By नीरज कुमार दुबे | Oct 22, 2026
दिल्ली में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर अमीर शोकीन के एक वायरल वीडियो ने त्रिपुरा समेत पूरे पूर्वोत्तर में नाराजगी पैदा कर दी है। वीडियो में त्रिपुरा के एक युवक की शक्ल-सूरत और पहचान का मजाक उड़ाते हुए उसे ‘चीनी’ कहा गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि आखिर पूर्वोत्तर के लोगों को उनकी शारीरिक बनावट और पहचान के आधार पर निशाना बनाने वाली सोच कब बदलेगी? यहां सवाल उठता है कि क्या किसी व्यक्ति की आंखों, चेहरे या शारीरिक बनावट के आधार पर उसकी राष्ट्रीयता तय करने का अधिकार किसी को मिल गया है? साथ ही अगर यही व्यवहार मनोरंजन के नाम पर किया जाए, तो क्या अपमान अपने आप जायज हो जाता है?
हम आपको यह भी बता दें कि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को सदर बाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 192, 196, 352 और 353 के तहत मामला दर्ज किया। ये धाराएं दंगा भड़काने के इरादे से उकसावे, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने, शांति भंग कराने के उद्देश्य से अपमान और सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयानों से संबंधित हैं। साथ ही दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) इकाई भी जांच में तकनीकी सहायता दे रही है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशेष पुलिस इकाई SPUNER ने इस मामले में IFSO से सहयोग मांगा था। पुलिस आरोपी की पहचान और घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
उधर, त्रिपुरा पुलिस ने भी प्राथमिकी दर्ज की है और दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के लिए विशेष टीम भेजी है। त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक जी.एस. राव ने पुष्टि की कि पीड़ित और आरोपी की पहचान कर ली गई है तथा मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली (TSFD) ने 21 अक्टूबर को SPUNER के संयुक्त पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठन ने नस्लीय टिप्पणियों, अपमानजनक व्यवहार और वीडियो में दिखाई गई घटना की जांच के साथ मूल रिकॉर्डिंग, मेटाडेटा, अकाउंट विवरण तथा अपलोड हिस्ट्री सुरक्षित रखने की मांग की। साथ ही युवक को आगे किसी तरह की धमकी या उत्पीड़न से बचाने की अपील भी की गई। यूथ TIPRA फेडरेशन (YTF) और TIPRA इंडिजिनस स्टूडेंट्स फेडरेशन (TISF) ने भी अगरतला के न्यू कैपिटल कॉम्प्लेक्स थाने में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरोपी को सजा मिलेगी। उन्होंने शिकायत दर्ज कराने में देरी का उल्लेख करते हुए दिल्ली और त्रिपुरा पुलिस से कठोर कार्रवाई की उम्मीद जताई। उन्होंने यह भी चेताया कि समाज में ऐसे घृणित व्यवहार को सहन करने वाले लोग भी नफरत फैलने के लिए जिम्मेदार हैं।
वहीं त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा समेत अन्य नेताओं ने भी उक्त टिप्पणियों की निंदा की है। उधर, भारतीय जनता पार्टी की त्रिपुरा इकाई ने अमीर शोकीन को कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है।
हम आपको यह भी बता दें कि इस विवाद के बीच शोकीन के भाई मोहम्मद वसीम राजा ने भी उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि परिवार ने एक दशक से अधिक पहले ही उनसे संबंध तोड़ लिए थे और उन पर उगाही तथा संपत्ति पर अवैध कब्जे जैसे आरोप हैं।
देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सवाल इन आरोपों से भी बड़ा है। पूर्वोत्तर के नागरिकों को बार-बार अपनी भारतीयता साबित करने की नौबत क्यों आए? उनकी शक्ल-सूरत को विदेशी पहचान से जोड़ने वाली सोच को सामान्य मजाक की तरह क्यों लिया जाए? क्या राष्ट्रीय एकता केवल नारों में दिखाई देगी, या रोजमर्रा के व्यवहार में भी नजर आएगी? कानून अपना काम करेगा और दोष तय करने का अधिकार अदालत का है। लेकिन सामाजिक जवाबदेही से कोई नहीं बच सकता। किसी वीडियो को वायरल करने की होड़ में अगर किसी समुदाय की गरिमा कुचली जाती है, तो उसे केवल कंटेंट कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।
बहरहाल, पूर्वोत्तर भारत का अभिन्न हिस्सा है, कोई सांस्कृतिक या भौगोलिक परिधि नहीं। उसके लोगों का सम्मान किसी की कृपा नहीं, उनका अधिकार है। अमीर शोकीन प्रकरण का निर्णायक संदेश यही होना चाहिए कि नस्लीय अपमान को मनोरंजन का मुखौटा पहनाकर सामान्य नहीं बनाया जा सकता। माफी अपनी जगह है, लेकिन न्याय, जवाबदेही और मानसिकता में बदलाव उससे कहीं अधिक जरूरी हैं।