कौन बिहारी किसपर भारी- इन 5 सीटों पर है महामुकाबला

By अभिनव आकाश | Apr 27, 2019

उठते हैं तूफान, बवंडर भी उठते जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढ़ाती है। दो राह समय के रथ की घर्घर नाद सुनो, सिंहासन खाली करो की जनता आती है। दिल्ली के रामलीला मैदान से बिहार के बेटे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की यह कविता लोकनायक जय प्रकाश नारायण के मुख से फूटी तो 1 सफदरजंग रोड पर बैठी इंदिरा गांधी की गद्दी हिल गयी थी। आंदोलन की यह भूमि बिहार इतिहास के पन्नों पर नया अध्याय लिखने में हमेशा आगे रहा है। लोकसभा चुनाव के शंखनाद के साथ ही बिहार में भी सबसे बड़े राजनीतिक लड़ाई के लिए जमीं सजी हुई है। बिहार में चुनाव की शुरुआत तो पहले ही हो गयी थी जब 4 लोकसभा सीटों के लिए 11 अप्रैल को मतदान हुए थे। बिहार की चुनावी राजनीति खासकर लोकसभा के बारे में चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इस प्रदेश की 40 सीटों के लिए सातों चरणों में चुनाव होना है। लेकिन 29 अप्रैल को यानि चौथा चरण में बिहार की 5 सीटों पर चुनाव होना है। इन पांच सीटों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर रालोसपा के अध्यक्ष व राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तक की किस्मत दांव पर है। चौथे चरण में बिहार की दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और मुंगेर सीट पर चुनाव होगा।

सिद्दीकी और गोपाल ठाकुर के बीच दरभंगा की जंग

उत्तरी बिहार के अंतर्गत आना वाला दरभंगा यूं तो अपनी प्राचीन संस्कृति, संस्कृत और बौद्धिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इस शहर की शान में “पग-पग पोखर, पान मखान, सरस बोल, मुस्की मुस्कान” जैसे कहावत के कसीदे भी पढ़े जाते हैं। उसी दरभंगा में इस बार राजनीतिक अखाड़े में भारतीय जनता पार्टी के गोपालजी ठाकुर एक तरफ अपनी जीत का खम ठोक रहे हैं वहीं राष्ट्रीय जनता दल के अब्दुल बारी सिद्दीकी हैं। बसपा के प्रत्याशी मो. मुख्तार मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। लोस चुनाव से ठीक पहले टिकट न मिलने से नाराज चिर परिचित लड़ाका रहे राजद के मो. अली अशरफ फातमी ने अपनी पार्टी छोड़ दी। लगभग तीन दशक से फातमी दरभंगा सीट पर राजद की धुरी रहे थे। एक खास बात यह है कि साल 2014 के चुनाव के दौरान तीनों दलों के चेहरे रहे राजद के अली अशरफ फातमी, भाजपा के तत्कालीन सांसद कीर्ति झा आजाद व जदयू के महासचिव संजय झा इस चुनाव में बिना लड़े ही मैदान से बाहर हो गए। ललित नारायण मिश्रा की कर्मभूमि रही दरभंगा सीट में पिछले सात चुनावों में मुख्य मुकाबला राजद औऱ भाजपा के बीच ही रहा है। दरभंगा में गरीबी, बेरोजगारी, पलायन व जातीय गोलबंदी के मुद्दे पर चुनाव होते रहे हैं। इस सीट पर ब्राह्मण वोटरों की आबादी सबसे अधिक है उसके बाद मुसलमान मतदाताओं की संख्या है।

समस्तीपुर में रामचंद्र पासवान और डॉ अशोक कुमार के बीच मुकाबला

मसाले व सब्जियों के लिए मशहूर समस्तीपुर पर राजनीति की फसल भी खूब लहलहाती है। आरक्षित समस्तीपुर सीट पर पिछले बार की तरह इस बार भी लोक जनशक्ति पार्टी के रामचंद्र पासवान मैदान में हैं जिनका मुकाबला रोसड़ा के मौजूदा विधायक व कांग्रेस प्रत्याशी डॉ अशोक कुमार से है। बता दें कि पिछले चुनाव में अशोक कुमार महज 6872 वोटों से पराजित हुए थे। इस सीट के जातीय समीकरण को देखा जाए तो इस सीट पर यादव, मुसलमान, मल्लाह व मांझी यहां अच्छी तादाद में हैं।

