By अभिनय आकाश | Jul 27, 2026
अस्पताल से छुट्टी मिलते ही सोनम वांगचुक सीधे राजघाट पहुँचे। 26 दिनों के कड़े अनशन और मेदांता में चले इलाज के बाद, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना उनकी पहली प्राथमिकता रही। बापू को नमन करते हुए उन्होंने देश को संदेश दिया कि आज भी सत्य और अहिंसा का रास्ता ही सबसे कारगर है। वांगचुक का कहना था कि एक सशक्त लोकतंत्र वही है जहाँ सरकारें जन-आवाज़ का सम्मान करें और हर गतिरोध को बातचीत के ज़रिए सुलझाएँ। इससे पहले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा था कि उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल रही है और लद्दाख लौटने से पहले वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट जाएंगे। एक्स पर एक पोस्ट में वांगचुक ने कहा कि वे सबसे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने याद दिलाया कि स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद जंतर-मंतर पर अपना अनशन शुरू करने से पहले भी उन्होंने ऐसा ही किया था। उन्होंने कहा कि आखिरकार वह दिन आ ही गया जब मुझे इस अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। आज, यहां से निकलने और घर लद्दाख लौटने से पहले, मैं बापू (महात्मा गांधी) को श्रद्धांजलि देने राजघाट जाऊंगा।
37 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन का समापन शनिवार दोपहर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के साथ हुआ। CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अकाउंट के तौर पर शुरू हुई 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने अपनी मांगों पर सरकार से आश्वासन मिलने के बाद जंतर-मंतर से अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया। NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा दे दिया। आमतौर पर सुनसान रहने वाले जंतर-मंतर विरोध स्थल पर तब हलचल मच गई जब युवा और छात्र CJP के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन में रचनात्मक बैनर और 'जेन-ज़ी' (Gen Z) स्लैंग के साथ शामिल हुए। एक हफ़्ते से ज़्यादा समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद, इस आंदोलन को तब नई गति मिली जब लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक इसमें शामिल हुए और अपनी 26 दिनों की भूख हड़ताल के साथ इस आंदोलन का चेहरा बन गए।