Interview: बलूचिस्तान की निर्वासित प्रधानमंत्री नाएला कादरी ने कहा- बलूचों की मदद करे दुनिया

By डॉ. रमेश ठाकुर | Aug 09, 2023

बलूच खुली हवा में सांस लेने के लिए दशकों से तड़प रहा है। 1948 से ही पाकिस्तान के चुंगल में जकड़ा हुआ है, लेकिन अब बलूच आजादी के प्रयास तेजी से हो रहे हैं। उनकी निर्वासित प्रधानमंत्री ‘नाएला कादरी’ अपने मुल्क की स्वतंत्रता के लिए दुनिया के तमाम देशों में जा-जाकर समर्थन मांग रही हैं। इस वक्त भारत में हैं, जहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगा रही हैं कि यूएन में उनके समर्थन में आवाज उठाएं। बलूचों को भारत के प्रधानमंत्री से ही उम्मीदें हैं कि वो कुछ करेंगे। पाकिस्तान से बांग्लादेश को जैसे आजाद करवाया था, ठीक वैसा ही करिश्मा वह अपने लिए चाहते हैं। बलूच प्रधानमंत्री बीते दो सप्ताह से हिंदुस्तान में हैं, वो कई विपक्षी नेताओं और जिम्मेदार व्यक्तियों से मिल रही हैं। इस बीच, पत्रकार डॉ. रमेश ठाकुर ने भी उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य हिस्से-

  

प्रश्नः बलूचिस्तान के दुनिया से अलग-थलग होने के पीछे के कारणों को बताएं?


उत्तर- युवा पीढ़ी बलूचियों के संबंध में कुछ नहीं जानती। उम्र का एक पड़ाव पार कर चुके बुजुर्ग और इतिहासकार अच्छे से जानते हैं कि 1948 से लेकर आज तक बलूचिस्तानियों पर पाकिस्तान कितना जुल्म बरपाता आया है। दरअसल, बलूच होना ही उनके लिए गुनाह होता है। हमें मारने और किस्म-किस्म के अत्याचार करने का जैसे उन्हें लाइसेंस मिला हो। इस खेल में अब चीन भी शामिल हो चुका है। बहन-बेटियों को उनकी आर्मी सरेआम उठा लेती है। उनके साथ कई-कई दिनों तक मिलकर आर्मी जवान रेप करते हैं। अफसोस, ये खेल दुनिया देखकर भी चुप है। हम बिना मान्यता वाले मुल्क के बाशिंदे हैं। मान्यता मिलने की मदद की चाह लेकर हम प्रत्येक ताकतवर मुल्क की चौखट पर जाकर गिड़गिड़ा रहे हैं उनसे गुजारिशें करते हैं। पर, कहीं से भी अब तक हमें मुकम्मल आश्वासन नहीं मिला।

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प्रश्नः हिंदुस्तान आने का मकसद भी क्या आपका मदद मांगने का ही है?


उत्तर- जी हां। मैंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूएन में बलूचिस्तान के लिए समर्थन की गुहार लगाई है। हमें भारत से ही सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं। प्रधानमंत्री का प्रयास हमें मुकम्मल देश की मान्यता दिलवाने में सहायता कर सकता है। मुझे पता है इस समय संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान के समर्थन में बोलने का भारत के पास बड़ा मौका है। इसी मकसद से मेरा भारत आना हुआ है। यहां मेरी बातों को गंभीरता से सुना गया है। हिंदुस्तान की विपक्षी पार्टियों से भी सहयोग की अपेक्षा है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी जैसे बड़े कद के नेताओं को भी आगे आकर हमारी मदद करनी चाहिए।


प्रश्नः भारत के हस्तक्षेप करने का मतलब सीधे-सीधे पाकिस्तान और चीन से पंगा लेना होगा?


उत्तर- बदले भारत की ताकत से दोनों मुल्क वाकिफ हैं। वरना, इंटरनल रिपोर्ट तो कई ऐसी हैं जिसमें पाक, चीन और तालिबानियों ने मिलकर भारत पर हमला करने की असफल योजनाएं कई मर्तबा बनाई थीं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के हटने के बाद भी इन्होंने तैयारियां की थीं। लेकिन, भारत पर चढ़ाई करने की हिम्मत नहीं हुई। पाकिस्तान को डर है, कहीं भारत देर-सबेर पीओके यानी उनके अधिकृत कश्मीर पर भी ना कब्जा कर ले। वो खुद अपने कश्मीर को बचाने में लगे हैं।


प्रश्नः अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी बलूची खबरें ज्यादा रिपोर्ट नहीं होतीं?


