Forex Reserve में जबरदस्त उछाल, Sanjay Malhotra बोले- Foreign Investment से भारतीय अर्थव्यवस्था हुई सशक्त

भारतीय रिजर्व बैंक की नई विदेशी मुद्रा जमा योजना ने दो महीने से कम समय में 40.8 अरब डॉलर जुटाकर 2013 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार यह मजबूत निवेश प्रवाह देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है और भू-राजनीतिक स्थिरता के साथ रुपया और मजबूत होने की संभावना है। कीवर्ड: आरबीआई, विदेशी मुद्रा भंडार, संजय मल्होत्रा, रुपया बनाम डॉलर, निवेश।
भारतीय रिजर्व बैंक का कहना है कि विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा योजना को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। केंद्रीय बैंक के अनुसार इस योजना के तहत लगातार मजबूत विदेशी धन आ रहा है और फिलहाल इसे तय समय से पहले बंद करने का कोई विचार नहीं है। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य बने रहे तो आने वाले समय में रुपया और मजबूत हो सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा योजना के तहत बैंकों को अपेक्षा के अनुरूप मजबूत धनराशि प्राप्त हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक ने इस योजना के लिए कोई निश्चित लक्ष्य तय नहीं किया है, लेकिन आगे भी अच्छे निवेश आने की उम्मीद है।
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इस विशेष सुविधा की घोषणा 5 जून 2026 को की थी। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा की नई आमद बढ़ाना और घरेलू बैंकिंग प्रणाली में तरलता को मजबूत करना था। यह योजना 8 जून 2026 से लागू हुई थी। इसके बाद कई बैंकों ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की, ताकि विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अधिक से अधिक निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके।
गौरतलब है कि 31 जुलाई 2026 तक इस विशेष व्यवस्था के तहत कुल 40.816 अरब डॉलर की राशि जुटाई जा चुकी है। इसमें सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा योजना का रहा, जिसके माध्यम से 36.725 अरब डॉलर की राशि आई है। यह वर्ष 2013 में इसी तरह की योजना के तहत जुटाए गए लगभग 26 अरब डॉलर से भी अधिक है। खास बात यह है कि इस बार यह उपलब्धि योजना शुरू होने के दो महीने से भी कम समय में हासिल की गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस कुल राशि में विदेशी मुद्रा में विदेशी उधारी के माध्यम से 2.575 अरब डॉलर और बाहरी वाणिज्यिक उधारी के जरिए 1.516 अरब डॉलर की आमद भी शामिल है। भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि इन निवेशों से देश की बाहरी वित्तीय स्थिति पहले से और अधिक मजबूत हुई है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास पहले से ही मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर बाहरी स्थिति थी। नई योजना से इस स्थिति को और मजबूती मिली है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के पास अभी विभिन्न देशों के अनुसार निवेश का अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं है।
रुपये की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले एक महीने में भारतीय मुद्रा में मजबूती देखने को मिली है। उनका मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कम होता है तो आने वाले समय में रुपया और मजबूत हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में रुपया अपने वास्तविक मूल्य से कुछ कम आंका जा रहा है।
बता दें कि बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.11 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक महीने के उच्च स्तर 94.92 तक भी पहुंचा था। हालांकि यह स्तर अभी भी 4 जून की तुलना में केवल लगभग 0.7 प्रतिशत अधिक है, जबकि अगले दिन भारतीय रिजर्व बैंक ने इस विशेष योजना की घोषणा की थी।
गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर दोहराया है कि वह रुपये के लिए कोई निश्चित विनिमय दर तय नहीं करता। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारतीय मुद्रा का मूल्य बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक का विश्वास है कि मजबूत विदेशी निवेश और स्थिर आर्थिक स्थिति से देश की वित्तीय मजबूती आने वाले समय में और बेहतर होगी।
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