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    <title><![CDATA[Hindi News - News in Hindi - Latest News in Hindi | Prabhasakshi]]></title>
    <description><![CDATA[Latest News in Hindi, Breaking Hindi News, Hindi News Headlines, ताज़ा ख़बरें, Prabhasakshi.com पर]]></description>
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      <title><![CDATA[PFC Net Profit पहली तिमाही में 8,998 करोड़ रुपये रहा, 3.90 रुपये अंतरिम लाभांश का ऐलान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/pfc-net-profit-rises-to-8998-crore-in-q1-dividend-announced]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>सार्वजनिक क्षेत्र की पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) का एकीकृत शुद्ध लाभ जून तिमाही में मामूली रूप से बढ़कर 8,998 करोड़ रुपये रहा। आलोच्य तिमाही कंपनी का परिचालन राजस्व 28,526.86 करोड़ रुपये रहा, जबकि इससे पहले यह 28,539.04 करोड़ रुपये था।&nbsp;</p><p>कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में एकीकृत शुद्ध मुनाफा 8,998 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्तवर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह 8,981 करोड़ रुपये था।’’ पीएफसी ग्रुप देश में नवीकरणीय उर्जा के लिए सबसे बड़ा वित्तपोषक बना हुआ है।</p><p>कंपनी की नवीकरणीय उर्जा ऋण खाता 30 जून, 2026 तक 1,63,184 करोड़ रुपये थी। कंपनी के निदेशक मंडल ने पहली तिमाही के लिए 3.90 प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश घोषित किया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 08:09:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/pfc-net-profit-rises-to-8998-crore-in-q1-dividend-announced</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Godrej Properties का निर्माण खर्च Q1 में 54% बढ़ा, 2,244 करोड़ रुपये हुआ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/godrej-properties-q1-construction-expenditure-rises-to-2244-crore]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त रियल एस्टेट कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज का निर्माण और संबंधित गतिविधियों पर खर्च चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 54 प्रतिशत बढ़कर 2,244 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने कहा कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए निर्माण कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के मकसद से यह बढ़ोतरी की गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने निर्माण गतिविधियों पर 1,458 करोड़ रुपये खर्च किए थे।</p><p>गोदरेज प्रॉपर्टीज ने अपनी ताजा निवेशक प्रस्तुति में कहा, ‘‘निर्माण और संबंधित गतिविधियों पर खर्च में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका कारण परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति में बढ़ोतरी है, जिसका असर 2027-28 में परियोजनाओं को सौंपे जाने के कार्य में दिखाई देगा।’’
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने नौ लाख वर्ग फुट क्षेत्र की परियोजनाएं पूरी कर ग्राहकों को सौंपीं। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.21 करोड़ वर्ग फुट क्षेत्र ग्राहकों को सौंप दी थी।</p><p>अब कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में 1.35 करोड़ वर्ग फुट क्षेत्र ग्राहकों को सौंपने का लक्ष्य रखा है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 07:43:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/godrej-properties-q1-construction-expenditure-rises-to-2244-crore</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[RBI Governor संजय मल्होत्रा से HR policy की समीक्षा की मांग, अधिकारियों ने पदोन्नति पर चिंता जताई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-officers-demand-review-of-hr-policy-from-governor-sanjay-malhotra]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (आरबीआईओए) ने आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा को पत्र लिखकर हाल में लागू मानव संसाधन नीतियों की तत्काल समीक्षा की मांग की है। संघ ने कहा नीतियों से अधिकारियों की भविष्य में तरक्की, मनोबल और कार्यस्थल पर मिलने वाली सुविधाओं में बुरा असर पड़ा है। आरबीआईओए ने छह अगस्त को दिए इस ज्ञापन में कहा कि उसके सदस्यों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में बैंक की मानव संसाधन (एचआर) नीतियों को लेकर व्यापक असंतोष पाया गया।</p><p>संघ के अनुसार, ग्रेड ए से ग्रेड ई तक के आधे से अधिक अधिकारियों ने इस सर्वेक्षण में भाग लिया। आरबीआईओए का दावा है कि सर्वेक्षण में शामिल 85 प्रतिशत अधिकारियों को पदोन्नति की उचित संभावना नहीं दिखती। वहीं, 79 प्रतिशत अधिकारियों ने अपना मनोबल कम या बहुत कम बताया।</p><p>इसके अलावा, 91 प्रतिशत अधिकारियों ने हाल में पदोन्नति नीति में किए गए बदलावों को प्रतिकूल माना, जबकि 65 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि वे ग्रेड डी या उससे निचले स्तर पर ही सेवानिवृत्त होंगे। संघ ने कहा कि अधिकारियों ने मनोबल बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में ‘उचित और समयबद्ध पदोन्नति’ की मांग की है। मई में जारी पदोन्नति नीति की ज्ञापन में आलोचना करते हुए कहा गया कि इससे भविष्य में होने वाली उन्नति से जुड़ी बाधाओं का पर्याप्त समाधान नहीं हुआ और प्रबंधन के साथ चर्चा के दौरान संगठन द्वारा दिए गए सुझावों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया।</p><p>आरबीआईओए ने कहा कि वह रिजर्व बैंक प्रबंधन के साथ रचनात्मक संवाद के लिए प्रतिबद्ध है और उसे उम्मीद है कि उठाए गए मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाएगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 07:42:40 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-officers-demand-review-of-hr-policy-from-governor-sanjay-malhotra</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[SEBI ने बाजार मध्यस्थों के संयुक्त निरीक्षण को बनाया अनिवार्य, लक्ष्य एक-तिहाई घटाया]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sebi-mandates-joint-inspection-by-stock-exchanges-and-depositories]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को बाजार मध्यस्थों के निरीक्षण को सुव्यवस्थित करते हुए शेयर बाजारों और डिपॉजिटरी संस्थानों द्वारा संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य कर दिया और 2026-27 के लिए अपने निरीक्षण लक्ष्य को पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग एक-तिहाई कर दिया। यह संशोधित ढांचा बाजार अवसंरचना संस्थानों, निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों के पर्यवेक्षी निकाय के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 से लागू किया जाएगा। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि शेयर ब्रोकरों, डिपॉजिटरी प्रतिभागियों, निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों का नियमित निरीक्षण पहले से ही शेयर बाजारों और डिपॉजिटरी द्वारा किया जाता है।</p><p>इसी को ध्यान में रखते हुए सेबी ने अपने निरीक्षण लक्ष्य को युक्तिसंगत बनाते हुए अब घटाने का निर्णय लिया है। सेबी के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य जोखिम-आधारित दृष्टिकोण के जरिए निगरानी को मजबूत करना और साथ ही कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है, ताकि अनावश्यक एवं बार-बार के निरीक्षण से बचा जा सके। इसके साथ ही सेबी ने यह निर्णय लिया है कि नियमों का पालन करने वाली संस्थाओं, खासकर पात्र शेयर ब्रोकरों के लिए हर वर्ष होने वाले व्यापक निरीक्षण अब बंद किए जाएंगे।</p><p>हालांकि, अधिक जोखिम स्तर वाली संस्थाओं या जिनके खिलाफ बार-बार संकेत मिलते हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जांच के दायरे में रखा जाएगा। इसके अलावा, जिन संस्थाओं के पास कई तरह के पंजीकरण हैं, उनका निरीक्षण सेबी के अलग-अलग विभाग मिलकर संयुक्त रूप से करेंगे, ताकि एक ही वर्ष में बार-बार निरीक्षण की आवश्यकता न पड़े। अब निरीक्षण के लिए संस्थाओं का चयन तिमाही आधार पर किया जाएगा और इसमें शेयर बाजारों से मिलने वाले संकेत, निवेशकों की शिकायतें और सामाजिक माध्यमों से मिले इनपुट को भी शामिल किया जाएगा।</p><p>सेबी ने कहा कि बाजार खुफिया जानकारी, क्षेत्रीय और स्थानीय कार्यालयों से मिले संकेतों के आधार पर भी जांच शुरू की जाएगी। इनमें तकनीकी गड़बड़ियां, साइबर घटनाएं और शेयर दलालों के अधिकृत प्रतिनिधियों से जुड़े मामले शामिल हो सकते हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 03:06:10 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sebi-mandates-joint-inspection-by-stock-exchanges-and-depositories</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[BRICS व्यापार मंत्रियों ने MSME वित्तपोषण सुगम बनाने हेतु इनवॉइस डिस्काउंट पर अध्ययन की दी मंजूरी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/brics-trade-ministers-agree-to-study-msme-invoice-discounting-system]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली/ जयपुर, सात अगस्त ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को व्यापार वित्त तक आसान पहुंच देने के लिए ‘इनवॉइस डिस्काउंट व्यवस्था’ की स्थापना को लेकर अध्ययन करने पर सहमति जताई है। यह फैसला ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वैश्विक स्तर पर एमएसएमई के लिए वित्त का अंतर लगभग 5.7 लाख करोड़ डॉलर आंका गया है, जो असंगठित उद्यमों को शामिल करने पर आठ लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाता है। सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने माना कि छोटे उद्यमों के सामने मुख्य समस्या व्यवहार्य व्यापार योजनाएं पेश न कर पाने की है, जिससे कड़े ऋण नियम, ऊंची ब्याज दरें, अधिक गारंटी की मांग और बाजार तक पहुंच में बाधाएं पैदा होती हैं।</p><p>बैठक में इस वित्तीय अंतर को कम करने और गिरवी-आधारित ऋण प्रणाली से हटकर समावेशी और विकास-उन्मुख ऋण व्यवस्था की ओर बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई गई। साथ ही, विनिमय दर जोखिम कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण के विकल्प तलाशने पर भी जोर दिया गया। ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की 16वीं बैठक के बाद जारी ‘जयपुर सहमति’ में कहा गया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत व्यापार से जुड़े प्राप्त होने वाली बकाया राशि के आधार पर वित्त उपलब्ध कराया जा सकेगा।