By रेनू तिवारी | Sep 03, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अब तक के सबसे बड़े सुरक्षा ऑपरेशनों में से एक को अंजाम दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एक ही दिन में लगभग 1.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल ले जा रहे 40 कमर्शियल जहाज़ों को अमेरिकी सैन्य सुरक्षा (Escort) के तहत सुरक्षित जलमार्ग से निकाला गया। युद्ध शुरू होने के बाद से इसे एक रिकॉर्ड ऑपरेशन माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले छह महीनों से जारी संघर्ष से पहले इस रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग से रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुज़रता था।
CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि मंगलवार को चलाए गए ऑपरेशन के दौरान, अमेरिका ने हवा, समुद्र और अंतरिक्ष-आधारित साधनों का इस्तेमाल किया। साथ ही, ड्रोन हमलों से जहाज़ों की सुरक्षा करते हुए ईरान की कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाने की क्षमता को कम करने के लिए हमले भी जारी रखे।
एक अधिकारी ने बताया कि एस्कॉर्ट ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलों को भी नाकाम कर दिया। यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप प्रशासन ने अपनी युद्ध रणनीति का ज़्यादातर ध्यान होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रित किया है। इस रणनीति में अहम जलमार्ग के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले करना, जलडमरूमध्य से कमर्शियल जहाज़ों को सुरक्षा देना और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी बनाए रखना शामिल है। अधिकारियों ने इसे ईरान के नेतृत्व पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए "फुल कोर्ट प्रेस" (हर तरह से दबाव बनाने की कोशिश) का नाम दिया है।
ऑपरेशन सफल होने के बावजूद, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस संघर्ष का जल्द समाधान होने की संभावना कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा कंपनियाँ अब भी सैन्य सुरक्षा के बावजूद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने को बहुत जोखिम भरा मानती हैं।
इस जलमार्ग से जहाज़ों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को भी प्रभावित कर रही हैं। ऊर्जा की कीमतें ऊँची बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक बॉन्ड बाज़ार में अस्थिरता बढ़ रही है।
इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को ज़मीन के नीचे ही रहने देने और सैटेलाइट तस्वीरों के ज़रिए उस पर नज़र रखने को तैयार हैं। पिछले साल ईरान की तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी हमलों के दौरान यह सामग्री पूरी तरह नष्ट नहीं हुई थी।
ट्रंप की ये बातें उनके पहले के रुख से बदलाव दिखाती हैं, जब उन्होंने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित करना इस संघर्ष की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक बताया था। अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ के आस-पास 60 ठिकानों पर हमला किया
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अमेरिका ने अपनी मौजूदा रणनीति के तहत कई मोर्चों पर एक साथ सैन्य अभियान चलाया। इसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आस-पास लगभग 60 सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए और साथ ही कमर्शियल जहाजों को उस जलमार्ग से सुरक्षित निकाला गया।
इन ठिकानों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार सिस्टम, समुद्री सैन्य संसाधन, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल थीं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सेना इस जलडमरूमध्य के पास आक्रामक अभियान जारी रखेगी, क्योंकि ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से बनाने और बहाल करने की क्षमता दिखाई है।
एक अधिकारी ने इस लगातार चल रहे अभियान की तुलना "घास काटने" या "व्हैक-ए-मोल" (whack-a-mole) गेम से की। उन्होंने बताया कि ईरान को कमर्शियल जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की क्षमता फिर से हासिल करने से रोकने के लिए बार-बार हमले करने की ज़रूरत है।
ईरान पर नए हमलों के बारे में ट्रंप
बुधवार को ओवल ऑफिस से बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के हालिया हमलों में सिर्फ़ ईरानी रडार सिस्टम को ही निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि इसका मकसद तेहरान की उस क्षमता को और कम करना भी था जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाजों पर नज़र रखता है। ट्रंप ने कहा, "वे जहाजों को देखने की कोशिश कर रहे थे। वे उन्हें नहीं देख सकते क्योंकि उनके पास रडार नहीं है, क्योंकि हमने उसे उड़ा दिया था, और कल रात हमने उनके रडार से कहीं ज़्यादा चीज़ें तबाह कर दीं।"
ट्रंप ने इस अभियान के दौरान निशाना बनाए गए अन्य ठिकानों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। हालांकि, उन्होंने फिर ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका का इस रणनीतिक रूप से अहम जलमार्ग पर नियंत्रण बना हुआ है। उन्होंने यह भी दिखाया है कि वे तट के किनारे ईरानी सैन्य संसाधनों पर हमला करने के साथ-साथ कमर्शियल जहाजों को हमलों से बचाने में भी सक्षम हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम रणनीतिक शिपिंग रूट में से एक बना हुआ है। इस जलमार्ग के आस-पास लगातार हो रहे सैन्य टकराव ने ग्लोबल ऑयल सप्लाई, एनर्जी की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर इस संघर्ष के व्यापक असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi