By अभिनय आकाश | Jul 27, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को एक PIL पर नोटिस जारी किया। यह PIL कपिल सिब्बल ने दायर की थी, जिसमें संविधान की दसवीं अनुसूची की उस व्याख्या को चुनौती दी गई है जो विधायकों को राजनीतिक पार्टी के विलय के ज़रिए दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने की इजाज़त देती है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद इस याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। भारत के दलबदल विरोधी कानून से जुड़ी "बड़ी समस्याओं" का ज़िक्र करते हुए बेंच ने कहा कि यह कानून विधायिका ने बनाया है।
सिब्बल ने जवाब दिया कि कभी-कभी सांसद भी गलतियाँ कर सकते हैं और हो सकता है कि यह मामला कभी सुलझ ही न पाए क्योंकि इससे सत्ता में बैठे लोगों को फायदा होता है। सिब्बल ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग कभी भी इस मामले का फैसला नहीं होने देंगे। सिब्बल, जो एक सांसद भी हैं, ने कहा, कृपया इस प्रस्ताव पर गौर करें। समस्या की गंभीरता को समझें। चुनावी नतीजों को बदला जा सकता है। एक अल्पसंख्यक समूह बहुमत में बदल सकता है और बहुमत वाला समूह अल्पसंख्यक बन सकता है। सिब्बल ने दसवीं अनुसूची के तहत विलय से जुड़े प्रावधानों की संवैधानिक व्याख्या पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्याख्या के कारण अलग हुए गुट, दूसरी राजनीतिक पार्टियों के साथ विलय करके दलबदल विरोधी कानून की सख्ती से बच सकते हैं।