भारत की बेटियां संभाल रहीं युद्ध की कमान, Bhawana Kanth बनीं देश की पहली Top Gun Pilot, Captain Shivani Sehrawat ने संभाला Army Chief के ADC का पद

हम आपको बता दें कि बिहार के दरभंगा में 1 दिसंबर 1992 को जन्मी भावना कांत ने बरौनी रिफाइनरी डीएवी पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई की डिग्री हासिल की।
भारतीय सेना और वायुसेना में महिलाओं का बढ़ता पराक्रम अब केवल प्रेरणा की कहानी नहीं, बल्कि भारत की युद्ध शक्ति का नया चेहरा बन चुका है। भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत देश की पहली महिला 'टॉप गन' कॉम्बैट पायलट बन गई हैं, जबकि भारतीय सेना की कैप्टन शिवानी सहरावत सेना प्रमुख की पहली महिला एड-डी-कैंप (ADC) नियुक्त हुई हैं। ये दोनों उपलब्धियां साबित करती हैं कि भारत की बेटियां अब सिर्फ सीमा की रक्षा ही नहीं कर रहीं, बल्कि युद्ध की रणनीति तय करने और सेना के नेतृत्व में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।
हम आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा कर स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत ने इतिहास रच दिया है। ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (TACDE) में आयोजित यह 20 सप्ताह का कोर्स इतना चुनौतीपूर्ण माना जाता है कि इसमें केवल चुनिंदा लड़ाकू पायलटों को ही प्रवेश मिलता है। वायुसेना के महज लगभग एक प्रतिशत फाइटर पायलट ही इस स्तर तक पहुंच पाते हैं। यही कारण है कि इसकी तुलना अमेरिकी नौसेना के विश्वप्रसिद्ध 'टॉप गन' कार्यक्रम से की जाती है।
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इस कोर्स को पूरा करने वाले अधिकारी केवल बेहतरीन पायलट नहीं रहते, बल्कि वे युद्ध रणनीति के विशेषज्ञ बन जाते हैं। वे जटिल हवाई अभियानों की योजना बनाते हैं, आधुनिक हथियारों के प्रभावी इस्तेमाल की रणनीति तैयार करते हैं, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिशनों का नेतृत्व करते हैं तथा भविष्य के युद्ध सिद्धांत विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो भावना कांत अब केवल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पायलट नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की युद्धनीति गढ़ने वाली चुनिंदा सैन्य रणनीतिकारों में शामिल हो गई हैं।
हम आपको बता दें कि बिहार के दरभंगा में 1 दिसंबर 1992 को जन्मी भावना कांत ने बरौनी रिफाइनरी डीएवी पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई की डिग्री हासिल की। कुछ समय तक टीसीएस में कार्य करने के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना का रास्ता चुना। जून 2016 में वे अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ देश की पहली महिला फाइटर पायलटों के बैच का हिस्सा बनीं। वर्ष 2019 में वे मिग-21 बाइसन पर दिन के समय लड़ाकू अभियान के लिए योग्य घोषित होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। बाद में उन्होंने अत्याधुनिक सुखोई-30 एमकेआई जैसे फ्रंटलाइन मल्टीरोल फाइटर विमान का संचालन किया। 2021 की गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनने से लेकर 2024 की गणतंत्र दिवस फ्लाईपास्ट तक उनका सफर लगातार नए कीर्तिमान स्थापित करता रहा है। वर्ष 2020 में उन्हें 'नारी शक्ति पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया था।
साथ ही महिलाओं की बढ़ती सैन्य भागीदारी का दायरा केवल वायुसेना तक सीमित नहीं है। भारतीय सेना में कैप्टन शिवानी सहरावत का सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के एड-डी-कैंप (ADC) के रूप में नियुक्त होना भी ऐतिहासिक उपलब्धि है। ADC का दायित्व केवल औपचारिक नहीं होता, बल्कि यह अत्यंत संवेदनशील और भरोसेमंद जिम्मेदारी होती है। इस पद पर वही अधिकारी चुने जाते हैं जिनका सेवा रिकॉर्ड उत्कृष्ट हो, अनुशासन अनुकरणीय हो और सैन्य प्रक्रियाओं व प्रोटोकॉल की गहरी समझ हो। किसी महिला अधिकारी का पहली बार इस पद तक पहुंचना भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
देखा जाये तो यह उपलब्धियां ऐसे समय सामने आई हैं जब भारत की सुरक्षा चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, सीमापार उकसावे और बदलते युद्ध स्वरूप के बीच भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सैन्य शक्ति अब किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। हम आपको याद दिला दें कि पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी भारतीय सशस्त्र बलों की महिला अधिकारियों और सैनिकों ने निगरानी, एयर डिफेंस, ऑपरेशनल प्लानिंग, खुफिया समन्वय और मिशन सपोर्ट जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय भूमिका निभाकर यह सिद्ध किया था कि आधुनिक युद्ध केवल मोर्चे पर गोली चलाने का नहीं, बल्कि तकनीक, रणनीति और नेतृत्व का भी होता है, जिसमें भारत की बेटियां पूरी क्षमता के साथ योगदान दे रही हैं।
बहरहाल, स्क्वाड्रन लीडर भावना कांत का 'टॉप गन' बनना और कैप्टन शिवानी सहरावत का सेना प्रमुख की ADC नियुक्त होना केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं हैं। ये उस नए भारत का प्रतीक हैं, जहां महिलाओं को अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी दी जा रही है, जहां वे युद्ध लड़ने के साथ-साथ युद्ध की रणनीति भी तय कर रही हैं। यह बदलती तस्वीर भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देती है कि अब भारत की सुरक्षा व्यवस्था में उसकी बेटियां भी सर्वश्रेष्ठ योद्धा की भूमिका निभा रही हैं।
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