</p><p>इससे एमएसएमई अपनी प्राप्तियों को तुरंत नकदी में बदलकर कार्यशील पूंजी जुटा सकेंगे। इस व्यवस्था में एमएसएमई, बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान, बड़ी कंपनियां, बीमा और नियामक एजेंसियों की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई सहित कई देशों के मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हुए।</p><p>बयान के अनुसार, दस्तावेज में शामिल सभी बिंदुओं पर ब्रिक्स सदस्य देशों की सहमति है और जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 03:04:09 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/brics-trade-ministers-agree-to-study-msme-invoice-discounting-system</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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      <title><![CDATA[Meta टीम से सरकार ने Deepfake और AI कंटेंट पर ठोस कदम उठाने की रिपोर्ट मांगी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/govt-meets-meta-team-on-deepfake-and-ai-content-rules]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त केंद्र सरकार ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा की टीम से दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद शुक्रवार को तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) और बिना लेबल वाले एआई-जनित सामग्री पर कंपनी की कार्ययोजना पर विशेष ध्यान रहा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मेटा की टीम ने इन समस्याओं से निपटने के तरीकों के बारे में बताया जबकि सरकार ने कंपनी को ठोस कदम उठाकर परिणामों की रिपोर्ट देने को कहा है। अधिकारियों ने कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का संचालन करने वाली कंपनी की इन मामलों में प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी।</p><p>बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि निर्दिष्ट किए जाने के बावजूद एआई-जनित हानिकारक सामग्री दोबारा सामने आ जाती है और तेजी से फैलती है। सरकार ने यह भी पूछा कि आईटी नियमों के बावजूद बिना लेबल वाले कृत्रिम ढंग से तैयार वीडियो मंच पर क्यों बने रहते हैं। सरकार ने ‘कंटेंट मॉडरेशन’ में अधिक मानवीय निगरानी, भारतीय भाषाओं की बेहतर समझ और स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया।</p><p>सूत्रों ने कहा कि अगले सप्ताह इन मुद्दों पर एक और बैठक होने की संभावना है। इससे पहले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दो दिनों की बैठक में मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल काप्लान की अगुवाई वाली टीम से कंटेंट एल्गोरिद्म और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर सवाल किए थे। तीसरे दिन हुई बैठक में कंपनी के प्रस्तावित उपायों पर तकनीकी रूप से गहराई से चर्चा हुई।</p><p>मेटा ने आईटी मंत्रालय के अधिकारियों को अपने सिस्टम की कार्यप्रणाली समझाते हुए कहा कि डीपफेक, सीएसएएम और बॉट्स खातों से निपटने के लिए उसके पास समाधान हैं और उन्हें लागू करने की योजना तैयार है। कंपनी ने पहले गंभीर मुद्दों को स्वीकार करते हुए लगातार सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिलाया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य सेंसरशिप नहीं, बल्कि भारतीय कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना है।</p><p>साथ ही, कंपनी पर लगातार दबाव बनाए रखा जाएगा कि वह ठोस और निरंतर सुधार करे। मेटा के साथ सरकार की यह बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक के बाद बुलाई गई थी। हालांकि मेटा ने प्रधानमंत्री की पोस्ट को एआई आधारित कंटेंट फिल्टर की गलती मानते हुए बहाल कर दिया था और माफी मांगी थी।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:56:01 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/govt-meets-meta-team-on-deepfake-and-ai-content-rules</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[RBI Rules for Banks: कर्ज वसूली में बदसलूकी पर कार्रवाई, बैंक की गलती पर ग्राहक को मिलेगा ₹250 प्रति घंटा Compensation]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-rules-action-against-misconduct-during-loan-recovery-customers-to-receive-compensation]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज की वसूली को लेकर नए और सख्त नियम जारी किए हैं ताकि उधार लेने वालों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके। मौजूद जानकारी के अनुसार ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और इनका पालन सभी बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं को करना होगा।</div><div><br></div><div>भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी संशोधित निर्देशों के अनुसार अब बैंक या उनकी ओर से नियुक्त वसूली एजेंसियां किसी भी कर्जदार या गारंटर से केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकेंगी। इसके अलावा परिवार में किसी की मृत्यु, गंभीर बीमारी या अन्य आपात स्थिति जैसे संवेदनशील समय पर फोन करना या घर पहुंचकर दबाव बनाना पूरी तरह अनुचित माना जाएगा। बता दें कि लंबे समय से वसूली एजेंसियों के व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है।</div><div><br></div><div>नए नियमों में साफ कहा गया है कि बैंक के कर्मचारी या वसूली एजेंट किसी भी कर्जदार के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। साथ ही किसी व्यक्ति की तस्वीर, वीडियो, ऑडियो या निजी जानकारी को सामाजिक माध्यमों पर साझा करके उसे बदनाम करने की भी अनुमति नहीं होगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ग्राहक की जानकारी के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था और दंड का प्रावधान भी लागू करें।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि अब बैंकों को कर्ज वसूली से जुड़ी हर फोन बातचीत का समय, संख्या और बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। इसके साथ ही कर्ज वसूली की पूरी प्रक्रिया के लिए लिखित नीति बनानी होगी, जिसमें वसूली शुरू करने की परिस्थितियां, चरणबद्ध कार्रवाई, कर्मचारियों और वसूली एजेंटों के लिए आचार संहिता तथा आर्थिक संकट से जूझ रहे ग्राहकों की मदद के उपाय भी शामिल होंगे। यदि कर्जदार की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे मामलों को संभालने के लिए भी अलग व्यवस्था तैयार करनी होगी।</div><div><br></div><div>भारतीय रिजर्व बैंक ने मोबाइल उपकरण पर दिए जाने वाले कर्ज को लेकर भी महत्वपूर्ण नियम बनाए हैं। यदि किसी व्यक्ति ने कर्ज लेकर मोबाइल खरीदा है तो बैंक उसकी कुछ सुविधाओं पर रोक लगा सकता है, लेकिन यह कार्रवाई तभी होगी जब कर्ज की किस्त 30 दिन से अधिक समय तक बकाया रहे और पहले नोटिस भेजा जा चुका हो। वहीं पूरी तरह से निर्धारित रोक तभी लगाई जा सकेगी जब भुगतान 60 दिन से अधिक समय तक लंबित रहेगा। हालांकि आने वाली कॉल, संदेश और आपातकालीन सहायता जैसी जरूरी सुविधाओं को बंद नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा 60 दिन पूरे होने से पहले जाने वाली कॉल पर भी रोक नहीं लगाई जाएगी।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार यदि बैंक गलती से किसी ग्राहक के मोबाइल की सुविधाएं बंद कर देता है या भुगतान होने के बाद समय पर उन्हें दोबारा चालू नहीं करता है, तो उसे हर घंटे 250 रुपये के हिसाब से मुआवजा देना होगा। हालांकि यह कुल मुआवजा दिए गए कर्ज की राशि से अधिक नहीं होगा। भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि इन नए नियमों से कर्ज वसूली की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जिम्मेदार और ग्राहकों के सम्मान की रक्षा करने वाली बन सकेगी।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:50:37 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-rules-action-against-misconduct-during-loan-recovery-customers-to-receive-compensation</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Delhi की electricity subsidy में बिना खपत बांटे 42.26 करोड़ रुपये, CAG report में उजागर हुई खामी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/cag-report-highlights-flaws-in-delhi-electricity-subsidy-scheme]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने 2019-20 से 2022-23 के बीच दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में कई खामियां उजागर करते हुए कहा है कि बिना बिजली खपत वाले कनेक्शनों को भी 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में कैग रिपोर्ट पेश किया। इसके मुताबिक, कम बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं को कम सब्सिडी मिली, जबकि अधिक खपत करने वालों को कहीं ज्यादा सब्सिडी दी गई।</p><p>कैग रिपोर्ट कहती है कि शून्य से 200 यूनिट तक खपत वाले 30 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को औसतन 6,000 रुपये सालाना सब्सिडी मिली जबकि 201-400 यूनिट खपत वाले 16.6 लाख उपभोक्ताओं को 10,000 रुपये से अधिक यानी करीब 70 प्रतिशत ज्यादा सब्सिडी दी गई। इस तरह उच्च खपत वालों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला। इसके अलावा, बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ जरूरतमंदों एवं वंचितों तक ही सीमित नहीं रहा और लगभग पूरे घरेलू उपभोक्ता वर्ग को इसका लाभ मिला।</p><p>रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई उपभोक्ताओं ने लगातार कई बिलिंग चक्रों तक शून्य खपत के बावजूद सब्सिडी का लाभ लिया। दिल्ली सरकार ने अगस्त 2019 में यह योजना शुरू की थी, जिसमें 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त और 201-400 यूनिट पर 50 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 800 रुपये) दी जाती है। सब्सिडी खर्च 2019-20 के 2,405.59 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 3,161 करोड़ रुपये हो गया।</p><p>कैग ने अपनी रिपोर्ट में पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने और उपभोक्ता डेटा की नियमित जांच की सिफारिश की है, ताकि सब्सिडी सही लोगों तक पहुंचे और दुरुपयोग रोका जा सके। इसके साथ ही कैग ने दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) की बापरोला में मौजूद 81.42 एकड़ जमीन 17 साल तक उपयोग में नहीं लाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। कैग रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2006 में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के लिए ली गई जमीन पर बार-बार योजना बदलने से 29.45 करोड़ रुपये का खर्च बेकार गया।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:52:16 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/cag-report-highlights-flaws-in-delhi-electricity-subsidy-scheme</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    <item>
