चालू खाते का आंकड़ा किसी देश के विदेशों के साथ व्यापार, सेवाओं, निवेश आय और विदेशों से आने वाले धन के प्रवाह की स्थिति को दर्शाता है। आमतौर पर जब आयात निर्यात से काफी अधिक हो जाता है तो चालू खाते में घाटा देखने को मिलता है। ऐसे में अधिशेष का दर्ज होना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जाता है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार इस बार सबसे बड़ा योगदान विदेशों में काम कर रहे भारतीयों द्वारा भेजी गई धनराशि का रहा है। जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान प्रवासी भारतीयों से प्राप्त धनराशि में सालाना आधार पर 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़कर 41.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यही कारण रहा कि कई विशेषज्ञों के घाटे के अनुमान के बावजूद चालू खाते में अधिशेष दर्ज किया जा सका है।</div><div><br></div><div>भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रारंभिक भुगतान संतुलन आंकड़ों के अनुसार चौथी तिमाही में देश का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 83.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 59.3 अरब डॉलर था। इसका मुख्य कारण आयात में तेज वृद्धि रही है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि इस दौरान देश का आयात बढ़कर 196.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात लगभग स्थिर रहकर 113.1 अरब डॉलर पर बना रहा है। आयात और निर्यात के बीच बढ़ते अंतर ने व्यापार घाटे को और अधिक बढ़ा दिया है।</div><div><br></div><div>हालांकि व्यापार घाटे में इस वृद्धि की भरपाई आंशिक रूप से सेवा क्षेत्र की मजबूत कमाई और विदेशों से आने वाली धनराशि ने की है। सेवा क्षेत्र से शुद्ध प्राप्तियां बढ़कर 60.4 अरब डॉलर हो गई हैं, जो एक वर्ष पहले 53.3 अरब डॉलर थीं। इसमें विशेष रूप से संगणक सेवाओं और अन्य व्यावसायिक सेवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजी गई व्यक्तिगत धनराशि भी बढ़कर 43.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 33.9 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया, उत्तरी अमेरिका और अन्य देशों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों की बढ़ती आय इसका प्रमुख कारण हो सकती है।</div><div><br></div><div>निवेश आय से संबंधित प्राथमिक आय खाते का घाटा भी कुछ कम हुआ है। यह घटकर 11.1 अरब डॉलर रह गया है, जबकि एक वर्ष पहले यह 11.9 अरब डॉलर था।</div><div><br></div><div>कैपिटल फ्लो के मोर्चे पर भी कुछ सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शुद्ध प्रवाह बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह केवल 0.4 अरब डॉलर था। दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जो एक वर्ष पहले 5.9 अरब डॉलर थी।</div><div><br></div><div>इसके अलावा अनिवासी भारतीय जमा खातों में 3.3 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया है। वहीं बाहरी वाणिज्यिक उधार के माध्यम से आने वाली शुद्ध राशि घटकर 3.6 अरब डॉलर रह गई है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते व्यापार घाटे के बावजूद सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों से आने वाली मजबूत धनराशि फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था को संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 20:00:58 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/great-news-for-indian-economy-expert-estimates-defied-with-a-71-billion-current-account-surplus</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[SpaceX IPO की आहट से निवेशकों में उत्साह, जानिए भारतीय कैसे उठा सकते हैं इस मौके का फायदा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/anticipation-of-a-spacex-ipo-sparks-excitement-globally-find-out-how-indians-can-capitalize-on-this]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>दुनिया की सबसे चर्चित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल स्पेसएक्स के संभावित शेयर बाजार प्रवेश को लेकर निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। एलन मस्क की इस कंपनी को लंबे समय से निजी क्षेत्र की सबसे मूल्यवान कंपनियों में गिना जाता रहा है और अब इसके आईपीओ को लेकर वैश्विक निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी का संभावित मूल्यांकन करीब 1.75 लाख करोड़ डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशक इस अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं। बाजार से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक शेयरों की मांग उपलब्ध हिस्सेदारी से अधिक बताई जा रही है, जिससे इस आईपीओ को लेकर उत्साह और बढ़ गया है।</div><div><br></div><div>बता दें कि स्पेसएक्स अंतरिक्ष प्रक्षेपण, उपग्रह सेवाओं और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में काम करती है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इसी कारण निवेशकों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है।