By अभिनय आकाश | May 26, 2026
आज काबुल की धरती से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में भूचाल ला दिया। जब पूरी दुनिया ने अफगानिस्तान को एक जलता हुआ घर समझकर अपने दरवाजे बंद कर दिए तब दो पुराने यारों ने यानी भारत और रूस ने तय कर लिया कि वो इस मुल्क को पाकिस्तान की साजिशों की आग में जलने नहीं देंगे। एक तरफ भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने ऐलान किया कि भारत का एक विशाल विमान 20 टन क्रिटिकल मेडिकल सप्लाई लेकर काबुल में उतर चुका है। तो वहीं दूसरी तरफ रूस की दिग्गज कंपनी फार्मा सिंटेज ने अफगानिस्तान के साथ दवाइयों का महा समझौता महा डील कर ली है। हम उस कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक की बात करेंगे जो बिना गोली चलाए इस्लामाबाद के घमंड को चकनाचूर कर चुकी है। जब पूरी दुनिया ने अफगानिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया था तब दिल्ली और मॉस्को ने तय किया कि वे इस मुल्क को यानी अफगानिस्तान को पाकिस्तान की साजिशों की आग में नहीं जलने देंगे। रूस की सबसे बड़ी फार्मा एजेंसियों में से एक फार्मा सिंटेज ने अब अफगानिस्तान का हाथ थाम लिया है। लेकिन इस खबर का सबसे बड़ा धमाका सुनिए। इस रूसी कंपनी को चलाने वाले आदमी भारतीय मूल के एक जांबाज कारोबारी हैं।
भारत ने साफ कर दिया और कह दिया कि मोर कंसाइनमेंट्स आर अंडरवे। यानी मतलब यह तो बस ट्रेलर है। पूरी पिक्चर अभी बाकी है। पाकिस्तान के लिए संदेश मैसेज साफ है कि तुम नफरत भेजो हम जिंदगी भेजेंगे। काबुल का इंदिरा गांधी चिल्ड्रन हॉस्पिटल आज भी वहां की सबसे बड़ी उम्मीद है जिसे भारत ने अपने खून पसीने से सवारा है अफगानिस्तान में। रूस का इस मिशन में भारत के साथ जुड़ना पाकिस्तान के लिए कॉफिन में आखिरी कील जैसा है। अब अफगानिस्तान को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए डूरन लाइन पार करने की जरूरत नहीं होगी। भारत और रूस ने मिलकर पाकिस्तान के उस ब्लैकमेलिंग कार्ड को ही जला कर रख दिया है।