      <title><![CDATA[Odisha को Food Processing क्षेत्र में 41,748 करोड़ का निवेश प्रस्ताव मिला]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/odisha-receives-investment-proposals-in-food-processing-sector]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 27 कंपनियों से 41,748 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। राज्य सरकार और उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा आयोजित निवेशक सम्मेलन में इन कंपनियों ने समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। माझी ने कहा, ‘‘22 कंपनियों के साथ 31,648 करोड़ रुपये के एमओयू पर आज हस्ताक्षर हुए हैं, जो इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की दिशा में हमारी प्रगति का प्रमाण हैं।’’
बाद में ओडिशा सरकार ने एक बयान जारी कर समझौतों के तहत निवेश के ताजा आंकड़ें जारी किए।</p><p>इसमें कुल निवेश प्रस्ताव 41,748 करोड़ रुपये बताया गया, जबकि 12 निवेश आशय फॉर्म (आईआईएफ) के जरिए 1,689 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश का प्रस्ताव है। राज्य सरकार को पहले दिन कुल मिलाकर 43,437 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनसे 43,316 नौकरियां सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक ओडिशा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था खनन और खनिजों पर आधारित रही, लेकिन अब राज्य खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण सहित चार प्रमुख क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।</p><p>उन्होंने कहा कि किसानों की आय से सीधे जुड़े होने के कारण खाद्य प्रसंस्करण सरकार की प्राथमिकता में है। राज्य सरकार सभी जिलों में इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है और निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए अलग नीति लागू की गई है। माझी ने कहा कि नीति आयोग के निवेश-अनुकूल सूचकांक में ओडिशा शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है और सरकार कारोबारी प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी बनाने पर काम कर रही है।</p><p>राज्य के उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वैन ने कहा कि ओडिशा में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं और सरकार निवेशकों को परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन में हरसंभव सहयोग देगी। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि वर्तमान में 130 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला ओडिशा वर्ष 2036 तक 500 अरब डॉलर और 2047 तक 1,500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:51:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/odisha-receives-investment-proposals-in-food-processing-sector</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[NBFC Gold Loan में 69 प्रतिशत की वृद्धि, आंकड़ा 3.42 लाख करोड़ रुपये पहुंचा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/nbfc-gold-loan-growth-surges-sixty-nine-percent-in-june-rbi-data]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मुंबई, सात अगस्त गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का स्वर्ण आभूषण पर दिया गया कर्ज जून में 69 प्रतिशत उछलकर 3.42 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह एक साल पहले 2.02 लाख करोड़ रुपये था और कर्ज से जुड़े सभी बड़े खंडों में यह सबसे तेज बढ़ोतरी है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।</p><p>जून 2024 में यह आंकड़ा 1.44 लाख करोड़ रुपये था। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की कुल कर्ज वृद्धि में खुदरा ऋण प्रमुख चालक बना रहा। जून 2026 में खुदरा ऋण में सालाना आधार पर 20.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 14.3 प्रतिशत थी।</p><p>खुदरा कर्ज श्रेणी में आवास ऋण, वाहन ऋण और सोने के आभूषण गिरवी रखकर दिए जाने वाले ऋण में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे उपभोक्ता ऋण की रफ्तार बनी रही। वहीं, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए दिए गए ऋण में जून 2026 में सालाना आधार पर 17.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 5.1 प्रतिशत थी। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण की वृद्धि धीमी पड़ी।</p><p>जून 2026 में इसमें 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह 10.3 प्रतिशत थी। इसकी मुख्य वजह बुनियादी ढांचा क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण में सुस्ती रही, जिसका औद्योगिक ऋण में सबसे बड़ा हिस्सा है। इसी तरह, सेवा क्षेत्र को एनबीएफसी द्वारा दिए जाने वाले ऋण की वृद्धि भी घटकर 17.6 प्रतिशत रह गई, जो जून 2025 में 22.4 प्रतिशत थी।</p><p>मुख्य रूप से व्यापार और परिवहन क्षेत्र के परिचालकों को दिए जाने वाले ऋण में धीमी वृद्धि के कारण सेवा क्षेत्र के कर्ज में वृद्धि कम रही। हालांकि वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में ऋण वृद्धि मजबूत बनी रही।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:52:05 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/nbfc-gold-loan-growth-surges-sixty-nine-percent-in-june-rbi-data</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[E-20 Petrol जांच में मानक पर खरा उतरा, तेल कंपनियों ने प्रदूषण के दावे खारिज किए]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/e20-petrol-quality-meets-standards-say-oil-companies-ioc-bpcl-hpcl]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त सार्वजनिक तेल कंपनियों ने शुक्रवार को कहा कि देशभर में की गई विस्तृत जांच में ई-20 पेट्रोल में नमी या क्लोराइड प्रदूषण के दावों की पुष्टि नहीं हुई है और ईंधन गुणवत्ता तय मानकों के भीतर पाई गई है। यह जांच हाल में मीडिया में आई खबरों के बाद तेज की गई थी जिनमें 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण वाले ई-20 पेट्रोल में नमी और क्लोराइड पाए जाने की बात कही गई थी। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने एक संयुक्त बयान में कहा कि समूची आपूर्ति शृंखला में की गई इस जांच से यह पुष्टि हुई कि ईंधन की गुणवत्ता लगातार निर्धारित मानकों के भीतर रही।</p><p>तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी तरह के प्रदूषण का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। बयान के मुताबिक, रिफाइनरी से लेकर पेट्रोल पंप तक समूची आपूर्ति शृंखला में ईंधन गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जा रही है। पेट्रोल पंपों पर रोजाना 8-12 बार पानी की मिलावट एवं घनत्व की जांच हो रही है और इसके साथ मोबाइल लैब से भी परीक्षण किए जा रहे हैं।</p><p>जांच में पेट्रोल के 100 से अधिक नमूनों में क्लोराइड स्तर 1 पीपीएम या उससे कम पाया गया। वहीं, डिस्टिलरी और खुदरा स्तर के नमूनों में यह 3 पीपीएम से नीचे रहा, जो “कई सौ पीपीएम” के दावों के विपरीत है। पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) का मतलब है कि किसी पदार्थ में किसी तत्व की मात्रा प्रति दस लाख हिस्सों में कितनी है।</p><p>निगरानी के दौरान केवल दो अलग-थलग मामलों में उच्च स्तर मिला, जिनमें तुरंत आपूर्ति रोककर ईंधन जांच शुरू की गई। देशभर के करीब 90,000 पेट्रोल पंपों पर टैंकों की जांच में अब तक पानी की मिलावट का कोई मामला सामने नहीं आया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा कि ई20 ईंधन सुरक्षित है और कुछ दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p><p>सरकारी तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं से पूरे भरोसे के साथ ई-20 पेट्रोल का उपयोग जारी रखने की अपील की है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:51:36 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/e20-petrol-quality-meets-standards-say-oil-companies-ioc-bpcl-hpcl</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Rupee vs US Dollar: विदेशी पूंजी प्रवाह से रुपया 5 पैसे चढ़कर 95.17 पर बंद]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/indian-rupee-rises-to-95-17-against-us-dollar-amid-fii-inflows]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मुंबई, सात अगस्त रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे की बढ़त के साथ 95.17 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी बातचीत के नतीजों को लेकर अनिश्चितता से वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की धारणा के बावजूद विदेशी पूंजी का निवेश बढ़ने से रुपये में तेजी आई। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.27 प्रति डॉलर पर खुला।</p><p>कारोबार के दौरान यह 95.16 से 95.28 प्रति डॉलर के दायरे में रहा और अंत में पांच पैसे की बढ़त के साथ 95.17 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। रुपया बृहस्पतिवार को 14 पैसे की गिरावट के साथ 95.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच समझौते पर अनिश्चितता के कारण रुपये में हल्का नकारात्मक रुख रह सकता है।</p><p>हालांकि, सप्ताहांत में इस संबंध में आने वाली किसी भी खबर से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।’’