</div><div><br></div><div>रिपोर्टों के अनुसार कंपनी ने इस बार सामान्य निवेशकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा सुरक्षित रखने की योजना बनाई है। आमतौर पर बड़े आईपीओ में संस्थागत निवेशकों का दबदबा रहता है, लेकिन इस बार छोटे निवेशकों को भी भागीदारी का अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी का कारोबार एसपीसीएक्स संकेत नाम के तहत सूचीबद्ध हो सकता है। इच्छुक निवेशकों को आवेदन करने के लिए किसी अधिकृत दलाली मंच पर खाता होना आवश्यक होगा। इसके अलावा संबंधित प्लेटफार्म द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को भी पूरा करना होगा।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि केवल रुचि दर्ज कराने से शेयर मिलने की गारंटी नहीं होगी। अंतिम मूल्य निर्धारण और आवंटन प्रक्रिया के बाद ही यह तय होगा कि किस निवेशक को कितने शेयर मिलेंगे। विभिन्न ब्रोकरेज प्लेटफार्मों के नियम भी अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ मंच न्यूनतम राशि या खाते में निश्चित धनराशि की शर्त रखते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जहां ऐसी बाध्यता नहीं होती है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों ने निवेशकों को यह भी सलाह दी है कि सूचीबद्ध होने के तुरंत बाद जल्दबाजी में शेयर बेचने से बचना चाहिए। कुछ मंचों ने चेतावनी दी है कि बहुत कम समय में शेयर बेचने वाले निवेशकों पर भविष्य के सार्वजनिक निर्गमों में भागीदारी को लेकर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।</div><div><br></div><div>बता दें कि यह अवसर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रह सकता है। कंपनी ने संकेत दिया है कि कई देशों के पात्र निवेशक स्थानीय नियमों और शर्तों के अनुसार इसमें भाग ले सकते हैं। हालांकि प्रत्येक देश के नियम अलग-अलग हैं और निवेशकों को आवेदन से पहले अपने देश के नियमों की जानकारी लेना आवश्यक होगा। भारत भी उन देशों में शामिल बताया जा रहा है जहां पात्र निवेशकों को भागीदारी का अवसर मिल सकता है।</div><div><br></div><div>यदि किसी निवेशक को आईपीओ में शेयर नहीं मिलते हैं, तब भी उसके लिए निवेश का रास्ता खुला रहेगा। सूचीबद्ध होने के बाद खुले बाजार में शेयर खरीदे जा सकेंगे। हालांकि शुरुआती दिनों में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अवसरों के साथ जोखिमों को भी समझना चाहिए। कंपनी का मूल्यांकन काफी ऊंचे स्तर पर माना जा रहा है, जिससे भविष्य में प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहने पर दबाव बन सकता है। इसके अलावा अंतरिक्ष प्रक्षेपण, उपग्रह तैनाती, भारी पूंजी निवेश और नियामकीय बदलाव जैसे कारक भी कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि स्पेसएक्स का संभावित आईपीओ हाल के वर्षों के सबसे चर्चित बाजार प्रवेशों में से एक माना जा रहा है। ऐसे में निवेशकों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं, लेकिन किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम और संभावनाओं दोनों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना आवश्यक माना जा रहा है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 19:15:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/anticipation-of-a-spacex-ipo-sparks-excitement-globally-find-out-how-indians-can-capitalize-on-this</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Air India का बड़ा दांव! 'No-Meal' टिकट से सस्ता होगा हवाई सफर, जानें कंपनी का पूरा Business Plan]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/air-indias-bold-move-no-meal-tickets-to-make-air-travel-cheaper-here-company-full-business-plan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>हवाई यात्रा को अधिक किफायती बनाने की दिशा में एक नया कदम उठाया जा सकता है। देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया अपने यात्रियों के लिए एक नई टिकट श्रेणी शुरू करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत यात्रा के दौरान भोजन नहीं लेने वाले यात्रियों को कम कीमत पर टिकट उपलब्ध कराया जा सकता है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यदि इस योजना को मंजूरी मिलती है तो शुरुआत में यह सुविधा केवल घरेलू उड़ानों के यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर फिलहाल ऐसी किसी व्यवस्था पर विचार नहीं किया जा रहा है।</div><div><br></div><div>बता दें कि वर्तमान समय में एयर इंडिया घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों में यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है। हालांकि सभी यात्री यात्रा के दौरान भोजन का उपयोग नहीं करते हैं। कई यात्री छोटी अवधि की उड़ानों में भोजन लेने से बचते हैं या अपनी सुविधा के अनुसार पहले से भोजन कर यात्रा करते हैं। ऐसे यात्रियों को ध्यान में रखते हुए कंपनी यह नया विकल्प लाने पर विचार कर रही है।