उत्तर- पूर्व पाबंदियां जो लगी हैं। किसी विदेशी पत्रकार या न्यूज चैनल, सोशल वर्कर या डेलीगेट को जाने नहीं दिया जाता। स्थानीय मीडिया पर पाकिस्तान आर्मी का होल्ड है। उनके बिना इजाजत कोई सोशल मीडिया पर भी पोस्ट नहीं कर सकता। वो तो गनीमत ये है कि हमारी थोड़ी बहुत आवाज बलूचिस्तान के बाहर हमारे समर्थक और चाहने वाले सोशल मीडिया के जरिए उठाते हैं। वरना, तो संसार के लोगों को कुछ भी न पता चले। हमारी कनेक्टिविटी दुनिया के साथ पूरी तरह से कटी हुई है। मदद की तो बात दूर है, झांकने तक भी कोई नहीं आता।


प्रश्नः स्थानीय नागरिकों की सरकारी सेवाओं में भागीदारी है या नहीं?


उत्तर- बलूचों का वजूद अब और खतरे में है। सेना की भर्तियों, सरकारी नौकरियों व अन्य रोजगार धंधों में पाकिस्तानियों का कब्जा है। स्थानीयों पर प्रतिबंध लगा दिया है। बलूच के लोग खुलकर कोई चहलकदमी न करें, इसके लिए उनके आसपास आईएसआई के एजेंट मंडराते रहते हैं। उनको सबसे ज्यादा डर भारत से है कि कहीं उनकी दखलंदाजी तो नहीं हो रही, हम चुगली तो नहीं कर रहे। बलूचियों को पूरा विश्वास है, भारत के हस्तक्षेप मात्र से ही पाकिस्तान की सेना पीछे हट जाएगी और हमारा आजादी की ओर कदम भी बढ़ जाएगा।


प्रश्नः बलूच महिलाओं की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जाती है?


उत्तर-  पाक आर्मी के जवान किसी जवान लड़की को नहीं छोड़ते। उनका बलात्कार करते हैं, शरीर के साथ अमानवीय व्यवहार करके मार देते हैं। डर के चलते हम अपनी बच्चियों को घरों से बाहर नहीं जाने देते। बच्चियां स्कूल-कॉलेज भी नहीं जातीं। मजबूरन उन्हें तालीम घरों में ही दी जाती है। बलूच के बाजारों में आपको मर्द ही दिखाई देंगे या बुजुर्ग महिलाएं? कट्टरपंथी लोग भी उनका साथ देते हैं, मजहब के नाम पर बलूचियों को भड़काते हैं। उनके डर से कई बलूची तो उनके पाले में चले गए हैं। उनकी यातनाओं से तंग आकर अब बलूचिस्तान का बच्चा-बच्चा दहशतगर्दों और पाकिस्तान के अवैध कब्जे से अब आजाद होना चाहते हैं।


प्रश्नः अगर बलूचिस्तान आजाद मुल्क हुआ, तो क्या योजनाएं हैं आपके दिमाग में?


उत्तर- अगर नहीं, बल्कि एक दिन बलूच आजाद होकर रहेगा। जिस दिन वो तारीख मुकर्रर होगी, दुनिया देखेगी, ये मुल्क न्यूक्लियर मुक्त रहेगा, आतंकवाद रहित बनेगा। सेक्युलर, प्रजातांत्रिक व्यवस्था वाला, सभी धर्म को मानने वाला और जेंडर बैलेंस्ड बनेगा हमारा प्यारा बलूच। बस उस सुबह का हमें इंतजार है। आजादी की लड़ाई लड़ने वाले हमारे कई क्रांतिकारी नेताओं को पाकिस्तान की सेना ने बंधक बनाया हुआ है। दरअसल, हमारी आवाज अब वैसे ही बुलंद हो चुकी है जैसे कभी बंगालियों ने अपने लिए बांग्लादेश की मांग करी थी।


-बातचीत में जैसा बलूच प्रधानमंत्री नाइला कादरी ने पत्रकार डॉ. रमेश ठाकुर से कहा।

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