देश को आग लगाने वाले दंगाई क्या नागरिकता पाने के हकदार हैं ?

By नीरज कुमार दुबे | Feb 25, 2020

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शुरू हुआ बवाल उत्तर पूर्वी दिल्ली में अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। भारत विरोधी तत्व एकाएक हावी होते जा रहे हैं जिस तरह पुलिस के माथे पर पिस्तौल तान दी जा रही है, जिस तरह घरों से लोग पथराव और गोलीबारी कर रहे हैं, पेट्रोल भरी बोतलें फेंकने की खबरें आ रही हैं वह दर्शाती है कि एक खतरनाक साजिश के तहत भारत और भारत की सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। नागरिकता संशोधन कानून किसी भारतीय पर लागू ही नहीं होता, एनआरसी सरकार ला ही नहीं रही है लेकिन कुछ लोग बेवजह मुस्लिमों को बहका कर देश को आग में झोंकने का प्रयास कर रहे हैं।

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दिल्ली में हुई हिंसा पर गृह मंत्रालय ने एक आपात बैठक कर हालात की समीक्षा की। गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपराज्यपाल अनिल बैजल, पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक समेत कई अफसर मौजूद रहे। गृहमंत्री के साथ बैठक से ठीक पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद केजरीवाल ने कहा कि पुलिस को ऊपर से कार्रवाई का आदेश नहीं है, इसलिए वह उचित कार्रवाई नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमाई इलाकों से लोग दिल्ली आ रहे हैं और हिंसा कर रहे हैं। हमने बॉर्डर को सील करने और उपद्रवियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

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बहरहाल, देखा जाये तो दिल्ली हिंसा पर एक चीज साफ नजर आ रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान जानबूझकर यह हिंसा भड़काई गयी ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीएए के विरोध का मामला उठे लेकिन यह उपद्रवी भूल गये हैं कि मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे या नहीं उठे, सीएए कानून बन चुका है और इसे बरकरार रखने, इसमें संशोधन करने या इसे रद्द करने का पूरा अधिकार भारत के पास है। यह जो लोग हिंसा भड़का रहे हैं उन्हें इस बात का भान होना ही चाहिए कि यदि यह लोग देश के कानून का सम्मान नहीं कर सकते और तोड़फोड़, आगजनी और सुरक्षाबलों पर पथराव कर अपने अधिकारों की तथाकथित लड़ाई लड़ना चाहते हैं तो ऐसे लोगों से कानून कड़ाई से निबटेगा। यहाँ सवाल यह भी उठता है कि देश में सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को आग के हवाले कर देने वाले दंगाइयों को क्या देश के नागरिकों के लिए उल्लिखित कर्तव्यों का जरा भी भान नहीं है? क्या ऐसे लोग नागरिकता पाने के हकदार हैं?

-नीरज कुमार दुबे

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