</div><div><br></div><div>सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यात्री टिकट बुक करते समय भोजन रहित विकल्प का चयन कर सकेंगे। इस श्रेणी के टिकट की कीमत सामान्य टिकट की तुलना में कम हो सकती है। इसका उद्देश्य उन यात्रियों को लाभ देना है जो केवल यात्रा करना चाहते हैं और भोजन सुविधा के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं करना चाहते हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में विमानन क्षेत्र में यात्रियों को अधिक विकल्प देने की प्रवृत्ति बढ़ी है। विभिन्न विमानन कंपनियां पहले से ही अतिरिक्त सामान, पसंदीदा सीट, प्राथमिकता चढ़ाई और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क आधारित विकल्प उपलब्ध करा रही हैं। ऐसे में भोजन रहित टिकट श्रेणी को भी इसी दिशा में एक नया प्रयोग माना जा रहा है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार एयर इंडिया इस योजना की शुरुआत चुनिंदा छोटी दूरी वाले घरेलू मार्गों पर कर सकती है। कंपनी पहले सीमित स्तर पर इस सुविधा का परीक्षण करना चाहती है। इसके बाद यात्रियों की प्रतिक्रिया और मांग के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।</div><div><br></div><div>यदि यात्रियों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो इस विकल्प का विस्तार अन्य घरेलू मार्गों पर भी किया जा सकता है। वहीं यदि अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती है तो कंपनी इसकी उपलब्धता सीमित रखने का फैसला भी कर सकती है।</div><div><br></div><div>बता दें कि भारतीय विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कंपनियां यात्रियों को आकर्षित करने और उन्हें अधिक लचीले विकल्प देने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही हैं। कम लागत में यात्रा की मांग भी लगातार बढ़ रही है, विशेषकर उन यात्रियों के बीच जो नियमित रूप से हवाई यात्रा करते हैं।</div><div><br></div><div>विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन रहित टिकट श्रेणी उन यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है जो कम दूरी की उड़ानों में अतिरिक्त सेवाओं की आवश्यकता महसूस नहीं करते हैं। इससे यात्रियों को अपनी जरूरत और बजट के अनुसार टिकट चुनने का मौका मिलेगा।</div><div><br></div><div>हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। कंपनी की मंजूरी और परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नई व्यवस्था कब से लागू होगी और इससे यात्रियों को कितनी लागत बचत का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल विमानन क्षेत्र में इस प्रस्ताव को एक महत्वपूर्ण और उपभोक्ता केंद्रित पहल के रूप में देखा जा रहा है।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:50:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/air-indias-bold-move-no-meal-tickets-to-make-air-travel-cheaper-here-company-full-business-plan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Iran-Israel टेंशन घटते ही झूमा Share Market, Sensex में 394 अंकों का शानदार उछाल]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/stock-market-rebounds-banks-lead-sensex-surge]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>&nbsp;घरेलू शेयर बाजार में पिछले दो कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट मंगलवार को थम गई और दोनों मानक सूचकांक चढ़कर बंद हुए। इजराइल एवं ईरान के बीच तनाव कम होने और दुनिया के अन्य शेयर बाजारों में तेजी से सेंसक्स 394 अंक चढ़ा जबकि निफ्टी 119 अंक की बढ़त में रहा।
 विश्लेषकों ने कहा कि बैंक शेयरों में तेजी और कच्चे तेल के दाम में नरमी से भी बाजार धारणा मजबूत हुई है।
 बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में 394.50 अंक यानी 0.54 प्रतिशत बढ़कर 73,918.76 अंक पर बंद हुआ।</p><p> कारोबार के दौरान एक समय यह 511.15 अंक तक चढ़ गया था।
 एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 119.10 अंक यानी 0.52 प्रतिशत बढ़कर 23,242.10 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान मानक सूचकांक 156.4 अंक तक चढ़ गया था।
 सेंसेक्स की कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स प्रमुख रूप से लाभ में रहीं।
 दूसरी तरफ, नुकसान में रहने वाले शेयरों में टाइटन, एनटीपीसी, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा शामिल हैं।
 ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और जोखिम वाली संपत्ति में सुधार हुआ, जिससे भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए।’’
</p><p> उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक बाजारों में भी तेजी रही। इसका कारण वैश्विक स्तर पर जोखिम कम होना, तेल की कीमतों में नरमी और प्रौद्योगिकी तथा एआई क्षेत्र को लेकर नई उम्मीद है।’’
 व्यापक बाजार में मझोली कंपनियों का बीएसई मिडकैप सूचकांक 1.50 प्रतिशत उछल गया जबकि छोटी कंपनियों के स्मालकैप सूचकांक में 1.33 प्रतिशत की तेजी रही।
 क्षेत्रवार सूचकांकों में पीएसयू बैंक में 83 प्रतिशत, बैंकिंग सूचकांक में 2.18 प्रतिशत, सेवा खंड में दो प्रतिशत और रियल्टी खंड में 1.76 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। 