उन्होंने कहा कि सकारात्मक घटनाक्रम रुपये को सहारा दे सकता है, जबकि इसके विपरीत स्थिति में दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों पर भी रहेगी। उन्होंने अनुमान जताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 95 से 95.60 के दायरे में रह सकती है।</p><p>इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.90 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82.30 डॉलर प्रति बैरल रहा। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 455.59 अंक टूटकर 78,499.17 अंक जबकि निफ्टी 65.35 अंक टूटकर 24,570.65 अंक पर बंद हुआ।</p><p>शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार में शुद्ध लिवाल रहे। उन्होंने शुक्रवार को शुद्ध रूप से 480.24 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:42:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/indian-rupee-rises-to-95-17-against-us-dollar-amid-fii-inflows</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[UPI इस्तेमाल पर नहीं लगेगा शुल्क, PCI ने छोटे व्यापारियों और ग्राहकों को दी राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/upi-transactions-to-remain-free-payments-council-of-india-clarifies]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई) ने शुक्रवार को कहा कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बावजूद उपभोक्ता और छोटे कारोबारी एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई का इस्तेमाल किसी शुल्क के बगैर करते रहेंगे। यह बयान लोकसभा में संशोधन विधेयक पारित होने के एक दिन बाद आया है, जिसमें सरकार को यूपीआई सहित अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। पीसीआई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 2016 में शुरू होने के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी बिना किसी लेनदेन शुल्क के डिजिटल भुगतान जारी रहेगा।</p><p>परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि किराना दुकानों सहित छोटे व्यापारियों को यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क नहीं देना होगा। इसके साथ ही पीसीआई ने कहा कि भविष्य में यदि बड़े कारोबारियों पर मर्चेंट सेवा शुल्क लगाया जाता है, तब भी उपभोक्ताओं को यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। परिषद ने स्पष्ट किया कि जहां भी लागू हो, एमडीआर शुल्क व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होती है और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता है।</p><p>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा था कि एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं, बल्कि कारोबारियों पर लागू होता है और इससे मिलने वाली राशि का उपयोग बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियां अवसंरचना एवं सुरक्षा सुधार में करती हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता जयराश रमेश के उस दावे को भी खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि आम लोगों पर यूपीआई इस्तेमाल का बोझ बढ़ सकता है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:41:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/upi-transactions-to-remain-free-payments-council-of-india-clarifies</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Google से विदाई के बाद Jeff Dean ने शुरू किया Discovery Loop, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ AI Startup का Pitch Deck]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/after-leaving-google-jeff-dean-launched-discovery-loop-ai-??startups-pitch-deck-has-gone-viral]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>गूगल में लगभग 27 वर्षों तक काम करने के बाद कंपनी से अलग हुए दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ जेफ डीन एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका नया एआई आधारित उद्यम और उसके लिए तैयार किया गया प्रस्तुति दस्तावेज़ है। मौजूद जानकारी के अनुसार जेफ डीन ने यह दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दिया है, जिसे उन्होंने कुछ चुनिंदा निवेश कंपनियों के सामने अपने नए उद्यम के लिए निवेश जुटाने के दौरान इस्तेमाल किया था। दस्तावेज़ सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और तकनीकी जगत में इसकी काफी चर्चा हो रही है।</div><div><br></div><div>बता दें कि जेफ डीन लंबे समय तक गूगल के सबसे प्रभावशाली इंजीनियरों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने अपने नए उद्यम का नाम डिस्कवरी लूप रखा है। यह संस्थान विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एआई की मदद से रिसर्च की प्रक्रिया को तेज और अधिक प्रभावी बनाने पर काम करेगा।</div><div><br></div><div>प्रस्तुति दस्तावेज़ में जेफ डीन और उनकी टीम ने उन प्रमुख परियोजनाओं का भी उल्लेख किया है, जिनके विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें दुनिया का सबसे बड़ा खोज मंच, विज्ञापन प्रणाली, सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली ईमेल सेवा, जेमिनी, अल्फाफोल्ड और गूगल का शुरुआती तंत्रिका आधारित डायलॉग प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। इन उपलब्धियों को देखकर तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने टीम की जमकर सराहना की है।</div><div><br></div><div>जेफ डीन ने सामाजिक माध्यम पर कहा कि उन्होंने कुछ निवेश कंपनियों को अपने काम और भविष्य की योजना समझाने के लिए यह प्रस्तुति तैयार की थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस दस्तावेज़ को तैयार करना उनके लिए एक रोचक अनुभव रहा। साथ ही उन्होंने उन लोगों की सूची भी तैयार की, जिन्होंने उनकी टीम के साथ काम करने के बाद आगे चलकर कई सफल तकनीकी कंपनियों की स्थापना की।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि इस प्रस्तुति दस्तावेज़ पर कई प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने इसे अब तक के सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति दस्तावेज़ों में से एक बताया। कुछ लोगों का कहना है कि इसमें शामिल उपलब्धियां किसी भी नए उद्यम के लिए भरोसा पैदा करने के लिए काफी हैं।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार इस नए उद्यम में भारतीय मूल के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ संजय घेमावत भी जेफ डीन के साथ जुड़े हैं। इसके अलावा एआई के जाने-माने शोधकर्ता ओरियोल विन्याल्स और क्वोक ले भी इस टीम का हिस्सा हैं। निवेश के क्षेत्र की प्रसिद्ध कंपनी खोसला वेंचर्स ने भी इस उद्यम का समर्थन किया है। कंपनी के संस्थापक विनोद खोसला ने टीम की उपलब्धियों को असाधारण बताते हुए कहा कि इतनी मजबूत तकनीकी टीम का साथ मिलना अपने आप में बड़ी बात है।</div><div><br></div><div>बता दें कि डिस्कवरी लूप को सार्वजनिक हित में काम करने वाली कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे एआई सिस्टम विकसित करना है, जो एक साथ हजारों वैज्ञानिक और अभियांत्रिकी प्रयोगों का सुझाव दे सकें, उन्हें पूरा कर सकें और उनके परिणामों का मूल्यांकन भी कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:27:45 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/after-leaving-google-jeff-dean-launched-discovery-loop-ai-??startups-pitch-deck-has-gone-viral</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Donald Trump का बड़ा फैसला: Solar Panels और Semiconductor सामग्री के Import पर New Tariff, China को मिलेगी कड़ी चुनौती]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/donald-trumps-major-decision-new-tariffs-on-imports-of-solar-panels-and-semiconductor-materials]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम आर्थिक फैसले के तहत सौर पैनल और सेमीकंडक्टर चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण सामग्री के आयात पर नए शुल्क लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कदम को अमेरिका की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और घरेलू उद्योग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह निर्णय वाणिज्य विभाग की करीब एक साल तक चली जांच के बाद लिया गया है।</div><div><br></div><div>बता दें कि जिस सामग्री पर यह फैसला लागू किया गया है, उसका उपयोग सौर पैनल और सेमीकंडक्टर चिप के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही कारण है कि यह उत्पाद आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहा है और अब सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है।</div><div><br></div><div>अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लटनिक ने इस फैसले को घरेलू उद्योग के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि अमेरिका में अंतिम उत्पाद तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन पूरी आपूर्ति व्यवस्था देश के भीतर विकसित नहीं हो पाई है। उनके अनुसार नए शुल्क का उद्देश्य कंपनियों को अमेरिका में ही उत्पादन और निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसे कदम उठा रही है जिससे विदेशी कंपनियां बहुत कम कीमत पर सामान बेचकर घरेलू उद्योग को नुकसान न पहुंचा सकें।</div><div><br></div><div>मौजूद जानकारी के अनुसार सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि आयात पर कितना शुल्क लगाया जाएगा या न्यूनतम कीमत क्या तय की जाएगी। हालांकि माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन नियमों की पूरी जानकारी जारी की जाएगी।</div><div><br></div><div>गौरतलब है कि अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने जुलाई 2025 में इस मामले की जांच शुरू की थी। यह जांच 1962 के व्यापार विस्तार कानून की एक विशेष व्यवस्था के तहत की गई थी। इसी कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल पहले इस्पात, एल्युमिनियम, वाहन और अन्य कई उत्पादों के आयात पर शुल्क लगाने के लिए भी किया गया था।</div><div><br></div><div>हालांकि जांच में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में चीन की बड़ी हिस्सेदारी मानी जाती है। ऐसे में इस फैसले का असर चीन समेत कई निर्यातक देशों पर पड़ सकता है।</div><div><br></div><div>बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष दोबारा सत्ता संभालने के बाद कई व्यापारिक साझेदार देशों पर अलग-अलग क्षेत्रों में शुल्क लगाए हैं। हालांकि इस साल फरवरी में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ व्यापक शुल्कों को रद्द कर दिया था, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत लगाए गए क्षेत्र विशेष के शुल्क अब भी लागू हैं।</div><div><br></div><div>इसके अलावा पिछले महीने भी ट्रंप प्रशासन ने अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करते हुए करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर नए शुल्क लगाने का फैसला किया था। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका अपनी व्यापार नीति को घरेलू उद्योग के हित में और अधिक सख्त बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा हैं।</div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:00:03 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/donald-trumps-major-decision-new-tariffs-on-imports-of-solar-panels-and-semiconductor-materials</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भारत के LPG आयात में बड़ा बदलाव: अब 67% सप्लाई USA से, Puri ने बताया गेमचेंजर प्लान]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/major-shift-in-india-lpg-imports-67-per-of-supply-now-from-usa-puri-outlines-game-changing-plan]]></guid>
