By अंकित सिंह | Sep 16, 2026
बुधवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने BJP के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के प्रस्ताव की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि देश संविधान से चलेगा या किसी राजनीतिक पार्टी के वैचारिक एजेंडे से। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 से पहले NDA-शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में यह कोड पहले ही लागू किया जा चुका है और उन्हें भरोसा है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले इसे सभी 21 राज्यों में लागू कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान, लोकतंत्र और कानून के शासन को बनाए रखना चाहती है। इसलिए, उसने यूनिफॉर्म सिविल कोड के खिलाफ उत्तराखंड हाई कोर्ट का रुख किया है और उसे न्याय मिलने की उम्मीद है। उत्तराखंड हाई कोर्ट में अब तक छह सुनवाई हो चुकी हैं और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अन्य वकील पेश हुए हैं। मौलाना मदनी ने ऐसे किसी भी कानूनी प्रावधान का भी विरोध किया जो उनके अनुसार इस्लामिक पर्सनल लॉ के खिलाफ हो और कहा कि यह मामला संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि हम ऐसा कोई कानून स्वीकार नहीं कर सकते जो शरीयत के खिलाफ हो। मुसलमान हर चीज़ पर समझौता कर सकते हैं, लेकिन वे अपने धर्म और आस्था पर कभी समझौता नहीं कर सकते। यह सवाल मुसलमानों के अस्तित्व का नहीं, बल्कि उनके संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों का है। यूनिफॉर्म सिविल कोड के ज़रिए सरकार मुसलमानों से वे अधिकार छीनना चाहती है जो उन्हें संविधान ने दिए हैं।