 बीएसई पर सूचीबद्ध कुल 2,782 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए जबकि 1,423 शेयरों में गिरावट रही और 193 अन्य अपरिवर्तित रहे।</p><p>
 जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा,  घरेलू बाजार हाल में आई तेज गिरावट से उबरने की कोशिश कर रहा है। इसमें इजराइल-ईरान तनाव में कमी आने और कच्चे तेल में नरमी की अहम भूमिका रही। लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी जारी रहने और उच्च बॉन्ड प्रतिफल से जुड़ी चिंताएं बरकरार हैं। 
 शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 5,555.67 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
</p><p> इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.66 प्रतिशत गिरकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
 एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और चीन का शंघाई कम्पोजिट बढ़त के साथ बंद हुए। हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहा।
 यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में बढ़त का रुख था। अमेरिकी बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे।
 सेंसेक्स सोमवार को 719.08 अंक टूटा था जबकि निफ्टी में 243.70 अंक की गिरावट आई थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:13:43 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/stock-market-rebounds-banks-lead-sensex-surge</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Best Shares for Long Term | शेयर बाजार में निवेश के लिए सदाबहार कंपनियां: मजबूत फंडामेंटल और सुरक्षित रिटर्न का फॉर्मूला]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/evergreen-companies-for-stock-market-investment-formula-for-strong-fundamentals-safe-returns]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश करना संपत्ति बनाने (Wealth Creation) का एक बेहतरीन जरिया है। लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए हर निवेशक, खासकर शुरुआती लोग, ऐसी कंपनियों की तलाश में रहते हैं जो सुरक्षित हों और लगातार अच्छा रिटर्न दे सकें।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">शेयर बाजार के दिग्गजों का मानना है कि निवेश हमेशा उन कंपनियों में करना चाहिए जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत हो, जिन पर कर्ज कम हो और जिनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा हो। इन्हें आमतौर पर लार्ज-कैप (Large-Cap) या ब्लूचिप (Blue-chip) कंपनियां कहा जाता है।</span></div><div><br></div><div>आइए जानते हैं भारत की उन चुनिंदा और भरोसेमंद कंपनियों के बारे में, जिन्हें लंबी अवधि के निवेश के लिए सुरक्षित और बेहतरीन माना जाता है।</div><div><br></div><div><b>1. आईटी सेक्टर की रीढ़: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)</b></div><div>टाटा ग्रुप की यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की दिग्गज आईटी सर्विस कंपनियों में से एक है।</div><div><br></div><div>क्यों निवेश करें: टीसीएस का ट्रैक रिकॉर्ड डिविडेंड (लाभांश) देने और लगातार ग्रोथ दिखाने में बेहतरीन रहा है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एआई (AI) के इस दौर में कंपनी के पास मजबूत ग्लोबल डील्स हैं। अगर आप सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहते हैं, तो यह एक परफेक्ट चॉइस है।</div><div><br></div><div><b>2. बैंकिंग सेक्टर का लीडर: एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank)</b></div><div>प्राइवेट सेक्टर का यह सबसे बड़ा बैंक भारतीय बैंकिंग प्रणाली का पावरहाउस है।</div><div><br></div><div>क्यों निवेश करें: मजबूत लोन बुक, शानदार मैनेजमेंट और बेहतरीन एसेट क्वालिटी के कारण एचडीएफसी बैंक को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह बैंक हमेशा से वेल्थ क्रिएटर रहा है।</div><div><br></div><div><b>3. एनर्जी और रिटेल की महाशक्ति: रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries Ltd.)</b></div><div>मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज केवल तेल और पेट्रोकेमिकल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह जियो (Telecom) और रिलायंस रिटेल (Retail) के जरिए देश के हर घर तक पहुंच चुकी है।</div><div><br></div><div>क्यों निवेश करें: कंपनी का भविष्य के बिजनेस जैसे ग्रीन एनर्जी, 5G और ई-कॉमर्स पर बड़ा फोकस है। इसका डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल इसे किसी भी आर्थिक मंदी से सुरक्षित रखता है।</div><div><br></div><div><b>4. एफएमसीजी का बेताज बादशाह: हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL)</b></div><div>लक्स, सर्फ एक्सेल, व्हील, ब्रुक बॉन्ड और हॉर्लिक्स जैसे ब्रांड्स बनाने वाली यह कंपनी भारत के एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर की लीडर है।