1. हिंदू-मुस्लिम एकता की भव्य इमारत खड़ी करने का अवसर

    हिंदू-मुस्लिम एकता की भव्य इमारत खड़ी करने का अवसर

    उच्चतम न्यायालय ने राम मंदिर निर्माण पर आपसी सहमति बनाने के बहाने देश में सामाजिक सद्भाव का अभूतपूर्व वातावरण बनाने और हिंदू-मुस्लिम एकता को सिद्ध करने का एक अवसर उपलब्ध कराया है।

  2. योगी पर सवाल बाद में उठाएं पहले उन्हें काम तो करने दें

    योगी पर सवाल बाद में उठाएं पहले उन्हें काम तो करने दें

    जो लोग योगी को मुख्यमंत्री के तौर पर कट्टर हिंदूवादी फैसला मान रहे हैं वो योगी को नहीं मोदी को नहीं समझ पाए। वे पहले उनकी सर्जिकल स्ट्राइक नहीं समझ पाए, फिर नोटबंदी भी नहीं समझ पाए और न ही यूपी की जनता को समझ पाए।

  3. दलित छात्रों से भेदभाव करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो

    दलित छात्रों से भेदभाव करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो

    मेरा मानना है कि हमें दलित और वंचित छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। मेरे दिमाग में एक ही हल आता है कि भेदभाव के खिलाफ कानूनी कारवाई हो।

  4. वार्ता से अयोध्या मुद्दे का हल संभव, एक और प्रयास करें तो सही

    वार्ता से अयोध्या मुद्दे का हल संभव, एक और प्रयास करें तो सही

    अयोध्या मुद्दे पर आपसी सहमति की जो राह अदालत ने एक बार फिर खोली है देखना होगा उस पर कितने लोग चलने को तैयार होते हैं या फिर यह मुद्दा फिर ''राजनीति'' का शिकार होकर अदालत की चौखट पर वापस पहुंचता है।

  5. केसरिया होली के बाद केसरिया पोंगल, केसरिया ओणम भी हो

    केसरिया होली के बाद केसरिया पोंगल, केसरिया ओणम भी हो

    विधानसभा चुनाव परिणाम देखकर यह कहना होगा कि भारत के विजय का उदय पर्व शुभ हो। उत्तर भारत में केसरिया होली हुई तो केसरिया पोंगल और केसरिया ओणम भी दूर नहीं होना चाहिए।

  6. विजय का सेहरा तो आदित्यनाथ के सिर ही बँधना चाहिए था

    विजय का सेहरा तो आदित्यनाथ के सिर ही बँधना चाहिए था

    योगी आदित्यनाथ ! इस अपूर्व विजय का सेहरा उसी के माथे बांधना चाहिए था, जो इसका हकदार था। श्मशान और कब्रिस्तान की बहस मोदी से पहले योगी ने चलाई थी।

  7. आतंकी संगठनों से भी सुरक्षा का आश्वासन चाहते हैं कश्मीरी पंडित

    आतंकी संगठनों से भी सुरक्षा का आश्वासन चाहते हैं कश्मीरी पंडित

    कश्मीरी पंडित समुदाय के लाखों परिवार वर्तमान हालात तथा अन्य असुविधाओं के चलते भी घर वापसी के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें सुरक्षा के प्रति कोई आश्वासन नहीं मिल रहा है। परंतु वे इस आश्वासन को बहुत जरूरी समझते हैं।

  8. परेशान क्यों है कांग्रेस? उसने जो बोया वही तो पाया है

    परेशान क्यों है कांग्रेस? उसने जो बोया वही तो पाया है

    लोकतंत्र हमारे देश में आंकड़ों का खेल बन गया है..फर्क सिर्फ इतना है कि कल जमाना कांग्रेस का था आज बीजेपी का है। गोवा और मणिपुर में जो हुआ वह पहले कांग्रेस भी विभिन्न राज्यों में कर चुकी है।

  9. इस तरह सपा, बसपा के सारे समीकरण ध्वस्त कर दिये मोदी ने

    इस तरह सपा, बसपा के सारे समीकरण ध्वस्त कर दिये मोदी ने

    यह जीत बीजेपी की नहीं मोदी की है। मोदी ने जिस तरह से प्रचार किया, वह देखने लायक तो था ही समझने वाला भी था। मोदी जहां भी जनसभा करते वहां वह अपना भाषण टुकड़ों में बांट कर आगे बढ़ाते थे।

  10. नाहिद आफरीन की सुरीली आवाज़ से कट्टरपंथियों को क्यों लग रहा डर

    नाहिद आफरीन की सुरीली आवाज़ से कट्टरपंथियों को क्यों लग रहा डर

    सुरीली आवाज का गला घोंटने के लिए कट्टरपंथियों ने 46 फरमान जारी करते हुए नाहिद को 25 मार्च को संगीत कार्यक्रम की प्रस्तुति नहीं देने के लिए धमकाया है।

  11. कांग्रेस की नाव बिना मल्लाह के तैर रही है, कहीं डूब ना जाए

    कांग्रेस की नाव बिना मल्लाह के तैर रही है, कहीं डूब ना जाए

    इन पांच प्रांतों के चुनाव ने सिद्ध कर दिया है कि कांग्रेस की नाव बिना मल्लाह के तैर रही है। वह चल नहीं रही है, बस तैर रही है। यदि यह नाव डूब गई तो भारतीय लोकतंत्र का बड़ा दुर्भाग्य होगा। मोदी-पार्टी बिल्कुल निरंकुश हो जाएगी।

  12. ईवीएम तो बहाना है, ''बड़े जनादेश'' को संदिग्ध बनाना है

    ईवीएम तो बहाना है, ''बड़े जनादेश'' को संदिग्ध बनाना है

    अरविंद केजरीवाल और मायावती ने ईवीएम के खिलाफ जो अभियान चलाया है उस पर यही कहा जा सकता है कि यह दरअसल भाजपा को मिले ''बड़े जनादेश'' को जनता की नजर में संदिग्ध बनाने का प्रयास भर है।

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