By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 04, 2026
प्रयागराज, तीन अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि लाइसेंसी हथियार का उपयोग विवाह समारोहों या धार्मिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक लाइसेंसधारक का दायित्व है कि वह खरीदे और इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद का समुचित रिकॉर्ड रखे। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अखिलेश कुमार की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
अदालत ने कहा, ‘‘शस्त्र लाइसेंस एक विशेषाधिकार है और इसे इस विश्वास के साथ जारी किया जाता है कि लाइसेंसधारक इसकी सभी शर्तों का पालन करेगा।’’ मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता को वर्ष 2000 में शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया था। वर्ष 2019 में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उससे खरीदे और इस्तेमाल किए गए कारतूसों का विवरण मांगा। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने वर्षों में 857 कारतूस खरीदे थे लेकिन वह केवल 57 कारतूस और 33 खोखे ही प्रस्तुत कर सका।
उसने दावा किया कि शेष 767 कारतूस निशानेबाजी, शादी तथा छठ पूजा और दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों में इस्तेमाल किए गए। इस स्पष्टीकरण से असंतुष्ट लाइसेंस प्राधिकारी ने शस्त्र अधिनियम की धारा 17 के तहत उसका लाइसेंस रद्द कर दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का रुख किया।
याचिकाकर्चा ने दलील दी कि वर्ष 2000 में लाइसेंस जारी होने के समय इस्तेमाल किए गए कारतूसों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य नहीं था। अदालत ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि शस्त्र अधिनियम के प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि नियामकीय शर्तें लाइसेंस का अभिन्न हिस्सा हैं और उनका पालन अनिवार्य है। अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को लाइसेंसी हथियार का उपयोग हर्ष फायरिंग के लिए करने की अनुमति नहीं थी।
विवाह और धार्मिक आयोजनों में इस प्रकार हथियार का उपयोग कानून के अनुरूप नहीं है।