</div><div><br></div><div>क्यों निवेश करें: लोग मंदी में कार या फोन खरीदना टाल सकते हैं, लेकिन साबुन, तेल और चाय जैसी जरूरी चीजें खरीदना बंद नहीं कर सकते। इसलिए, इस कंपनी का बिजनेस बेहद स्थिर रहता है और यह निवेशकों को लगातार सुरक्षित रिटर्न और डिविडेंड देती है।</div><div><br></div><div><b>5. इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की जान: लार्सन एंड टुब्रो (L&amp;T)</b></div><div>भारत में जब भी किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (जैसे मेट्रो, बुलेट ट्रेन, हाईवे या बड़े ब्रिज) की बात आती है, तो एलएंडटी का नाम सबसे पहले आता है।</div><div><br></div><div>क्यों निवेश करें: भारत सरकार का पूरा फोकस इस समय देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर है। कंपनी के पास भारी-भरकम ऑर्डर बुक है, जो अगले कई सालों तक इसकी मजबूत कमाई की गारंटी देती है।</div><div><br></div><div><b>निवेश करने से पहले ध्यान रखने योग्य 'गोल्डन रूल्स'</b></div><div><b>1. विविधीकरण (Diversification): </b>कभी भी अपना सारा पैसा एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में न लगाएं। अपने पोर्टफोलियो में आईटी, बैंकिंग, एफएमसीजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों को शामिल करें।</div><div><br></div><div><b>2. लंबी अवधि का नजरिया (Long-term Vision):</b> शेयर बाजार में रातों-रात अमीर बनने की सोच नुकसान पहुंचा सकती है। अच्छी कंपनियों में कम से कम 3 से 5 साल या उससे अधिक समय के लिए निवेश करें, ताकि आपको कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) का फायदा मिल सके।</div><div><br></div><div><b>3. एसआईपी (SIP) का रास्ता चुनें: </b>यदि आपके पास एकमुश्त बड़ी रकम नहीं है, तो आप हर महीने एक निश्चित राशि (जैसे 1000 या 5000 रुपये) इन अच्छी कंपनियों में 'स्टॉक एसआईपी' के जरिए निवेश कर सकते हैं।</div><div><br></div><div><b>निष्कर्ष: </b>शेयर बाजार में 'सबसे अच्छी कंपनी' वह होती है जो वक्त के साथ अपने बिजनेस को बढ़ाती रहे और जिसके प्रमोटर्स ईमानदार हों। ऊपर बताई गई कंपनियां भारत की विकास गाथा (India Growth Story) का अहम हिस्सा हैं। हालांकि, बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से चर्चा जरूर कर लें।</div>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:20:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/evergreen-companies-for-stock-market-investment-formula-for-strong-fundamentals-safe-returns</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Zepto IPO पर Promoters का बड़ा भरोसा, 11,000 करोड़ के इश्यू में नहीं बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/promoters-have-great-confidence-in-zepto-ipo]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>&nbsp;क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो के सह-संस्थापक आदित पलिचा एवं कैवल्य वोहरा जैसे प्रवर्तक कंपनी के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में अपनी कोई भी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे। हालांकि शुरुआती निवेशक और उद्यम पूंजी कोष इस निर्गम में करीब 11.35 करोड़ शेयरों की बिक्री करेंगे।
 कंपनी ने आईपीओ की मंजूरी के लिए सोमवार को बाजार नियामक सेबी के पास अपना अद्यतन मसौदा दस्तावेज दाखिल किया। </p><p>आईपीओ में कंपनी 8,010 करोड़ रुपये की नई शेयर बिक्री के जरिए पूंजी जुटाएगी, जबकि खुली पेशकश (ओएफएस) के जरिए भी शेयर बेचे जाएंगे। 
 निर्गम का कुल आकार करीब 11,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस आईपीओ को जुलाई में लाए जाने की संभावना है।
 मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, प्रवर्तक समूह के पास मौजूद 18.47 प्रतिशत हिस्सेदारी में से कोई भी हिस्सा बिक्री के लिए नहीं रखा जाएगा। सबसे बड़ा हिस्सा नैक्सस वेंचर्स बेचने जा रहा है, जो 8.77 करोड़ से अधिक शेयर बेचेगा।
</p><p> कंपनी के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जेप्टो का राजस्व 22,623.58 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले के दोगुने से अधिक है। हालांकि इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध घाटा बढ़कर 5,905.19 करोड़ रुपये हो गया।
 जनवरी-मार्च तिमाही में जेप्टो का राजस्व 75 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 7,497.64 करोड़ रुपये हो गया, जबकि घाटा कम होकर 1,538.67 करोड़ रुपये रहा।</p><p>
 कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 64 करोड़ ऑर्डर पूरे किए, जबकि दैनिक औसत 17 लाख से अधिक ऑर्डर का रहा। मार्च 2026 तक कंपनी के वार्षिक उपयोगकर्ताओं की संख्या 4.79 करोड़ हो गई जबकि इसके स्टोर बढ़कर 1,139 हो गए।</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:52:35 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/promoters-have-great-confidence-in-zepto-ipo</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Dollar के मुकाबले Rupee में 20 पैसे की मजबूती, Crude Oil में नरमी से मिली बड़ी राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-strengthens-by-20-paise-against-the-dollar-easing-crude-oil-prices-provide-major-relief]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर सूचकांक में नरमी के बीच मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 20 पैसे मजबूत होकर 95.41 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
 विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, इजराइल और ईरान के बीच तनाव में नरमी के संकेतों के बाद बाजार धारणा में सुधार देखा गया, जिससे रुपये को समर्थन मिला।
 अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.47 पर खुला और बाद में 95.41 तक पहुंच गया। </p><p>यह पिछले बंद स्तर की तुलना में 20 पैसे की बढ़त दर्शाता है।
 सोमवार को रुपया 43 पैसे कमजोर होकर 95.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
 विश्लेषकों के अनुसार, निकट अवधि में रुपये के 95.40 से 95.80 प्रति डॉलर के दायरे में रहने की संभावना है। हालांकि इसमें हल्का कमजोर रुख रह सकता है।
 आईएफए ग्लोबल ने एक शोध रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों के चलते रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
 इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.98 पर आ गया।
</p><p> वैश्विक तेल बाजार में भी नरमी देखी गई। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.99 प्रतिशत गिरकर 93.32 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
 घरेलू शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार में तेजी देखी गई। सेंसेक्स 350.57 अंक चढ़कर 73,874.83 पर और निफ्टी 114.50 अंक बढ़कर 23,237.50 पर पहुंच गया।
 विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 5,555.67 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।
 भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-मार्च तिमाही में भारत का चालू खाते का अधिशेष 7.1 अरब डॉलर रहा। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 की समूची अवधि में चालू खाते का घाटा 25.2 अरब डॉलर रहा।</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 10:52:20 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rupee-strengthens-by-20-paise-against-the-dollar-easing-crude-oil-prices-provide-major-relief</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[शेयर बाजार में लौटी रौनक! वैश्विक संकेतों और क्रूड में नरमी से सेंसेक्स 350 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के पार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/stock-market-rises-in-early-trade-sensex-surges-350-points]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सोमवार की भारी गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की है। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और मध्य पूर्व में इजराइल-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव में थोड़ी नरमी आने से घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक—सेंसेक्स और निफ्टी—मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं। शुरुआती कारोबार में बीएसई (BSE) का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 350.57 अंक की बढ़त के साथ 73,874.83 अंक पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी 114.50 अंक चढ़कर 23,237.50 अंक पर ट्रेंड कर रहा था।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/rebellion-in-tmc-flames-of-dissent-reach-parliament-20-mps-make-claim-will-mamata-lose-grip" target="_blank">TMC में ऐतिहासिक बगावत! संसद तक पहुंची विद्रोह की आग, 20 सांसदों का दावा, क्या गिर जाएगी ममता बनर्जी की पकड़?</a></h3><p>&nbsp;</p><p> सेंसेक्स की कंपनियों में ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फिनसर्व बढ़त के साथ कारोबार कर रही थीं।
 हालांकि आईटी और कुछ अन्य क्षेत्रों के शेयरों पर दबाव देखा गया। एनटीपीसी, टाटा स्टील, इन्फोसिस, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा प्रमुख रूप से गिरावट में थे।
 वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई। ब्रेंट क्रूड 1.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 93.17 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। 
 बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मध्य पूर्व में तनाव में कुछ नरमी के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन मिला है। हालांकि कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।</p><p>
 ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर. ने कहा, “कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आई है, लेकिन यह अभी भी ऊंचे स्तर पर है, जिससे महंगाई, आयात लागत और व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण पर चिंता बनी हुई है।”
