जिन्हें लगता था भारत राष्ट्र के रूप में टिक नहीं पाएगा, बिखर जाएगा, सबको करारा जवाब हैं भारत के ये 80 साल!

By अभिनय आकाश | Aug 15, 2026

14-15 अगस्त 1947 की वह आधी रात... जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी, तब भारत अपनी नियति के साथ एक ऐतिहासिक साक्षात्कार कर रहा था। उस रात दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव रखी गई, जिसने आगे चलकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के ज़रिए पूरी दुनिया को चकित कर दिया। आज 15 अगस्त 2026 को भारत जब अपनी स्वतंत्रता की 79वीं वर्षगांठ मना रहा है और आज़ादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तो यह जश्न सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि 1947 में भारत के वजूद पर उठाए गए हर सवाल का एक ठोस जवाब है। साम्राज्यवादी ताकतें तब तथाकथित 'व्हाइट मैन्स बर्डन' का अहंकार पाले बैठी थीं। उनका मानना था कि अश्वेतों को सभ्य बनाने का ठेका सिर्फ गोरों के पास है। यूरोपीय बुद्धिजीवियों का दावा था कि अनगिनत भाषाओं, विविधताओं, गरीबी और अशिक्षा से जूझता यह नवजात राष्ट्र अपनी ही असमानताओं के बोझ तले कुछ ही सालों में ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। लेकिन आज का यह भारत उन तमाम पश्चिमी भविष्यवाणियों और उपेक्षाओं के मलबे पर सीना ताने खड़ा है मजबूत, अटूट और लगातार आगे बढ़ता हुआ।

अराजकता छा जाएगी

ब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने 1891 में कहा था कि ये चार हजार साल पुराने लोग हैं। ये इतने पुराने हैं कि इस प्रणाली को सीख नहीं सकते। अगर हमने कभी भारतीयों को उनका शासन चलाने की छूट दी तो यहां अराजकता छा जाएगी या खुदा... किस तरह का भ्रम, अव्यवस्था, उलझन और बुरी स्थिति यहां छा जाएगी।

भारतीय राष्ट्र नाम की कोई चीज नहीं

ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल के काउंसिल मेंबर सर जॉन स्ट्रेची ने सन 1888 में कहा था कि हिंदुस्तान के बारे में यह सबसे जरूरी सीखने लायक बात है कि एक भारतीय राष्ट्र का कभी भी अस्तित्व नहीं था, न ही यूरोपीय विचारों के मुताबिक कोई ऐसी भौतिक, राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक रूप से एकीकृत अवधारणा ही मौजूद थी। अतीत में भारतीय राष्ट्र नाम की कोई चीज नहीं थी, न ही भविष्य में उसके ऐसा होने की संभावना है।

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