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मुंगेर की लड़ाई

मुंगेर हथियारों का बाजार बहुत लंबे अरसे से रहा है। राजग ने इस बार बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी और वर्तमान सांसद वीणा देवी की बजाय जद-यू के ललन सिंह को मैदान में उतारा है। इस बार इस सीट पर कई आपराधिक मामलों में आरोपी और विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी ललन सिंह मबजूत उम्मीदवार हैं, लेकिन भूमिहारों के बीच अनंत सिंह का अच्छा प्रभाव है। मुंगेर संसदीय क्षेत्र में अतिपिछड़े वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। इस क्षेत्र में 6.5 लाख अतिपिछड़े मतदाता है। करीब 2.25 लाख भूमिहार है। यादव मतदाताओं की संख्या करीब 1.75 लाख है जबकि मुसलमान 1.25 लाख के करीब हैं। दोनों गठबंधन के उम्मीदवार भूमिहार जाति से हैं। 2019 के चुनावी मौदान में कुल 19 प्रत्य़ाशी मैदान में हैं। लेकिन टक्कर दो महागठबंधन के उम्मीदवारों के बीच ही हैं। मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य प्रमुख मुद्दे हैं। 

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उजियारपुर की सीट पर दो दिग्गजों के बीच मुकाबला

उजियारपुर सीट पर साल 2014 में भाजपा ने अश्वमेघ देवी और आलोक मेहता यानि दो कुशवाहा की लड़ाई का फायदा उठाते हुए इस सीट पर दूसरी अच्छी तादाद यानि यादव जाति के नित्यानंद राय को चुनाव लड़ाया और उन्होंने जीत दर्ज की। इस बार भाजपा ने फिर से अपने प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय पर दांव खेला है तो दूसरी तरफ राजग का दामन छोड़ महागठंबधन में शामिल हुए उपेंद्र कुशवाहा इस सीट पर चुनावी मैदान में हैं। वैसे तो उजियारपुर सीट पर 18 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं लेकिन मुख्य मुकाबला उपेंद्र कुशवाहा और नित्यानंद राय के बीच है। यादव बहुल वाले इस क्षेत्र में प्रमुख मुद्दे की बात करें तो सिंचाई और पेयजल ही सबसे बड़ी समस्या है। 

बेगूसराय का रण

लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार की सबसे चर्चित सीट बेगूसराय जिसपर सभी की निगाहें टिकी हैं। भला हो भी क्यों न भाजपा के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह नवादा की जगह बेगूसराय से चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। जिनसे राजनीति के दंगल में दो-दो हाथ करने के लिए जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीवार कन्हैया कुमार चुनावी मैदान में उतरे हैं वहीं राजद के तनवीर हसन की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। कन्हैया के नामांकन से प्रचार तक जहां स्वरा भास्कर और जावेद अख्तर सरीखी बॉलिवुड की हस्तियों ने बेगूसराय सरजमीं पर कदम रखे, वहीं शुरू में सीट बदलने से नाराज गिरिराज सिंह के पक्ष में राज्य और केंद्र सरकार के मंत्री से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तक जोर लगा रहे हैं। एक तरफ गिरिराज अपनी एंट्री से विवादित बयान देकर सुर्खियों में बने हुए हैं। इसके उलट कन्हैया कुमार को जेएनयू में रहते वहां हुई बयानबाजी के चलते लोग जगह-जगह घेर रहे हैं। आरजेडी के उम्मीदवार तनवीर हसन एकमात्र ऐसे प्रत्याशी हैं जिनकी यहां पर चुनावी दखल पुरानी है। 

लोकसभा के चुनाव वैसे तो राष्ट्रीय मुद्दों पर होते हैं लेकिन बिहार में क्षेत्रीय फैक्टर भी कम प्रभावी नहीं हैं। इस सीट के जातिगत समीकरण की बात करे तो यहां 19 फीसदी भूमिहार, 15 फीसदी मुस्लिम, 12 फीसदी यादव और सात फीसदी कुर्मी हैं। भूमिहार वोट ही यहां हार-जीत का समीकरण तय करते हैं। 16 लोकसभा चुनावों में से कम से कम 11 में नौ बार भूमिहार सांसद बने हैं।

-अभिनव आकाश

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