 एशिया के अन्य बाजारों में भी सुधार देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225 और चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक बढ़त में रहे, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग मामूली गिरावट में रहा।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/international/fire-breaks-out-at-oil-facilities-in-crimea-following-ukrainian-attacks" target="_blank">Ukraine Targets Russian Fuel | रूस की 'इकोनॉमिक लाइफलाइन' पर यूक्रेन का प्रहार! क्रीमिया के तेल प्रतिष्ठानों में आग लगी | Ukraine Russia War</a></h3><p>
</p><p> अमेरिकी बाजार सोमवार को ज्यादातर बढ़त के साथ बंद हुए थे। 
 आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 5,555.67 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।
 इससे पहले सोमवार को बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स 719.08 अंक टूटकर 73,524.26 अंक पर और निफ्टी 243.70 अंक गिरकर 23,123 अंक पर बंद हुए थे।</p>]]></description>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 10:34:05 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/stock-market-rises-in-early-trade-sensex-surges-350-points</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Telecom Sector को बड़ी राहत! Bombay High Court ने Airtel-Vi का अतिरिक्त Spectrum शुल्क किया रद्द]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/big-relief-for-the-telecom-sector-bombay-high-court-cancels-airtel-vis-additional-spectrum-fee]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>टेलीकॉम क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के उन फैसलों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत उनसे अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में बड़ी रकम वसूलने की कोशिश की जा रही थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विवाद से जुड़े मामलों में कंपनियों द्वारा जमा कराई गई बैंक गारंटी को अब आगे जारी रखने की आवश्यकता नहीं है।</div><div><br></div><div>बता दें कि यह मामला वर्ष 2008 से 2012 के बीच दूरसंचार कंपनियों को आवंटित अतिरिक्त स्पेक्ट्रम से जुड़ा हुआ था। केंद्र सरकार ने बाद में वर्ष 2012 में हुए स्पेक्ट्रम आवंटन की ऊंची दरों को आधार बनाकर पूर्व अवधि के लिए भी अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया था। इसी आधार पर भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को मांग नोटिस जारी किए गए थे।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति मनीष एम पितले और न्यायमूर्ति श्रीराम वी शिरसाट की खंडपीठ ने दोनों कंपनियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा पूर्व प्रभाव से अतिरिक्त शुल्क लगाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।</div><div><br></div><div>सुनवाई के दौरान भारती एयरटेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और डेरियस खंबाटा ने पक्ष रखा, जबकि वोडाफोन आइडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अस्पी चिनॉय पेश हुए थे। कंपनियों का तर्क था कि भारतीय तार अधिनियम या लाइसेंस समझौतों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत सरकार पूर्व प्रभाव से इस प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लगा सके। इसलिए यह मांग कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नवंबर और दिसंबर 2012 में मंत्रिमंडल स्तर पर दो महत्वपूर्ण फैसले लिए थे। इन्हीं फैसलों के आधार पर दूरसंचार विभाग ने कंपनियों को अतिरिक्त भुगतान के नोटिस जारी किए थे। हालांकि अदालत ने अब इन दोनों मंत्रिमंडलीय निर्णयों और उनसे जुड़े सभी मांग नोटिसों को रद्द कर दिया है।</div><div><br></div><div>अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकार भारतीय टेलीग्राम अधिनियम की धारा 4 के तहत अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी वित्तीय बोझ नहीं डाल सकती है। न्यायालय के अनुसार किसी भी कार्रवाई के लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार और कॉन्ट्रैक्चुअल आधार होना आवश्यक है।</div><div><br></div><div>बता दें कि अदालत ने लाइसेंस समझौतों की भी विस्तार से समीक्षा की है। इसके बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सरकार सार्वजनिक हित का हवाला देकर समझौते की शर्तों से अलग नहीं जा सकती है और न ही बाद में नई वित्तीय जिम्मेदारियां जोड़ सकती है।</div><div><br></div><div>न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 1999 का मूल उद्देश्य दूरसंचार सेवाओं को आम लोगों तक सुलभ और किफायती बनाना था। इसका उद्देश्य केवल अधिकतम राजस्व जुटाना नहीं था। ऐसे में सार्वजनिक हित की व्याख्या प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर की जानी चाहिए।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार अदालत ने यह भी पाया कि अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले लाइसेंस समझौतों में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था। न ही ऐसा कोई नया समझौता हुआ था जो पुराने अनुबंध का स्थान लेता। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने एकतरफा तरीके से अतिरिक्त शुल्क लागू कर दिया था।</div><div><br></div><div>इस फैसले को दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में सरकारी नीतियों और लाइसेंस संबंधी विवादों में कॉन्ट्रैक्चुअल शर्तों तथा कानूनी अधिकारों की भूमिका और अधिक स्पष्ट हो सकती है।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 22:45:25 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
