By अभिनय आकाश | Jan 18, 2026
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्ज मेलोनी का जिन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका को साफ-साफ दो टूक संदेश दिया है। मेलोनी ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं का समाधान नाटो के भीतर ही किया जाना चाहिए। दरअसल जॉर्जिया मेलोनी इन दिनों जापान के दौरे पर हैं। जहां इस दौरे के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर बयान दिया है। इस बयान में उन्होंने अमेरिका की ओर से उठाए गए सुरक्षा सवालों को गंभीर और जायज बताया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उस मुद्दे पर बातचीत और फैसला अटलांटिक गठबंधन यानी नाटो के ढांचे के अंदर ही होना चाहिए। मेलोनी ने आगे कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा नाटो के सभी देशों के साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में सहयोगी देशों की मौजूदगी को भी मजबूत करने पर विचार किया जाना चाहिए। लेकिन इससे आपसी मतभेद या विभाजन के रूप में नहीं देखना चाहिए। जॉर्जिया मेलोनी ने साफ किया कि ग्रीनलैंड को लेकर किसी भी तरह के जमीनी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना बेहद कम है। उनके अनुसार यह एक राजनीतिक विषय है और इसका समाधान भी राजनीतिक बातचीत के जरिए ही निकलेगा। मेलोनी ने कहा कि यह इलाका सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरे यूरोप और सभी देशों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। आपको बता दें कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका और यूरोप के बीच अब तनाव बढ़ता दिख रहा है। जहां राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन से आयात होने वाले सामानों पर 10% अतिरिक्त टेरिफ लगाया जाएगा।
जिसके बाद 1 जून से यह टेरिफ बढ़ाकर 25% तक कर दिया जाएगा। और टेरिफ का इस तरह बढ़ना तब तक जारी रहेगा जब तक ग्रीनलैंड पर कोई समझौता नहीं होता। वहीं यूरोप के कई बड़े नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए ट्रंप के टेरिफ की धमकी को गैर मंजूर बताया है और बोला है कि यूरोप इसका एक साथ जवाब देगा। अब देखना यह होगा कि ग्रीनलैंड को लेकर यह विवाद यूरोप और अमेरिका के रिश्तों पर क्या असर डालेगा।