By अभिनय आकाश | Jan 27, 2026
यूरोपीय यूनियन के नेताओं की वापसी के तुरंत बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च में भारत आने की तैयारी में हैं। जस्टिन ट्रूडो के दौर की कड़वाहट को भुलाकर कनाडा भारत के साथ यूरेनियम, क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बड़ी डील करना चाहता है। जिस वक्त यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मुहर लग गई है ठीक उसी वक्त भारत के लिए एक और बड़ी कूटनीतिक विजय की खबर आ रही है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले हफ्ते में भारत आ सकते हैं। सुबह ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने फोन पर इस बारे में बातचीत भी की है। जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में रिश्तों में आई खटास के बाद कानिया अब भारत के साथ रिश्तों को रिसेट करने और एक नई शुरुआत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से टेलिफोन पर बात की। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। बातचीत में आर्थिक साझेदारी, एआई (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस) जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय आदान-प्रदान गहरा करने पर खास फोकस रहा। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका ने कनाडा के पीएम कार्नी के चीन दौरे पर असहजता दिखाई है। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर कनाडा चीन के साथ व्यापार सम्झौता करता है, तो अमेरिका कनाडाई सामान पर 100% टैरिफ लगा सकता है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त ने बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी कुछ हफ्तों में भारत आ सकते हैं। यह भरोसा बहाली का संकेत मानी जा रही है।
कनाडा का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर अमेरिका है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टेरिफ धमकियों से परेशान है। बीते दिनों दावोस में कार्नी ने कहा था कि मिडल पावर्स को मिलकर काम करना चाहिए। उनके भाषण और फैसलों से साफ है कि वह मौजूदा हालात को देखते हुए आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में विविधता की राह तलाश रहे है। भारत को भी ऐसे ही साझेदार की तरह देखा जा रहा है। उनके संभावित दौरे में आर्थिक रिश्तो को गहरा करने पर फैसले लिए जाएंगे। भारत और कनाडा के रिश्तों में उस वक्त मोड़ आया था, जब बीते साल 13 अक्टूबर को विदेश मंत्री अनीता आनद ने भारत का दौरा किया। अब कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था यानी कि इकॉनमी को बचाने के लिए अमेरिका से निर्भरता टच अब कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अमेरिका से निर्भरता कम करना चाहता है और उसे भारत जैसे मिडिल पावर्स के साथ गठबंधन की जरूरत है। भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने पुष्टि की है कि दोनों देश एक अनिश्चित दुनिया में अपना रास्ता खुद बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।