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      <title><![CDATA[पेट्रोल से ₹20 सस्ता E-85 Fuel लॉन्च, Hardeep Singh Puri बोले- जनता को मिलेगी बड़ी राहत।]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/e-85-fuel-launched-at-?20-cheaper-than-petrol-hardeep-singh-puri-said-public-will-get-great-relief]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने नई प्रकार की मिश्रित ईंधन व्यवस्था की शुरुआत की है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में एक खुदरा ईंधन केंद्र पर ई-85 ईंधन का शुभारंभ किया है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि प्रदूषण और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।</div><div><br></div><div>बता दें कि ई-85 एक उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन है, जिसमें लगभग 80 से 85 प्रतिशत इथेनॉल और 14 से 19 प्रतिशत पेट्रोल शामिल होता है। यह ईंधन विशेष रूप से उन वाहनों के लिए तैयार किया गया है जो अलग-अलग अनुपात में इथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण पर चलने की क्षमता रखते हैं।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि ई-85 ईंधन की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही देश की पहली यात्री श्रेणी की लचीले ईंधन तकनीक वाली कार को भी पेश किया गया था। इस तकनीक वाले वाहन 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन से लेकर पूरी तरह इथेनॉल आधारित ईंधन तक विभिन्न मिश्रणों पर चल सकते हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार ई-85 ईंधन की कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य देश में उत्पादित इथेनॉल का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। इससे वाहन मालिकों को ईंधन खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है।</div><div><br></div><div>पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी इस ईंधन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ई-85 पर चलने वाले वाहन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की तुलना में जीवनचक्र के दौरान लगभग 61 प्रतिशत तक कम हरितगृह गैस उत्सर्जन करते हैं। इसके अलावा इस ईंधन से सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन भी लगभग नगण्य स्तर पर होता है, जिससे वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।</div><div><br></div><div>नीति आयोग भी उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाले वाहनों को शून्य उत्सर्जन श्रेणी के वाहनों में शामिल करता है। सरकार का मानना है कि यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।</div><div><br></div><div>हालांकि हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि ई-85 ईंधन सामान्य पेट्रोल वाहनों में नहीं डाला जा सकता है। यह केवल विशेष रूप से तैयार किए गए लचीले ईंधन तकनीक वाले वाहनों के लिए ही उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि ई-20 और ई-85 दो अलग-अलग प्रकार के ईंधन हैं और दोनों अलग श्रेणी के वाहनों के लिए बनाए गए हैं।</div><div><br></div><div>उन्होंने यह भी कहा कि ई-85 के आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा पेट्रोल या ई-20 ईंधन वाले वाहन बंद हो जाएंगे। उपभोक्ता अपने वर्तमान वाहनों का उपयोग पहले की तरह करते रह सकते हैं। ई-85 उपलब्ध कराने वाले केंद्रों पर स्पष्ट सूचना पट्ट लगाए जाएंगे, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।</div><div><br></div><div>बता दें कि देश में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2014 में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर केवल 1.53 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार के अनुसार यह लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया गया है।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार ई-85 ईंधन की आपूर्ति शुरुआत में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के 48 केंद्रों पर शुरू होगी। इसके बाद दिसंबर 2026 तक इसे 500 केंद्रों और दिसंबर 2027 तक लगभग 5000 केंद्रों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे वर्ष 2030-31 तक देश में कुल इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंच सकेगा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में और कमी आएगी।</div>]]></description>
      <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:32:18 +0530</pubDate>
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      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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