By अभिनय आकाश | Jul 27, 2026
क्या देश में नया आंदोलन शुरू होने जा रहा है? क्या सड़कों से उठकर इंटरनेट के सर्वर को हिला देने वाला एक नया युवा विद्रोह भारत की सबसे पुरानी और संवेदनशील व्यवस्था को चुनौती दे रहा है? सोशल मीडिया का 'रील' वाला ज़माना अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, यह देश का नया डिजिटल आंदोलन केंद्र बन चुका है। जिस तरह 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने इंस्टाग्राम के ज़रिए ज़मीनी आक्रोश खड़ा किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कुर्सी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, उसने विरोध के एक नए दौर की शुरुआत कर दी है। आज अलग-अलग मांगों के साथ इंस्टाग्राम पर कई नए मोर्चे खुल रहे हैं। ज़ाहिर है, इस डिजिटल दौर में अगर इंस्टाग्राम को जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी का नया 'जंतर-मंतर' कहा जाए, तो यह रत्ती भर भी गलत नहीं होगा। एक डिजीटल विस्फोट ने पिछले 24 से 48 घंटों में पूर देश के सियासी और सामाजिक हल्कों में तहलका मचा दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने जिस तरीके से शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन किया उसके ठीक बाद अब सोशल मीडिया के दीवारों पर एक ही नारा गूंज रहा है- आरक्षण हटाओ आंदोलन! समानता के अधिकार, योग्यता और न्याय इन तीन शब्दों के ईर्द-गिर्द बुने गए नए अभियान जिसे रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन यानी आरएचए का नाम दिया गया है। इस आंदोलन का मुख्य मकसद भारत की मौजूदा जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था का विरोध करना और कॉलेज एडमिशन से लेकर सरकारी नौकरियों में मेरिट यानी योग्यता को एकमात्र आधार बनाने की मांग करना है। जो लोग आंदोलन कर रहे हैं, उनका नारा है कि सारी जातियां एक समान, मेरा बस ये देश महान। इनका तर्क है कि 21वीं सदी के भारत में हर नागरिक को बिना किसी कोटे या जितगत भेदभाव के एक समान अवसर यानी फुल ऑपरच्युनिटी मिलनी चाहिए। हालांकि इनका ये भी कहना है कि वो किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं बल्कि उनका प्रस्ताव ये है कि सरकार को रोजमर्रा के सार्वजनिक जिंदगी में जाति की पहचान को ही पहचानना बंद कर देना चाहिए ताकी जातिवाद जड़ से खत्म हो सके।
बहुत ज्यादा तथ्यों की पड़ताल करेंगे तो आपको बहुत सारे चेहरे नजर आएंगे जो इसके सपोर्ट में यानी कि रिजर्वेशन हटना चाहिए। इसके सपोर्ट में वीडियो बना रहे हैं। लेकिन कोई इसका सिंगल फाउंडर सामने नहीं आया है। हां, एक लड़का जरूर बहुत आगे आकर वीडियो बना रहा है। लग रहा है कि यह सारा आंकड़ा उसी का हो सकता है। फिलहाल पेज के बायो में लिखा है बैक बाय सिटीजंस हु बिलीव रिफॉर्म डिर्व्स अ बॉयज। यानी यह उन आम नागरिकों और छात्रों द्वारा संचालित है जो व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। इस पेज पर कई युवा रिजर्वेशन हटाओ का नारा देते हुए सरकार और आरएसएस से भी सवाल पूछते दिख रही हैं। मेरा फर्ज है सवाल पूछना। क्यों भारतीय जनता पार्टी चुप है? क्यों कांग्रेस चुप है? क्यों आम आदमी पार्टी चुप है? यही एकमात्र ऐसा मुद्दा था जिस पे सारी पार्टियां चुप हैं। कोई इस पे नहीं बोलता। सब लोग एक ही थाली में खाना खाते हैं ये लोग। सबका पता होता है कि कौन सा पार्लियामेंट में कानून पास होने वाला है, कौन सा नहीं होने वाला और सिर्फ एक्टिंग करते हैं। जनता को बरगलाने का काम करते हैं। भारतीय जनता पार्टी से बस एक खुशी की चीज यह है कि वो देशद्रोही नहीं है। राजनीतिक पार्टी जरूर है। देशद्रोही नहीं है कम से कम।