      <description><![CDATA[<div>पिछले कुछ महीनों में भारत के लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इंपोर्ट बास्केट में काफ़ी बदलाव आया है और अमेरिका देश का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने शुरू में अमेरिका से अपनी LPG ज़रूरतों का सिर्फ़ एक छोटा हिस्सा ही मंगाने की योजना बनाई थी, लेकिन अब यह आंकड़ा तेज़ी से बढ़ गया है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/nishikant-dubey-ultimatum-on-jpsc-jssc-dispute-if-youth-not-get-justice-i-will-go-on-hunger-strike" target="_blank">JPSC-JSSC विवाद पर BJP सांसद Nishikant Dubey का अल्टीमेटम: युवाओं को न्याय नहीं मिला तो मैं भूख हड़ताल पर बैठूंगा</a></h3><div><br></div><div>पुरी ने कहा कि ईरान युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपने कच्चे तेल का लगभग आधा आयात इसी मार्ग से जुड़े देशों से करता था, जबकि 90 प्रतिशत एलपीजी और 60 प्रतिशत गैस आयात भी इसी रास्ते से होता था। उन्होंने कहा कि आपूर्ति बाधित होने के बावजूद भारत ने स्रोतों में विविधता लाकर देश में कहीं भी कमी नहीं होने दी। उन्होंने कहा कि मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि एक भी पेट्रोल पंप सूखा नहीं पड़ा।&nbsp;</div><div><br></div><div>पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया है, जबकि पेट्रोल पंपों की संख्या 2014 के लगभग 52,000 से बढ़कर अब 1.07 लाख हो गई है। शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार भी 55 क्षेत्रों से बढ़कर 309 तक हो गया है। पुरी ने कहा कि आज अमेरिका भारत के लिए एलपीजी का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है, जो कुल आयात का लगभग 67 प्रतिशत है।&nbsp;</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/noida-police-fir-against-man-for-video-on-bjp-mla-tejpal-nagar" target="_blank">Noida Police FIR: BJP MLA Tejpal Nagar पर अभद्र वीडियो पोस्ट करने पर जुनैद पर केस</a></h3><div><br></div><div>मंत्री ने कहा कि सरकार ने 84,000 करोड़ रुपये के ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना है। इस योजना में निजी क्षेत्र की भागीदारी होगी और सरकार ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत या प्रति कुआं 650 करोड़ रुपये तक मदद देगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपतटीय क्षेत्रों को खोज के लिए खोला है और भविष्य में लाइसेंस के और अवसर दिए जाएंगे। साथ ही, कम्प्रेस्ड बायोगैस और एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।&nbsp;<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 19:50:21 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/major-shift-in-india-lpg-imports-67-per-of-supply-now-from-usa-puri-outlines-game-changing-plan</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Strong Operating Performance: महंगाई के दबाव के बावजूद Godrej Consumer का Net Profit ₹504 करोड़ पार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/gcpl-q1-results-analyzing-godrej-9-percent-volume-growth]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>रोजमर्रा के उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनी गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 11.5 प्रतिशत बढ़कर 504.52 करोड़ रुपये रहा।
 वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ 452.45 करोड़ रुपये था।
 कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को बताया कि समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की परिचालन आय 18.31 प्रतिशत बढ़कर 4,225.47 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 3,571.32 करोड़ रुपये थी।
</p><p> गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप (जीआईजी) की एफएमसीजी इकाई ने बयान में कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान एकीकृत बिक्री में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बढ़ोतरी का कारण बिक्री की मात्रा में नौ प्रतिशत की वृद्धि है। कंपनी के सभी कारोबार में आय और मुनाफे में व्यापक स्तर पर वृद्धि दर्ज की गई।’’
</p><p> चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीसीपीएल का कुल खर्च 18.6 प्रतिशत बढ़कर 3,585.24 करोड़ रुपये हो गया।
 कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुधीर सीतापति ने कहा कि जीसीपीएल की कर पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई और मार्जिन 19 प्रतिशत रहा। शुद्ध लाभ में 11 प्रतिशत की वृद्धि मजबूत परिचालन प्रदर्शन को दर्शाती है, हालांकि जिंस की ऊंची कीमतों का कुछ दबाव बना रहा।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 17:56:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/gcpl-q1-results-analyzing-godrej-9-percent-volume-growth</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[SBI Q1 Profit 13.73 प्रतिशत बढ़कर 24,113 करोड़ रुपये हुआ, NPA में हुआ सुधार]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-reports-net-profit-growth-to-24113-crore-in-q1]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मुंबई, सात अगस्त सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 13.73 प्रतिशत बढ़कर 24,113 करोड़ रुपये रहा। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में 21,201.47 करोड़ रुपये और पिछली मार्च तिमाही में 19,642.87 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। शेयर बाजार को दी सूचना के अनुसार, एकल आधार पर बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121.22 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही में 19,160.44 करोड़ रुपये था।</p><p>समीक्षाधीन तिमाही में बैंक की शुद्ध ब्याज आय 18.63 प्रतिशत की ऋण वृद्धि के बल पर लगभग 15 प्रतिशत बढ़कर 46,992 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, घरेलू शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) घटकर तीन प्रतिशत रह गया। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 0.07 प्रतिशत बढ़ा।</p><p>इस दौरान बैंक की जमा वृद्धि 9.73 प्रतिशत रही, जबकि कम लागत वाली चालू और बचत जमा (कासा) का हिस्सा घटकर 39.36 प्रतिशत रह गया, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 0.12 प्रतिशत कम है। बैंक ने बताया कि जून तिमाही में फंसे कर्ज (एनपीए) के लिए प्रावधान घटकर 3,359 करोड़ रुपये रह गया, जो 2025-26 की समान तिमाही में 4,934 करोड़ रुपये था। हालांकि, पिछली तिमाही के 3,140 करोड़ रुपये के मुकाबले यह अधिक रहा।</p><p>बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात 30 जून, 2026 को सुधरकर 1.47 प्रतिशत रह गया, जो मार्च, 2026 के अंत में 1.49 प्रतिशत और एक वर्ष पहले 1.83 प्रतिशत था। एसबीआई के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने संवाददाताओं से कहा कि बैंक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 में ऋण वृद्धि को 14-15 प्रतिशत तक ले जाने का है। इसके लिए 10-11 प्रतिशत जमा वृद्धि पर्याप्त रहेगी।</p><p>उन्होंने कहा कि विशेष विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) (एफसीएनआर-बी) योजना के तहत बैंक अब तक छह अरब अमेरिकी डॉलर जुटा चुका है और सितंबर में योजना समाप्त होने तक यह राशि 10 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 18:25:15 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sbi-reports-net-profit-growth-to-24113-crore-in-q1</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Sensex 456 अंक गिरकर 78,499 पर बंद हुआ, Brent Crude के असर से Nifty भी फिसला]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/sensex-falls-456-points-as-crude-oil-prices-and-banking-stocks-drag-market]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मुंबई, सात अगस्त कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने और बैंकों एवं वित्तीय शेयरों में बिकवाली के दबाव के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में दो दिनों की तेजी थम गयी। सेंसेक्स 456 अंक टूट गया जबकि निफ्टी में 65 अंकों की गिरावट रही। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत टूटकर 78,499.17 अंक पर बंद हुआ।</p><p>कारोबार के दौरान एक समय यह 577.69 अंक यानी 0.73 प्रतिशत तक लुढ़ककर 78,377.07 अंक तक आ गया था। एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत गिरकर 24,570.65 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 113.25 अंक यानी 0.45 प्रतिशत टूटकर 24,522.75 अंक तक आ गया था।</p><p>सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से बजाज फाइनेंस में सर्वाधिक 5.90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि बजाज फिनसर्व 4.18 प्रतिशत के नुकसान में रहा। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक और एशियन पेंट्स भी नुकसान में रहे। दूसरी तरफ, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और टेक महिंद्रा के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।</p><p>ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर. ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता और वित्तीय शेयरों में कमजोरी के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि कंपनियों के तिमाही नतीजे अपेक्षाकृत सहायक रहे।”
व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.20 प्रतिशत की बढ़त में रहा जबकि मझोली कंपनियों का मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.19 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। क्षेत्रवार सूचकांकों में वित्तीय सेवा खंड में 1.33 प्रतिशत की गिरावट रही जबकि निजी बैंक सूचकांक में 1.04 प्रतिशत, टिकाऊ उपभोक्ता खंड में 0.90 प्रतिशत और आवासीय वित्त खंड में 0.81 प्रतिशत की गिरावट रही।</p><p>वहीं, फोकस आईटी खंड 1.44 प्रतिशत और वाहन खंड 1.33 प्रतिशत चढ़ गया। इस कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स ने कुल 404.53 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की तेजी दर्ज की जबकि निफ्टी में 187.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। पूरे सप्ताह में वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) वाले शेयरों के लिए नई नीलामी व्यवस्था लागू होने के बाद दोनों प्रमुख सूचकांकों में अलग-अलग रुख देखने को मिला।</p><p>शेयर बाजारों ने इस सोमवार से समापन मूल्य तय करने के लिए नकद इक्विटी खंड में समापन नीलामी सत्र शुरू किया है, जो मूल्य निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का एक प्रयास है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 0.35 प्रतिशत गिरकर 82.20 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को 17.86 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।</p><p>जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “पश्चिम एशिया में स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है।”
एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और जापान का निक्की गिरावट में रहे, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर कारोबार में तेजी का रुख था। बाजार तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे।</p><p>अमेरिकी बाजार बृहस्पतिवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। इससे पहले बृहस्पतिवार को सेंसेक्स 373.76 अंक चढ़कर 78,954.76 अंक और निफ्टी 11.35 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,636 अंक पर रहा था।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 18:25:02 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/sensex-falls-456-points-as-crude-oil-prices-and-banking-stocks-drag-market</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[India Forex Reserves में 10.51 अरब डॉलर का उछाल, आंकड़ा 692.87 अरब डॉलर हुआ]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/india-forex-reserves-surge-to-692-point-87-billion-dollars-rbi-data]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>मुंबई, सात अगस्त देश का विदेशी मुद्रा भंडार 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 10.51 अरब डॉलर बढ़कर 692.87 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इससे एक सप्ताह पहले विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर की बढ़त के साथ682.35 अरब डॉलर रहा था।</p><p>इस साल 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने और रुपये पर दबाव बढ़ने के कारण कई सप्ताह तक इसमें गिरावट आई, क्योंकि केंद्रीय बैंक को डॉलर की बिक्री कर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वालीं विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 8.75 अरब डॉलर बढ़कर 564.68 अरब डॉलर हो गईं।</p><p>डॉलर के संदर्भ में इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है। इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 1.68 अरब डॉलर बढ़कर 104.74 अरब डॉलर हो गया। विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.67 अरब डॉलर पर पहुंच गए।</p><p>आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में देश का आरक्षित भंडार भी 2.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.78 अरब डॉलर हो गया। पिछले महीने सरकार और आरबीआई ने देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए एफसीएनआर (बी) समेत कई उपायों की घोषणा की थी। इन प्रयासों से अब तक करीब 32 अरब डॉलर प्राप्त हो चुके हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 18:24:57 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/india-forex-reserves-surge-to-692-point-87-billion-dollars-rbi-data</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Titan Q1 Results: ज्वेलरी बिजनेस में जोरदार उछाल से Titan का Net Profit 63% बढ़ा, ₹1,777 करोड़ रहा मुनाफा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/titan-q1-earnings-jewelry-business-drives-63-percent-profit-jump]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>&nbsp;आभूषण एवं घड़ी विनिर्माता टाइटन कंपनी लिमिटेड का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 62.87 प्रतिशत बढ़कर 1,777 करोड़ रुपये रहा।
 कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को बताया कि मुख्य रूप से आभूषण कारोबार के मजबूत प्रदर्शन से कंपनी का लाभ बढ़ा है।
 वित्त वर्ष 2025-26 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 1,091 करोड़ रुपये था।
</p><p> समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की बिक्री सालाना आधार पर 40.31 प्रतिशत बढ़कर 20,787 करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 14,814 करोड़ रुपये थी।
 कंपनी का कुल खर्च चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत बढ़कर 19,075 करोड़ रुपये रहा।</p><p>
 टाइटन के कुल कारोबार में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले आभूषण कारोबार की आय वित्त वर्ष 2026-27 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में 29.73 प्रतिशत बढ़कर 19,002 करोड़ रुपये हो गई, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 14,647 करोड़ रुपये थी।
 समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की कुल एकीकृत आय भी 29.3 प्रतिशत बढ़कर 21,502 करोड़ रुपये रही।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 17:49:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/titan-q1-earnings-jewelry-business-drives-63-percent-profit-jump</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[President Murmu ने Handloom Day पर ई-कॉमर्स से हथकरघा उत्पादों की वैश्विक पहचान पर दिया जोर]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/president-droupadi-murmu-addresses-national-handloom-day-event-in-new-delhi]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि देश का हथकरघा क्षेत्र रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करता है और ई-कॉमर्स मंचों के जरिए इसके उत्पादों की वैश्विक बाजारों में पहुंच को और बढ़ाया जा सकता है। मुर्मू ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र से लगभग 35 लाख लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें 25 लाख से अधिक महिलाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि हथकरघा क्षेत्र देश के समावेशी विकास का एक मजबूत आधार बनेगा।</p><p>उन्होंने कहा, “हथकरघा क्षेत्र न केवल आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। डिजिटल मंचों और ई-कॉमर्स के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया जा सकता है।” मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में विश्वास जताया कि सरकार और अन्य हितधारकों के सहयोग से यह क्षेत्र आने वाले समय में और सशक्त होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर ‘संत कबीर हथकरघा पुरस्कार’ और ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025’ भी प्रदान किए।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/droupadi-murmu-odisha-train-journey-bhubaneswar-brahmapur" target="_blank" rel="noopener">Droupadi Murmu ओडिशा दौरे पर, राष्ट्रपति ने भुवनेश्वर से ब्रह्मपुर तक की ट्रेन यात्रा</a></h3><p>इन पुरस्कारों के जरिए उत्कृष्ट बुनकरों और कारीगरों के योगदान को सम्मानित किया जाता है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 16:26:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/president-droupadi-murmu-addresses-national-handloom-day-event-in-new-delhi</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Exim Bank संभालेगा निर्यातकों की ब्याज सहायता योजना, DGFT ने दी मंजूरी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/exim-bank-to-manage-dgft-interest-equalisation-scheme-from-april-2026]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त निर्यात संवर्धन मिशन के तहत निर्यात-पूर्व और निर्यात-पश्चात ऋण पर ब्याज सहायता योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अब भारतीय निर्यात-आयात बैंक (एक्जिम बैंक) निभाएगा। वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को यह बात कही। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा कि ब्याज सहायता योजना को शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से प्रायोगिक आधार पर लागू किया गया था।</p><p>योजना की संचालन समिति की बैठक में लिए गए संस्थागत बदलाव के निर्णय के बाद, एक अप्रैल 2026 से योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी आरबीआई से भारतीय निर्यात-आयात बैंक को सौंपने की औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, एक अप्रैल 2026 से योजना के संचालन, पोर्टल प्रबंधन, सत्यापन और दावों के निपटान से जुड़े सभी कार्यों की जिम्मेदारी एक्जिम बैंक के पास होगी। हालांकि, भागीदारी करने वाले बैंकों के जनवरी-मार्च 2026 तिमाही से संबंधित अतिरिक्त या पूरक दावों का निपटारा आरबीआई ही करेगा।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:38:48 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/exim-bank-to-manage-dgft-interest-equalisation-scheme-from-april-2026</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Delhi HC ने FSSAI के 100 प्रतिशत दावा बैन आदेश पर लगाई रोक, Dabur को राहत]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/delhi-high-court-stays-fssai-order-on-dabur-products-claims]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली, सात अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खाद्य नियामक एफएसएसएआई के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें डाबर इंडिया को शहद, गाय का घी और खाद्य तेल जैसे उत्पादों को 100 प्रतिशत दावों के साथ बेचने से प्रतिबंधित किया गया था। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि डाबर लंबे समय से इन उत्पादों की बिक्री कर रही है और प्रथम दृष्टया उसे राहत देने का मामला बनता है, क्योंकि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आदेश पारित करने से पहले कंपनी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया था। न्यायमूर्ति महाजन ने कहा, “न्यायालय का प्रथम दृष्टया यह मत है कि सुनवाई का अवसर दिए बिना प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए था।</p><p>अगली सुनवाई तक विवादित आदेश पर रोक रहेगी।”
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध की है। डाबर की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि एफएसएसएआई का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई के पारित किया गया है। वहीं, केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने खाद्य नियामक के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि कंपनी को पहले ‘सुधार नोटिस’ एवं परामर्श जारी किए गए थे तथा उसके उत्पादों पर 100 प्रतिशत का दावा भ्रामक है।</p><p>एफएसएसएआई ने सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, जिन पर 100 प्रतिशत जैसे भ्रामक दावे किए गए हैं। इनमें शहद, सेब का सिरका, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:39:26 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/delhi-high-court-stays-fssai-order-on-dabur-products-claims</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Substandard Food Safety: FSSAI  ने Fortune Brand के सूरजमुखी तेल को बताया मानक से कम, AWL Agri Business पर कार्रवाई]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/fssai-penalty-on-awl-agri-business-for-substandard-oil]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने मानक से कम गुणवत्ता वाला फोर्टिफाइड सूरजमुखी खाद्य तेल बनाने और बेचने के मामले में खाद्य तेल कंपनी एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड पर जुर्माना लगाया है।
 अहमदाबाद स्थित एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड  फॉर्च्यून  ब्रांड के तहत खाद्य तेल बेचती है।
 यह कार्रवाई नियामक द्वारा गोवा से लिए गए एक नमूने के प्रयोगशाला परीक्षण में  विटामिन डी  का स्तर निर्धारित सीमा से काफी कम पाए जाने के बाद की गई है।</p><p>
 एफएसएसएआई ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि इस मामले में एक न्यायनिर्णयन आदेश पारित किया गया है और कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है।
 नियामक ने कहा कि यह आदेश एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड (मैंगलोर) के खिलाफ मानक से कम गुणवत्ता वाला फोर्टिफाइड खाद्य तेल बनाने और विपणन करने के मामले में पारित किया गया है।
 फोर्टिफाइड सूरजमुखी खाद्य तेल वह तेल होता है जिसमें पोषण बढ़ाने के लिए विटामिन ए और विटामिन डी जैसे अतिरिक्त पोषक तत्व मिलाए जाते हैं।
</p><p> उल्लंघनों का विवरण साझा करते हुए एफएसएसएआई ने बताया कि एक लीटर के फॉर्च्यून  फ्रायोला  रिफाइंड सूरजमुखी तेल (सीड) एफएसएसएआई द्वारा ताज फोर्ट अगुडा रिजॉर्ट एंड स्पा, गोवा से एकत्र किया गया था।
 प्राथमिक खाद्य प्रयोगशाला की जांच में पाया गया कि यह फोर्टिफाइड खाद्य तेल खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2018 के तहत निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा।</p><p>
 एफएसएसएआई ने कहा कि उत्पाद में विटामिन ए और विटामिन डी का स्तर निर्धारित सीमा से कम था। इस कारण इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 3(1)(जेडएक्स) के तहत मानक से कम गुणवत्ता वाला घोषित किया गया।
 कंपनी की अपील पर नमूने की जांच रेफरल प्रयोगशाला में कराई गई, जिसमें भी विटामिन डी का स्तर निर्धारित सीमा से काफी कम होने की पुष्टि हुई।
 इसके बाद केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने अभियोजन चलाने की मंजूरी दी और न्यायनिर्णयन के लिए आवेदन दायर किया गया।
 हालांकि, एफएसएसएआई ने जुर्माने की राशि का खुलासा नहीं किया।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:43:50 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/fssai-penalty-on-awl-agri-business-for-substandard-oil</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Akasa Air के सफर के 4 साल पूरे, Akasa Elevate Loyalty Program के जरिए ग्राहकों को मिलेगा बड़ा तोहफा]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/akasa-air-launches-akasa-elevate-loyalty-program]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>&nbsp;एयरलाइन कंपनी अकासा एयर ने परिचालन के चार वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को अपना  लॉयल्टी  कार्यक्रम  अकासा एलीवेट  शुरू किया।
 एयरलाइन का कहना है कि इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव और विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
 सात अगस्त, 2022 को उड़ान परिचालन शुरू करने वाली एयरलाइन ने शुक्रवार को चार वर्ष पूरे कर लिए।
 कंपनी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनय दुबे ने अब तक के सफर को बेहद रोमांचक बताया।</p><p>
 कंपनी ने एक बयान में कहा कि  अकासा एलीवेट  कार्यक्रम के तहत सदस्य पात्र उड़ानों के साथ-साथ सहायक उत्पादों और सेवाओं पर भी अंक अर्जित कर सकेंगे।
 दुबे ने कहा,  पांचवें वर्ष में प्रवेश के साथ हमारा ध्यान अनुशासित वृद्धि, परिचालन उत्कृष्टता, कर्मचारियों को केंद्र में रखने और ग्राहकों को विशिष्ट अनुभव उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहेगा।</p><p> 
 एयरलाइन ने कहा कि  अकासा एलीवेट  को ग्राहकों की निष्ठा के बदले उन्हें अधिक मूल्य, व्यक्तिगत पहचान और बेहतर यात्रा सुविधाएं प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
 पीटीआई-से बातचीत में दुबे ने कहा कि अकासा एयर खुद को  अनुभव आधारित विमानन सेवा मानती है।
</p><p> उन्होंने कहा,  हमने अपने ग्राहकों के लिए बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काफी मेहनत की है। ऐसे में ग्राहक लॉयल्टी कार्यक्रम की शुरुआत उनके प्रति आभार व्यक्त करने का स्वाभाविक विस्तार है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 12:37:19 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/akasa-air-launches-akasa-elevate-loyalty-program</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[UPI Transaction Charges 2026 | क्या UPI का इस्तेमाल करना होगा महंगा? जानें नए संशोधन बिल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का रुख]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/will-using-upi-become-expensive-find-out-about-new-amendment-bill-and-nirmala-sitharaman-stance]]></guid>
      <description><![CDATA[<div><span style="font-size: 1rem;">लोकसभा ने 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन करने वाले नए विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के पास होने के बाद सरकार को बैंकों और अन्य पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सहित अन्य नोटिफाइड डिजिटल भुगतान माध्यमों पर 'सर्विस चार्ज' लगाने का अधिकार मिल जाएगा।&nbsp;</span><span style="font-size: 1rem;">इस कानून का मुख्य उद्देश्य उस मौजूदा प्रावधान को हटाना है, जो अब तक बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों को नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक तरीकों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने से रोकता था। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बिल के पास होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि UPI लेनदेन पर तुरंत अपने आप कोई चार्ज लागू हो जाएगा।</span></div><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/will-the-delimitation-bill-pass-in-the-lok-sabha-the-dmk-has-laid-down-three-conditions" target="_blank"> Delimitation Bill 2026 | क्या लोकसभा में पास होगा परिसीमन बिल? DMK ने रखीं 3 शर्तें, समर्थन मिलते ही NDA के करीब होगा बहुमत का आंकड़ा</a></h3><div><span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div><div><b>क्या इसका असर व्यापारियों या ग्राहकों पर पड़ेगा?</b></div><div>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि डिजिटल ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि MDR चार्ज से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी में ज़्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी।</div><div><br></div><div>उन्होंने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की इस बात का जवाब देते हुए X पर एक पोस्ट में यह बात कही कि UPI इस्तेमाल करने के लिए आम लोगों को ज़्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। सीतारमण ने कहा कि NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी को अभी MDR पर फैसला लेना है, और यह फैसला संसद द्वारा टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास करने के बाद ही लिया जाएगा।</div><div>&nbsp;</div><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/national/india-first-woman-top-gun-pilot-bhawana-kanth-fcl-course-operation-sindoor-women-in-armed-forces" target="_blank">भारत की बेटियां संभाल रहीं युद्ध की कमान, Bhawana Kanth बनीं देश की पहली Top Gun Pilot, Captain Shivani Sehrawat ने संभाला Army Chief के ADC का पद</a></h3><div><br></div><div>रमेश को जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा, "@Jairam_Ramesh जी, कोई गलत बात फैलाने से पहले कृपया इस बात पर गौर करें: मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) सिर्फ़ व्यापारियों पर लागू होता है, न कि एंड यूज़र्स/ग्राहकों पर। इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सिक्योरिटी पर ज़्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी। UPI के सभी यूज़र्स को इस निवेश का फ़ायदा मिलेगा।"</div><div><br></div><div>सीतारमण ने यह भी कहा कि संसद द्वारा टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल पास करने के बाद ही एक कमेटी MDR पर फ़ैसला करेगी।</div><div><br></div><div><b>RTGS, NEFT पर पहले से ही चार्ज लागू हैं</b></div><div>RTGS (रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) और NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर) के ज़रिए किए जाने वाले रियल-टाइम पेमेंट के लिए पहले से ही सर्विस चार्ज देना पड़ता है। हालाँकि, UPI ट्रांज़ैक्शन को अब तक ऐसे चार्ज से छूट मिली हुई है। अभी तक, कोई भी बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 269SU के तहत बताए गए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए किसी पर भी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकता है।<span style="font-size: 1rem;">&nbsp;</span></div>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 11:45:12 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/will-using-upi-become-expensive-find-out-about-new-amendment-bill-and-nirmala-sitharaman-stance</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[RBI ने डिफ़ॉल्टरों के मोबाइल फोन बंद करने पर लगाई रोक, Loan Recovery के नियम जारी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-bars-banks-from-locking-mobile-phones-of-loan-defaulters]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंक व्यक्तिगत, वाहन या आवास ऋण नहीं लौटाने वालों से कर्ज की वसूली के लिए उनके मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप को बंद या निष्क्रिय नहीं कर सकते हैं। हालांकि, यदि संबंधित उपकरण की खरीद के लिए उसी बैंक ने कर्ज दिया है, तो यह कदम उठाया जा सकता है। आरबीआई ने कहा कि जिन मामलों में उपकरण की कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने की अनुमति है, उनमें भी बैंक को शुरुआत से ही उपकरण बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा।</p><p>केंद्रीय बैंक ने कर्ज वसूली और ‘रिकवरी’ एजेंसियों की नियुक्ति से जुड़े आचरण संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उधारकर्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिये उत्पीड़न और अभद्र के इस्तेमाल जैसी शिकायतें की थीं। उसके बाद यह कदम उठाया गया है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-repo-rate-kept-at-5-point-25-percent-bank-officials-welcome-decision" target="_blank" rel="noopener">RBI Repo Rate 5.25% पर स्थिर रहने से कर्ज की लागत भरोसेमंद रहेगी: बैंकरों का दावा</a></h3><p>आरबीआई के परिपत्र के अनुसार, ये नियम एक जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘कोई भी बैंक ऐसी प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं करेगा, जो ऋण वसूली के साधन के रूप में उधारकर्ता के मोबाइल फोन, टैबलेट या लैपटॉप जैसी मोबाइल उपकरण की किसी भी कार्यक्षमता को सीमित या निष्क्रिय करे। अपवाद केवल उन मामलों में होगा, जहां संबंधित उपकरण की खरीद के लिए बैंक ने ही ऋण उपलब्ध कराया हो।’’ केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यदि मोबाइल उपकरण की खरीद बैंक से कर्ज लेकर की गई है, तो बैंक उसकी कार्यक्षमता सीमित या निष्क्रिय करने का विकल्प अपना सकता है।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/massive-surge-in-forex-reserves-sanjay-malhotra-says-foreign-investment-has-strengthened-economy" target="_blank" rel="noopener">Forex Reserve में जबरदस्त उछाल, Sanjay Malhotra बोले- Foreign Investment से भारतीय अर्थव्यवस्था हुई सशक्त</a></h3><p>हालांकि, ऐसे मामलों में भी बैंक को उपकरण को तुरंत बंद करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होगी। आरबीआई ने यह भी कहा कि बैंक आवश्यक सुविधाओं को किसी भी स्थिति में बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे। इनमें ‘इनकमिंग कॉल’, एसएमएस और आपातकालीन एसओएस सुविधा शामिल हैं।</p><p>इससे पहले, मई में आरबीआई ने बैंक और एनबीएफसी समेत उसके दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण वसूली और रिकवरी एजेंसियों की नियुक्ति से संबंधित आचरण पर मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिस पर विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त हुए थे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सुझावों में यह सुनिश्चित करने की बात कही गई थी कि बैंक और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) केवल सुरक्षित, मानकों के अनुरूप और परीक्षण की गई ‘डिवाइस-लॉकिंग’ तकनीक का ही उपयोग करें तथा बिना लाइसेंस या गैर-भरोसेमंद सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को रोका जाए। इन सुझावों को स्वीकार करते हुए आरबीआई ने कहा कि तकनीक आधारित वसूली प्रणाली लागू करने वाली वित्तीय संस्थाएं और उससे जुड़ी तीसरे पक्ष की सेवा प्रदाता कंपनी को संबंधित डिवाइस के मूल उपकरण विनिर्माता या ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ मंच से इस तकनीक का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-governors-major-announcement-gdp-projection-at-67-repo-rate-set-at-525-in-monetary-policy" target="_blank" rel="noopener">RBI Governor का बड़ा ऐलान: GDP Forecast बढ़ाकर 6.7% किया, Monetary Policy में Repo Rate 5.25% पर बरकरार</a></h3><p>आरबीआई ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि किसी भी उधारकर्ता या गारंटर की जानकारी केवल उतनी ही सीमा तक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ साझा की जाए, जितनी ऋण वसूली से जुड़े दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक हो।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:56:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/rbi-bars-banks-from-locking-mobile-phones-of-loan-defaulters</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Meta अधिकारियों से Ashwini Vaishnaw की लगातार दूसरे दिन पूछताछ, Safe Harbor सुरक्षा पर दी चेतावनी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/meta-interrogated-by-indian-government-over-safe-harbor-and-algorithms]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा के अधिकारियों से बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन भारत सरकार के अधिकारियों ने पूछताछ की। इस दौरान इंस्टाग्राम के कंटेंट सुझाव संबंधी एल्गोरिद्म और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मेटा के अधिकारियों ने डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), बॉट खातों और कृत्रिम सामग्री से जुड़े मुद्दों को स्वीकार किया और कहा कि कंपनी इनसे निपटने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।&nbsp;</p><p>सूत्रों ने कहा कि करीब एक घंटे चली बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि वह इन मुद्दों पर कंपनी पर लगातार दबाव बनाए रखेगी और ठोस कदम उठाने को कहेगी। सरकार ने मेटा से यह भी पूछा कि क्या वह भारतीय कानूनों का पालन कर रही है, उसके एल्गोरिद्म कैसे काम करते हैं और क्या उसके अनुपालन तंत्र में पर्याप्त जांच-परख और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का संचालन करने वाली कंपनी मेटा ने इस मुद्दे पर सरकार को भरोसा दिलाया कि वह इन चुनौतियों को दूर करने के लिए गंभीरता से और कड़ी मेहनत कर रही है। मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल केपलन की अगुवाई वाली टीम ने लगातार दूसरे दिन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/meta-apologizes-to-pm-modi-over-removed-facebook-post-after-summons" target="_blank" rel="noopener">PM Modi का Facebook पोस्ट हटाने पर Meta ने माफी मांगी, मंत्री Ashwini Vaishnaw से मुलाकात</a></h3><p>&nbsp;यह बैठक हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाए जाने के बाद सरकार द्वारा भेजे गए समन के संदर्भ में हो रही है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि मेटा के साथ बैठकों का यह दौर तीन से चार दिन तक चलेगा, जिसमें आगे तकनीकी टीम भी सरकार के साथ विस्तृत चर्चा करेगी। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के प्रावधानों का हवाला देते हुए मेटा को चेताया कि यदि वह मध्यस्थ के रूप में अपने दायित्वों का पालन नहीं करती है, तो उसे मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा (कानूनी छूट) खतरे में पड़ सकती है। इससे पहले, बुधवार को हुई बैठक के बाद सरकारी सूत्रों ने बताया था कि मेटा ने प्रधानमंत्री की पोस्ट हटाने की गलती के लिए माफी मांगी थी और साथ ही डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री तथा भुगतान लेकर कुछ कंटेंट को बढ़ावा देने जैसी नाकामियों को भी स्वीकार किया था।&nbsp;</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/ceo-zuckerberg-apologizes-to-india-for-content-errors" target="_blank" rel="noopener">Meta को भारत की कड़ी चेतावनी: Deepfakes और CSAM पर Mark Zuckerberg की माफी, अब नहीं मिलेगा Safe Harbor Protection</a></h3><p>केपलन ने एक लिखित बयान में कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट पर लगे प्रतिबंध की त्रुटि के लिए मंत्री से माफी मांगी। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि मेटा की तरफ से यह माफी कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग की ओर से आई थी। सरकार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मेटा पर्याप्त कदम उठा रही है ताकि उसके मंचों पर अवैध सामग्री को रोका जा सके। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने माना कि उसकी प्रणालियां अभी पूरी तरह सक्षम नहीं हैं और वह सभी अवैध सामग्री को नियंत्रित नहीं कर पा रही है।&nbsp;</p><p>हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को लगभग पांच घंटे के लिए हटा दिया गया था, जिसे बाद में मेटा ने बहाल करते हुए इसे कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित कंटेंट फिल्टर की गलती बताते हुए माफी मांगी थी। सरकार ने पिछले महीने इंस्टाग्राम पर कथित बाल यौन शोषण सामग्री वाले विज्ञापनों को लेकर भी मेटा को नोटिस जारी किया था। इन बैठकों में एल्गोरिद्म से जुड़े पक्षपात, प्रमुख खातों की सुरक्षा, डीपफेक और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हो रही है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:56:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/meta-interrogated-by-indian-government-over-safe-harbor-and-algorithms</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Dabur ने 100% दावों पर बैन के FSSAI फैसले को Delhi High Court में चुनौती दी]]></title>
      <guid isPermaLink="false"><![CDATA[https://www.prabhasakshi.com/business/dabur-challenges-fssai-order-on-100-percent-claims-in-delhi-high-court]]></guid>
      <description><![CDATA[<p>डाबर इंडिया ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के उस निर्देश को चुनौती देते हुए बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें कंपनी को शहद, देसी घी और खाद्य तेल जैसे उत्पादों को 100 प्रतिशत दावों के साथ बेचने से रोक दिया गया है। कंपनी के वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराने के लिए मामले का उल्लेख किया। इस पर सुनवाई शुक्रवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ करेगी।</p><p>खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को 100 प्रतिशत जैसे भ्रामक दावों के साथ उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इनमें शहद, सेब का सिरका, नारियल तेल, तिल का तेल, देसी घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। एफएसएसएआई ने कहा था कि 100 प्रतिशत के दावे खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन हैं, क्योंकि ये अस्पष्ट, सत्यापन योग्य नहीं और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं।</p><h3 class="readthish3">इसे भी पढ़ें: <a href="https://www.prabhasakshi.com/business/fssai-takes-action-against-misleading-claims-orders-dabur-to-recall-product-labeled-100-natural" target="_blank" rel="noopener">Misleading Claims पर FSSAI की बड़ी कार्रवाई, Dabur को '100% Natural' टैग वाले उत्पाद वापस लेने का Order</a></h3><p>नियामक ने डाबर को ऐसे सभी उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने और 15 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने का निर्देश दिया था। डाबर ने अपनी याचिका में कहा है कि एफएसएसएआई का यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसे कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बगैर जारी किया गया है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि एफएसएसएआई के पास इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है और मौजूदा आदेश अस्पष्ट, गैर-युक्तिसंगत तथा बिना पर्याप्त विचार के पारित किया गया है।</p>]]></description>
      <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:56:00 +0530</pubDate>
      <link>https://www.prabhasakshi.com/business/dabur-challenges-fssai-order-on-100-percent-claims-in-delhi-high-court</link>
      <dc:creator><![CDATA[प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क]]></dc:creator>
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