इसका जवाब है बिल्कुल नहीं फिलहाल नहीं। इस आंदोलन के एडमिन और रणनीतिकारों ने बहुत ही सोची समझी रणनीति अपनाई है। उन्होंने इसे फर्स्ट पीसफुल ऑनलाइन प्रोटेस्ट बताया है। पेज के जरिए युवाओं से अपील की गई है कि वह सड़कों पर ना उतरे। मतलब कि सड़कों पर उतर कर लाठियां खाने के बजाय या कानून व्यवस्था बिगाड़ने के बजाय डिजिटल ताकत का इस्तेमाल करें। समर्थकों को निर्देश दिया गया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और सीजेपी के सोशल मीडिया कमेंट सेक्शन में जाकर पूरी तरीके से शांतिपूर्ण तरीके से रिजर्वेशन हटाओ लिखकर अपनी मांग को दर्ज कराएं। हालांकि इस ऑनलाइन अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए देश के कुछ हिस्सों खासकर देश की राजधानी दिल्ली में प्रशासन पूरी तरीके से अलर्ट है। छात्र संगठनों की हर हलचल पर नजर रखी जा रही है और एतिहातन सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि इंटरनेट का यह उबाल सड़कों पर किसी बड़ी अव्यवस्था का रूप ना ले सके। इस पूरे आंदोलन का एक और पहलू भी है जिसे भी आपके लिए समझना जरूरी है। जहां एक तरफ देश का जेंजी युवा मेरिट और आर्थिक आधार पर अवसरों की मांग कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सामाजिक न्याय के समर्थकों का दृढ़ तर्क यह है कि भारत में भैया सदियों से सामाजिक असमानता चली आ रही है। जातिगत भेदभाव और प्रतिनिधित्व की कमी है और उसे दूर करने के लिए आरक्षण आज भी बेहद जरूरी संवैधानिक हथियार है। हालांकि सवाल इस बात पर भी उठता है कि 700 साल पहले अगर किसी के ऊपर अत्याचार हुआ तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आने वाले 7000 साल तक उसके ऊपर अत्याचार ही होगा। लोग आगे बढ़ रहे हैं। यह जो रिजर्वेशन अब तक मिला है इसका फायदा हुआ है। लोग स्टेबल हुए हैं और आज भी अगर कोई एससी एसटी है और किसी अच्छी पोजीशन पर है तो उसके बच्चे को भी वही सारी चीजें फेस करनी होंगी जो उसके पूर्वजों ने किया होगा। जाहिर सी बात है यह बिल्कुल कुतर्क लगता है। शायद इसीलिए खुलकर इस पर बहस हो रही है और यह जो प्रोटेस्ट कर रही हैं इनका भी कहना है कि तार्किक बहस होनी चाहिए।
जेई परीक्षा में 2023 में जो एससी एसटी हैं उनका कट ऑफ 37 था और जनरल का 90 के करीब था। मतलब कि 90 से भी ज्यादा प्रतिशत तो जनरल कास्ट के लड़के हैं वो 90 नंबर लाकर भी सिलेक्ट नहीं हुए और जो दूसरे लड़के वो 38 नंबर लाकर सिलेक्ट हो गए। इसी तरह 2025 के नीट का एग्जाम का रिजल्ट तो आपको याद ही होगा जिसपर खूब बवाल मचा था। हुआ यह था कि -40 लाने वाले का सिलेक्शन हो गया था। -40 मतलब कोरा कागज भी अगर चुपचाप आप दे देते हैं फिर भी जीरो आते हैं। माइनस लाने के लिए आपको एक्स्ट्रा टैलेंट की जरूरत पड़ती है। जो कि नीट 2025 में हुआ था। रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट कहती है कि 37% वैसी जातियां जो ओबीसी में डाल दी गई हैं उन्हें कभी ओबीसी का लाभ मिला ही नहीं। मतलब यह कि 2600 से ज्यादा जातियों को ओबीसी में डाला गया है। यानी किसी को कुछ नहीं मिल रहा तो ओबीसी में डाल दो। ओबीसी में इतने सारे लोगों को भर दिया गया है कि उनमें से आधे से ज्यादा लोगों ने कभी ओबीसी का लाभ ही नहीं उठाया। इसलिए जब कोई नेता बोले कि ओबीसी रिजर्वेशन बढ़ा देंगे तो क्योंकि ऑलरेडी 2600 जातियां है। 80 साल के आसपास होने जा रहे हैं इस रिजर्वेशन पॉलिसी के। 78 साल हो गए हैं। इस रिजर्वेशन पॉलिसी से देश के 20% दलित और 12% आदिवासियों में से कितने प्रतिशत को लाभ मिला है? भारत की कुल जनसंख्या का मात्र 3% टोटल सरकारी नौकरी है।
E20 जनता पार्टी कोई आधिकारिक राजनीतिक दल या संस्था नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर छिड़ा एक डिजिटल अभियान है। इस मुहिम की शुरुआत उन वाहन चालकों और नागरिकों ने की है, जो E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड) के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल की उपलब्धता की मांग कर रहे हैं। इस अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार E20 पेट्रोल की आपूर्ति भले जारी रखे, लेकिन पेट्रोल पंपों पर बिना एथेनॉल वाला सामान्य पेट्रोल भी मिलना चाहिए ताकि विकल्प चुनना ग्राहकों के हाथ में हो। सोशल मीडिया पर यह कैंपेन तेजी से ट्रेंड कर रहा है और लोग इससे जुड़ते जा रहे हैं। इनका तर्क सीधा है—E20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए, लेकिन शुद्ध पेट्रोल का विकल्प बंद न हो, ताकि उपभोक्ता खुद तय कर सके कि उसकी गाड़ी के लिए क्या सही है। इस ऑनलाइन मुहिम को लोगों का लगातार समर्थन मिल रहा है।